अंतरराष्ट्रीय
कांस्य पदक विजेता रूपिंदरपाल और बीरेंद्र ने हॉकी से संन्यास लेने का फैसला किया
टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम के दो सदस्य रूपिंदरपाल सिंह और बीरेंद्र लाकड़ा ने अपने शानदार करियर के बाद संन्यास लेने का फैसला किया है। ड्रैग फ्लिकर और डिफेंडर रूपिंदरपाल ने पहले घोषणा की और बीरेंद्र ने बाद में संन्यास की घोषणा की। रूपिंदर और बीरेंद्र को दो साल के अंतराल के बाद टीम में वापस लाया गया था। उन्होंने टोक्यो में एक शानदार भूमिका निभाई, जिससे टीम को चार दशकों के अंतराल के बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने में मदद मिली।
भारतीय टीम को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भाग लेना था, लेकिन महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था जिसके बाद दोनो खिलाड़ियों ने भी महसूस किया है कि उन्होंने वे सभी प्रमुख चीजें हासिल कर ली हैं । इन दोनो का फैसला भारतीय टीम में जरुर प्रभाव डालेगा क्योंकि टीम के दो बहतरिन डिफेंडर अब खेलते हुए नजर नहीं आएंगे।
2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाले रूपिंदर ने ओलंपिक में चार गोल किए और टीम में दूसरे सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी थे। कुल मिलाकर, उन्होंने 223 सीनियर अंतरराष्ट्रीय मैचों में 119 गोल किए हैं।
बीरेंद्र टोक्यो ओलंपिक में टीम के संयुक्त उप-कप्तान और एक प्रमुख डिफेंडर रहे थे। बीरेंद्र ने 201 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 10 गोल किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकी एजेंसी ने भारत-सिंगापुर सबमरीन केबल लिंक प्रोजेक्ट का किया समर्थन

वॉशिंगटन, 21 जनवरी : अमेरिकी ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी ने मंगलवार को भारत को सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशियाई डेटा हब से जोड़ने वाले एक प्रस्तावित सबमरीन केबल सिस्टम के लिए सपोर्ट की घोषणा की।
यूएसटीडीए ने कहा कि उसने एससीएनएक्स3 सबमरीन केबल सिस्टम के लिए एक फीजिबिलिटी स्टडी को फंड करने के लिए सबकनेक्स मलेशिया एसडीएन.बीएचडी. के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया है। यह प्रोजेक्ट भारत को सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे हिस्सों से जोड़ेगा और इससे लगभग 1.85 बिलियन लोगों को सर्विस मिलने की उम्मीद है।
यूएसटीडीए ने कहा कि यह स्टडी केबल सिस्टम के लिए निवेश लाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड-बेस्ड सर्विसेज के लिए जरूरी क्षमता बढ़ाने में मदद करने के लिए डिजाइन की गई है।
एजेंसी ने कहा कि इस कोशिश के जरिए यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी कि इंटरनेशनल नेटवर्क भरोसेमंद और सुरक्षित रहें। इसके साथ ही साइबर खतरों और विदेशी दखलंदाजी के खतरे को कम किया जा सके। यह एग्रीमेंट हवाई के होनोलूलू में पैसिफिक टेलीकम्युनिकेशंस काउंसिल 26 कॉन्फ्रेंस में साइन किया गया था।
यूएसटीडीए के डिप्टी डायरेक्टर थॉमस आर हार्डी ने कहा, “सेंसिटिव डेटा और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर हमलों और विदेशी जासूसी से बचाने के लिए सुरक्षित, अमेरिका में बनी सबसी केबल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना जरूरी है। यह प्रोजेक्ट दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में हमारे साझेदारों की रणनीतिक प्राथमिकता को आगे बढ़ाता है और वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अमेरिका के नेतृत्व को मजबूत करता है।”
सबकनेक्स ने फिजिबिलिटी स्टडी करने के लिए फ्लोरिडा की एपीटेलीकॉम एलएलसी को चुना है। स्टडी रूट डिजाइन, इंजीनियरिंग, फाइनेंशियल मॉडलिंग, कमर्शियलाइजेशन प्लानिंग और रेगुलेटरी एनालिसिस पर फोकस करेगी।
यूएसटीडीए के मुताबिक, इस काम का मकसद एससीएनएक्स3 केबल प्रोजेक्ट के लिए निजी निवेश को बढ़ाना और शुरुआती स्टेज के रिस्क को कम करना है। अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि सिस्टम के टेक्निकल और कमर्शियल फ्रेमवर्क को बनाने में अमेरिकी विशेषज्ञ अहम भूमिका निभाएंगे।
प्लान किया गया केबल रूट दक्षिण भारत में चेन्नई को सिंगापुर से जोड़ेगा। एजेंसी ने कहा कि भारत, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया में और लैंडिंग पॉइंट पर विचार किया जा रहा है। यूएसटीडीए ने कहा कि केबल के बनने से अमेरिकी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए पूरे इलाके में भरोसेमंद सॉल्यूशन सप्लाई करने के नए मौके बन सकते हैं।
एससीएनएक्स3 सबमरीन केबल का मकसद भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती कनेक्टिविटी चुनौतियों का सामना करना है। यूएसटीडीए ने कहा कि बढ़ती डिजिटल डिमांड और सीमित रूट डायवर्सिटी ने मौजूदा नेटवर्क को आउटेज और सिक्योरिटी रिस्क के प्रति कमजोर बना दिया है।
इस प्रोजेक्ट के जरिए नए और मजबूत डेटा पाथवे जोड़कर डिजिटल एक्सेस में सुधार लाया जा सकता है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड सर्विसेज की ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि यह केबल दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया में सरकारों, बिजनेस और नागरिकों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर देगा।
सबकॉनेक्स के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर साइमन जेटल ने कहा कि यह प्रोजेक्ट इस इलाके के डिजिटल बैकबोन को मजबूत करने के लिए एक जरूरी कदम है।
उन्होंने कहा, “भारत, सिंगापुर और खास क्षेत्रीय हब के बीच एक नया, मजबूत और भरोसेमंद रूट बनाकर, यह सिस्टम सीधे तौर पर इकोनॉमिक ग्रोथ, डिजिटल इन्क्लूजन और दुनिया के सबसे डायनामिक मार्केट में से एक में क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं के तेजी से विस्तार में मदद करेगा।”
जेटल ने कहा कि यूएसटीडीए का समर्थन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। प्रोजेक्ट यह सुनिश्चित करेगा कि केबल भरोसेमंद तकनीक और दुनिया की सबसे अच्छी विशेषज्ञता पर बनी हो।
यूएसटीडीए ने कहा कि फिजिबिलिटी स्टडी से सुरक्षित केबल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और डेटा फ्लो को गलत विदेशी असर से बचाने में मदद मिलेगी। ऐसी चिंताएं इसलिए बढ़ी हैं क्योंकि समुद्र के नीचे के केबल दुनिया भर के ज्यादातर इंटरनेट और डेटा ट्रैफिक को ले जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
फुटबॉल वर्ल्ड कप में आने वाले दर्शकों की आसानी के लिए यूएस ने की ‘फीफा पास’ की घोषणा

वाशिंगटन, 21 जनवरी : संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया भर से आने वाले फुटबॉल प्रशंसकों का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि यह फीफा विश्व कप अब तक का सबसे बड़ा और सबसे भव्य आयोजन होगा। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने विदेशी प्रशंसकों के लिए एक नई फास्ट-ट्रैक वीजा पहल की घोषणा की है, ताकि लाखों दर्शक आसानी से अमेरिका आ सकें।
20 जनवरी से अमेरिका का विदेश विभाग एक नई व्यवस्था शुरू कर रहा है, जिसे फीफा प्रायोरिटी अपॉइंटमेंट शेड्यूल सिस्टम कहा गया है। इसे फीफा पास नाम दिया गया है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए है, जिनके पास विश्व कप के मैचों के टिकट हैं और जिन्हें अमेरिका आने के लिए वीज़ा की ज़रूरत होती है।
विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि असली और सही प्रशंसकों को समय पर वीज़ा अपॉइंटमेंट मिल जाए, ताकि वे टूर्नामेंट से पहले अमेरिका पहुंच सकें।”
फीफा पास के तहत जिन लोगों के पास कंफर्म टिकट होगा, उन्हें वीजा साक्षात्कार के लिए प्राथमिकता दी जाएगी और उनका वीजा काम तेजी से पूरा किया जाएगा।
हालांकि, अधिकारी ने साफ किया कि इस नई सुविधा से अमेरिका के आव्रजन नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। वीजा साक्षात्कार के दौरान आवेदक को यह साबित करना होगा कि वह वीज़ा के सभी नियमों को पूरा करता है, अमेरिका के कानूनों का पालन करेगा और टूर्नामेंट के बाद वापस लौट जाएगा। अमेरिका की सुरक्षा और सीमा की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।
विश्व कप को सुचारू रूप से कराने के लिए विदेश विभाग 500 से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को भी तैनात कर रहा है, ताकि वीज़ा आवेदन समय पर निपटाए जा सकें। इसके साथ ही सुरक्षा जांच के वही सख्त मानक लागू रहेंगे, जो सामान्य वीज़ा प्रक्रिया में होते हैं।
इसके अलावा, दुनिया के ज्यादातर देशों में वीज़ा अपॉइंटमेंट का इंतज़ार भी कम किया गया है। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दुनिया भर के 80 प्रतिशत से ज्यादा देशों में, आवेदक अब 60 दिनों से भी कम समय में यूएस विज़िटर वीज़ा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट शेड्यूल कर सकते हैं, जो पहले के बैकलॉग की तुलना में एक महत्वपूर्ण कमी है।
फीफा विश्व कप 11 जून से शुरू होगा। यह टूर्नामेंट अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको मिलकर आयोजित कर रहे हैं। पहली बार इसमें 48 टीमें भाग लेंगी और अमेरिका के 11 शहरों में कुल 78 मैच खेले जाएंगे, जिनमें फाइनल मैच न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में होगा।
अंतरराष्ट्रीय
यूएई के राष्ट्रपति पहुंचे भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया स्वागत, बोले- अपने भाई को लेने पहुंचा

नई दिल्ली, 19 जनवरी : संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत पहुंच गए है। हवाईअड्डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वागत करने पहुंचे। पीएम मोदी ने कहा कि वो अपने भाई को लेने वहां पहुंचे हैं। बतौर राष्ट्रपति ये उनकी तीसरी भारत यात्रा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पोस्ट पर कहा, “मैं अपने भाई, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति, महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट गया। उनकी यह यात्रा भारत और यूएई के बीच दोस्ती के मजबूत रिश्तों को जो महत्व वह देते हैं, उसे दर्शाती है। मैं हम दोनों के बीच होने वाली बातचीत को लेकर उत्सुक हूं।
विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार शेख मोहम्मद मात्र डेढ़ घंटे के दौरे पर भारत पहुंचे हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूएई के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत के बाद छह बजकर पांच मिनट पर यहां से रवाना हो जाएंगे। पीएम मोदी के निमंत्रण पर यूएई के राष्ट्रपति भारत पहुंचे हैं।
शेख मोहम्मद नाहयान का कुछ घंटों का ये दौरा दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है। उनका ये भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। एक तरफ वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की चीन और रूस के साथ तनातनी है, तो वहीं ईरान में हालात बेहद खराब चल रहे हैं। इसके अलावा यूएई और सऊदी अरब के बीच भी तनाव है। इन सबके बीच भारत और यूएई के नेताओं की मुलाकात पर सबकी नजर होगी।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा और दुनिया से जुड़े अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।
शेख मोहम्मद नाहयान बतौर राष्ट्रपति तीसरी बार भारत दौरे पर पहुंच रहे हैं। वहीं बीते 10 सालों में उनकी यह पांचवीं भारत यात्रा है।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार वित्त वर्ष 24-25 में 100.06 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है, जो कि 19.6 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाता है। इसी के साथ यह उपलब्धि भारत के लिए यूएई को उसके खास व्यापार साझेदारों में से एक बनाती है।
बता दें, बीते कुछ वर्षों में भारत और यूएई के बीच के संबंध और भी प्रगाढ़ हुए है। दोनों देशों ने अलग-अलग क्षेत्रों में व्यापारिक संबंधों को और मजबूत किया है। पीएम मोदी को यूएई ने 2019 में यूएई के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ जायद से सम्मानित किया जा चुका है।
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