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Wednesday,02-September-2026
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वैश्विक ई-कॉमर्स राजस्व में इतिहास में पहली बार 95 अरब डॉलर की कमी का अनुमान

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इतिहास में पहली बार दुनिया भर में ई-कॉमर्स राजस्व के इस साल काफी कम होने का अनुमान है। ऐसा आपूर्ति श्रृंखला में बाधा पैदा होने और बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण है। उद्योग को इस साल 3.74 ट्रिलियन डॉलर की बिक्री की उम्मीद है, जो 2021 की तुलना में 95 बिलियन डॉलर कम है। एक रिपोर्ट में गुरुवार को ये बात कही गई है। ऑगस्ताफ्रीप्रेस डॉट कॉम के आंकड़ों के अनुसार, अपेक्षित ई-कॉमर्स राजस्व में गिरावट 2022 में वैश्विक चुनौतियों के बीच आ रही है।

महामारी के दौरान, कई उपभोक्ताओं ने खरीददारी के अपने व्यवहार को बदल दिया है और ब्रांड वैल्यू, उपलब्धता और सुविधा की तलाश में नए ब्रांडों की ओर रुख किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, पारंपरिक ई-कॉमर्स तकनीक भी अपनी सीमा तक पहुंच गई है, और कई ब्रांड अपने ई-कॉमर्स तकनीक को ग्राहकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं देख रहे हैं। इसके अलावा, डिजिटल विज्ञापनों की लागत बढ़ रही है। हालांकि, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और मुद्रास्फीति कमजोर कारक बनी हुई है।

स्टेटिस्टा डिजिटल मार्केट आउटलुक के अनुसार, केवल चार वर्षों में, वैश्विक राजस्व में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 2021 में 3.84 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गई। इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन में बिक्री इनमें से कुल मूल्य का लगभग आधा हिस्सा है।

आंकड़े बताते हैं कि 2017 और 2021 के बीच, वैश्विक ई-कॉमर्स फैशन उद्योग का राजस्व 67 प्रतिशत बढ़कर 890 बिलियन डॉलर हो गया। इस अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स बिक्री 46 प्रतिशत बढ़कर 920 बिलियन डॉलर हो गई।

स्टेटिस्टा डिजिटल मार्केट आउटलुक के नवीनतम पूवार्नुमान से पता चलता है कि वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक कारकों ने ई-कॉमर्स उद्योग में पहली बार साल-दर-साल राजस्व में गिरावट दर्ज की है।

रिपोर्ट में कहा गया है, पिछले पूवार्नुमान ने एक साल पहले की तुलना में 2022 में 481 बिलियन डॉलर अधिक राजस्व का अनुमान लगाया था। हालांकि, जुलाई तक, वैश्विक ई-कॉमर्स राजस्व प्रक्षेपण 4.22 ट्रिलियन डॉलर से 3.74 ट्रिलियन डॉलर तक फिसल गया।

हालांकि इस समय एक परिस्थितियां विपरीत हैं, लेकिन स्टेटिस्टा को उम्मीद है कि राजस्व वृद्धि अंतत: पटरी पर आ जाएगी।

पिछले साल, वैश्विक ई-कॉमर्स बाजार में लगभग 3.8 बिलियन लोगों ने ऑनलाइन खरीददारी की थी।

आंकड़े बताते हैं कि 2022 में ऑनलाइन खरीददारों के 31.5 करोड़ सालाना बढ़कर 4.1 अरब होने की उम्मीद है। साथ ही, इस साल बाजार की पहुंच दर 54.1 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय

उत्तरी साइप्रस के तट पर फेरी डूबने से आठ यात्र‍ियों की मौत, 18 लोग लापता

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तुर्की साइप्रस अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी साइप्रस तट के पास एक तुर्की फेरी के डूबने के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है, जबकि 18 लोग अब भी लापता हैं।

डबल-हल वाली इस फेरी में 259 यात्री और 8 चालक दल के सदस्य सवार थे। रविवार दोपहर कायरिनिया बंदरगाह से रवाना होने के कुछ ही समय बाद फेरी में पानी भरना शुरू हो गया और वह पलट गई। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तक 241 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था।

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, पलटने बाद में फेरी समुद्र में 500 मीटर से अधिक गहराई में डूब गई। यह अभी साफ नहीं है कि कोई व्यक्ति जहाज के अंदर फंसा था या नहीं। हालांकि सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो से संकेत मिला कि फेरी के डूबने के समय उसके एक हिस्से में अभी भी कुछ लोग मौजूद थे।

तुर्की ने बताया कि वह खोज अभियान में मदद के लिए एक गहरे समुद्र में काम करने वाला रिमोट संचालित वाहन (आरओवी) भेज रहा है। यह उपकरण मंगलवार तक दुर्घटनास्थल पर पहुंचने की उम्मीद है।

तुर्की साइप्रस अधिकारियों ने फेरी के कप्तान और चालक दल के सात अन्य सदस्यों को हिरासत में ले लिया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस फेरी में पहले भी पानी रिसने की समस्या रही थी और उसकी मरम्मत कराई गई थी।

कुछ बचे हुए यात्रियों ने दावा किया कि कप्तान और चालक दल के सदस्य सबसे पहले नाव से बाहर निकल गए और यात्रियों को सुरक्षित निकलने के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए।

शनिवार को साइप्रस में तेज तूफान आया था और रविवार को भी समुद्र की स्थिति काफी खराब बनी हुई थी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उस समय मौसम को देखते हुए फेरी का कायरिनिया से लगभग 120 किलोमीटर उत्तर में स्थित तुर्की के तासुकु बंदरगाह के लिए रवाना होना सुरक्षित माना गया था।

अधिकारियों ने कहा कि फेरी के पलटने की असली वजह की जांच अभी जारी है।

इस साल की शुरुआत में सूडान में भी इसी तरह की एक घटना हुई थी। उत्तरी सूडान के नील राज्य में एक यात्री फेरी नदी में डूब गई थी, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी।

सूडान की सिविल डिफेंस अथॉरिटी के एक अधिकारी के अनुसार, ऊंची लहरों के कारण नाव पलट गई थी। बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर 15 से अधिक शव बरामद किए थे। इस हादसे में 8 लोग बच गए थे, जबकि लगभग 4 लोग लापता बताए गए थे।

फिलहाल साइप्रस में डूबी फेरी के लापता यात्रियों की तलाश जारी है और बचाव दल उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द से जल्द बाकी लोगों का पता लगाया जा सके।

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अंतरराष्ट्रीय

नेपाल त्रासदी : पर‍िजनों को सौंपने से पहले शवों का होगा डीएनए और पोस्टमॉर्टम, गाइडलाइन जारी

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नेपाल में आई व‍िनाशकारी बाढ़ के पीड़ितों के पार्थिव अवशेषों को लेकर काठमांडू स्‍थित भारतीय दूतावास ने नया अपडेट जारी किया है। दूतावास ने बताया कि यह 29 अगस्त की प्रेस विज्ञप्ति का अगला अपडेट है। नेपाली अधिकारियों के अनुसार, विदेशी नागरिकों के शव सौंपने से पहले दस्तावेजीकरण, पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच और पहचान सत्यापन समेत कई औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।

दूतावास ने बताया क‍ि नेपाल सरकार के अनुसार, विदेशी नागरिकों के पार्थिव अवशेष उनके परिजनों या संबंधित अधिकारियों को सौंपने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इस प्रक्रिया में पार्थिव अवशेषों से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज तैयार करना, शव की रिकॉर्ड की गई तस्वीरें/विवरण, पोस्टमॉर्टम जांच, मौत का कारण सत्यापित करना, औपचारिक रूप से पहचान स्थापित करना, फिंगरप्रिंट/डीएनए/फोरेंसिक सैंपल इकट्ठा करना, मृतक का पासपोर्ट/आईडी सत्यापित करना, दूतावास/काउंसलर समन्वय पूरा करना और पार्थिव अवशेष सौंपने से जुड़े दस्तावेज और रसीद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें संबंधित पक्ष को सौंप दिया जाएगा।

इसके आलावा यदि रिश्तेदार और परिवार के सदस्य नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर मृतक की तस्वीरों और विवरण के माध्यम से शव की पहचान कर पाते हैं, तो काठमांडू में भारतीय दूतावास शव को सौंपने और वापस भेजने से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में सहायता करेगा। स्वास्थ्य जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफनाया है। ऐसे शवों की पहचान के लिए करीबी रिश्तेदारों (फर्स्ट-डिग्री रिलेटिव्स) के साथ डीएनए मिलान की आवश्यकता होगी।

अध‍िकार‍ियों ने बताया क‍ि जिन मामलों में पहचान संभव नहीं है या शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है, वहां नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा प्रदान करेगी। नेपाल में अधिकारी डीएनए प्रोफाइल बनाने के लिए शवों से डीएनए सैंपल इकट्ठा कर रहे हैं। मिलान करने के लिए मृतक के करीबी रिश्तेदार ईमेल के माध्यम से प्रोफाइल भेज सकते हैं या नेपाली अधिकारियों की ओर से मांगी गई कुछ प्रारंभिक जानकारी के साथ ब्लड सैंपल दे सकते हैं।

भारतीय दूतावास की ओर से सहायता के लिए करीबी रिश्तेदारों के डीएनए प्रोफाइल की कॉपी ‘ईओआई काठमांडू फ्लड सपोर्ट ऐट जीमेल डॉट कॉम’ पर भी भेजी जा सकती है। डीएनए प्रोफाइलिंग से जुड़ी जरूरी जानकारी नेपाल पुलिस की वेबसाइट ‘डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट नेपाल पुलिस डॉट जीओवी डॉट एनपी’ और उनके हेल्पलाइन नंबर 9779841616095 पर देखी जा सकती है।

इसके अलावा किसी भी और मदद या जानकारी के लिए, काठमांडू में भारतीय दूतावास की इन 9779851316807, 9779709107500, 9779810326117 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है।

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अंतरराष्ट्रीय

आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना जरूरी: एससीओ समिट में पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें एससीओ समिट में आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने की बात कही। स्पष्ट किया कि कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देने वाले तत्वों पर रोक लगानी होगी। इस सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल हुए हैं।

मंगलवार को सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “पिछले पच्चीस वर्षों में एससीओ ने यूरेशिया के विशाल भूभाग में संवाद और सहयोग की एक मजबूत परंपरा विकसित की है। हमने मिलकर अपने लोगों की भलाई के साथ-साथ मानवता के विकास में भी बहुमूल्य योगदान दिया है। इन पच्चीस वर्षों में हमने सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है। अब आने वाले पच्चीस वर्षों में हमारा लक्ष्य इस सहयोग को स्पष्ट परिणामों में बदलने का होना चाहिए।”

प्रधानमंत्री के मुताबिक एससीओ को लेकर भारत की सोच जाहिर की। उन्होंने कहा, “आज जब विश्व अनिश्चितता और अस्थिरता से गुजर रहा है, हमें अपने साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलना है और हमारे प्रयासों से हमारे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना हैं।पिछली बैठक में मैंने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया था: एस से सिक्योरिटी (सुरक्षा), सी से कनेक्टिविटी और ओ से ऑर्प्चुनिटी (अवसर)। अब समय है कि इन तीनों स्तंभों को विजन से आगे बढ़ाकर ठोस आउटकम (उपलब्धि) तक ले जाया जाए। और इसकी पहली आवश्यकता है—शांति और सुरक्षा। आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके विरुद्ध लड़ाई में हम एक्शन-रिएक्शन की सोच तक सीमित नहीं रह सकते।”

फिर पीएम मोदी ने आतंकवाद को लेकर भारत की मंशा स्पष्ट की। उन्होंने कहा, ” हमें आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को ध्वस्त करना होगा। हमें एक स्वर में बोलना होगा कि इस गंभीर विषय पर द्विपक्षीय मापदंड के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता।”

उन्होंने किसी भी देश का नाम लिए बगैर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ” जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं, आतंकियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश देना होगा कि आतंकवाद किसी के लिए स्ट्रेटेजिक एसेट नहीं हो सकता। शांत और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है, और आगे भी देता रहेगा।”

प्रधानमंत्री ने एक दूसरे से जुड़े रहने को दुनिया के लिए जरूरी करार दिया। पीएम बोले,” आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में सुरक्षा की परिधि और भी व्यापक हो चुकी है। पश्चिम एशिया के संकट ने यह दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव पूरे विश्व की एनर्जी सिक्योरिटी, मैरीटाइम ट्रेड और सप्लाई चेन्स पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ता है। इसलिए भारत का आह्वान रहा है कि सभी तनावों और युद्धों का समाधान बैटलफील्ड पर नहीं, डायलॉग और डिप्लोमेसी से ही संभव है।”

पीएम मोदी ने नशीले पदार्थों की तस्करी को भी रोकने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ” ड्रग ट्रैफिकिंग केवल एक अपराध नहीं है बल्कि हमारी युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। एससीओ के अंतर्गत सिक्योरिटी थ्रेट्स, ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, इन्फोर्मेशन सिक्योरिटी और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थापित किए जा रहे सेन्टर्स एक सकारात्मक कदम है। हमें व्यावहारिक समन्वय और समय पर कार्रवाई कर इन्हें प्रभावी माध्यम बनाना चाहिए।”

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