राजनीति
लोकसभा में कांग्रेस सांसदों ने दिया स्थगन नोटिस
सरकार के साथ गतिरोध के बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और मनिकम टैगोर ने मंगलवार को लोकसभा में स्थगन का नोटिस दिया। तिवारी ने अपने नोटिस में किसान आंदोलन का उल्लेख किया कि आंदोलन के दौरान कई किसानों ने कठोर मौसम, राज्य द्वारा कथित बल प्रयोग और किसानों पर हिंसक हमलों के लिए अपनी जान गंवा दी, विशेष रूप से लखीमपुर खीरी में हुई घटना, जहां किसान कथित तौर पर तेज रफ्तार वाहनों ने उन्हें कुचल दिया था।
“कई किसानों ने अपनी आजीविका खो दी है, क्योंकि वे किसानों के विरोध में सीमाओं पर बैठे थे। कई मामलों में, जिन किसानों ने अपनी जान गंवाई, वे अपने परिवारों के लिए एकमात्र कमाने वाले थे।”
उन्होंने कहा कि सरकार को उन किसानों का रिकॉर्ड बनाना चाहिए जिन्होंने कृषि कानूनों का विरोध करते हुए अपनी जान गंवाई है। उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने भी लोकसभा में मुद्रास्फीति के कारणों पर चर्चा करने और केंद्र को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर उत्पाद शुल्क को 2013 के स्तर तक कम करने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देने के लिए स्थगन नोटिस दिया है।
राजनीति
पश्चिम बंगाल एसआईआर मामला: चुनाव ड्यूटी पर तैनात अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को इस मामले में दाखिल 65 अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
दरअसल, चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शिकायत की थी कि उनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना था कि वे अपने मताधिकार से वंचित हो रहे हैं, जबकि वे स्वयं चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को पहले इस मुद्दे को संबंधित अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष उठाना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विस्तृत तथ्यात्मक जांच और सुनवाई की आवश्यकता होती है, जो अपीलीय मंच पर अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह उचित होगा कि याचिकाकर्ता पहले उपलब्ध वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करें। इसके तहत वे संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जहां उनके मामले की विस्तार से सुनवाई संभव है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट एमआर शमशाद ने दलील दी कि 65 याचिकाकर्ता चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं और स्थिति विडंबनापूर्ण है क्योंकि जो व्यक्ति चुनाव करा रहा है, वही मतदान नहीं कर पा रहा है जबकि उनके ड्यूटी आदेशों में दर्ज ईपीआईसी नंबर अब हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिना कारण बताओ नोटिस के नाम हटाना प्रथमदृष्टया मनमाना है।
इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिससे फिलहाल चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को कोई तत्काल राहत नहीं मिल सकी है। अधिकारियों को अब अपनी शिकायत के निस्तारण के लिए अपीलीय प्राधिकरण का रुख करना होगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन व्यक्तियों की अपील 21 या 27 अप्रैल तक स्वीकार हो जाती है, उन्हें संबंधित चरण में मतदान की अनुमति दी जाए लेकिन केवल अपील लंबित होने से मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा।
महाराष्ट्र
सेंसेक्स 77,000 के नीचे फिसला; आईटी सेक्टर, महंगा कच्चा तेल जैसे कारणों से तीन सत्रों से लगातार हो रही बिकवाली

मुंबई, भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन कारोबारी सत्रों से बिकवाली देखी जा रही है। शुक्रवार को दोपहर 12:50 बजे सेंसेक्स 1,007 अंक या 1.30 तिशत की गिरावट के साथ 76,656 और निफ्टी 278 अंक या 1.15 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,895 पर था।
बाजार में चौतरफा बिकवाली देखी जा रही है। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी कमजोर बने हुए थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 728.65 अंक या 1.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,219 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 200 अंक या 1.13 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,520 पर था।
बाजार में कमजोरी की एक बड़ी वजह आईटी सेक्टर का कमजोर प्रदर्शन करना है। इन्फोसिस और एसीएल टेक जैसी कंपनियों के कमजोर नतीजों के कारण पूरे आईटी सेक्टर में बिकवाली है और इस कारण से आईटी इंडेक्स 4 प्रतिशत से अधिक फिसल गया है।
कच्चे तेल की कीमतों का उच्च स्तर पर होना, बाजार में निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसके साथ ही निकट अवधि में महंगाई भी बढ़ने का खतरा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली भी बाजार को निचले स्तर पर धकेल रही है। गुरुवार को लगातार चौथ दिन विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता थे और इस दौरान उन्होंने 3,200 करोड़ रुपए से अधिक की इक्विटी में बिकवाली की।
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर अनिश्चितता के कारण मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है। वहीं, अमेरिका ने भी हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई और भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली देखी जा रही है।
भारत में अस्थिरता दर्शाने वाले इंडिया विक्स में भी तेजी देखी जा रही है। इंडिया विक्स 3.50 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19.24 पर था, जब भी इसमें तेजी देखने को मिलती है, तो आमतौर पर बाजार में गिरावट आती है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की। इसके साथ ही इसे एक “ऐतिहासिक” कदम बताया और वाशिंगटन में दोनों पक्षों के बीच संभावित सीधी बातचीत का संकेत दिया।
यह फैसला ओवल ऑफिस में हुई एक बैठक के बाद सामने आया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद और इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर बैठक में शामिल थे।
ट्रंप ने कहा, “वे तीन सप्ताह के अतिरिक्त युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं, अब और गोलीबारी नहीं होगी। दोनों देशों के नेता आने वाले सप्ताह में वाशिंगटन का दौरा कर सकते हैं।”
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस कदम को “एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षण” बताया और दोनों पक्षों को एक साथ लाने का श्रेय राष्ट्रपति की सीधी भागीदारी को दिया। उन्होंने कहा कि इस विस्तार से दोनों देशों को दीर्घकालिक समाधान खोजने के लिए अवसर मिलेगा।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और लेबनान दोनों को हिजबुल्लाह को लेकर एक जैसी सुरक्षा चिंता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दोनों देश एक ही आतंकवादी संगठन के शिकार हैं, और आशा व्यक्त की कि युद्धविराम से दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित हो सकती है।
इजरायली राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि इजरायल शांति और नागरिकों की सुरक्षा चाहता है। दोनों सरकारें एकजुट हैं और हिजबुल्लाह के प्रभाव से देश को मुक्त कराना चाहती हैं।”
लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद ने अमेरिकी समर्थन का स्वागत करते हुए कहा, “आपकी मदद और समर्थन से हम लेबनान को फिर से स्थिर बना सकते हैं।
ट्रंप ने युद्धविराम के प्रयास को व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति से जोड़ा, जिसमें ईरान से संबंधित अमेरिकी प्रयास भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, “इजरायल-लेबनान वार्ता, उन कुछ मुद्दों की तुलना में आसान होनी चाहिए जिन पर हम काम कर रहे हैं। दोनों पक्ष एक साझा खतरे के खिलाफ एकजुट हैं।”
ट्रंप ने दोहराया कि हमले की स्थिति में इजरायल को जवाबी कार्रवाई का अधिकार है। उन्होंने कहा, “इजरायल को अपनी रक्षा करनी होगी और वे करेंगे। कोई भी जवाबी कार्रवाई “सतर्क” और “सटीक” होगी।
राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि सऊदी अरब जैसे क्षेत्रीय देश भविष्य की वार्ताओं में भूमिका निभा सकते हैं। सऊदी अरब “इससे बहुत खुश होगा” और शांति प्रयासों का समर्थन करेगा।
ट्रंप ने लेबनान में स्थिरता की संभावनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बहुत अच्छी संभावना है कि वार्ता बहुत जल्दी फिर से शुरू हो सकती है।”
यह युद्धविराम विस्तार इजरायल-लेबनान सीमा पर लगातार तनाव के बीच हुआ है, जहां हिजबुल्लाह एक प्रमुख सशस्त्र समूह बना हुआ है। ईरान समर्थित यह समूह लंबे समय से क्षेत्रीय संघर्षों का केंद्र रहा है और इसे संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।
इजरायल और लेबनान के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं और तकनीकी रूप से वे अभी भी युद्ध की स्थिति में हैं। अतीत में हुए युद्धविराम समझौते नाजुक रहे हैं। अक्सर तनाव को रोकने के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की आवश्यकता होती रही है।
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