राजनीति
बुंदेलखंड को मिलेगा स्वच्छ जल, अन्ना समस्या हल होगी : योगी
कोरोना संकट के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को झांसी पहुंचे। यहां उन्होंने जल जीवन मिशन, उत्तर प्रदेश (हर-घर-जल) के अंतर्गत पहले चरण में बुंदेलखंड में 2185 करोड़ रुपये की 12 ग्रामीण पाइप पेयजल परियोजनाओं के निर्माण कार्यो का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि अन्ना प्रथा और जल की समस्या का सामधान होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड अब विकास और शुद्ध पेयजल से वंचित नहीं रहेगा। अब बुंदेलखंड की महिलाओं को घर पर ही इस योजना के तहत शुद्ध पेयजल मिल सकेगा। हमें बरसात के पानी के संरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से यहां विकास नहीं हुआ, खनन माफिया लोगों का शोषण करते रहे।
योगी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी बुंदेलखंड आए, उन्होंने एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर दिया। अब विकास भी होगा, रोजगार भी मिलेगा। पिछले डेढ़ साल से जो कवायद चल रही है। 2022 में हर घर जल का काम पूरा हो जाएगा। यह काम पहले होना चाहिए था, लेकिन नहीं हुआ। बुंदेलखंड को जल संजोना होगा। सबको शुद्घ पानी घर में ही मिलेगा। इसके अलावा अन्ना प्रथा का समाधान होगा।”
योगी ने कहा कि पेयजल के संकट से बुंदेलखंड को मुक्त करना है। घर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। एक-एक बूंद जल संरक्षण के लिए सबको आगे आना पड़ेगा। बुंदेलखंड में बरसात अच्छी हुई है। बड़े पैमाने में जलसंरक्षण किया जाना चाहिए। रेन हारवेटिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह जल हमारे लिए सोना उगलेगा। इस अभियान का हिस्सा बने। जल एक महत्वपूर्ण अभियान का हिस्सा होगा। बुंदेलखंड की लाइफ लाइन एक्सप्रेस-वे बनेगा। देश की सुरक्षा में आत्मनिर्भरता का केंद्र बिंदु बुंदेलखंड बनेगा। बहुत कार्य होना है, इसके लिए सबको आगे आना होगा।”
इसी अवसर पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि हर घर में पानी पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री ने ठाना है। उसको आगे बढ़ाने में उप्र के मुख्यमंत्री योगी लगे हुए हैं। यूपी के मुख्यमंत्री ने 2022 तक हर घर पीने का पानी पहुंचाने का संकल्प लिया है। इन्होंने सबसे दुरूह क्षेत्र बुंदेलखंड से इस योजना की शुरुआत की है, ताकि पीने का पानी हर व्यक्ति को 55 लीटर की दर से पहुंचे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह केवल पानी पहुंचाने का लक्ष्य नहीं है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि गांव के पानी के प्रबंधन की व्यवस्था गांव के लोग ही करें। इसमें महिलाएं आगे आएं। परस्पर जनसहभागिता के माध्यम से इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।”
उन्होंने कहा, “घर से निकले गंदे पानी को साफ करके फिर से उपयोग में लाएं। इसका उपयोग खेती और बागवानी में उपयोग कर सकते हैं। जल के आंदोलन को जन-जन का आंदोलन बनाना होगा, जिससे हमारी पीढ़ी समृद्ध हो सके।”
कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी शामिल हुए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन स्वदेश रवाना

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद स्वदेश रवाना हो गए। दो दिन तक चले शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की और न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन को मंजूरी दी।
पुतिन दो दिन के समिट से पहले शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे थे। इस समिट को भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। इस समिट में ब्रिक्स के सदस्य देशों और पार्टनर देशों के नेता भारत में इकट्ठा हुए।
अपनी यात्रा के दौरान, पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग मुख्य एजेंडा में शामिल थे।
पुतिन ने पिछली बार दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था, लेकिन दोनों नेता इस महीने की शुरुआत में किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में मिले थे।
पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अन्य नेताओं के साथ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया। इस सम्मेलन के बाद एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया गया, जिसमें मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए कूटनीति और बातचीत पर जोर दिया गया।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल पश्चिमी ताकतों की तथाकथित “औपनिवेशिक मानसिकता” की आलोचना करने के लिए किया और उन पर एक अधिक बहुध्रुवीय दुनिया के उदय का विरोध करने का आरोप लगाया।
उन्होंने एक-धुव्रीय व्यवस्था का विरोध किया। उनके मुताबिक ये व्यवस्था एक समूह तक सिमट कर रह जाती है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक-ध्रुवीय व्यवस्था, जो देशों के एक छोटे समूह के हितों को साधती थी, अब अतीत की बात होती जा रही है। शक्ति का संतुलन अब ग्लोबल साउथ और पूर्व के नए विकास केंद्रों के पक्ष में बदल रहा है। ज्यादा से ज्यादा देश अब खुलकर अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और वैश्विक समस्याओं को सुलझाने में योगदान देने के लिए अपनी मुस्तैदी जाहिर कर रहे हैं।”
पुतिन के अनुसार, “मल्टी-पोलर दुनिया का बनना चुनौतियों से खाली नहीं है। इसका विरोध उन लोगों की ओर से होता है जिनकी सोच की जड़ें औपनिवेशिक मानसिकता में हैं। जो दुनिया को एक लहलहाते बाग और जंगल में बांटकर देखते हैं, और दूसरों की मेहनत पर जीने के आदी हैं। वे बदलते सच को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और सिर उठाते प्रतिद्वंदी को रोकने की हर संभव कोशिश करते हैं।”
राष्ट्रीय समाचार
टेस्ला लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को अगली पीढ़ी की रोडस्टर को करेगी लॉन्च

इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने घोषणा की कि कंपनी लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को रोडस्टर लॉन्च करेगी। टेस्ला रोडस्टर की पहली जनरेशन को करीब एक दशक पहले बाजार में उतारा गया था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टेस्ला ने एक पोस्ट में कहा, “गो फॉर लॉन्च”, साथ ही इसमें एक पोस्टर भी था, जिसमें इसकी तारीख एक अक्टूबर दी गई थी।
इस पोस्ट के रिप्लाई में मस्क ने कहा, “नई टेस्ला रोडस्टर 10.01 को लॉन्च की जाएगी।”
इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में अगस्त में दावा किया गया था कि टेस्ला नए डिजाइन वाली रोडस्टर को जल्द ही लॉन्च करने की योजना बना रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इवेंट में स्पेसएक्स के साथ मिलकर बनाए गए कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स वाले लिमिटेड-एडिशन वर्जन का डेमो दिखाया जा सकता है।
टेस्ला ने सबसे पहले 2017 में अगली पीढ़ी की रोडस्टर लाने का ऐलान किया था और कहा था कि इसकी डिलीवरी 2020 में शुरू हो जाएगी, लेकिन इस प्रोग्राम में बार-बार देरी हुई है।
यह कदम टेस्ला द्वारा पिछले हफ्ते ऑस्टिन, टेक्सास के कुछ इलाकों में अपनी दो-सीटर साइबरकैब में राइड्स की सुविधा शुरू करने के बाद उठाया गया है। इस साइबरकैब में न तो स्टीयरिंग व्हील है और न ही पैडल। मस्क ने इस गाड़ी को टेस्ला को ड्राइवरलेस गाड़ियों के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बनाने के लिए अहम बताया है।
खबरों के मुताबिक, नई रोडस्टर अब एक आम हाई-परफॉर्मेंस ईवी से बदलकर पूरी तरह से नई कार्बन-फाइबर हाइपरकार बन गई है।
नई रोडस्टर के लॉन्च से पहले टेस्ला के शेयर में तेजी देखी गई। बीते एक महीने में टेस्ला ने 7 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।
राष्ट्रीय समाचार
आंध्र प्रदेश: भारी बारिश और बिजली गिरने से दो लोगों की मौत, मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह

आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। शनिवार रात से ही कम दबाव वाले क्षेत्र के असर से राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है।
अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पलनाडू जिले के नरसरावपेट में तूफान के साथ जोरदार बारिश हुई। इस दौरान पेटलुरिवरिपालेम और लक्ष्मीपुरम गांवों में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई। मरने वालों की पहचान नागाम्मा (63) और मेकाला वेंकयम्मा (60) के तौर पर हुई है। माना जा रहा है कि दोनों की मौत कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) से हुई।
पूर्वी गोदावरी, विशाखापत्तनम और गजुवाका इलाकों में जोरदार बारिश हुई। निदादावोलु में बस स्टैंड पानी से भर जाने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एपीएसडीएमए) के अनुसार, विदर्भ और मध्य प्रदेश क्षेत्रों के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार सुबह एक बुलेटिन में कहा कि इसके अगले 24 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की संभावना है और इससे राज्य के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।
उत्तरी आंध्र तट पर 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। एलुरु, एनटीआर, कृष्णा, नंद्याल और कुरनूल जिलों के कुछ इलाकों में बिजली कड़कने के साथ बारिश होने की संभावना है।
एपीएसडीएमए के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने लोगों को सलाह दी है कि वे बिजली कड़कने और तेज़ हवाएं चलने के दौरान पेड़ों या होर्डिंग्स के नीचे न खड़े हों। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि वे उफान पर बह रही नदियों या नहरों को पार करने की कोशिश न करें। राज्य की गृह मंत्री वंगलापुडी अनीता ने बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए लोगों और अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि लोगों को उफान पर बह रही नदियों या नहरों को पार करने से बचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से जोखिम वाले इलाकों में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने को भी कहा।
गृह मंत्री ने पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में मौजूद रहने का निर्देश दिया। राज्य में इस साल बारिश में लगभग 60 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी का जोर है और कई जगहों पर दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। आंध्र प्रदेश जल संसाधन सूचना और प्रबंधन प्रणाली (एपीडब्ल्यूआरआईएमएस) के अनुसार, 1 जनवरी से 9 सितंबर के बीच राज्य में 578.58 एमएम की सामान्य बारिश के मुकाबले 236.51 एमएम बारिश हुई, जो 59.12 प्रतिशत कम है।
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