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Wednesday,16-September-2026
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चीन से बाहर निकलकर भारत आने वाली कंपनियों को मिलेगी सब्सिडी

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जापान ने भारत और अन्य क्षेत्रों में अपना आधार स्थानांतरित करने के लिए जापानी कंपनियों के लिए 22.1 डॉलर की चीन निकास सब्सिडी की घोषणा की है।

यानी जापानी सरकार ने चीन से बाहर निकलने के लिए जापानी कंपनियों को 22.1 करोड़ डॉलर की सब्सिडी या इन्सेंटिव देने का फैसला किया है, जिसका भारत को सीधा फायदा पहुंचने की संभावना है।

अप्रैल में कोरोनावायरस महामारी के बीच, निवर्तमान जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने एक ऐसी अर्थव्यवस्था का निर्माण करने का प्रस्ताव रखा था, जो चीन पर कम निर्भर हो, ताकि राष्ट्र आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) व्यवधानों से बच सके।

जुलाई के मध्य में जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय ने अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए जापान की विनिर्माण कंपनियों के पहले समूह को चीन से दक्षिण पूर्व एशिया या जापान में अपना कारोबार स्थापित करने के लिए सब्सिडी देने की योजना का अनावरण किया था।

भारत-जापान शिखर सम्मेलन से आगे, जापान सरकार ने घोषणा की थी कि वह भारत और बांग्लादेश को चीन से बाहर जाने वाले जापानी निमार्ताओं के लिए सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आसियान देशों की सूची में शामिल करेगी।

यह कदम भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार एवं उद्योगों से जुड़े मंत्रियों के बीच हाल ही में एक वर्चुअल बैठक के बाद सामने आया है। इस बैठक में चीन पर निर्भरता को कम करने के लिए भारत-प्रशांत क्षेत्र में विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने में सहयोग करने पर सहमति बनी थी। दरअसल चीन इन तीनों देशों के साथ एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। चीन के पास बड़ी विनिर्माण इकाइयां होने के साथ ही वह निर्यात के मामले में भी कहीं बेहतर स्थिति में है। उसके इसी वर्चस्व को खत्म करने के लिए तीनों देश आगे आए हैं। एससीआरआई (सप्लाई चेन्स रेजिलिएशन इनिशिएटिव) का उद्देश्य चीन से दूर एक वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि हम विश्वसनीय, दीर्घकालिक आपूर्ति और उचित क्षमता का एक नेटवर्क बनाकर क्षेत्र में मूल्य श्रृंखलाओं को जोड़ने के लिए मुख्य मार्ग प्रदान कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मई 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा था कि यह समय की आवश्यकता है कि भारत को आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।

जापानी सरकार के अनुपूरक (सपलिमेंट्री) बजट ने उन व्यवसायों के लिए 22.1 करोड़ डॉलर की घोषणा की, जो चीन से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में अपने उत्पादन को स्थानांतरित करना चाहते हैं।

देश के निर्माता अब पायलट कार्यक्रमों और व्यवहार्यता अध्ययन के लिए सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। जापानी सरकार का कार्यक्रम किसी भी आपात स्थिति में चिकित्सा आपूर्ति और बिजली के घटकों जैसे उत्पादों की एक स्थिर आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना है।

वर्तमान में, जापानी कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला चीन पर बहुत निर्भर करती है। कोविड-19 महामारी के दौरान यह मुद्दा सामने आया, जब चीन से आपूर्ति में कटौती की गई।

अनुप्रयोगों के दूसरे दौर में, परियोजनाएं आसियान-जापान आपूर्ति श्रृंखला में योगदान देंगी, यह मानते हुए कि भारत और बांग्लादेश में पुनर्वास होगा। सुविधाओं के प्रायोगिक परिचय के साथ विकेंद्रीकृत विनिर्माण योजनाओं पर व्यवहार्यता अध्ययन भी किया गया है।

सब्सिडी का पहला दौर, जिसे जुलाई में घोषित किया गया था, उसमें जापान ने अपने उत्पादन स्थलों को दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थानांतरित करने वाली 30 कंपनियों को लगभग 10 अरब येन प्रदान किया। अन्य 57 फर्मो को जापान में विनिर्माण सुविधाओं को स्थानांतरित करने के लिए भी समर्थन मिल रहा है।

इस फैसले का चीन पर काफी बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है। चीन से बड़ी औद्योगिक इकाइयां बाहर निकलने से उसकी उत्पादन क्षमता पर असर पड़ेगा ही साथ ही कम्युनिस्ट देश में बेरोजगारी भी बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर नौकरियों का संकट खड़ा हो सकता है।

अमेरिका-चीन व्यापार तनाव पहले से ही चीन में लगभग 20 लाख औद्योगिक नौकरियों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। वहीं भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी गतिरोध के बीच भारत में भी चीन विरोधी भावनाएं चरम पर हैं। चूंकि चीन के भारत से भी बड़े व्यापारिक हित जुड़े हुए हैं, उसे यहां से भी कई व्यापारिक मामलों में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं, जो कि आने वाले समय में और भी बढ़ सकते हैं।

दीर्घकालिक से मध्यम अवधि के दौरान चीन के उत्पादकता पर एक बड़ा नकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है।

व्यापार

बोफा ने भारतीय शेयर बाजार पर बढ़ाया भरोसा, दिसंबर 2026 तक निफ्टी के 26,200 तक पहुंचने का लगाया अनुमान

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बोफा यानी बैंक ऑफ अमेरिका (बीओएफए) सिक्योरिटीज ने लगभग दो वर्षों तक सतर्क रुख अपनाने के बाद भारतीय शेयर बाजारों को लेकर अपना दृष्टिकोण सकारात्मक कर लिया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि निफ्टी दिसंबर 2026 तक 26,200 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 12 प्रतिशत की संभावित बढ़त को दर्शाता है।

अपनी नवीनतम रणनीति रिपोर्ट में बीओएफए ने कहा कि वह अगस्त 2024 से भारतीय शेयरों को लेकर सतर्क था और उसने आठ प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, जो बाजार में अस्थिरता बनाए रख सकते थे। हालांकि अब इन आठ में से पांच जोखिम या तो सामने आ चुके हैं या फिर बाजार पहले ही उन्हें अपने मूल्यांकन में शामिल कर चुका है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने अब भारतीय इक्विटी बाजारों पर अधिक सकारात्मक रुख अपनाया है।

बोफा के अनुसार, शेष तीन जोखिमों के कारण उसके नकारात्मक परिदृश्य में निफ्टी 50 में लगभग 7 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि उसके आधारभूत अनुमान में निफ्टी दिसंबर 2026 तक 26,200 के स्तर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बचे हुए जोखिम अक्टूबर 2026 तक अपने चरम पर पहुंच सकते हैं। इसके बाद नवंबर से बाजार में टिकाऊ सुधार की संभावना बन सकती है।

ब्रोकरेज फर्म ने पहले जिन प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, उनमें कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना भी शामिल था। ब्रोकरेज का चौथी तिमाही 2026 के लिए कच्चे तेल का अनुमान 81 डॉलर प्रति बैरल है। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले सात महीनों में कच्चे तेल की कीमतें सात बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से वापस नीचे आई हैं।

रुपया भी पहले चिंता का विषय था, हालांकि बीओएफए का कहना है कि हाल में आए लगभग 136 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह से भारतीय मुद्रा को समर्थन मिलना चाहिए और उसने रुपये को लेकर मजबूती का दृष्टिकोण बनाए रखा है।

कमजोर मानसून को भी जोखिमों में शामिल किया गया था। वर्तमान में वर्षा की कमी 13 प्रतिशत है, जो बीओएफए के पहले से अनुमानित 15 प्रतिशत के सबसे खराब परिदृश्य के काफी करीब है।

ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि एल्यूमीनियम और तांबे की कीमतों में अब अधिक तेजी की संभावना सीमित है। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर बीओएफए के अर्थशास्त्री का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दिसंबर 2026 तक नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि स्वैप बाजार फिलहाल करीब 45 आधार अंकों की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं।

बोफा ने जिन तीन प्रमुख जोखिमों को अभी भी बरकरार बताया है, उनमें पहला प्राथमिक बाजार में बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने की गतिविधियां हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर से दिसंबर के बीच लगभग 30 अरब डॉलर के नए इश्यू आ सकते हैं और अक्टूबर में इनकी रफ्तार सबसे अधिक रहने की संभावना है।

दूसरा जोखिम अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अपेक्षा से अधिक बढ़ोतरी का है। बीओएफए का अनुमान है कि फेड कुल 75 आधार अंक तक दरें बढ़ा सकता है, जबकि बाजार फिलहाल लगभग 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी को मूल्यांकन में शामिल कर रहे हैं।

तीसरा और दीर्घकालिक जोखिम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ा है। बीओएफए ने कहा कि एआई-आधारित बदलावों का भारत में रोजगार बाजार पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है और निवेशकों को इस विषय पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

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व्यापार

गणेश चतुर्थी पर 14 सितंबर को बंद रहेंगे शेयर बाजार, मंगलवार को फिर शुरू होगा कारोबार

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गणेश चतुर्थी के अवसर पर आज सोमवार, 14 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बीएसई और एनएसई, दोनों पर इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स और करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग बंद रहेगी। इसके बाद बाजार मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को फिर से खुलेगा।

शेयर बाजार अवकाश सूची के अनुसार, 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी पर्व के चलते बाजार में ट्रेडिंग नहीं होगी। इस दौरान इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, एनडीएस-आरएसटी और ट्राई-पार्टी रेपो से जुड़े लेनदेन भी स्थगित रहेंगे।

हालांकि, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) सेगमेंट में आंशिक कारोबार होगा। इन बाजारों में सुबह का सत्र बंद रहेगा और शाम 5:00 बजे के बाद ट्रेडिंग फिर शुरू होगी। यानी कमोडिटी बाजार सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बंद रहेगा।

सितंबर 2026 में शेयर बाजार के लिए केवल एक ही अवकाश निर्धारित है और वह 14 सितंबर (सोमवार) को गणेश चतुर्थी का अवकाश है।

गणेश चतुर्थी के बाद वर्ष 2026 में शेयर बाजार निम्नलिखित अवसरों पर बंद रहेंगे। इनमें 2 अक्टूबर (शुक्रवार) – महात्मा गांधी जयंती, 20 अक्टूबर (मंगलवार) – दशहरा, 10 नवंबर (मंगलवार) – दिवाली बलिप्रतिपदा, 24 नवंबर (मंगलवार) – प्रकाश गुरुपर्व श्री गुरु नानक देव और 25 दिसंबर (शुक्रवार) – क्रिसमस शामिल है।

अवकाश से पहले समाप्त हुए सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी 50 में 2 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज हुई और यह 23,398 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स करीब 2.27 प्रतिशत फिसलकर 74,781 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड बाजार पर दबाव के प्रमुख कारण रहे।

इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए इसी समय गणेश स्थापना और पूजा को सबसे शुभ माना जाता है।

इस प्रकार निवेशकों को अब अगले कारोबारी सत्र के लिए 15 सितंबर (मंगलवार) तक इंतजार करना होगा, जबकि कमोडिटी बाजार में शाम के सत्र में सीमित कारोबार जारी रहेगा।

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राष्ट्रीय समाचार

टेस्ला लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को अगली पीढ़ी की रोडस्टर को करेगी लॉन्च

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इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने घोषणा की कि कंपनी लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को रोडस्टर लॉन्च करेगी। टेस्ला रोडस्टर की पहली जनरेशन को करीब एक दशक पहले बाजार में उतारा गया था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टेस्ला ने एक पोस्ट में कहा, “गो फॉर लॉन्च”, साथ ही इसमें एक पोस्टर भी था, जिसमें इसकी तारीख एक अक्टूबर दी गई थी।

इस पोस्ट के रिप्लाई में मस्क ने कहा, “नई टेस्ला रोडस्टर 10.01 को लॉन्च की जाएगी।”

इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में अगस्त में दावा किया गया था कि टेस्ला नए डिजाइन वाली रोडस्टर को जल्द ही लॉन्च करने की योजना बना रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इवेंट में स्पेसएक्स के साथ मिलकर बनाए गए कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स वाले लिमिटेड-एडिशन वर्जन का डेमो दिखाया जा सकता है।

टेस्ला ने सबसे पहले 2017 में अगली पीढ़ी की रोडस्टर लाने का ऐलान किया था और कहा था कि इसकी डिलीवरी 2020 में शुरू हो जाएगी, लेकिन इस प्रोग्राम में बार-बार देरी हुई है।

यह कदम टेस्ला द्वारा पिछले हफ्ते ऑस्टिन, टेक्सास के कुछ इलाकों में अपनी दो-सीटर साइबरकैब में राइड्स की सुविधा शुरू करने के बाद उठाया गया है। इस साइबरकैब में न तो स्टीयरिंग व्हील है और न ही पैडल। मस्क ने इस गाड़ी को टेस्ला को ड्राइवरलेस गाड़ियों के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बनाने के लिए अहम बताया है।

खबरों के मुताबिक, नई रोडस्टर अब एक आम हाई-परफॉर्मेंस ईवी से बदलकर पूरी तरह से नई कार्बन-फाइबर हाइपरकार बन गई है।

नई रोडस्टर के लॉन्च से पहले टेस्ला के शेयर में तेजी देखी गई। बीते एक महीने में टेस्ला ने 7 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

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