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Tuesday,30-June-2026
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चीन की कलाकारी को टक्कर देंगी अपनी मिट्टी से बनी डिजाइनर मूर्तियां

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि अबकी दीपावली में चीन से बनकर आई गौरी-गणेश की मूर्तियों की जगह स्थानीय स्तर बनी मूर्तियों की ही बिक्री हो। मुख्यमंत्री की इस इच्छा को साकार करने के लिए माटी कला बोर्ड ने पहल शुरू कर दी है।

गोरखपुर के कई मूर्तिकार और लखनऊ के ही मूर्तिकला विशेषज्ञ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, यूपीआईडी (उप्र इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन) की डिजाइनर सारिका वर्मा और वंदना प्रजापति के निर्देशन में मॉडल तैयार होंगे। मॉडल के अनुसार सांचे, स्प्रे और ऑटोमैटिक मशीनें मंगाकर इस विधा से जुड़े लोगों को दिये जाएंगे। साथ ही यह लोग स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार करने वालों को प्रशिक्षण भी देंगे।

पिछले दिनों माटी कला बोर्ड के महाप्रबंधक और प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) नवनीत सहगल की अध्यक्षता में इस बाबत बैठक हो चुकी है। तय हुआ कि गौरी-गणेश की मूर्तियां और डिजाइनर दीये बनाने में अगर चीन के इन उत्पादों से गुणवत्ता और दाम में मुकाबला करना है तो तीन चीजें जरूरी हैं। जिस साइज (8 से 12 इंच)की मूर्तियों की सर्वाधिक मांग रहती उनका खूबसूरत मॉडल विशेषज्ञ तैयार करें। इन मूर्तियों के लिये प्लास्टर ऑफ पेरिस का सांचा मंगाया जाए और बेहतर फि निश के साथ उत्पादन बढ़ाने के लिए ऑटोमैटिक मशीन का उपयोग हो।

यह भी तय हुआ कि मूर्तियों का मॉडल मूर्तिकला विशेषज्ञ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव तैयार करेंगे। इसका सांचा कोलकाता से आएगा। मॉडल जिले के रूप में चयनित गोरखपुर, वाराणसी और लखनऊ के मूर्तिकारों को 50-50 सांचे माटी कला बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी तरह दीपक बनाने और उस पर स्प्रे करने की मशीन गुजरात के पानगढ़ से मंगाने का निर्णय लिया गया।

चूंकि मिट्टी बनाने का काम क्लस्टर में होता है। मिट्टी लाने से लेकर उसकी तैयारी, उत्पादन बनाने और उसकी प्रोसेसिंग से लेकर बाजार तक पहुंचाने में परिवार के अन्य सदस्यों का भी योगदान होता है। लिहाजा विशेष स्थानीय स्तर पर उनको प्रशिक्षण देंगे। जहां पर पग मिल, इलेट्रिक चक और गैस चालित भट्टी की जरूरत हो उसको भी मुहैया कराने का आदेश भी महाप्रबंधक ने दिया है।

मूर्तिकला में विशेषज्ञता के साथ फोइन आर्ट से एमए करने वाले के.के. श्रीवास्तव ने बताया कि “हम चीन से बेहतर कर सकते हैं। चीन का नजरिया सिर्फ व्यवसायिक है, हम जो करेंगे वह दिल से करेंगे। इसकी वजहें हैं। मसलन दीपावली हमारा पर्व है। इस दिन पूजे जाने वाले गौरी-गणेश हमारे आराध्य हैं।”

मूर्तिकला में विशेषज्ञता के साथ फोइन आर्ट से ही एमए करने वाले अमरपाल का कहना है, “पहली बार सूबे के किसी मुखिया ने मिट्टी से जुड़े कलाकारों के बारे में इतना सोचा है। ऐसे में उनकी मंशा पर खरा उतरना हमारा फर्ज है। हम शुरुआत भी कर चुके हैं। तय साइज में गौरी-गणेश की मूर्तियों के चार-पांच मॉडल जल्दी ही तैयार हो जाएंगे।”

राष्ट्रीय समाचार

डेयरी संस्था आविन ने दूध की किल्लत वाली खबर का किया खंडन, कहा- ऐसी खबरें पूरी तरह भ्रामक

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तमिलनाडु की राज्य संचालित डेयरी सहकारी संस्था आविन ने दूध की आपूर्ति में गिरावट संबंधी खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि चेन्नई में दूध की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में दूध की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई है।

यह स्पष्टीकरण तमिलनाडु मिल्क एजेंट्स एंड वर्कर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि निजी डेयरी कंपनियां आविन की तुलना में अधिक खरीद मूल्य देकर दूध उत्पादकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।

एसोसिएशन के अनुसार, इसके कारण आविन के दूध खरीद में गिरावट आई है, जिससे कई इलाकों में दूध की आपूर्ति पर 30 प्रतिशत तक असर पड़ा है।

इन आरोपों को खारिज करते हुए आविन ने कहा कि दूध की खरीद या वितरण में किसी भी तरह की कोई बाधा नहीं आई है और चेन्नई के उपभोक्ताओं को प्रतिदिन आविन के सभी प्रकार के दूध के पैकेट बिना किसी कमी के उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

आधिकारिक बयान में आविन ने कहा कि वह वर्तमान में चेन्नई में प्रतिदिन औसतन 14.50 लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रहा है और अपने व्यापक वितरण नेटवर्क के माध्यम से निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है।

सहकारी संस्था ने कहा कि वह उपभोक्ताओं की मांग पूरी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दूध की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

बिक्री में गिरावट के दावों का जवाब देते हुए आविन ने जून महीने के दौरान दूध वितरण के तुलनात्मक आंकड़े भी जारी किए।

जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में सहकारी संस्था ने प्रतिदिन औसतन 14.46 लाख लीटर दूध की बिक्री की थी। वहीं जून 2026 में औसत दैनिक बिक्री बढ़कर 14.82 लाख लीटर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में प्रतिदिन लगभग 36,000 लीटर अधिक है।

आविन ने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि उपभोक्ता मांग या दूध वितरण में किसी प्रकार की कोई गिरावट नहीं आई है। इसके विपरीत, मिल्क एजेंट्स एसोसिएशन द्वारा जताई गई चिंताओं के बावजूद बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

डेयरी सहकारी संस्था ने आगे कहा कि आविन दूध की कमी या आपूर्ति में व्यवधान संबंधी खबरें “निराधार और भ्रामक” हैं।

संस्था ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे ऐसी खबरों से गुमराह न हों। उसने दोहराया कि पर्याप्त मात्रा में दूध उपलब्ध है और दूध वितरण का कार्य पूरी तरह सामान्य रूप से चल रहा है।

उपभोक्ताओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए आविन ने कहा कि निर्बाध दूध आपूर्ति उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसने जनता को आश्वस्त किया कि चेन्नई में सभी श्रेणियों के दूध के पैकेट बिना किसी कठिनाई के लगातार उपलब्ध रहेंगे।

सहकारी संस्था ने यह भी दोहराया कि वह दूध खरीद और वितरण की लगातार निगरानी करती रहेगी, ताकि शहर के उपभोक्ताओं को भरोसेमंद और निर्बाध दूध आपूर्ति मिलती रहे।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत में अमेरिकी मिशन ने बनाया रिकॉर्ड, अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर का निवेश जुटाया

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भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस साल अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर (20.5 बिलियन डॉलर) के नए निवेश आकर्षित किए हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत में अमेरिकी मिशन निवेश बढ़ाने के मामले में दुनियाभर के सभी अमेरिकी दूतावासों में पहले स्थान पर पहुंच गया है।

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के लीडरशिप समिट में बोलते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि यह उपलब्धि भारत में बढ़ते भरोसे और दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों का बड़ा संकेत है।

उन्होंने कहा, “हमारी सभी अमेरिकी दूतावासों के बीच एक तरह की प्रतिस्पर्धा रहती है। इस साल नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने 20.5 अरब डॉलर का नया निवेश अमेरिका तक पहुंचाया और हम बाकी सभी मिशनों से काफी आगे रहे। यह हमारे लिए बेहद गर्व और संतोष की बात है।”

सर्जियो गोर ने कहा कि आज भारत एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य बनकर उभरा है। यही वजह है कि अमेरिकी कंपनियां भारत के साथ काम करने में पहले से ज्यादा विश्वास दिखा रही हैं।

उन्होंने बताया कि जब कोई अमेरिकी कंपनी उनसे पूछती है कि क्या भारत में निवेश करना सुरक्षित है? क्या यहां उनकी बौद्धिक संपदा (आईपी) सुरक्षित रहेगी? क्या कानून अचानक नहीं बदलेंगे? क्या टैक्स व्यवस्था स्थिर और भरोसेमंद है? तब उन्हें गर्व के साथ जवाब देने का मौका मिलता है कि अमेरिका भारत पर भरोसा करता है और भारत के साथ मिलकर काम करता है।

राजदूत ने कहा कि उन्होंने भारत में अपने छह महीने के कार्यकाल के दौरान कई सकारात्मक बदलाव देखे हैं। अमेरिकी दूतावास अब केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका पूरा ध्यान ठोस आर्थिक परिणाम हासिल करने पर है।

उन्होंने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं, हम परिणामों पर काम करते हैं। मैं भारत सिर्फ स्वागत समारोहों में शामिल होने नहीं आया हूं। मेरा उद्देश्य इस महत्वपूर्ण साझेदारी को और मजबूत करना है, जो दोनों देशों के लिए बेहद जरूरी है।”

सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी दूतावास हमेशा निवेशकों और कारोबारियों के लिए खुला है। उन्होंने कंपनियों से अपील की कि अगर किसी निवेश या कारोबारी परियोजना में नियमों या सरकारी प्रक्रियाओं की वजह से कोई अड़चन आती है, तो वे सीधे दूतावास से संपर्क करें।

उन्होंने कहा, “हमारा दूतावास आपके लिए हमेशा खुला है। आइए, हमसे मिलिए और बताइए कि हम आपकी किस तरह मदद कर सकते हैं। कई बार दोनों देशों में फाइलें सरकारी प्रक्रियाओं में अटक जाती हैं। अगर हम सही व्यक्ति तक मामला पहुंचाकर उसे आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, तो जरूर करेंगे। आपको हमारा दूतावास हमेशा सहयोगी और सकारात्मक मिलेगा।”

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार आर्थिक कूटनीति को विदेश नीति का अहम हिस्सा मानती है। उनका कहना था कि ट्रंप खुद भी अमेरिकी कंपनियों को विदेशों में कारोबार बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा, “कोई भी सौदा छोटा नहीं होता। अगर किसी निवेश से अमेरिका में रोजगार पैदा होता है, तो राष्ट्रपति खुद उस कंपनी के समर्थन में फोन करने के लिए भी तैयार रहते हैं। यह बेहद सक्रिय तरीका है, जैसा हमने पहले किसी भी राजनीतिक दल की सरकार में नहीं देखा।”

सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ तकनीक, रक्षा, विमानन (एविएशन) और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कारोबारी और निवेश संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता भरोसे, साझा अवसरों और दीर्घकालिक साझेदारी पर आधारित है।

उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा, तकनीक और ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ अब कॉमर्शियल डिप्लोमेसी भी भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का एक मजबूत और महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापार समझौते से मिली नई रफ्तार, एआई और रक्षा सहयोग पर बढ़ा जोर

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अमेरिका और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में बढ़ते भरोसे का अनुमान लगाते हुए कहा कि लंबे समय से इंतजार किया जा रहा द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने वाला है। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ा रहे हैं।

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट में इस पर आम सहमति बनी, जहां दोनों सरकारों के अधिकारियों, कानून बनाने वालों और बिजनेस लीडर्स ने बताया कि यह संबंध तकनीक, निवेश और साझा रणनीतिक हितों से प्रेरित होकर एक नए दौर में पहुंच रहा है।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अपने आखिरी चरण में पहुंच गई है।

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत के आर्थिक बदलाव ने इसे वैश्विक विकास, स्थिरता और भरोसेमंद साझेदारी का एक जरूरी सहारा बना दिया है। उन्होंने कहा कि लगातार सुधार, मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी और उच्च तकनीक में निवेश ने भारत को इस दशक के आखिर तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर ला खड़ा किया है।

क्वात्रा ने बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी को भारत-अमेरिका सहयोग के अगले मोर्चों के तौर पर पहचाना और कहा कि 2030 तक दोनों देशों का आपसी व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य सप्लाई चेन, इन्वेस्टमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और स्किल्ड टैलेंट के करीबी इंटीग्रेशन पर निर्भर करेगा।

पूरे समिट में चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर खास तौर पर बात हुई। अमेरिका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने इंजीनियरिंग टैलेंट में भारत को दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बताया जो असल में चीन को टक्कर देता है और इसे भरोसेमंद तकनीकी इकोसिस्टम बनाने में अमेरिका का सबसे जरूरी लॉन्ग-टर्म साझेदार बताया।

हेलबर्ग ने कहा कि वाशिंगटन चीन से आगे जरूरी तकनीकी सप्लाई चेन में विवधिकरण लाना चाहता है। इसके साथ ही भारत के साथ मिलकर एक साझा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है।

अपनी शुरुआती बातों में, यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां चुपचाप चीन पर निर्भरता कम कर रही हैं और भारत में मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च ऑपरेशन बढ़ा रही हैं।

समिट में नई दिल्ली के साथ करीबी संबंधों के लिए वाशिंगटन में दोनों पार्टियों के समर्थन पर भी जोर दिया गया। रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर ही एकमात्र ऐसा कॉम्बिनेशन हैं जो इनोवेशन में चीन के लेवल की बराबरी कर सकते हैं।

डेमोक्रेटिक सेनेटर मार्क वार्नर ने भारत को लंबे समय में अमेरिका के शीर्ष दो या तीन रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया। डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि रो खन्ना ने कहा कि यह संबंध आखिर में साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों के साथ-साथ बढ़ते रक्षा और आर्थिक सहयोग पर आधारित होना चाहिए।

पूर्व अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने मौजूदा संबंधों को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए लोगों के बीच के जुड़ाव को ‘सीक्रेट सॉस’ बताया, जिसने दशकों तक दोनों देशों के संबंधों को बनाए रखा। उन्होंने यूएसआईएसपीएफ की यादगार कॉफी टेबल बुक, ‘वी द पीपल: 250 वॉयसेज दैट हैव शेप्ड द यूएस-इंडिया रिलेशनशिप’ भी लॉन्च की।

बातचीत में यह बात सामने आई कि भारत-अमेरिका के संबंध डिप्लोमेसी और डिफेंस पर अपने पारंपरिक फोकस से कहीं आगे बढ़ गए हैं। अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स ने बार-बार तकनीक, सप्लाई चेन की मजबूती, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश को संबंध के अगले चरण की तय प्राथमिकता बताया।

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