राष्ट्रीय समाचार
बजट 2024: भारत में नवाचार के सद्गुण चक्र को उन्मुक्त करना।
बजट 2024, अन्य महत्वपूर्ण घोषणाओं के बीच, अनुसंधान और विकास (आर एंड डी), नवाचार और विकास के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को उजागर करता है। जैसा कि ज्ञात है, पिछले बजट ने राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के माध्यम से 2000 करोड़ रुपये प्रदान करके बुनियादी और अकादमिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग को काफी हद तक बढ़ावा दिया था। इस वर्ष, एक और महत्वाकांक्षी घोषणा का उद्देश्य जोखिम भरे प्रयासों के लिए धैर्यपूर्ण पूंजी उधार देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का कोष बनाकर उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की नवाचार गतिविधियों का समर्थन करना है। यद्यपि ये कदम निजी क्षेत्र को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सही दिशा में हैं, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की समग्र समझ इसे बेहतर बनाने के लिए संकेत प्रदान करेगी।
उदाहरण के लिए, एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि पिछले कुछ समय से ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की स्थिति स्थिर क्यों है? भारत ने 2023 में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) में अपना स्थान 40 पर बरकरार रखा। यह अपने आय समूह में लगातार 13वें वर्ष इनोवेशन ओवरपरफॉर्मर बनकर रिकॉर्ड धारक बना हुआ है। इसे समझने के लिए, किसी को यह समझना होगा कि नवाचार की पीढ़ी और प्रसार दो अलग-अलग लेकिन परस्पर जुड़ी हुई नवाचार प्रक्रियाएं हैं। भारतीय संदर्भ में दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट है, जिसके लिए नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, जीआईआई के विभिन्न उप-सूचकांकों में से, भारतीय रैंक में सबसे अधिक अंतर मानव पूंजी और अनुसंधान में उभरता है। यह उप-सूचकांक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में किए गए इनपुट को दर्शाता है। प्रतिशत के लिहाज से विज्ञान और इंजीनियरिंग में स्नातक भारत की ताकत हैं, हालांकि प्रति मिलियन जनसंख्या पर शोधकर्ता इसकी कमजोरी हैं। यह स्थिति इस बात पर प्रकाश डालती है कि अधिकांश विज्ञान और इंजीनियरिंग स्नातक अनुसंधान को एक आकर्षक करियर संभावना नहीं मानते हैं। 2018-19 से, प्रधान मंत्री अनुसंधान अध्येता (पीएमआरएफ) जैसी योजनाओं ने अनुसंधान में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित किया है। देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान की मात्रा बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता में सुधार करने के लिए विभिन्न स्तरों पर ऐसी और अधिक योजनाओं की बहुत आवश्यकता है उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI) और शोध प्रयोगशालाओं के बीच क्रॉस-लिंकेज में सुधार करना एक आसान काम हो सकता है, जिससे नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के बोझ को बढ़ाए बिना शोधकर्ताओं की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए संयुक्त शोध परियोजनाओं और शोध प्रयोगशालाओं और HEI के बीच गतिशीलता के लिए रास्ते बनाने को प्रोत्साहित किया जा सकता है। सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी इनोवेशन एंड इकोनॉमिक रिसर्च (CTIER)* द्वारा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) को सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधान एवं विकास संगठनों पर एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तरह के सहयोग से सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधान संगठनों की दक्षता बढ़ेगी।
इसी उपसूचकांक में, स्कूली जीवन प्रत्याशा में भारत का प्रदर्शन खराब है, जो बच्चों के लिए शिक्षा में अधिक वर्ष बिताने की कम संभावना और शिक्षा प्रणाली के भीतर समग्र अवधारण में कमी का संकेत देता है। इसके अलावा, कम प्रतिधारण को छात्र-शिक्षक अनुपात पर निराशाजनक प्रदर्शन के साथ जोड़ना प्राथमिक कारण को दर्शाता है कि छात्र स्कूल नहीं जाते हैं क्योंकि वहां शिक्षक नहीं हैं। शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की तत्काल आवश्यकता है, विशेष रूप से स्कूली शिक्षा में नवाचार जो भारत की अगली पीढ़ी को तैयार करने में मदद करेगा और लाखों प्रतिभाशाली दिमागों को राष्ट्रीय और वैश्विक समस्याओं के शानदार समाधान प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
नवाचार के लिए बुनियादी ढांचे के संबंध में, भारत में ऑनलाइन सेवाओं में आय समूह की ताकत है, जिसका अर्थ है कि निम्न-मध्यम आय समूह के देशों में, भारत सरकार सेवाएं प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल बुनियादी ढांचे का उपयोग कर रही है। ऐसी अधिकांश सेवाओं के बावजूद, जो समाज के निचले तबके को मदद करती हैं, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) तक पहुंच और उपयोग न्यूनतम है। दरअसल, इस उपसूचकांक में देश की ये दो बड़ी कमजोरियां हैं। आईसीटी एक्सेस इंडेक्स में मोबाइल नेटवर्क द्वारा कवर की गई आबादी का प्रतिशत, प्रति 100 निवासियों पर मोबाइल सेलुलर टेलीफोन सब्सक्रिप्शन, प्रति इंटरनेट उपयोगकर्ता अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ (बिट/एस) और इंटरनेट एक्सेस वाले घरों का प्रतिशत शामिल है। इनमें से अधिकांश बिंदुओं में राज्य द्वारा डिजिटल बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश शामिल है।
इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि आईसीटी के इस्तेमाल में कमी आई है। आधुनिक तकनीक के बारे में लाखों लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए हाल की तकनीकों के लिए शिक्षा की ज़रूरत है। यह कमज़ोरी सीमित शिक्षा और आबादी पर इसके असर के बारे में पहले बताए गए बिंदु से भी मेल खाती है। दोनों ही बातें एक साथ चलती हैं क्योंकि शिक्षित आबादी सूचना तक पहुँचने और विभिन्न योजनाओं से लाभ उठाने के लिए आईसीटी का इस्तेमाल करेगी। शिक्षा में कम निवेश और प्रदर्शन और आईसीटी के इस्तेमाल की कमी के बीच संबंध समाज के हर वर्ग तक तकनीक के कम प्रसार से भी जुड़ा है। यह कमज़ोरी भविष्य में एक और ज़्यादा गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है जहाँ शिक्षा में अंतर डिजिटल विभाजन की ओर ले जाता है, जिससे बहुसंख्यक विकास प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। नए विचारों के निर्माण और उनके प्रसार के बीच संबंध का लूपबैक प्रभाव होता है। अगर भारत अपनी युवा क्षमता को नवाचार गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना चाहता है जो समाज की बेहतरी के लिए नए उत्पादों में तब्दील हो जाएँ, तो एक बार फिर स्कूली शिक्षा और इसकी गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
इस प्रकार, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए अगले दशक का एजेंडा स्पष्ट है, जैसा कि शिक्षा में निवेश है। इस तरह के निवेश से आत्मनिर्भर भारत के लिए नए उत्पादों में तब्दील नए विचारों की एक सतत और कुशल धारा उत्पन्न होगी। साथ ही, यह कदम ऐसी नई तकनीकों का आम जनता तक प्रसार सुनिश्चित कर सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
ओडिशा में अगले 48 घंटे बेहद भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल राहत

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान बेहद भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, पश्चिम बंगाल और हिमालयी इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने के अनुमान हैं।
दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के लोगों को फिलहाल भारी बारिश से राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले दो से तीन दिनों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की उम्मीद है और इस दौरान भारी बारिश की संभावनाएं नहीं है।
आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने बातचीत में देश में मौजूदा मौसम की स्थिति को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस समय ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। खास तौर पर ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जिसे देखते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी भारत के अलावा हिमालयी क्षेत्रों में भी आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
डॉ. नरेश कुमार ने विशेष रूप से उत्तराखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालयी इलाकों में अगले छह से सात दिनों तक अत्यधिक बारिश होने की संभावना है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में लंबे समय तक भारी बारिश होने से भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़क संपर्क प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।
वहीं, दिल्ली-एनसीआर के लिए फिलहाल स्थिति अपेक्षाकृत राहत भरी रहने की उम्मीद है। डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अगले दो से तीन दिनों तक भारी बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में दिल्ली और आसपास के इलाकों में मौसम ज्यादातर शुष्क रहने का अनुमान है।
डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान है।
पश्चिम बंगाल में भी मौसम की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आईएमडी ने राज्य के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण राज्य के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
अलीपुर मौसम विभाग के मौसम विज्ञानी सौरिश बंद्योपाध्याय ने बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और इसके प्रभाव से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि रविवार को बहुत ज्यादा बारिश होने की चेतावनी दी गई है।
राष्ट्रीय समाचार
लाल किला ब्लास्ट केसः एनआईए की चार्जशीट पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, 9 सितंबर को अगली सुनवाई

दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में जांच अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। कोर्ट के इस कदम के बाद मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।
एनआईए ने अपनी जांच के आधार पर कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में उमर उन नबी (मृतक), आमिर राशिद अली, जासिर बिलाल वानी, मुजम्मिल, आदिल अहमद राथर, मुफ्ती इरफान अहमद, शाहीन, सोयाब, बिलाल और यासिर अहमद डार समेत 13 आरोपी शामिल हैं। एजेंसी ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और जुटाए गए सबूतों के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण चार्जशीट में दर्ज किया है।
जांच के मुताबिक, उमर-उन-नबी की ब्लास्ट में मौत हो चुकी है, जबकि मामले से जुड़ा एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। एनआईए ने इस पूरे मामले की जांच दिल्ली तक सीमित नहीं रखी। एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों और इलाकों में जांच की। इस दौरान आरोपियों के संभावित संपर्कों और कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की गई।
जांच के दौरान 588 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त किए गए सामान को भी केस का हिस्सा बनाया गया है। इन सबूतों के आधार पर एनआईए ने ब्लास्ट से जुड़े घटनाक्रम, आरोपियों की कथित भूमिका और उनके बीच संभावित संपर्क को अदालत के सामने रखा है।
इससे पहले अदालत ने अहलमद को मुख्य और सप्लीमेंट्री चार्जशीट की जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। मौजूदा अदालत ने उसी आदेश का पालन करने को कहा है। साथ ही विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया है कि वह एक संक्षिप्त सारणी तैयार करें, जिसमें हर आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों का जिक्र हो, ताकि अदालत को चार्जशीट पर संज्ञान लेने में आसानी हो।
अदालत ने यह भी नोट किया कि उकाशा, फैजल, आशिम और उस्मान के खिलाफ आगे की जांच लंबित है। एनआईए को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है कि इस लंबित जांच के बावजूद मामले में आगे की कार्यवाही की जा सकती है या नहीं।
राष्ट्रीय समाचार
बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा।
आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।
बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।
आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं।
अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।
आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।
वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।
इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।
हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।
साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।
टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।
इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें।
इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।
जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।
-
दुर्घटना12 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
