राष्ट्रीय
भारतीय खाद्य निगम : ई-नीलामी में 901 करोड़ रुपये में 3.85 एलएमटी गेहूं की बिक्री
नई दिल्ली, 16 फरवरी : आटे की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं की ई नीलामी करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार के मुताबिक गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए यह ई-नीलामी मार्च 2023 के दूसरे सप्ताह तक हर बुधवार को की जायेगी। इस बीच भारतीय खाद्य निगम ने 15 फरवरी, 2023 को जो दूसरी ई-नीलामी की थी, उसमें 1060 से अधिक बोलीकर्ताओं ने हिस्सा लिया और 3.85 एलएमटी गेहूं की बिक्री की गई। निगम ने 15.25 एलएमटी गेहूं के भंडारण की नीलामी की पेशकश की थी।
उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की दूसरी ई-नीलामी में 100 से 499 एमटी की मात्रा की अधिकतम मांग थी। इसके बाद 500-1000 एमटी मात्रा की मांग दूसरे नंबर पर रही। तीसरे नंबर पर 50-100 एमटी गेहूं की मांग रही। इससे पता चलता है कि नीलामी में छोटे और मंझोले आटा मिल वालों तथा कारोबारियों ने सक्रिय हिस्सा लिया। एकमुश्त 3000 एमटी की अधिकतम मात्रा के लिये केवल पांच बोलियां ही प्राप्त हुई थीं।
नीलामी में एफसीआई ने औसत दर 2338.01 रुपये कुंतल जारी की थी। दूसरी ई-नीलामी में एफसीआई ने 901 करोड़ रुपये अर्जित किये।
मंत्रालय का कहना है कि देश में गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिये मंत्रियों के समूह द्वारा की जाने वाली सिफारिशों के अनुपालन में एफसीआई ई-नीलामी के लिये गेहूं की पेशकश कर रहा है। ई-नीलामी के जरिये गेहूं की बिक्री देशभर में मार्च 2023 के दूसरे सप्ताह तक हर बुधवार को की जाएगी।
भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, सहकारिताओं तथा केंद्रीय भंडार, एनसीसीएफ और नाफेड जैसे संघों के लिये बिना ई-नीलामी के 3 एलएमटी गेहूं का आवंटन किया है। पहले रियायती दरों पर गेहूं 23.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उठाया जा सकता था। इसी तरह इस योजना के तहत आटा भी जनता को एमएसपी की दर के मद्देनजर उपलब्ध कराया जाता रहा है, जो 29.50 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं था। भारत सरकार ने इन दोनों दरों में संशोधन कर दिया है, जिसके अनुसार गेहूं 21.50 रुपये प्रति किलोग्राम और आटा एमएसपी की दर से ऐसे भंडारण से उठाया जा सकता है, जिसकी कीमत 27.50 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं होगी।
भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) को उपरोक्त योजना के तहत आठ राज्यों में 68,000 एमटी गेहूं उठाने की अनुमति दी गई है। इस योजना के तहत नाफेड को 1 एलएमटी गेहूं का आवंटन और केंद्रीय भंडार को 1.32 एलएमटी गेहूं का आवंटन किया गया है, ताकि देशभर में आटे की कीमत को नीचे लाया जाए। एफसीआई से भंडारण उठाने के बाद आटे की बिक्री इन्हीं सहकारिताओं द्वारा संचालित की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि ओएमएसएस (डी) योजना के जरिए दो महीनों की अवधि में बाजार में ओएमएसएसडी (डी) के तहत बिक्री के लिये 30 एलएमटी गेहूं रखा गया था, जिसमें से 25 एलएमटी से अधिक गेहूं उठा लिया गया है। यह गतिविधि अनेक चैनलों के माध्यम से चलाई जा रही है। इसका भी गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में भूमिका रहेगी तथा खाद्य अर्थव्यवस्था में कीमतों को स्थिर कर आम आदमी को राहत मिलेगी।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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