राजनीति
उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस : पीएम मोदी ने सीएम योगी को दी शुभकामनाएं, मुख्यमंत्री ने जताया आभार
लखनऊ, 24 जनवरी : उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शुभकामनाओं के साथ संदेश भेजा है। पीएम मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा उत्तर प्रदेश आज ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र का उत्तम उदाहरण बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संदेश को प्रदेशवासियों के साथ शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के पावन अवसर पर आत्मीय और प्रेरणादायी शुभकामनाओं के लिए आपका हृदय से आभार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।”
सीएम योगी के नाम अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “आज 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाया जा रहा है। मैं सभी यूपी वासियों को ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ की हृदय से शुभकामनाएं देता हूं। मैं काशी का सांसद हूं और यूपी के लोगों ने मुझे चुनकर लोकसभा भेजा है, इसलिए यह दिन मेरे लिए और भी विशेष हो जाता है। यूपी के लोगों से मुझे जो प्रेम और आत्मीयता मिली है, वह मेरे लिए बहुत बड़ी पूंजी है। उत्तर प्रदेश की मिट्टी में कुछ खास है। उत्तर प्रदेश ने हमेशा अपने सामर्थ्य से, अपनी प्रतिभा से देश के विकास को गति दी है। मुझे खुशी है कि हमारा उत्तर प्रदेश आज ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र का उत्तम उदाहरण बन रहा है।”
पीएम मोदी ने कहा कि यूपी में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या है, भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन है और इसी भूमि पर सारनाथ से भगवान बुद्ध का ज्ञान विश्व को प्राप्त हुआ था। उत्तर प्रदेश में ही अनादि काशी भी है, और पवित्र प्रयागराज भी है। अयोध्या के राम मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा-ध्वजारोहण, काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्निर्माण, महाकुंभ का आयोजन और अभी चल रहा माघ मेला यूपी के सांस्कृतिक सामर्थ्य को दर्शाता है। यह सामर्थ्य यूपी में पर्यटन की अपार संभावनाओं को साकार कर रहा है।
उन्होंने पत्र में आगे लिखा, “उत्तर प्रदेश झांसी और मेरठ से लेकर काकोरी तक स्वतंत्रता आंदोलन की उर्वरा भूमि भी रहा है। इस प्रांत की मिट्टी को रानी लक्ष्मीबाई, झलकारीबाई, बेगम हजरत महल, मंगल पांडे, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और अश्फाकउल्ला खान जैसी महान विभूतियों की जन्मभूमि और कर्मभूमि बनने का गौरव प्राप्त है। मध्यकाल में राजा सुहेलदेव ने आक्रमणकारियों के आतंक का अंत किया था। इतिहास राजा बिजली पासी के शौर्य का भी साक्षी रहा है।”
उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “ऐसी महान प्रेरक गाथाओं को साथ लेकर उत्तर प्रदेश के लोगों ने अपने श्रम, सामर्थ्य और निष्ठा से राज्य की एक अलग पहचान बनाई है। आज उत्तर प्रदेश तेजी से एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एक समय ऐसा भी था जब दशकों तक प्रोजेक्ट्स के लंबित रहने के कारण आम लोगों के मन में व्यवस्था के प्रति एक अविश्वास पैदा हो गया था। लेकिन आज, भाजपा सरकार में पुराने प्रोजेक्ट्स भी पूरे हो रहे हैं, और नई परियोजनाएं भी तेजी से पूरी की जा रही हैं। इसमें केंद्रीय स्तर पर होने वाली ‘प्रगति’ की बैठकों की भी अहम भूमिका रही है।”
उन्होंने यह भी लिखा कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के बाद अब गंगा एक्सप्रेसवे भी यूपी के विकास को नई रफ्तार देने जा रहा है। उत्तर प्रदेश जल्द ही 21 हवाई अड्डों वाला प्रदेश बनने की राह पर है और देश में सबसे आगे खड़ा है। लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट दुनिया के लिए हमारे द्वार खोल रहे हैं। जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शीघ्र ही लाखों यात्रियों की उम्मीदों को उड़ान देगा।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ में उत्तर प्रदेश के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने राज्य की मजबूत कानून व्यवस्था को लेकर भी तारीफ की। पीएम मोदी ने आगे कहा कि जनसंख्या की दृष्टि से यूपी देश का सबसे बड़ा राज्य है। जब हम सामूहिक शक्ति से विकास का निर्धारित लक्ष्य लेकर चलेंगे तो यूपी की प्रगति से देश के विकास को भी नई गति मिलेगी।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि उन्हें विकास के हर पैरामीटर पर यूपी को नंबर वन बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ना होगा। पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी संकल्प लें कि यूपी को आत्मनिर्भर अभियान, मिशन मैन्यूफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी सहित विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी बनाएंगे।
फिर से प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए अपने पत्र के आखिर में पीएम मोदी ने लिखा, “विकसित उत्तर प्रदेश का यह संकल्प दिन-प्रतिदिन विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति की ऊर्जा बनेगा।”
राष्ट्रीय समाचार
त्योहारी मौसम से पहले सरकारी बफर स्टॉक से प्याज कोलकाता पहुंचेगा

पश्चिम बंगाल में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के तहत मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के बफर स्टॉक से प्याज लेकर कांडा एक्सप्रेस गुरुवार को कोलकाता पहुंचने वाली है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
पश्चिम बंगाल में एनएएफईडी और एनसीसीएफ की मोबाइल वैन के माध्यम से लगभग 1,400 मीट्रिक टन प्याज 35 रुपए प्रति किलो की दर से वितरित किया जा चुका है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि कांडा एक्सप्रेस के आने से अतिरिक्त मात्रा में प्याज की आवाजाही अधिक कुशलता से हो सकेगी, जिससे बाजार में उपलब्धता में सुधार होगा और मौसमी कीमतों पर दबाव कम होगा।
बयान में आगे कहा गया कि आगमन से प्याज की अधिक मात्रा की आवाजाही में तेजी आने की उम्मीद है और कोलकाता और आसपास के जिलों में, विशेष रूप से त्योहारी मौसम से पहले, इसकी उपलब्धता और मजबूत होगी।
बयान में आगे कहा गया है कि कोलकाता जाने वाली कांडा एक्सप्रेस, रेल और सड़क परिवहन के हाइब्रिड नेटवर्क के माध्यम से पीएसएफ बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित आपूर्ति की चल रही रणनीति का हिस्सा है।
एनएएफईडी और एनसीसीएफ के माध्यम से बफर स्टॉक का लक्षित निपटान 24 अगस्त से शुरू हुआ, और बाजार की आवश्यकताओं के आधार पर देश के विभिन्न हिस्सों में आपूर्ति धीरे-धीरे भेजी जा रही है।
मंत्रालय ने बताया कि कोलकाता में वर्तमान में 25 से अधिक स्थानों पर खुदरा बिक्री की जा रही है, जिनमें कोले मार्केट, मेचुआ मंडी, मानिकतला मार्केट, रामपुरिया मार्केट और श्याम बाजार जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं।
इसके अलावा, सरकार ‘सुफल बंगला’ के माध्यम से बफर स्टॉक प्याज की खुदरा बिक्री की संभावना तलाश रही है, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त पहुंच मिलेगी और इस पहल का दायरा व्यापक होगा।
बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति अब तक देश भर के 100 से अधिक शहरों में की जा चुकी है।
बफर स्टॉक हस्तक्षेप के बाद बाजार में उपलब्धता में सुधार का संकेत देते हुए, 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में खुदरा प्याज की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं या उनमें गिरावट आई है। पिछले सप्ताह जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में प्याज की कीमतों में गिरावट आई है, उनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और बिहार शामिल हैं।
राष्ट्रीय समाचार
एआई समाधान दे सकता है, लेकिन सही सवाल पूछना आपकी जिम्मेदारी होनी चाहिए: राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को उच्च शिक्षा में मल्टी-डिसिप्लिनरी (कई विषयों को मिलाकर) अप्रोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गरीबी उन्मूलन और लोकतंत्र जैसी जटिल समकालीन चुनौतियों का समाधान केवल अध्ययन के एक क्षेत्र से नहीं किया जा सकता।
गुजरात में महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के 75वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के कई विषय हैं, जो इसे ज्ञान की अलग-अलग धाराओं को एक साथ लाने की स्थिति में लाते हैं।
उन्होंने कहा, “आर्ट्स से लेकर साइंस, टेक्नोलॉजी से लेकर मेडिसिन, लॉ से लेकर सोशल वर्क, फाइन आर्ट्स से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट्स, मैनेजमेंट से लेकर जर्नलिज्म तक, यह यूनिवर्सिटी ज्ञान के कई क्षेत्रों में शिक्षा दे रही है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के सामने आने वाली समस्याएं अब आपस में अधिक जुड़ी हुई हैं और उनके समाधान के लिए कई विषयों के ज्ञान की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “क्लाइमेट चेंज सिर्फ एनवायरनमेंटल स्टडीज का विषय नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिर्फ कंप्यूटर साइंस का विषय नहीं है। हेल्थ सिर्फ मेडिसिन या मेडिकल साइंस का विषय नहीं है। गरीबी दूर करना सिर्फ अर्थशास्त्री का विषय नहीं है। लोकतंत्र सिर्फ पॉलिटिकल साइंस का विषय नहीं है।”
उन्होंने कहा, “आज, सभी जरूरी समस्याओं को हल करने के लिए कई विषयों को मिलाकर काम करने (मल्टीडिसिप्लिनरी) के नजरिए की जरूरत है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को सिर्फ अपनी पढ़ाई के खास विषयों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अलग-अलग तरह की समझ और नजरिया विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हमें एक वैज्ञानिक जैसी जिज्ञासा, एक कलाकार जैसी संवेदनशीलता, एक इतिहासकार जैसा नजरिया, अर्थशास्त्र की समझ और समाजशास्त्र की चेतना की जरूरत है।”
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों से उम्मीद की जाती है कि वे इसी दिशा में आगे बढ़ें और छात्रों को अलग-अलग विषयों में ज्ञान का इस्तेमाल करने में मदद करें।
राष्ट्रपति मुर्मु ने तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी को अपनाते समय छात्रों द्वारा सही समझ और विवेक का इस्तेमाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने छात्रों से कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समाधान दे सकती है, लेकिन सही सवाल पूछना आपकी जिम्मेदारी होनी चाहिए। टेक्नोलॉजी रफ्तार तो दे सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल किस दिशा में किया जाए, यह तय करना छात्रों का काम है।”
राष्ट्रपति ने छात्रों से टेक्नोलॉजी की क्षमताओं को मानवीय मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के साथ जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे नागरिकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे संविधान में बताए गए “न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व” के आदर्शों को अपने जीवन और कार्यस्थलों में अपनाएं।
यूनिवर्सिटी के विभागों में आर्ट्स, साइंस, एजुकेशन और साइकोलॉजी, कॉमर्स, टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग, मेडिसिन, लॉ, फाइन आर्ट्स, फ़ैमिली और कम्युनिटी साइंसेज़, सोशल वर्क, परफॉर्मिंग आर्ट्स, मैनेजमेंट स्टडीज, जर्नलिज़्म और कम्युनिकेशन और फार्मेसी शामिल हैं।
दीक्षांत समारोह की घोषणा के अनुसार, 229 उम्मीदवार डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी डिग्री, 2,857 उम्मीदवार मास्टर डिग्री, 8,863 उम्मीदवार बैचलर डिग्री और 657 उम्मीदवार पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा के लिए योग्य पाए गए।
राजनीति
राहुल गांधी ने एसआईआर विवाद के बीच चुनाव आयोग पर साधा निशाना, कहा-समय आएगा, हम आपको नहीं बख्शेंगे

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और चुनाव अधिकारियों पर गड़बड़ी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि “समय आएगा, हम आपको बख्शेंगे नहीं।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने कहा, “वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।”
गांधी ने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें उन्होंने कहा, “मैं चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों से साफ कह रहा हूं। आप जो कर रहे हैं, वह गलत है।”
उन्होंने कहा, “यह देशद्रोह है। समय आएगा! हम आपको पकड़ेंगे, आप बच नहीं पाएंगे।”
यह ताजा विवाद एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 10 महीनों के दौरान 14 मौकों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां कई तरह के फैसलों और प्रक्रियाओं से जुड़ी थीं। इनमें यह आरोप भी शामिल था कि नए वोटरों को जोड़ने और वोटर लिस्ट से नाम हटाने से जुड़े कुछ मामलों और मुद्दों के बारे में आयुक्तों को अंधेरे में रखा गया था।
इससे पहले दिन में ईसीआई ने एक प्रमुख अखबार की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कई फैसलों पर “आधिकारिक तौर पर आपत्ति” जताई थी, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे।
इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चुनाव आयोग के किसी भी फैसले पर किसी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति दर्ज नहीं कराई थी। उन्होंने कहा कि दोनों आयुक्तों ने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं, जिनकी बाद में आयोग ने समीक्षा की थी।
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