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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार
oil
ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति बाधित होने और वैश्विक बाजारों में हलचल मचने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों में इस तेजी का बचाव करते हुए कहा कि यह ईरान के परमाणु खतरे का सामना करने की अस्थायी कीमत है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के बाद तेल की कीमतें जल्दी ही कम हो जाएंगी और दुनिया की सुरक्षा के लिए यह छोटी कीमत है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, क्योंकि मध्य पूर्व के बड़े तेल उत्पादकों ने उत्पादन कम कर दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति लगभग बंद जैसी स्थिति में है।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत लगभग 20.75 प्रतिशत या 18.83 डॉलर बढ़कर 109.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 18 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर लगभग 109.48 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
यह तेजी 1980 के दशक की शुरुआत के बाद तेल वायदा कारोबार में सबसे बड़े साप्ताहिक उछालों में से एक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में यह उछाल इसलिए आया है क्योंकि आशंका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रह सकती है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और वैश्विक तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि इस क्षेत्र में हमलों और धमकियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही काफी धीमी हो गई है और कई जहाज इस इलाके से गुजरने से बच रहे हैं।
खाड़ी क्षेत्र के कुछ तेल उत्पादकों ने उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। भंडारण टैंक भरने लगे हैं और निर्यात मार्ग बंद होने के कारण कुछ कंपनियों को कुओं को बंद करना या उत्पादन धीमा करना पड़ रहा है।
इस स्थिति का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है। एशियाई बाजारों में कारोबार शुरू होते ही शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखी गई। जापान का बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 5 प्रतिशत गिर गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया का बाजार 7 प्रतिशत से अधिक टूट गया। दोनों अर्थव्यवस्थाएं आयातित तेल और गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कुछ बाजार अनुमानों के अनुसार, इस साल के अंत तक कच्चा तेल 143 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
ऊर्जा इतिहासकार डेनियल येर्गिन ने कहा कि यह स्थिति रोजाना तेल उत्पादन के लिहाज से दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा व्यवधान बन सकती है।
इस संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी पड़ रहा है। वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर एशिया और यूरोप पर पड़ सकता है, क्योंकि ये क्षेत्र ऊर्जा के लिए फारस की खाड़ी से आने वाले आयात पर ज्यादा निर्भर हैं।
हालांकि अमेरिका अपने घरेलू तेल उत्पादन और बढ़ते ऊर्जा निर्यात के कारण कुछ हद तक सुरक्षित हो सकता है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। आमतौर पर ईंधन महंगा होने से परिवहन और खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।
इतिहास में भी फारस की खाड़ी में तेल संकट ने बड़ी आर्थिक समस्याएं पैदा की हैं। 1973 के अरब तेल प्रतिबंध और 1979 की ईरानी क्रांति के समय भी तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था और वैश्विक मंदी जैसी स्थिति बन गई थी।
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ईरान का दावा,’ अमेरिका को दिया जवाब, कुवैत में उसके सैन्य ठिकानों पर किया ड्रोन से हमला’

अमेरिका ने लगातार आठवीं रात ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी आर्मी के अनुसार, उसने कुवैत स्थित दो अमेरिकी सैन्य अड्डों को ड्रोन से निशाना बनाया है। रविवार को ईरान के सरकारी प्रसारक आईएसएनए ने सेना की ओर से जारी किए गए बयान के हवाले से कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में की गई।
ईरानी सेना के अनुसार, उसने कामिकाजे ड्रोन के जरिए कैंप उदैरी स्थित अमेरिकी सेना के गोला-बारूद भंडार और अली अल सलेम एयर बेस पर तैनात पैट्रियट रडार सिस्टम और एयर सर्विलांस रडार को निशाना बनाया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान या संभावित हताहतों के बारे में तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच, ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही, जो खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख हैं, ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई और सैन्य कार्रवाई की, तो ईरानी सशस्त्र बल उसका “निर्णायक और विनाशकारी जवाब” देंगे।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अब्दुल्लाही ने कहा कि देश किसी भी आक्रामक कार्रवाई का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका को “ग्रेट सैटन (महाशैतान)” बताते हुए उन पर “विश्वासघाती और धोखेबाज दुश्मन” होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सशस्त्र सेनाओं, सरकारी संस्थानों और आम जनता के बीच एकता को और मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भविष्य में ईरान अमेरिका को पिछले संघर्षों की तुलना में कहीं अधिक भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
इससे पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बयान जारी कर पुष्टि की है कि उसने 18 जुलाई को ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक और दौर पूरा किया। सेंटकॉम के अनुसार, यह लगातार आठवीं रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की।
अमेरिकी सेना ने बताया कि इस अभियान में ईरान की तटीय निगरानी प्रणालियों, वायु रक्षा ठिकानों, समुद्री सैन्य क्षमताओं और मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना था।
सेंटकॉम ने यह भी कहा कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े उन बलों को भी निशाना बनाया, जिन पर 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने का आरोप है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, वर्तमान में मध्य पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। बयान में कहा गया कि सभी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं, अभियान के लिए तैयार हैं और क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने की क्षमता रखते हैं।
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अमेरिका ने समझौते से किए वादे नहीं निभाए, इसलिए ईरान ने भी अपने दायित्वों का पालन रोका: उपविदेश मंत्री गरीबाबादी

ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ शांति समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना बंद कर दिया है। वाशिंगटन ने समझौते के तहत अपने वादों को तोड़ा है।
सरकारी आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में, गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को असल में तोड़ा है या रद्द कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अब अपना बचाव करने पर ध्यान दे रहा है और बातचीत की कोई खबर नहीं है।
उन्होंने कहा, “अभी हमारे सामने देश का मजबूती से बचाव करने की चुनौती है। इस बार भी, अमेरिकियों को पहले ही जवाब मिल चुका है कि इन आक्रामक कार्रवाइयों से कुछ नहीं होगा। अगर वे समझदार हैं, तो उन्हें दूसरे तरीके चुनने चाहिए।”
दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिकी समयानुसार, शनिवार की रात को जानकारी देते हुए लिखा, “अमेरिकी सेना ने आज (शनिवार) शाम 6 बजे कमांडर इन चीफ के कहने पर ईरान के खिलाफ नए एयरस्ट्राइक शुरू किए। ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को और कम करने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की सेना को तुरंत सजा देने के लिए किए गए हैं, जिन्होंने कल रात जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले किए थे।”
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को बताया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में दो यूएस सैनिक मारे गए और एक लापता हैं। मार्च के बाद से ईरानी गोलीबारी में पहली अमेरिकी सैनिक की मौत है।
सेंट्रल कमांड ने कहा, “17 जुलाई को, जॉर्डन में दो अमेरिकी सेवा सदस्य मारे गए, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड और साझेदार फोर्स ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव कर रहे थे। इसके अलावा, एक सेवा सदस्य अभी लापता है।”
कमांड के अनुसार, चार और अमेरिकी सेवा सदस्य को मेडिकली जॉर्डन के हॉस्पिटल में ले जाया गया, लेकिन उन्हें छुट्टी दे दी गई। दूसरे लोगों को मामूली चोटें आईं और वे ड्यूटी पर लौट आए हैं।
वहीं, शहीदों की पहचान से संबंधित जानकारी को लेकर उन्होंने कहा कि सैनिकों की पहचान उनके परिवार वालों को बताए जाने के 24 घंटे बाद तक सार्वजनिक तौर पर साझा नहीं करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सैनिकों की मौत पर दुख जताया। उन्होंने बताया, “हमें ऐसा होते देखना अच्छा नहीं लग रहा। हमारे देश की सेवा करते हुए वो शहीद हुए।”
इसके अलावा, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक्स पर लिखा, “भगवान आपका भला करे, हीरो। उनकी कुर्बानी हमारे इरादे को और मजबूत करती है।”
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने शनिवार को एक बयान में जॉर्डन के अल-अजराक में अमेरिकी सेना के बेस पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली। आईआरजीसी ने दावा किया कि हमले में कई एयरक्राफ्ट पूरी तरह से नष्ट हो गए। यह हमला मिसाइलों और ड्रोन दोनों से किया गया था।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, अमेरिका ने पिछले हफ्ते ईरान के दक्षिणी प्रांतों में सैन्य ठिकानों और ढांचों पर कई हमले किए हैं। अमेरिका का दावा है कि उनका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कम करना था।
ईरान ने जवाब में कई खाड़ी देशों और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
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रूस पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, मास्को के पास वेयरहाउस पर हमले में 7 की मौत

यूक्रेन ने शनिवार तड़के रूस के कई इलाकों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए। रूसी अधिकारियों के अनुसार, मास्को से दक्षिण-पूर्व स्थित तांबोव क्षेत्र के कोटोव्स्क शहर में एक लॉजिस्टिक्स सेंटर पर हुए ड्रोन हमले में 7 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 24 से 25 लोग घायल हुए हैं।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, तांबोव के गवर्नर येवगेनी पेर्विशोव ने बताया कि हमला रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के स्वामित्व वाले वेयरहाउस पर हुआ। उनके मुताबिक, सभी मृतक नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे।
गवर्नर ने दावा किया कि रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले 28 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। उन्होंने कहा कि यदि सभी ड्रोन अपने निशाने तक पहुंच जाते, तो नागरिक हताहतों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी।
वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार एक अलग घटना में ड्रोन हमले से एक तेल डिपो में आग लग गई। इसकी जानकारी मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन के मलबे के गिरने से नोगिंस्क शहर के एक तेल डिपो में आग लग गई।
उन्होंने बताया कि इस घटना में दो लोग घायल हुए हैं। एहतियात के तौर पर पास के एक मैटरनिटी हॉस्पिटल को खाली करा लिया गया। हालांकि, तेल डिपो को हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह डिपो हल्के पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण और वितरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
जानकारी के मुताबिक, इस डिपो में पेट्रोल, डीजल और केरोसीन का भंडारण किया जाता है। यहां कुल 24 स्टोरेज टैंक हैं, जिनकी संयुक्त भंडारण क्षमता लगभग 11,500 घन मीटर (क्यूबिक मीटर) है।
रूसी अधिकारियों के अनुसार, कोटोव्स्क स्थित लॉजिस्टिक्स सेंटर के वेयरहाउस में लगी आग पर काबू पा लिया गया है, जबकि मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है।
24 फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है। हाल के महीनों में दोनों पक्षों के बीच ड्रोन हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।
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