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Thursday,24-September-2026
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महाराष्ट्र विधानसभा में तीन तलाक़ और समान नागरिक संहिता को लेकर हंगामा, सना मलिक ने क़ुरान और शरिया लागू करने की मांग की।

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मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा में उस समय हंगामा हो गया जब तीन तलाक और यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर बहस चल रही थी। इस दौरान एनसीपी अजित पवार ग्रुप की नेता और विधायक सना मलिक ने गुस्से में कहा कि एक से ज़्यादा शादी सिर्फ मुसलमानों में ही नहीं, दूसरे धर्मों में भी आम है। सिर्फ मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है। इस पर बीजेपी ने हंगामा करते हुए कहा कि देश संविधान से चलेगा, कुरान या शरिया से नहीं।

विधानसभा के मॉनसून सेशन के दूसरे दिन ‘तीन तलाक’, एक से ज़्यादा शादी और ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (यूसीसी) जैसे बहुत सेंसिटिव मुद्दों पर सत्ताधारी और विपक्षी विधायक आपस में भिड़ गए। बीजेपी विधायक देवयानी फ्रांडे ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का सवाल उठाया तो एनसीपी (अजित पवार ग्रुप) विधायक सना मलिक ने गुस्से में रुख अपनाया। देवयानी ने यहां यूसीसी लागू करने की मांग की। ध्यानाकर्षण नोटिस

बीजेपी विधायक देवयानी ने तीन तलाक का मुद्दा उठाया। “तीन तलाक और एक से ज़्यादा शादी की वजह से मुस्लिम महिलाओं के साथ बहुत नाइंसाफ़ी हो रही है। सिर्फ़ पाकिस्तान में एक से ज़्यादा शादी की प्रथा है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। राज्य सरकार यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड कब लागू करेगी?” यह सवाल पूछे जाने पर गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने यूसीसी के लिए कमेटी बनाने की जानकारी दी और कहा कि इस पर सरकार का रुख़ साफ़ है, राज्य सरकार यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू करने पर पॉज़िटिव तरीके से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने एक कानूनी ड्राफ़्ट भी तैयार किया है और एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का फ़ैसला किया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद यूसीसी को लागू करने के लिए कदम उठाए जाएँगे। यूसीसी लागू होने के बाद, यह देश के हर नागरिक पर एक जैसा लागू होगा। इसलिए, एक से ज़्यादा शादी और ज़्यादा शादियों पर रोक लगेगी।

एक मुसलमान कुरान और सुन्नत को मानता है और शरिया से बंधा होता है।

विधायक सना मलिक ने बहस में हिस्सा लेते हुए आक्रामक रुख अपनाया और कहा कि मुसलमान कुरान, सुन्नत और शरिया को मानते हैं और बीजेपी को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी और उसके सदस्य कहते हैं कि पाकिस्तान में फलां कानून लागू है, तो पाकिस्तान कुछ अनोखा नहीं कर रहा है। वह कुरान और हदीस को मानता है। वह सिर्फ कुरान की शिक्षाओं को लागू करता है। इसलिए, मैं मांग करती हूं कि यहां भी कुरान की शिक्षाओं का पालन किया जाए। क्या सिर्फ मुस्लिम पुरुष ही एक से ज़्यादा शादी करते हैं? दूसरे धर्मों में भी एक से ज़्यादा शादी होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि सिर्फ मुस्लिम धर्म में ही एक से ज़्यादा शादी के लिए एक जैसे नियम और कानून हैं। सना मलिक ने कहा, “तलाक हसन और ‘तलाक अहसन’ वो टाइप हैं जिन्हें हम फॉलो करते हैं। लेकिन ‘तलाक बिदअत’ अपने आप में एक अलग कल्चरल प्रैक्टिस है, कुरान में इसका कहीं ज़िक्र नहीं है। इसीलिए यह इंडिया में नहीं था, इसलिए सरकार ने इसे खत्म कर दिया। जिस पर मुसलमानों को कोई एतराज़ नहीं है क्योंकि मुसलमान तलाक बिदअत में यकीन नहीं करते।” कुरान को लागू करने पर सना मलिक के बयान पर बीजेपी मेंबर भड़क गए और कई मेंबर ने इस पर एतराज़ भी जताया। कई मेंबर ने सना मलिक से कहा, “हमें कुरान पर लेक्चर मत दो। यह देश कुरान से नहीं बल्कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान से चलेगा।” इस बीच, जब हाउस में सना मलिक का विरोध हुआ और बीजेपी ने उनके इस गुस्से पर हंगामा किया, तो नेशनलिस्ट कांग्रेस (शरद पवार ग्रुप) के स्टेट प्रेसिडेंट जयंत पाटिल ने सना के स्टैंड का सपोर्ट किया और कहा कि हाउस की परंपरा है कि अगर कोई अपनी राय रखता है, तो उसे बोलने की आज़ादी मिलनी चाहिए। सना मलिक की सलाह पसंद आए या न आए, उनकी भाषा बिल्कुल भी सही नहीं है। मैं सना मलिक के स्टैंड का सपोर्ट करता हूं।

मॉनसून सेशन में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (यूसीसी) और ‘ट्रिपल तलाक’ के मुद्दे पर रूलिंग ग्रैंड अलायंस के बीच आइडियोलॉजिकल टकराव और असहमति सामने आई है। एक तरफ बीजेपी और शिंदे ग्रुप हिंदुत्व और संविधान का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम विधायक सना मलिक शरिया और इस्लाम को लेकर हाउस में बोल्डनेस दिखा रही हैं और मुस्लिम मुद्दों पर बीजेपी को पूरी ताकत से जवाब दिया है। टकराव के और तीखे होने का चांस अब साफ हो गया है। दूसरी तरफ, यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को एड्रेस करते हुए नीतीश राणे ने भी मुसलमानों के खिलाफ जहर उगला और कहा कि यह देश डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान पर चलेगा। उन्होंने कहा कि जब हाउस में इस मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, तो ऐसा लग रहा था जैसे हम कराची या पाकिस्तान के हाउस में बैठे हों। उन्होंने कहा कि यह हिंदुत्व की सरकार है। जब उनसे पूछा गया कि महायोति की विधायक सना मलिक ने सदन में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड और मुस्लिम महिलाओं से जुड़े सवाल पर आपत्ति जताई और कहा कि महाराष्ट्र में सिर्फ़ मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं, तो नीतीश राणे ने कहा कि जो भी हिंदुत्व का मुद्दा उठाएगा, हम उसका साथ देंगे।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र यूसीसी कमेटी से पूर्व जज के इस्तीफे पर जयराम रमेश बोले-‘हर राज्य का अलग यूसीसी संविधान की भावना के खिलाफ’

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महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि इस इस्तीफे ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और समिति के कामकाज पर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें हर राज्य अपना अलग-अलग समान नागरिक संहिता बनाए? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। क्या डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा था कि एक राजनीतिक दल की राजनीतिक चालों के हिसाब से राज्य अलग-अलग यूसीसी बनाने की होड़ करेंगे? इसका जवाब भी नहीं है।

कांग्रेस नेता ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 17 जून 2016 को मोदी सरकार ने ही यूसीसी के सवाल को विस्तृत अध्ययन के लिए विधि आयोग के पास भेजा था। आयोग ने व्यापक रिसर्च के बाद 31 अगस्त 2018 को अपना कंसल्टेशन पेपर प्रकाशित किया था। इसके पेज 7 के पैराग्राफ 1.15 में स्पष्ट कहा गया था कि “इस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।” आयोग ने अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी।

रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने उसी आयोग की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया, जिसे उसने खुद जिम्मा सौंपा था क्योंकि तथ्य उसके राजनीतिक एजेंडे से मेल नहीं खाते थे। पिछले तीन वर्षों में भाजपा शासित राज्यों ने यूसीसी के अपने-अपने वर्जन जबरन पारित कराए हैं। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू हो गया जबकि गुजरात में 24 मार्च 2026, असम में 27 मई 2026 और मध्य प्रदेश में 21 जुलाई 2026 को विधानसभा में विधेयक पारित किया गया।

उन्होंने कहा कि ये राज्यस्तरीय यूसीसी एक जैसे भी नहीं हैं। इनमें अलग-अलग प्रावधान, अलग-अलग दंड और कई छूट हैं। उत्तराखंड का यूसीसी कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को आज भी जारी रखे हुए है और कानून का पालन करने वाले निवासियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहा है।

जयराम रमेश ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। एनडीए के बाकी दलों की आवाज को दबा दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार, मोदी सरकार के लिए यूसीसी कोई कानूनी सुधार नहीं बल्कि विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का औजार है, जो समाज को स्थायी ध्रुवीकरण में बनाए रखने का साधन है।

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महाराष्ट्र

मुंबई : लालबाग में करंट लगने से बच्ची समेत दो की मौत मामले में एफआईआर दर्ज

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मुंबई के लालबाग इलाके में रविवार देर रात 2 बजे बड़ा हादसा हो गया। गणपति पंडाल के बाहर करंट लगने से 8 साल की बच्ची समेत 2 लोगों की मौत हो गई जबकि 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

यह घटना लालबाग के कालाचौकी क्षेत्र में दत्ताराम लाड मार्ग पर हुई। पुलिस के अनुसार, आस्था हॉस्पिटल के पास लगे पेप्सी-कोला स्टॉल के एक खुले तार से करंट फैल गया। यह हादसा कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के पास हुआ, जहां गणपति उत्सव के दौरान भारी भीड़ जमा थी। इसी बीच अचानक करंट फैलने से वहां अफरा-तफरी मच गई।

कालाचौकी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, यह घटना शनिवार-रविवार दरमियानी रात 2 बजे हुई। खुले तार के संपर्क में आने से 8 साल की बच्ची रागिनी और उसके पास खड़े अन्य लोग करंट की चपेट में आ गए। बच्ची को मसीना हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, 33 साल की सुजाता थोराटी नामक महिला की ग्लोबल हॉस्पिटल में मौत हो गई। हादसे में घायल हुए 4 अन्य लोगों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

पुलिस ने स्टॉल संचालक कमल शेट्टी के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 125(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की है और जांच शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि गणपति उत्सव के कारण लालबाग इलाके में देर रात भी लोगों की काफी भीड़ थी। पंडाल के बाहर लगे स्टॉल में बिजली के तारों में लापरवाही बरती गई थी, जिसके चलते यह दर्दनाक हादसा हुआ।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि बिजली कनेक्शन में किस तरह की लापरवाही हुई थी।

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महाराष्ट्र

बीएमसी ने गणपति विसर्जन के लिए 383 से ज़्यादा कृत्रिम झीलें उपलब्ध कराई हैं।

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मुंबई मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) एडमिनिस्ट्रेशन महाराष्ट्र के सरकारी त्योहार गणेश उत्सव को इको-फ्रेंडली तरीके से मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें विसर्जन जुलूस के लिए कई तरह की सुविधाएं और इंतज़ाम शामिल हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, बीएमसी ने इस साल छह फीट ऊंची मूर्तियों के विसर्जन के लिए 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल झीलें बनाई हैं। इसके अलावा, छह फीट से ज़्यादा ऊंची मूर्तियों के विसर्जन के लिए 67 नेचुरल जगहों पर कई तरह की सुविधाएं दी गई हैं। आम लोगों के बीच पर्यावरण बचाने का मैसेज फैलाने के मकसद से, इस साल ‘एक गणपति, एक पेड़’ पहल शुरू की गई है, जिसका आइडिया मेयर रितु तावड़े ने दिया था। बीएमसी ने मुंबई में विसर्जित की जाने वाली कुल गणेश मूर्तियों के बराबर पेड़ लगाने का वादा किया है। ‘एक गणपति, एक पेड़’ के कॉन्सेप्ट के तहत, भगवान गणेश के आने से लेकर विसर्जन तक का त्योहार पर्यावरण बचाने की कोशिशों के साथ जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, मूर्ति विसर्जन सेरेमनी को आसानी से चलाने के लिए 25,000 से ज़्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरी व्यवस्था की गई है। इस साल, गणेश उत्सव 14 सितंबर, 2026 को शुरू हुआ। मुंबई की मेयर रितु तावड़े, डिप्टी मेयर संजय घाडी, म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े और एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (ईस्टर्न सबर्ब्स) डॉ. अविनाश ढाकने की गाइडेंस में, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने पूरे मुंबई में, और खासकर विसर्जन वाली जगहों पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। विसर्जन के रास्तों से रुकावटें हटाने, सड़कों पर गड्ढों और नाली के ढक्कनों को ठीक करने और पेड़ों की डालियों को काटने जैसे काम पूरे हो चुके हैं। समुद्र के किनारों और नेचुरल और आर्टिफिशियल विसर्जन वाली जगहों पर स्टील प्लेट, राफ्ट, क्रेन, एम्बुलेंस, लाइफगार्ड, ‘निर्मलिया’ (पूजा के बाद बचे फूल और दूसरी चीजें) कलेक्शन बॉक्स, कंट्रोल रूम, ऑब्जर्वेशन टावर, लाइटिंग का इंतज़ाम, टेम्पररी टॉयलेट और ज़रूरी मैनपावर जैसी कई सुविधाएं और सर्विस दी गई हैं।

एक गणपति; एक पेड़
गणपति भक्ति, आस्था और सामाजिक मेलजोल का त्योहार है। इस त्योहार के ज़रिए लोगों तक पर्यावरण बचाने का मैसेज पहुँचाने के मकसद से, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने इस साल जितनी गणेश मूर्तियाँ विसर्जित की जाएँगी, उतने ही पेड़ लगाने का वादा किया है। ‘एक गणपति – एक पेड़’ पहल का आइडिया मेयर रितु तावड़े ने दिया था। इस पहल का मकसद त्योहार के दौरान, भगवान गणेश के आने से लेकर विसर्जन तक, पर्यावरण बचाना है, जिसमें हर विसर्जित मूर्ति के लिए एक पेड़ लगाया जाएगा, जिससे मुंबई के हरे-भरे भविष्य में योगदान मिलेगा। गणेश उत्सव के ज़रिए, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने लोगों की भागीदारी से मुंबई को हरा-भरा, सुंदर और इको-फ्रेंडली बनाने का वादा किया है, साथ ही पेड़ लगाने, पेड़ों की सुरक्षा और पर्यावरण बचाने के बारे में जागरूकता भी पैदा की है।
इस साल, भगवान गणेश की मूर्तियों के विसर्जन के लिए 67 नेचुरल विसर्जन की जगहें (जिनमें 44 बीच/जेटी और 23 नेचुरल झीलें शामिल हैं) और 383 आर्टिफिशियल विसर्जन की जगहें उपलब्ध कराई गई हैं। इन जगहों पर ये इंतज़ाम किए गए हैं: 1,194 स्टील प्लेट, 23 जर्मन राफ्ट, 34 क्रेन, 85 एम्बुलेंस, 10 मोटर बोट, 498 ‘निर्मलिया’ (पूजा का प्रसाद/सामान) इकट्ठा करने वाले बर्तन, 326 ‘निर्मलिया’ डंपर, 261 रिसेप्शन सेंटर, 228 कंट्रोल रूम, 75 ऑब्ज़र्वेशन टावर, 1,132 लाइफ़गार्ड, 6,052 फ़्लडलाइट/सर्चलाइट और 489 टेम्पररी टॉयलेट। इसके अलावा, लगभग 25,000 नगर निगम के अधिकारी और अलग-अलग वॉलंटरी ऑर्गनाइज़ेशन ड्यूटी पर रहेंगे।

आर्टिफ़िशियल झीलों में छह फ़ीट से नीचे की मूर्तियों का विसर्जन
हाई कोर्ट के 20 अगस्त, 2026 के निर्देशों के अनुसार, 24 जुलाई, 2025 का आदेश पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) पर आख़िरी फ़ैसला आने तक ज़रूरी है। इसलिए, 6 फीट तक ऊंची भगवान गणेश की मूर्तियों को आर्टिफिशियल झीलों में विसर्जित करना ज़रूरी है और नगर निगम ने इसके लिए ज़रूरी इंतज़ाम किए हैं। इस पहल के बारे में ज़रूरी पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन भी शुरू किए गए हैं। मुंबई में 278 जगहों पर 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल तालाब
इको-फ्रेंडली ‘गणेश उत्सव’ को बढ़ावा देने और आर्टिफिशियल तालाबों में मूर्ति विसर्जन को बढ़ावा देने के लिए, मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने 278 जगहों पर 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल तालाब बनाए हैं। इसके अलावा, नगर निगम प्रशासन 6 फीट से ज़्यादा ऊंची मूर्तियों के लिए 67 नेचुरल विसर्जन पॉइंट पर ज़रूरी सुविधाएं देगा।
स्वराज्य भूमि (गुड़गांव चौपाटी) पर 12 आर्टिफिशियल तालाब
स्वराज्य भूमि, जिसे ‘गुड़गांव चौपाटी’ के नाम से जाना जाता है, मुंबई में सबसे ज़्यादा गणेश मूर्ति विसर्जन का हब है। शहर भर के पब्लिक ‘मंडलों’ और घरों से मूर्तियां विसर्जन (पानी में विसर्जन) के लिए यहां लाई जाती हैं।

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