राजनीति
भारत के कड़े रुख के बाद कनाडाई पीएम ने नरम किया अपना रुख
(180710) — RIGA, July 10, 2018 (Xinhua) — Canadian Prime Minister Justin Trudeau speaks during a joint press conference with Latvian Prime Minister Maris Kucinskis (not seen in picture) in Riga, Latvia, on July 10, 2018. Trudeau pledged sustained commitment to Latvia’s security during his visit to Riga on Tuesday, saying that Canada would extend its leadership of the NATO battalion stationed in the Baltic country for four more years. (Xinhua/Janis)
भारत के घरेलू मामलों में विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ नरेंद्र मोदी सरकार के कड़े रुख से कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को अपनी बयानबाजी और किसान आंदोलन को समर्थन देने से पीछे हटना पड़ा है।
पिछले हफ्ते, ट्रूडो ने भारत के किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया था, यह दावा करते हुए कि स्थिति चिंताजनक है।
टोरंटो में सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि ट्रूडो की टिप्पणी पर मोदी सरकार के नई दिल्ली में कनाडाई उच्चायुक्त को बुलाने और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के इस घोषणा के बाद कि वो कोविड-19 (एमसीजीसी) पर कनाडा के नेतृत्व वाले मंत्री समन्वय समूह को छोड़ देंगे, कनाडा के सरकारी हलकों में दहशत फैल गई।
भारत सरकार ने स्पष्ट संदेश भेजा था कि इस तरह के व्यवहार से द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित होगा क्योंकि यह ट्रूडो सरकार में पहले भी हो चुका है। भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार ट्रूडो के खालिस्तानी समर्थक ²ष्टिकोण के चलते 2017-18 से 2018-19 तक लगभग 1 बिलियन डॉलर कम हो गया।
भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2017-18 में 7.23 बिलियन डॉलर का था। इस अवधि में कनाडा को भारत का निर्यात 2.51 बिलियन डॉलर और कनाडा से आयात 4.72 बिलियन डॉलर था, जो कि 2018-19 में 6.3 बिलियन डॉलर का था।
कनाडाई निवेशक भारत को निवेश के लिए एक आकर्षक देश मानते हैं, विशेषकर कोरोनावायरस के बाद की अवधि में। 400 से अधिक कनाडाई कंपनियों की भारत में मौजूदगी है, और 1,000 से अधिक कंपनियां सक्रिय रूप से भारतीय बाजार में कारोबार कर रही हैं।
कनाडा दाल, अखबारी कागज, लकड़ी के गूदे, अभ्रक, पोटाश, लोहे के स्क्रैप, तांबा, खनिज और औद्योगिक रसायनों का निर्यात करता है और चाहता है कि भारत और अधिक आयात करे। सूत्रों ने कहा कि कनाडा के कारोबारी चाहते हैं कि उनकी सरकार भारत के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) और द्विपक्षीय निवेश संवर्धन और भागीदारी समझौते (बीआईपीपीए) पर हस्ताक्षर करे।
कनाडा में भारतीय उच्चायोग की कूटनीति के बाद, सूत्रों ने कहा कि ट्रूडो ने अब अपना रुख नरम कर लिया है। ट्रूडो ने कहा, कनाडा हमेशा दुनिया भर में कहीं भी शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के लिए खड़ा रहेगा और हम डी-एस्केलेशन और बातचीत की ओर कदम बढ़ते देख खुश हैं।
सूत्रों ने कहा कि ट्रूडो के किसान आंदोलन पर भारत के खिलाफ पहले की बयानबाजी उनकी राजनीतिक मजबूरियों से प्रेरित थी – वे अपने दूसरे कार्यकाल में अल्पसंख्यक सरकार चला रहे हैं और उन्हें सिख वोट बैंक की जरूरत है।
कनाडा में छह लाख सिख प्रवासी हैं, जिनको ट्रूडो की लिबरल पार्टी से लेकर सभी दल अपनी ओर खींचना चाहते हैं। कनाडा में सिखों का एक बड़ा वर्ग वैचारिक रूप से खालिस्तान आंदोलन का समर्थक रहा है। 1980 के दशक के दौरान पंजाब में एक हिंसक अलगाववादी सिख आतंकवादी आंदोलन, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित था। पंजाब में हजारों निर्दोष लोगों को खालिस्तानी आतंकवादियों ने मार डाला, जिसके बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पूरी तरह से बाहर निकाल दिया।
हालांकि, पंजाब में उग्रवाद का सफाया हो चुका है, पिछले पांच सालों में, पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई कनाडा, यूके और अन्य जगहों पर सिख प्रवासियों की मदद से आंदोलन को फिर से जीवित करने का प्रयास कर रही है।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु में धान और गन्ना उत्पादकों को बड़ी राहत, सरकार ने बढ़ाई प्रोत्साहन राशि

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को धान और गन्ना किसानों के लिए ज्यादा प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों का बेहतर दाम दिलाने की कोशिश कर रही है, जिसके तहत खरीद की प्रभावी कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।
विधानसभा में नियम 110 के तहत बयान देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सरकार फसलों के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा, अच्छी किस्म के धान के लिए 289 रुपए प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के धान के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त प्रोत्साहन देगी।
इस बदलाव के बाद अच्छी किस्म का धान बेचने वाले किसानों को 2,750 रुपए प्रति क्विंटल मिलेंगे, जबकि सामान्य किस्म के धान की खरीद कीमत बढ़कर 2,600 रुपए प्रति क्विंटल हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बढ़ी हुई सहायता का मकसद किसानों पर आर्थिक बोझ कम करना और उनकी उपज के लिए उन्हें अच्छी कीमत दिलाना है।
इस घोषणा से पूरे तमिलनाडु में धान उगाने वाले बड़ी संख्या में किसानों को फायदा होने की उम्मीद है, खासकर उन किसानों को जो अपनी फसल बेचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्भर हैं।
धान राज्य की मुख्य फसलों में से एक है और खरीद की कीमतों का खेती के मौसम के दौरान किसानों की कमाई पर काफी असर पड़ता है।
मुख्यमंत्री विजय ने राज्य की चीनी मिलों को अपनी उपज बेचने वाले गन्ना किसानों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन में भी काफी बढ़ोतरी की घोषणा की।
केंद्र सरकार अभी मिलों को बेचे जाने वाले गन्ने के लिए 3,290.50 रुपए प्रति टन देती है। तमिलनाडु सरकार 709.50 रुपए प्रति टन का अतिरिक्त प्रोत्साहन देगी, जिससे किसानों को मिलने वाली कुल रकम 4,000 रुपए प्रति टन हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार है जब तमिलनाडु में गन्ने की कुल खरीद कीमत 4,000 रुपए प्रति टन के स्तर पर पहुंची है। मुख्यमंत्री ने धान के लिए बदले हुए प्रोत्साहन को भी किसानों के लिए एक अहम कदम बताया और कहा कि सामान्य किस्म के धान के लिए प्रोत्साहन राशि 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाई गई है।
ये घोषणाएं ऐसे समय में की गई हैं जब किसान खेती के सामान, मजदूरी और खेती की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए खरीद की कीमतें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसान समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य भर में खेती को मजबूत करने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए उपाय करती रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान की संसदीय समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए सुरक्षा कार्य योजना को दी मंजूरी

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी की “सुरक्षा और टिकाऊ प्रगति सुनिश्चित करने” के लिए एक रणनीतिक कार्य योजना की रूपरेखा को मंजूरी दे दी है।
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने कमेटी के प्रवक्ता हसन कशकावी के हवाले से बताया कि इस प्लान पर कमेटी की बैठक में चर्चा हुई और इसे बिना किसी विरोध के मंजूरी दे दी गई।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कशकावी ने कहा कि प्लान के सामान्य ढांचे को मंजूरी देने से पहले सांसदों ने ईरान की संबंधित संस्थाओं से मिली जानकारियों की समीक्षा की।
आईआरएनए के अनुसार, यह कानून 13 जुलाई को औपचारिक रूप से संसद में पेश किया गया था।
ईरान ने 28 फरवरी को जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी और इजरायल और अमेरिका के जहाजों या उनसे जुड़े जहाजों के सुरक्षित गुजरने पर रोक लगा दी थी। यह कदम ईरानी क्षेत्र पर उनके संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था।
जून में ईरान और अमेरिका ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों पक्षों को अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के भीतर बातचीत करनी थी, लेकिन हाल ही में इलाके में तनाव बढ़ने से बातचीत का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
जुलाई में अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर कई बार हमले किए। उनका कहना था कि ये हमले जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में और “व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कम करने” के मकसद से किए गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।
ईरान और ओमान कुछ हफ्तों से जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही के लिए एक नया रास्ता तय करने के समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा था कि अभी अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री ने यह बात विदेश मंत्रालय के ‘सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
अरागची ने कहा, “अभी अमेरिका के साथ हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है। बातचीत फिर से शुरू करने के रास्ते खोजने के लिए मध्यस्थ अभी भी कोशिश कर रहे हैं। हमारे नजरिए से जब तक अमेरिका ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ का उल्लंघन बंद नहीं करता और अपने किए गए उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता, तब तक बातचीत फिर से शुरू नहीं हो सकती।”
महाराष्ट्र
मुंबईः ग्रुप डी की परीक्षा में मोबाइल के जरिए नकल करते 4 उम्मीदवार गिरफ्तार

मुंबई की पवई पुलिस ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा आईआईटी-बॉम्बे परिसर के केंद्रीय विद्यालय में आयोजित चपरासी भर्ती परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर कथित तौर पर नकल करने वाले 4 उम्मीदवारों को गिरफ्तार किया है।
पवई पुलिस ने अभ्यर्थियों के पास मिले मोबाइल को जब्त कर लिया है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के खिलाफ रविवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, आईआईटी पवई परिसर में सुबह 9 बजे से 10.30 बजे के बीच ग्रुप-डी मल्टी-टास्किंग स्टाफ भर्ती परीक्षा के लिए कुल 324 उम्मीदवारों को 14 कमरों में बैठाया गया था। प्रक्रिया की निगरानी के लिए 28 निरीक्षक तैनात थे, यानी हर कमरे में 2 निरीक्षक थे। हर कमरे में 24 उम्मीदवारों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। नकल रोकने के लिए हर कमरे में जैमर भी लगाए गए थे।
पवई पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने बताया कि उम्मीदवारों को चेकिंग के बाद ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया। कमरा नंबर 69 के एक निरीक्षक ने एक उम्मीदवार को संदिग्ध हरकतें करते देखा। उसकी तलाशी लेने पर पैंट की जेब से एक फोन मिला, जिसे जैमर को बायपास करने और परीक्षा के उत्तर साझा करने के लिए परिसर के बाहर किसी से संपर्क करने के लिए संशोधित किया गया था। आरोप है कि उम्मीदवार ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे रोक लिया गया।
इसी तरह कमरा नंबर 20, 62, 81 और 89 में भी मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए छात्र हुए पाए गए। यहां उम्मीदवारों के पास भी संशोधित डिवाइस पाए गए। परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने सभी उम्मीदवारों को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार उम्मीदवार हरियाणा के निवासी हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि अनिवार्य सुरक्षा जांच और हर कमरे में जैमर लगाए जाने के बावजूद उम्मीदवार परीक्षा केंद्र में उपकरण लाने में कैसे कामयाब रहे।
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