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Tuesday,21-July-2026
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मध्यप्रदेश में कांग्रेस की जमीनी नब्ज टटोलने की कवायद

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मध्यप्रदेश की सत्ता गंवाने के बाद अगले कुछ समय में 24 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव कांग्रेस के लिए काफी अहमियत वाले हैं, क्योंकि इन इलाकों में कांग्रेस अपनी पहली पंक्ति के नेताओं को खो चुकी है। यही कारण है कि कांग्रेस ने जमीनी नब्ज टटोलने के साथ क्षमतावान उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है।

कांग्रेस हाईकमान ने पिछले विधानसभा चुनाव में प्रभारी महासचिव के नेतृत्व में चार राष्ट्रीय सचिवों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्से की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन सचिवों को जगह-जगह बैठकें करके संगठन की क्षमता के साथ जनाधार वाले नेता की खोज की जिम्मेदारी भी थी। ये प्रभारी सचिव सीधे पार्टी हाईकमान से जुड़े हुए थे। कारगर रणनीति के चलते कांग्रेस डेढ़ दशक बाद राज्य में सत्ता में लौटी थी।

कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार प्रदेश में लगभग 15 माह रही, मगर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक तत्कालीन 22 विधायकों के पार्टी छोड़ने से सरकार गिर गई।

राज्य में आगामी समय में इन 22 स्थानों के साथ अन्य रिक्त दो स्थानों पर कुल मिलाकर 24 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होना है और इनमें सबसे ज्यादा 16 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जो सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में हैं।

राज्य में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस उपचुनावों की तैयारी में जुटी हुई है। पार्टी प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा का कहना है कि कांग्रेस उपचुनाव पूरी क्षमता और ताकत से लड़ेगी साथ ही सत्ता में वापसी करेगी, क्योंकि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को पांच साल के लिए जनादेश दिया था। वहीं, दलबदलू को सबक भी सिखाएगी। पार्टी सक्षम और चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों का सर्वे करा रही है।

पार्टी में हुई बगावत के बाद जिन 24 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने वाले हैं, वहां पर कांग्रेस की पहली पंक्ति के नेताओं का टोटा है, क्योंकि वे सभी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इन विषम परिस्थितियों में पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव पद पर बदलाव किया है। दीपक बावरिया की जगह मुकुल वासनिक को कमान सौंपी है। दूसरी ओर, प्रभारी सचिवों में दो को बदला है। दो सचिव सुधांशु त्रिपाठी और संजय कपूर पूर्ववत हैं।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि उपचुनाव में बड़ी चुनौती ग्वालियर-चंबल से बाहर के इलाकों में है। पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़े, इसके लिए संगठन को और मजबूत करने के साथ जनाधार वाले उम्मीदवार की तलाश भी आवश्यक है।

पार्टी ने पूर्व से कार्यरत राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी और संजय कपूर को सात-सात विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है, वहीं नए प्रभारी सचिवों पीसी मित्तल और कुलदीप इंदौरा को पांच-पांच विधानसभा क्षेत्रों का प्रभार दिया गया है।

पार्टी ने जिन सचिवों को विधानसभा क्षेत्रों का प्रभारी बनाय है, उनमें से सुधांशु त्रिपाठी अब तक मुरैना जिले की उपचुनाव वाली सीटों कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुके हैं और भिंड में बैठकों का दौर शुरू हो रहा है। त्रिपाठी संगठन की स्थिति के साथ क्षेत्र के जनाधार वाले नेता की तलाश कर रहे हैं।

राजनीति के जानकारों की मानें तो उपचुनाव में कांग्रेस को सबसे बड़ी चुनौती जनाधार वाले उम्मीदवार की है, क्योंकि जिन स्थानों पर उपचुनाव होना है, वहां पार्टी से बड़े और क्षेत्रीय नेता भाजपा में जा चुके है। लिहाजा, कांग्रेस को नए चेहरों पर दाव लगाना होगा, दल-बदल कर कई नेता आएंगे, मगर वे जीत दिला पाएंगे इसमें संदेह रहेगा। यही कारण है कि कांग्रेस ने अभी से जमावट शुरू कर दी है और जमीनी हकीकत को समझा जा सके।

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महाराष्ट्र

शांतिपूर्ण विरोध का कोई विरोध नहीं, लेकिन दिल्ली में विरोध के दौरान हिंसा भड़की, अशांति फैलाने की साजिश : देवेंद्र फडणवीस

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मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गंभीर आरोप लगाते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में हुई हिंसा को पॉलिटिकल एजेंडा बताया है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कई पॉलिटिकल पार्टियां राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि कई नेक लोग भी इसमें शामिल हैं, लेकिन जिस तरह से इस विरोध प्रदर्शन में हिंसा की गई, वह पूरी तरह से गलत है। पुलिस पर पत्थरबाजी और गाड़ियों को तोड़ना बिल्कुल सही नहीं है। फडणवीस ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का भी समर्थन किया है और कहा है कि पुलिस ने धैर्य और संयम दिखाया है। विरोध प्रदर्शन को लेकर देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया है कि संविधान और लोकतंत्र में सभी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन बिना इजाजत विरोध करके हालात खराब करने का अधिकार किसी को नहीं है। अगर कोई बिना इजाजत विरोध करता है या हिंसा और तनाव पैदा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जेसीपी के विरोध प्रदर्शन में कुछ ऐसे तत्व भी शामिल हो गए हैं जिनका विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है, वे सिर्फ अपने फायदे और देश में अशांति फैलाने की साजिश में शामिल हैं। देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि प्रोटेस्ट प्रदर्शनों के खिलाफ तभी एक्शन लिया जाता है, जब वे हिंसा के लिए तैयार हों या किसी साज़िश का हिस्सा हों। उन्होंने कहा कि जो लोग परमिशन लेकर प्रोटेस्ट करते हैं, उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता, जबकि सभी को प्रोटेस्ट करने का अधिकार है और किसी को भी इससे वंचित नहीं किया जा सकता। फडणवीस ने कहा कि जेसीपी प्रोटेस्ट के बैकग्राउंड में हालात बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है, जो बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में जो हुआ और यहां कैसे हिंसा हुई, यह सबने देखा है। इसके साथ ही, महाराष्ट्र और मुंबई में भी प्रोटेस्ट प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस ने एक्शन लिया है, जबकि फडणवीस ने प्रोटेस्ट करने वालों के खिलाफ पुलिस एक्शन का भी सपोर्ट किया है।

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राजनीति

जंतर-मंतर पर झड़प से आहत खड़गे ने जन्मदिन नहीं मनाने का किया ऐलान, कहा-हमारे बच्चे न्याय के हकदार

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए युवाओं के विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प से आहत खड़गे ने अपना जन्मदिन न मनाने की घोषणा की है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि देश ने सोमवार को सरकार द्वारा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन को कुचलने, लाठीचार्ज की घटना देखी। न्याय की मांग कर रहे छात्रों की आवाज का जवाब देने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया। ‘लोकतंत्र की जननी’ अपने युवा बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करती। इन दुखद हालात में मैंने आज अपना जन्मदिन न मनाने का फैसला किया है।

खड़गे ने कहा, “मैं उन सभी कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों, शुभचिंतकों और हर उस नागरिक का बहुत आभारी हूं, जिन्होंने मुझे शुभकामनाएं भेजी हैं। आपका स्नेह मेरे लिए बहुत मायने रखता है और मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूं लेकिन आज जश्न मनाने का दिन नहीं है। यह जवाबदेही तय करने और लोकतंत्र को बहाल करने का दिन है।”

कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा, “न्याय की मांग कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज क्यों किया गया? संसद को लगभग सील क्यों कर दिया गया और इंटरनेट क्यों बंद कर दिया गया? बार-बार पेपर लीक होने और लाखों युवाओं की परेशानी के लिए कौन ज़िम्मेदारी लेगा?”

खड़गे ने कहा कि सरकार को तुरंत संसद में इस मुद्दे पर पूरी चर्चा की अनुमति देनी चाहिए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस मामले की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। सुरक्षित डिजिटल प्रश्न बैंक और रैंडमाइज्ड पेपर के साथ 21वीं सदी की छात्र-केंद्रित परीक्षा प्रणाली लागू हो। शिक्षा पर अधिक खर्च के साथ एक स्वतंत्र और योग्यता-आधारित शिक्षा प्रणाली, जो आरएसएस के राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त हो। परीक्षा में गड़बड़ी होने पर अनिवार्य रूप से दोबारा परीक्षा और मुआवजे के जरिए छात्रों को कानूनी सुरक्षा मिले। हमारे बच्चे न्याय के हकदार हैं, दमन के नहीं।”

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राजनीति

कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों के साथ बैठक अच्छी रहीः जेपी नड्डा

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्यों के साथ उनकी बैठक “ठीक” रही।

सोमवार को सीजेपी के दो प्रतिनिधियों ने नड्डा से उनके घर पर मुलाकात की। दिन में पहले हुई विस्तृत बातचीत के बाद उन्होंने ग्रुप की तीन मुख्य मांगों वाला एक लिखित ज्ञापन सौंपा।

एनडीए के ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम में पहुंचने पर जब नड्डा से सीजेपी सदस्यों के साथ हुई बातचीत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “बातचीत अच्छी रही। बैठक हमेशा अच्छी ही होती है।” हालांकि, उन्होंने प्रदर्शनकारियों को दिए गए “आश्वासनों” पर कोई टिप्पणी नहीं की।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहली बैठक सोमवार सुबह लगभग 11:50 बजे हुई, जिसमें सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगें ज़ुबानी तौर पर रखीं। नड्डा ने प्रतिनिधियों से उन्हें लिखित रूप में सौंपने के लिए कहा। शाम लगभग 4 बजे प्रतिनिधिमंडल वापस लौटा और अपनी मांगों का विवरण देते हुए एक लिखित ज्ञापन सौंपा।

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी रोक-टोक के रिहा करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट 2026 पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान नड्डा ने तीनों मांगों में से किसी पर भी कोई भरोसा नहीं दिलाया। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर पर चल रहे महीने भर से जारी धरने को खत्म करने और संसद के पास के हाई-सिक्योरिटी वाले इलाके में हालात सामान्य करने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।

बैठक के बाद नड्डा ने एक्स पोस्ट में लिखा, “पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 से ही हमारी बातचीत जारी है। सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई। उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई। मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने धरने को समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन की मदद करें।”

इस बीच, मंगलवार सुबह प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर डटे रहे और अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखा। सोमवार में ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं।

पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से मंच और टेंट हटा दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उस जगह पर दोबारा कब्ज़ा कर लिया। सीजेपी की ओर से विरोध जारी रखने के आह्वान के बाद मंगलवार सुबह ही प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचने लगे। उस जगह पर पुलिस और आरएएफ के जवान बड़ी संख्या में तैनात हैं।

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