राजनीति
सीएम योगी का मिशन विलेज: अब ग्लोबल होगा यूपी का शहद, महिलाएं लॉन्च करेंगी अपना ब्रांड
लखनऊ, 5 फरवरी : उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को नई ताकत देने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मधुमक्खी पालन कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से प्रदेश के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता भी बढ़ाएंगी।
योजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में एक लाख महिला मधुमक्खी पालक तैयार की जाएंगी। इसके तहत प्रत्येक महिला उद्यमी की आय में प्रति वर्ष एक लाख रुपए तक की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। मधुमक्खियों द्वारा परागण से गेहूं, सरसों, दलहन-तिलहन और बागवानी फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन विलेज के तहत अब यूपी का शहद वैश्विक पहचान बनाएगा। महिलाएं शहद का अपना ब्रांड विकसित करेंगी और शहद व अन्य उत्पादों के विपणन से प्रदेश के आर्थिक विकास में साझीदार बनेंगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिलाओं का आत्मनिर्भरता का सपना साकार होगा।
इस योजना के जरिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और उद्यमियों को बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि यूपी का शहद देश-दुनिया में गुणवत्ता और भरोसे की पहचान बने।
वहीं, उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की चाइनीज मांझे की वजह से होने वाली मृत्यु हत्या की तरह है। इस तरह के मामलों में संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके बावजूद इसकी उपलब्धता गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिस को प्रदेशव्यापी सघन छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान चाइनीज मांझे की बिक्री ही नहीं, बल्कि भंडारण व परिवहन पर भी कठोर नजर रखी जाएगी।
राजनीति
केजरीवाल के कार्यकाल में सरकार को भारी जीएसटी नुकसान, रिश्वत-वसूली के लिए नहीं की गई कार्रवाई: प्रवेश वर्मा

दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने कैग रिपोर्ट का मुद्दा उठाते हुए पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 24वीं कैग रिपोर्ट में साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई हैं। यह रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का लिखित दस्तावेज है।
मंत्री प्रवेश वर्मा ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “विधानसभा के मानसून सत्र में 24वीं कैग रिपोर्ट को पेश किया गया। कैग रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का लिखित दस्तावेज है। हम सभी जानते हैं कि केजरीवाल सरकार में कामों का ऑडिट नहीं होता था। भाजपा सरकार बनने के बाद डेढ़ साल में 24 कैग रिपोर्ट आ चुकी हैं। हर रिपोर्ट में सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार सामने आया है।”
उन्होंने दावा किया कि 24वीं कैग रिपोर्ट में साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई हैं। यह रिपोर्ट 31 मार्च 2023 की है।”
प्रवेश वर्मा ने कहा कि हर वित्त वर्ष में केजरीवाल सरकार ने क्या-क्या भ्रष्टाचार किए, इन सबके बारे में कैग रिपोर्ट के दस्तावेजों से जानकारी सामने आई है। कैग ने सबसे अहम बात यह कही कि 70,410 करोड़ रुपए का जीएसटी दिल्ली की जनता का बकाया था।
मंत्री ने कहा, “65 प्रतिशत राशि 5 साल से अधिक समय से दिल्ली सरकार वसूल नहीं करती थी। जिन उद्योगपतियों को पैसा देना होता था, उससे जीएसटी विभाग सांठगांठ करता था और उद्योगपतियों का बकाया सालों तक लंबित रहता था। बहुत सारे कारोबारी ऐसे थे, जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो चुका था। इसके बावजूद ईवे बिल बनाया जाता था। 8,334 करदाताओं का जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका था, वे ईवे बिल जनरेट करते रहे। 68,680 करोड़ रुपए के ईवे बिल जनरेट किए गए थे। इससे स्पष्ट है कि सरकार को बहुत भारी जीएसटी नुकसान हुआ है।”
प्रवेश वर्मा ने आगे कहा कि 4,076 लोग टैक्स फाइल नहीं करते थे, लेकिन उन्होंने भी 11,635 करोड़ रुपए के ईवे बिल जनरेट किए। उन्होंने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल, उनकी सरकार के जीएसटी विभाग और उनके मंत्रियों को यह सब पता था, लेकिन वे इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते थे। कार्रवाई इसलिए नहीं की गई, ताकि रिश्वत ली जाए और डरा-धमकाकर वसूली की जाए।
उन्होंने कहा कि टैक्स चोरी हो रहा था। इसके ऊपर पिछली सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। 6.10 करोड़ ईवे बिल जनरेट हुए, जिसमें सिर्फ 70 मामलों यानी महज लगभग 0.10 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई हुई। इसलिए यह बहुत गंभीर विषय है। सरकार के पास पूरे आंकड़े थे, फिर भी सिर्फ 70 मामलों में कार्रवाई हुई।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पश्चिमी कनाडा में तेजी से फैल रही जंगल की आग, 20,000 से ज्यादा लोगों को खाली करने पड़े घर

पश्चिमी कनाडा में जंगल की आग तेजी से फैल रही है। आग इतनी भयावह है कि यह ब्रिटिश कोलंबिया की ओकानागन झील के किनारे बसे शहरों की ओर बढ़ रही है और घरों और इमारतों को नष्ट कर रही है। इस वजह से 20,000 से ज्यादा लोगों को रात भर में अपने घर छोड़ने का आदेश दिया गया।
समरलैंड की पूरी कम्युनिटी को इलाके को खाली करने का आदेश दिया गया है। यहां लगभग 12,000 लोग रहते हैं। इसके साथ ही पीचलैंड और उसके आस-पास के लगभग 8,000 लोगों को भी इलाका खाली करने का आदेश दिया गया। अधिकारियों को अब तक यह पता नहीं लग पाया है कि इस आग में कितने घरों को नुकसान पहुंचा।
बाल्ड रेंज जंगल की आग की खबर सबसे पहले शुक्रवार शाम को मिली थी, लेकिन कुछ ही घंटों में यह लगभग 50 वर्ग किलोमीटर (19 वर्ग मील) तक फैल गई। फॉल्डर की छोटी कम्युनिटी भी इस भयावह आग की चपेट में आ गई है और समरलैंड तक लगभग 15 किलोमीटर (9 मील) के रास्ते तक फैली है।
ओकानागन-सिमिलकामीन क्षेत्रीय जिले के आपातकालीन अधिकारी एरिक थॉम्पसन ने इसे इस क्षेत्र की सबसे तेजी से फैलने और बढ़ने वाली जंगल की आग में से एक बताया। थॉम्पसन को इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर छोड़ना पड़ा और अपने परिवार को वहां से निकालना पड़ा। उन्होंने शनिवार सुबह अपनी गाड़ी से पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, “मुझे ईओसी छोड़कर अपने परिवार को इस इलाके से रेस्क्यू करने के लिए आना पड़ा। हम दक्षिण की ओर जा रहे हैं।”
कनाडा ने हाल के सालों में जंगल की आग के बढ़ते खतरनाक मौसम का सामना किया है। इसकी वजह से बड़े पैमाने पर लोगों को निकालना पड़ा और कनाडा तथा अमेरिका के बड़े हिस्सों में बार-बार धुआं फैल रहा है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में कई घर जलते हुए दिख रहे हैं, वहीं लोग दोनों तरफ आग की लपटों से खुद को बचाते हुए भाग रहे थे।
एक घर की मालिक केरी गोल्ड और उनके पति, माइक एल्सिंगा, पास के पहाड़ों से आगे आग की लपटें फैलते देखकर रात करीब 12:30 बजे भाग गए। उन्होंने कहा, “यह डरावना है। यह तेजी से बढ़ रहा है।”
राष्ट्रीय समाचार
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद : अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ी

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत रविवार सुबह बिगड़ गई। उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर मेडिकल टीम लगातार नजर रख रही है।
देवेंद्र महतो ने 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह किया था। इसके बाद 2 अगस्त से उनका आंदोलन स्थल पर अनशन शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि लगातार संघर्ष और थकान के कारण शरीर कमजोर पड़ रहा है, लेकिन छात्रों के अधिकार और न्याय की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “शरीर थक सकता है, लेकिन न्याय के लिए हमारा संकल्प नहीं।”
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने भी आंदोलनकारियों के समर्थन में रविवार सुबह से एक दिन का निर्जला उपवास शुरू किया है। उन्होंने देवेंद्र महतो के गिरते स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। जयराम महतो ने कहा कि छात्रों की मांगों पर सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
मौजूदा आंदोलन की शुरुआत 2 जुलाई को 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में कथित गड़बड़ी के विरोध से हुई थी। इसके बाद 5 जुलाई से छात्रों ने लगातार प्रदर्शन शुरू किया। 25 जुलाई से आंदोलन ने अनिश्चितकालीन दिवा-रात्रि सत्याग्रह का रूप ले लिया। रविवार को सत्याग्रह का 16वां दिन है।
आंदोलनकारी छात्र जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। साथ ही, परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए।
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों में चिंता देखी गई। हालांकि, आंदोलनकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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