राष्ट्रीय समाचार
भुवन चंद्र खंडूरी ने ईमानदारी, सादगी और विकास की राजनीति का उदाहरण पेश किया : राष्ट्रपति मुर्मु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर शोक जताया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी ने ईमानदारी, सादगी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया। देश के तथा उत्तराखंड के विकास, सुशासन और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा स्मरणीय रहेगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बीसी खंडूरी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा देने के बाद उन्होंने जन सेवा के लिए ईमानदारी, सादगी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया। देश के तथा उत्तराखंड के विकास, सुशासन और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव स्मरणीय रहेगी। मैं उनके शोक संतप्त परिवारजनों और शुभचिंतकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करती हूं।”
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के कार्यालय ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, मेजर जनरल बी. सी. खंडूरी (सेवानिवृत्त) के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। उनके निधन से देश ने एक विशिष्ट सैनिक, एक सक्षम प्रशासक और असाधारण ईमानदारी वाले एक राजनेता को खो दिया है। स्वर्णिम चतुर्भुज और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के माध्यम से भारत के सड़क बुनियादी ढांचे को बदलने की दिशा में उनका दूरदर्शी योगदान देश की विकास यात्रा में एक मील का पत्थर बना रहेगा। हाल ही में देहरादून की अपनी यात्रा के दौरान मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य मिला था; उस समय हमने लोकसभा में पूर्व सहकर्मी के रूप में अपने जुड़ाव को स्नेहपूर्वक याद किया। दुख की इस घड़ी में, मैं उनके परिवार, उनके अनगिनत प्रशंसकों और उत्तराखंड की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, ”उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता भुवन चंद्र खंडूरी जी का निधन उत्तराखंड एवं भाजपा परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। तीन दशकों से अधिक समय तक सेना में अपनी सेवाएं देने वाले बीसी खंडूरी जी आजीवन राष्ट्र प्रथम के संकल्प के प्रति समर्पित रहे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। शोक की इस घड़ी में पूरा भाजपा परिवार उनके परिजनों के साथ खड़ा है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार एवं समर्थकों को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा, ”उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी जी के निधन से मुझे गहरी वेदना की अनुभूति हुई है। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने बड़े अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ देश और समाज की सेवा की। उत्तराखंड के विकास, सुशासन और जनकल्याण के प्रति उनका समर्पण अतुलनीय था। उनके शोकाकुल परिवार एवं समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।”
इसके अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी उत्तराखंड के पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर दुख जाहिर किया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पोस्ट में लिखा, ”भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। खंडूरी जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, सादगी, अनुशासन और सुशासन के मूल्यों को समर्पित रहा। उनका व्यक्तित्व सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।”
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा, ”उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता मे.ज. (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी जी का निधन अत्यंत दुखद है। विनम्र श्रद्धांजलि। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति एवं शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने लिखा, ”उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण के प्रति अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व एवं सार्वजनिक जीवन में योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।”
छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय ने एक्स पोस्ट में लिखा, ”उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल ( रिटा.) भुवन चंद्र खंडूरी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। सैन्य सेवाओं से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका संपूर्ण व्यक्तित्व राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पित रहा। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लिखा, ”उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। भगवान बद्रीनाथ दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोक संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करें।”
राष्ट्रीय समाचार
भारत का मानसून बेहतर हुआ, खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका आई कमी : रिपोर्ट

भारत में मानसून की स्थिति हाल के महीनों में काफी बेहतर हुई है, जिससे खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान की आशंका कमी आई है। हालांकि, बारिश का वितरण अभी भी एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है, जिस पर नजर रखना जरूरी है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अगस्त तक संचयी बारिश की कमी घटकर 12.6 प्रतिशत रह गई है, जो जून में 35 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया, “स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि यह पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।” मानसून में सुधार का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी देखने को मिला है। सीजन की कमजोर शुरुआत के बाद बुवाई में काफी सुधार हुआ है।
ब्रोकरेज के अनुसार, 14 अगस्त तक कुल खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर से 2 प्रतिशत कम थी, जबकि जून के अंत में यह कमी 21 प्रतिशत थी।
इसके अलावा, धान का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.7 प्रतिशत कम रहा, जबकि मक्का का रकबा 4 प्रतिशत घटा।
इसके विपरीत, दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास का रकबा पिछले साल के स्तर से करीब 1 प्रतिशत के दायरे में रहा।
मैक्वायरी ने कहा कि बुवाई में बची हुई कमी मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा फसलों तक सीमित है और यह व्यापक स्तर पर नहीं है।
इसके अलावा, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर भी बारिश की कमी के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों में पानी का भंडारण 10 साल के औसत स्तर के बराबर या उससे अधिक है। वहीं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में जल भंडारण उनके संबंधित औसत स्तर का करीब 80-100 प्रतिशत है।
हालांकि, बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार, मानसून में सुधार, कुल बुवाई में सीमित कमी और पर्याप्त सिंचाई भंडार ने मिलकर खरीफ उत्पादन में गिरावट के जोखिम को कम कर दिया है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि मानसून की प्रगति महंगाई के लिहाज से भी सकारात्मक है। जून के स्तर की तुलना में खाद्य आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम कम हो रहे हैं।
राजनीति
यूपी चुनाव: मुस्लिम प्रभावी सीटों पर ओवैसी का फोकस, गठबंधन की राह नहीं बनी तो अकेले मैदान में कूदने की तैयारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। इस बीच आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) भी प्रदेश में अपना सियासी खाता खोलने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी की पहली प्राथमिकता गठबंधन है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बनी तो एआईएमआईएम अकेले चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश के चुनावी महत्व को समझते हैं। यही वजह है कि पार्टी उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर तराई क्षेत्र के बहराइच तक ओवैसी खुद दौरा कर पार्टी की संभावनाओं का जायजा ले चुके हैं। पार्टी ने फिलहाल प्रयागराज, बहराइच, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा की कई विधानसभा सीटों पर अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। इन क्षेत्रों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
पार्टी की कोशिश चुनाव से पहले ऐसे इलाकों में अपना सियासी आधार मजबूत करने की है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। गठबंधन को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। ऐसे में एआईएमआईएम ने अपने विकल्प खुले रखे हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, यदि किसी दल के साथ गठबंधन नहीं होता है तो एआईएमआईएम अपने दम पर करीब 200 से 250 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर सकती है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि एआईएमआईएम को उत्तर प्रदेश में वर्ष 2023 के निकाय चुनाव के प्रदर्शन से राजनीतिक आधार मजबूत करने का अवसर मिला। पार्टी के कई प्रत्याशियों ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। अब एआईएमआईएम इसी स्थानीय चुनावी सफलता को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के कई हिस्सों में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि एआईएमआईएम इन क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाने में सफल रहती है तो उसका असर केवल उसके वोट प्रतिशत तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि समाजवादी पार्टी के चुनावी समीकरण पर भी पड़ सकता है। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा है और पार्टी अब तक विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हुज्जत रजा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की राजनीति में यदि ओवैसी की एआईएमआईएम गठबंधन से बाहर रहकर चुनाव लड़ती है तो उसका असर मुख्य रूप से विपक्षी मतों के बंटवारे के रूप में सामने आ सकता है, जिसका लाभ भाजपा को मिलने की संभावना रहेगी। वहीं, यदि सपा-कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन एआईएमआईएम को साथ लेता है तो चुनावी तस्वीर अलग हो सकती है और विपक्ष को इसका लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं और दलों के साथ संभावित तालमेल को भी ‘भीम-मीम’ समीकरण के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, अतीक अहमद के परिवार से जुड़े किसी चेहरे को चुनाव मैदान में उतारने की संभावना को लेकर अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
एआईएमआईएम सेंट्रल जोन के अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलने के लक्ष्य के साथ पूरी तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा, ”हम भाजपा को रोकने के लिए सभी विपक्षी दलों के साथ सम्मानजनक हिस्सेदारी वाले गठबंधन के पक्ष में हैं। बसपा के साथ गठबंधन की संभावना हो या चंद्रशेखर आजाद और अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का विकल्प, हमारा उद्देश्य भाजपा को रोकना है।”
उन्होंने कहा कि सितंबर तक गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई तो एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश की 200 से 250 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी। पार्टी की बूथ स्तर तक तैयारियां चल रही हैं और पूरे प्रदेश से लगातार चुनाव लड़ने के लिए आवेदन मिल रहे हैं।
राजनीति
तमिलनाडु: दो दिन अवकाश के बाद फिर शुरू होगी विधानसभा की कार्यवाही, छह विभागों के अनुदान पर होगी चर्चा

वीकेंड की दो दिन की छुट्टी के बाद तमिलनाडु विधानसभा सोमवार को फिर से अपनी कार्यवाही शुरू करेगी, जिसमें छह प्रमुख विभागों से जुड़ी अनुदान मांगों पर चर्चा होनी है।
इस बहस में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के पास मौजूद विभाग भी शामिल हैं। सदन में नगर प्रशासन और जलापूर्ति; सूचना, प्रचार, स्टेशनरी और प्रिंटिंग; स्कूली शिक्षा; तमिल विकास; और उच्च शिक्षा के लिए अनुदान की मांगों पर चर्चा की जाएगी। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्यों के इस बहस में भाग लेने, नीतियों, खर्च और योजनाओं पर सवाल उठाने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री विजय के पास नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभाग भी है। वे विभाग से जुड़े विधायकों के सवालों का जवाब देंगे। सूचना, प्रचार और स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन और उच्च शिक्षा मंत्री विश्वनाथन भी अपने विभागों से जुड़ी बहस का जवाब देंगे।
चर्चा के आखिर में मंत्रियों की ओर से नई विभागीय पहल की घोषणा करने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के जवाब और घोषणाओं पर खास ध्यान दिया जा सकता है क्योंकि नगर प्रशासन और पीने के पानी की आपूर्ति सीधे तौर पर तमिलनाडु के शहरों, कस्बों और फैलते शहरी इलाकों को प्रभावित करती है।
विधानसभा में 5 अगस्त को 2026-27 का आम बजट और 6 अगस्त को कृषि बजट पेश किया गया था। इन दो वित्तीय बयानों पर 7, 10 और 11 अगस्त को तीन दिन तक आम चर्चा हुई। वित्त मंत्री मारिया विल्सन और कृषि मंत्री विनोद के जवाब देने के बाद 12 अगस्त को बहस खत्म हुई। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह के कारण विधानसभा की कार्यवाही चार दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी।
17 अगस्त को सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर अनुदान की मांगों पर विभाग-वार चर्चा शुरू हुई। मौजूदा सत्र के दौरान अब तक 18 विभागों की मांगों पर चर्चा की जा चुकी है और उन्हें मंजूरी दी जा चुकी है। शनिवार और रविवार होने की वजह से 22 और 23 अगस्त को कार्यवाही स्थगित रही।
सोमवार को सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर सबकी निगाहें फिर से विभागीय खर्च की प्राथमिकताओं, शिक्षा, शहरी प्रशासन, जलापूर्ति, सूचना और तमिल विकास के क्षेत्रों में सरकार की नीतिगत दिशा पर केंद्रित रहेगा। मंत्रियों के जवाब के बाद, अनुदान की मांगों को मंजूरी के लिए सदन के सामने रखा जाएगा। उम्मीद है कि योजनाओं के कार्यान्वयन, फंड के आवंटन और 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए प्रशासन की योजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा जारी रहेगी।
-
दुर्घटना12 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
