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Tuesday,25-August-2026
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बीएमसी चुनाव 2026: क्या ‘मराठी माणूस’ मुंबई नगर निगम चुनावों के विजेता का फैसला करेंगे?

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मुंबई: आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव, जो 15 जनवरी, 2026 को होने वाले हैं, मुंबई की पहचान के लिए एक निर्णायक लड़ाई साबित होने वाले हैं। इस मुकाबले के केंद्र में ‘मराठी माणूस’ वर्ग है, जो शहर के मतदाताओं का लगभग 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है, लेकिन ‘मराठी अस्मिता’ (गौरव) की भावना को लेकर उनका प्रभाव कहीं अधिक है।

शिवसेना में फूट और मराठी वोटों के लिए प्रतिस्पर्धी दावों के उभरने के साथ, कई प्रमुख वार्ड और क्षेत्र प्राथमिक युद्धक्षेत्र बन गए हैं।

1. मुख्य क्षेत्र: दादर, परेल और सेवरी (जी-साउथ और एफ-साउथ वार्ड)

परंपरागत रूप से, मराठी राजनीति का केंद्र रहे ये क्षेत्र शिवसेना की जन्मभूमि हैं।

इन इलाकों में बदलाव देखने को मिला है: पहले यहाँ मिल मजदूरों के दबदबे वाली चॉलें थीं, लेकिन अब आलीशान ऊंची इमारतें बन गई हैं। हालांकि, यहाँ की मूल पहचान आज भी पूरी तरह से मराठी ही है।

मुख्य संघर्ष: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है, जिसमें उसे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के खिलाफ अपने गढ़ में अपनी पकड़ बनाए रखनी है। एकनाथ शिंदे का मानना ​​है कि बाल ठाकरे की विरासत का असली श्रेय उन्हीं को जाता है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली एमएनएस (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) भी यहां एक शक्तिशाली तीसरी ताकत बनी हुई है, जो अक्सर ‘बाधा’ या निर्णायक भूमिका निभाती है।

2. उपनगरीय गढ़: गिरगांव से बोरीवली तक (पश्चिमी उपनगर)

जबकि पश्चिमी उपनगरों को अक्सर गुजराती और उत्तर भारतीय आबादी से जोड़ा जाता है, वहीं विले पार्ले (पूर्व) और दहिसर जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में मराठी भाषी लोगों की घनी आबादी है।

विले पार्ले (वार्ड के-ईस्ट): सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध, यहाँ का मराठी मध्यम वर्ग मुखर और राजनीतिक रूप से सक्रिय है। भाजपा ‘मराठी मेयर’ का वादा करके इस वर्ग को लुभाने की आक्रामक कोशिश कर रही है, जो शिवसेना के पारंपरिक वफादारों को अपनी ओर खींचने की एक रणनीतिक चाल है।

दहिसर (वार्ड आर-उत्तर): शहर के अंतिम परिस्थानों में से एक होने के नाते, दहिसर में ‘भूमिपुत्र’ आबादी की संख्या अधिक है। स्थानीय पुनर्विकास और अवसंरचना के मुद्दों को मराठी क्षेत्रों के संरक्षण के परिप्रेक्ष्य से देखा जा रहा है।

3. पूर्वी गलियारा: कुर्ला, चेंबूर, मुलुंड और भांडुप (एल, एम और एस वार्ड)

पूर्वी उपनगरों में बड़ी संख्या में मराठी भाषी आबादी रहती है, विशेष रूप से निम्न-मध्यम वर्ग और श्रमिक वर्ग में।

भांडुप और मुलुंड (वार्ड एस): भांडुप में ऐतिहासिक रूप से शिवसेना और एमएनएस के बीच तीव्र झड़पें होती रही हैं। यहां रोजगार के अवसरों और आवास को लेकर अक्सर ‘मराठी बनाम बाहरी’ का मुद्दा सामने आता है।

चेंबूर (वार्ड एम-पश्चिम): इस क्षेत्र में दलित-मराठी और उच्च जाति के मराठी मतदाताओं का मिश्रण देखने को मिलता है। महा विकास अघाड़ी (एमवीए) एक एकजुट मराठी-दलित-मुस्लिम मोर्चे पर भरोसा कर रही है, जबकि महायुति शिंदे गुट के ‘भूमिपुत्र’ के नारे के माध्यम से मराठी वोटों को विभाजित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

रणनीतिक बदलाव: ‘मराठी मेयर’ की चाल

अपने पारंपरिक ‘विकास’ के नारे से हटकर, भाजपा ने हाल ही में घोषणा की है कि अगर महायुति गठबंधन जीतता है, तो मुंबई का मेयर एक मराठी माणूस होगा। यह शिवसेना के यूबीटी गुट द्वारा पार्टी पर अक्सर लगाए जाने वाले ‘मराठी-विरोधी’ आरोप को बेअसर करने का सीधा प्रयास है।

ठाकरे चचेरे भाई: उद्धव और राज ठाकरे के बीच रणनीतिक समझ की खबरें मराठी वोटों को मजबूत कर सकती हैं।

परिसीमन का प्रभाव: हाल ही में हुए सुधार में वार्ड सीमाओं के लगभग 20-25 प्रतिशत में बदलाव होने से, पारंपरिक वोट बैंक बाधित हो गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर लामबंदी महत्वपूर्ण हो गई है।

आवास और विस्थापन: बढ़ती लागत के कारण ‘मराठी माणूस’ लोगों को मुंबई से मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में विस्थापित किया जा रहा है, यह एक प्रमुख भावनात्मक मुद्दा है जिसका उपयोग विपक्ष सत्ताधारी दल के खिलाफ करेगा।

जैसे-जैसे 15 जनवरी नजदीक आ रही है, ये वार्ड न केवल यह तय करेंगे कि देश के सबसे धनी नगर निकाय पर किसका नियंत्रण होगा, बल्कि यह भी तय करेंगे कि शहर में मराठी पहचान का सही मायने में प्रतिनिधित्व कौन करेगा।

राजनीति

चाय की कीमत बढ़कर 15 रुपए हो गई, 50 पैसे में चाय पीकर हमारी जिंदगी शुरू हुई है: संजय राउत

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चाय की कीमतों में बढ़ोतरी, कंगना रनौत के बयान और मराठी भाषा विवाद पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया सामने आई है।

नेता संजय राउत ने चाय की बढ़ती कीमतों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “चाय की कीमत 15 रुपये हो गई है, जबकि बड़े होटलों में यही चाय 200-300 रुपये में मिलती है। हमारी जिंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई है।” राउत ने तंज कसते हुए कहा, “अब भाजपा वाले कहेंगे कि चाय मत पियो। चाय पीना अपराध है, देशद्रोह है। राष्ट्रभक्ति के नाम पर कोई आदेश जारी कर देंगे। खुद इथेनॉल पिएंगे। गरीब आदमी को मेहनत करके एक कप चाय नसीब होती है और ये लोग सरकारी चाय पीते हैं।”

कंगना रनौत की ओर से कृति सेनन और तापसी पन्नू पर कटाक्ष करने को लेकर संजय राउत ने कहा, “आप लोग कंगना रनौत को इतनी गंभीरता से क्यों लेते हैं? उनको इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। ये अंधभक्त लोग हैं। उनसे पूछना चाहिए कि चाय क्यों महंगी हो गई है। चीनी बनाने वाला गन्ना इथेनॉल बनाने में चला गया।

महाराष्ट्र में मराठी भाषा बोलने को लेकर संजय राउत ने कहा, “संविधान में जो अधिकार दिया गया है, उसका इस्तेमाल होना चाहिए। चाहे महाराष्ट्र हो या बंगाल, कॉर्पोरेट में स्थानीय भाषा होनी चाहिए। देश की भाषा एक होनी चाहिए, हिंदी। अगर अंग्रेजी गुलामी का लक्षण है तो हिंदी में बात होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और ब्यूरोक्रेट्स को हिंदी में लिखना और बोलना चाहिए। उनको हिंदी में जवाब देने से किसने रोका है?

बीते दिन भी संजय राउत ने अखिलेश यादव के बयान पर कहा था, “अखिलेश यादव ने ऐसा कुछ नहीं कहा। यहां और हर राज्य में एक कानून है कि स्थानीय भाषा बोली जानी चाहिए। अखिलेश ने यही कहा, लेकिन यह कानून सभी पर लागू होना चाहिए। जो लोग कॉर्पोरेट में, ऊंचे पदों पर या ऑफिस में काम करते हैं, वे मराठी क्यों नहीं बोलते? उन्हें भी मराठी आनी चाहिए और उन पर भी मराठी सख्ती से लागू होनी चाहिए। हर राज्य में लोगों को गर्व और आत्म-सम्मान के साथ स्थानीय भाषा बोलनी चाहिए।”

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र : पालघर के आश्रम स्कूल में 7 साल के बच्चे की मौत, 26 अन्य छात्र अस्पताल में भर्ती

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महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक आवासीय स्कूल में 7 साल के छात्र की तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद मौत हो गई है। वहीं 26 अन्य छात्रों को सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मसवण के आश्रम स्कूल में पढ़ने वाले पहली क्लास के छात्र को 22 अगस्त को तेज बुखार आया था। इसके बाद उसे इलाज के लिए स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ले जाया गया था।

सोमवार को जब उसका बुखार वापस आया तो पीएचसी के डॉक्टर ने देखा कि उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है। डॉक्टर ने उसे तुरंत एंबुलेंस से मनोर के ग्रामीण अस्पताल में भेजने की सलाह दी।

अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे का ईसीजी किया और फिर उसे मृत घोषित कर दिया। अधिकारी ने बताया कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।

घटना के बाद स्वास्थ्य और प्रशासन के बड़े अधिकारी स्कूल पहुंचे। इस स्कूल में कुल 449 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें से 395 छात्र हॉस्टल में रहते हैं। मेडिकल टीम ने स्कूल परिसर में सभी छात्रों की पूरी स्वास्थ्य जांच भी की।

एहतियात के तौर पर सर्दी, खांसी या बुखार के हल्के लक्षण वाले 26 छात्रों को मसवण पीएचसी में निगरानी में रखा गया है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना अधिकारी विशाल खत्री ने स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया और अस्पताल में भर्ती छात्रों और उनके माता-पिता से मुलाकात की।

यह घटना कुछ हफ्ते पहले गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय स्कूल हॉस्टल में हुई घटना के बाद हुई है, जहां तीन आदिवासी लड़कियों की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी। बताया गया था कि वे जमीन पर सो रही थीं।

इन मौतों ने महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी महीने की शुरुआत में अधिकारियों ने बताया था कि पिछले दो सालों में राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त आवासीय स्कूलों में 584 छात्रों की मौत हुई है। इन मौतों के कारणों में सांप का काटना, सिकल सेल रोग, गंभीर बीमारियां, हादसे और आत्महत्या शामिल हैं।

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राजनीति

परंदूर एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित 1,700 एकड़ जमीन पर औद्योगिक परियोजनाएं लगाने का विचार कर रही तमिलनाडु सरकार

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तमिलनाडु सरकार प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को छोड़ने के बाद, इसके लिए अधिग्रहित 1,700 एकड़ जमीन के वैकल्पिक औद्योगिक इस्तेमाल पर विचार कर रही है। साथ ही, सरकार चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए किसी दूसरी जगह की तलाश भी कर रही है।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने खेती की जमीन, जल संसाधनों और वहां रहने वाले लोगों की आजीविका पर इस प्रोजेक्ट के असर का हवाला दिया।

हालांकि, उन्होंने कहा कि चेन्नई को एक और एयरपोर्ट की जरूरत है और वादा किया कि ऐसी जगह चुनी जाएगी, जहां खेती और बस्तियों को कम से कम नुकसान हो। मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट का भी विस्तार किया जाएगा।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि अधिग्रहित जमीन को वापस करने या जमीन मालिकों को दिए गए मुआवजे को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है। चूंकि ये जमीन के टुकड़े ‘तमिलनाडु औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम’ के तहत अधिग्रहित किए गए थे, इसलिए इनका इस्तेमाल एयरपोर्ट के अलावा दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए भी किया जा सकता है।

उद्योग विभाग दूसरे विभागों से सलाह-मशविरा करके जमीन के इस्तेमाल का प्लान तैयार करेगा। जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स, खेती से जुड़े काम-काज और बिना जोखिम वाले उद्योग शामिल हैं। सिपकॉटइंडस्ट्रियल एस्टेट बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि बातचीत पूरी होने के बाद सरकार एक रोडमैप का ऐलान करेगी।

इस बीच, अधिकारी नए एयरपोर्ट के लिए संभावित जगहों का जायजा ले रहे हैं, हालांकि अभी किसी जगह को फाइनल नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर बातचीत की है।

2021 में सर्वे शुरू होने के बाद अगस्त 2022 में घोषित परंदूर प्रोजेक्ट को 13 गांवों में 5,300 एकड़ जमीन पर बनाने की योजना थी। इसका मकसद चेन्नई की लंबे समय की एविएशन जरूरतों को पूरा करना था और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

हालांकि, इस प्रस्ताव का ग्रामीणों ने लगातार विरोध किया, जिन्हें डर था कि इससे खेती की जमीन, जल स्रोत और बसी-बसाई बस्तियां बर्बाद हो जाएंगी। एगनापुरम के निवासियों ने 1,100 से ज्यादा दिनों तक रात में विरोध प्रदर्शन किए। एयरपोर्ट के खिलाफ 16 पंचायत प्रस्ताव पास किए और सात ग्राम सभा बैठकों का बहिष्कार किया। आंदोलन के तहत परिवारों ने बच्चों को सरकारी स्कूलों से भी दूर रखा।

विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, पिछली सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी रखी और विस्थापित परिवारों के लिए मॉडल घरों समेत पुनर्वास योजनाएं तैयार कीं।

विजय ने जनवरी 2025 में एगनापुरम का दौरा किया और वादा किया था कि अगर वे चुने गए तो इस प्रोजेक्ट को रद्द कर देंगे। उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद काम धीमा पड़ गया। सोमवार को विधानसभा में की गई घोषणा से परंदूर योजना औपचारिक रूप से खत्म हो गई, जबकि किसी दूसरी जगह पर दूसरे एयरपोर्ट का प्रस्ताव अभी भी बना हुआ है।

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