राजनीति
गुजरात चुनाव : भाजपा ने जामनगर उत्तर से क्रिकेटर रवींद्र सिंह जडेजा की पत्नी रीवाबा को मैदान में उतारा
भारतीय जनता पार्टी ने क्रिकेटर रवींद्रसिंह जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा को गुजरात के जामनगर उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा विधायक धर्मेद्र सिंह जडेजा (हकुभा) के स्थान पर दिसंबर विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारा है। हकुभा एक टर्नकोट थे, जिन्होंने 2017 में कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा के चुनाव चिह्न् पर विधानसभा चुनाव जीते। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें इस चुनाव में फिर से टिकट देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
भाजपा उम्मीदवारों की सूची की घोषणा के बाद रिवाबा जडेजा ने पार्टी कार्यालय का दौरा किया और मीडिया से कहा, “रवींद्रसिंह भी एक अप्रत्यक्ष पार्टी सदस्य हैं और जल्द ही हम उन्हें पार्टी के प्रचार के लिए मैदान में लाएंगे।”
जडेजा के पिता अनिरुद्धसिंह और बहन नयनाबा के कांग्रेस में शामिल होने के तुरंत बाद, वह 2019 में भाजपा में शामिल हो गईं।
भाजपा के जामनगर नेताओं को उम्मीद है कि रिवाबा जडेजा सीट जीतेंगी और हकुभा भी पार्टी के लिए काम करेंगी।
कांग्रेस की जामनगर शहर समिति के प्रमुख वीरेंद्रसिंह जडेजा ने कहा कि दूसरी ओर, कांग्रेस को अब भाजपा में खामियां दिख रही हैं और वह जामनगर उत्तर में सही उम्मीदवार के चयन के कारण लाभ पाने का सपना देखती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेद्र सिंह जडेजा को भाजपा ने एक कॉर्पोरेट घराने के हस्तक्षेप के कारण हटा दिया था, क्योंकि आजकल मौजूदा विधायक की उससे पटरी नहीं बैठ रही है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका में चीन से जुड़ी कंपनियों पर सख्त प्रतिबंध लगाने के लिए नया विधेयक पेश

अमेरिका में दो वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसदों ने चीन के सैन्य-औद्योगिक तंत्र से जुड़े चीनी संस्थानों पर प्रतिबंधों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक विधेयक पेश किया है। उनका कहना है कि अमेरिका अब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) से जुड़े खतरों के खिलाफ कार्रवाई में और देरी नहीं कर सकता।
सीनेटर रिक स्कॉट और प्रतिनिधि एलिस स्टेफानिक ने ‘सीसीपी सैंक्शंस शॉट क्लॉक एक्ट’ पेश किया। इस विधेयक के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को उन चीनी व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ एक साल के भीतर कार्रवाई करना जरूरी होगा, जिन्हें अमेरिकी सरकार ने सुरक्षा के लिए खतरा माना है।
इस विधेयक का मकसद वित्त वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन करना है। इसके तहत एक साल की ‘शॉट क्लॉक’ (समय सीमा) तय की जाएगी, जिसके भीतर पहचानी गई संस्थाओं को ट्रेजरी विभाग की ‘नॉन-एसडीएन चीनी सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स कंपनियों की सूची’ में शामिल करना होगा।
वर्तमान कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को हर दो साल में एक रिपोर्ट पेश करनी होती है, जिसमें उन चीनी नागरिकों या संस्थाओं की पहचान की जाती है जो अमेरिकी सरकारी सूचियों में शामिल हैं और जिन्हें एनएस-सीएमआईसी सूची में डाला जा सकता है। हालांकि, ट्रेजरी विभाग पर इस सूची को अपडेट करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा लागू नहीं है। वहीं, प्रस्तावित कानून इस व्यवस्था को बदल देगा।
विधेयक के मसौदे के अनुसार, राष्ट्रपति की ओर से उपधारा (ए) के तहत रिपोर्ट पेश करने के एक साल के भीतर ट्रेजरी सचिव ट्रेजरी सचिव संबंधित विदेशी नागरिकों को इस सूची में शामिल करना होगा और इसका संशोधित संस्करण ‘फेडरल रजिस्टर’ में प्रकाशित करना होगा।
स्कॉट ने कहा कि जैसे ही किसी संस्था की पहचान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में हो जाती है, अमेरिका को तुरंत उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। स्कॉट ने कहा, “सीसीपी के सैन्य हितों के लिए काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को इस देश में कारोबार करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। कम्युनिस्ट चीन हमारा दुश्मन है और अब हमें जागकर उसी के अनुरूप कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “जब किसी व्यक्ति की पहचान हमारी सुरक्षा और हमारी जीवनशैली के लिए खतरे के रूप में हो जाती है, तो हमें उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। यह विधेयक इसी कमी को दूर करता है।”
स्टेफानिक ने कहा कि यह बिल रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका मकसद चीन के सैन्य विस्तार से जुड़ी चीनी कंपनियों पर अमेरिका की आर्थिक निर्भरता को कम करना है।
उन्होंने कहा, “यह एक व्यावहारिक कानून है, जो यह सुनिश्चित करता है कि ट्रेजरी विभाग अब कम्युनिस्ट चीन के दुर्भावनापूर्ण प्रभाव और सैन्य विस्तार से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई में और देरी न कर सके।”
स्टेफानिक ने आगे कहा, “पिछले साल कांग्रेस ने प्रशासन से उन चीनी कंपनियों पर रिपोर्ट देने को कहा था जो बढ़े हुए प्रतिबंधों के दायरे में आती हैं। सीसीपी-सैंक्शंस शॉट क्लॉक एक्ट यह सुनिश्चित करेगा कि इन कंपनियों पर उतनी ही तेजी से प्रतिबंध लगाए जाएं, जितनी तेजी से अमेरिका को जवाब देने की जरूरत है।”
राजनीति
पीएम मोदी आज साइप्रस के राष्ट्रपति के साथ करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

पीएम मोदी शुक्रवार को नई दिल्ली में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स के साथ वार्ता करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय मुद्दों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना है।
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे, जहां हवाईअड्डे पर उनका स्वागत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री अजय टम्टा ने किया।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स का नई दिल्ली आगमन पर हार्दिक स्वागत है। मुंबई यात्रा के बाद वह नई दिल्ली पहुंचे। उन्हें औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।”
साइप्रस के राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु उनके सम्मान में आधिकारिक भोज भी आयोजित करेंगी। विदेश मंत्री जयशंकर शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात से पहले साइप्रस राष्ट्रपति से भेंट करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और क्रिस्टोडौलिड्स के बीच बैठक हैदराबाद हाउस में होगी।
क्रिस्टोडौलिड्स ने अपनी भारत यात्रा को “बेहद महत्वपूर्ण” बताया है। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद “उत्कृष्ट” संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम पड़ाव साबित होगी।
नई दिल्ली आने से पहले क्रिस्टोडौलिड्स ने अपनी भारत यात्रा के तहत मुंबई का दौरा किया। उनके साथ उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी है, जिसमें साइप्रस के विदेश मंत्री कस्टेनसंस, परिवहन मंत्री अलेक्सिस, वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी शामिल हैं। इस यात्रा से भारत और साइप्रस के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले गुरुवार को क्रिस्टोडौलिड्स ने नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) के चेयरमैन श्रीनिवास इंजेटी और प्रबंध निदेशक एवं सीईओ आशीष कुमार चौहान के साथ मुंबई में एनएसई इंडिया की घंटी बजाई।
एनएसई इंडिया ने एक्स पर लिखा, “इस यात्रा के दौरान एनएसई परिसर का दौरा भी कराया गया। इसके बाद हमारे नेतृत्व दल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के नए अवसरों पर सार्थक चर्चा हुई।”
राजनीति
तमिलनाडु में दो नए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की सिफारिश, राज्यपाल ने दी मंजूरी

तमिलनाडु सरकार में मंत्रिपरिषद विस्तार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने दो विधायकों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की अनुशंसा की है, जिसे राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है।
तमिलनाडु के लोक भवन से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने पापनासम विधानसभा क्षेत्र से चुने गए विधायक ए.एम. शाहजहां और तिंडीवनम विधानसभा क्षेत्र से चुने गए विधायक वन्नी अरसु को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की सिफारिश की थी। राज्यपाल ने इस अनुशंसा को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
यह मंत्रिपरिषद विस्तार तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी के अंदर कुछ क्षेत्रीय संतुलन बनाने और नए चेहरों को मौका देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ए.एम. शाहजहां पापनासम क्षेत्र से आते हैं, जो दक्षिण तमिलनाडु का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। वहीं वन्नी अरसु तिंडीवनम से हैं, जो उत्तर-पूर्वी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने से कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन मजबूत होने की उम्मीद है।
इससे पहले गुरुवार को 23 नए मंत्रियों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था और राज्यपाल ने विभाग आवंटन की मंजूरी दी थी। इनमें श्रीनाथ को मत्स्य पालन, कमाली एस. को पशुपालन, सी. विजयलक्ष्मी को दुग्ध और डेयरी विकास और आरवी रंजीत कुमार को वन विभाग सौंपा गया है। विनोद को कृषि और किसान कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है जबकि राजीव को पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग का प्रभार दिया गया है।
अन्य मंत्रियों में बी. राजकुमार को आवास और शहरी विकास, वी. गांधीराज को सहकारिता, मथन राजा पी. को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग, जगदीश्वरी के. को समाज कल्याण व महिला सशक्तीकरण और राजेश कुमार एस. को पर्यटन विभाग सौंपा गया है।
इसके अलावा एम. विजय बालाजी को हथकरघा और वस्त्र, लोगेश तमिलसेल्वन डी. को वाणिज्यिक कर और पंजीकरण, विजय तमिलन पार्थिबन ए. को परिवहन और रमेश को हिंदू धार्मिक व धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग का कार्यभार दिया गया है।
उच्च शिक्षा विभाग पी. विश्वनाथन को सौंपा गया है जबकि कुमार आर. को नवगठित कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवा विभाग का नेतृत्व दिया गया है। थेन्नारासु के. को अनिवासी तमिल कल्याण, वी. संपत कुमार को पिछड़ा वर्ग कल्याण, मोहम्मद फरवास को श्रम कल्याण व कौशल विकास और डी. सरथकुमार को मानव संसाधन प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी मिली है। वित्त, योजना और विकास विभाग एन. मैरी विल्सन को दिया गया है जबकि विघ्नेश के. को निषेध और आबकारी विभाग सौंपा गया है।
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