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Wednesday,03-June-2026
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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में होगी 6.8 फीसदी की रिकवरी : एडीबी

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एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में बांग्लादेश के लिए मजबूत आर्थिक सुधार का अनुमान लगाया है। एडीबी ने इस दौरान बांग्लादेश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 6.8 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद जताई है।

ढाका में एडीबी के स्थानीय निदेशक मनमोहन प्रकाश ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि बांग्लादेश में 2021 में मालदीव, भारत और चीन के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है। महामारी के समय पड़ोसी अर्थव्यवस्थाएं काफी नीचे चली गई हैं, जिनमें ऐतिहासिक तौर पर चढ़ाव देखने को मिलेगा।

सितंबर 2020 तक बांग्लादेश इस क्षेत्र में 46 देशों के बीच सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्था रहा है, जिसमें ऐसी कई अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जिनकी वृद्धि नकारात्मक दर्ज की गई है। हालांकि अर्थव्यवस्थाओं की रिकवरी भी तेजी से और बड़े पैमाने पर होगी। अगर मालदीव की बात करें तो इसकी अर्थव्यवस्था जो फिलहाल माइनस 20.5 प्रतिशत है, वह एक वर्ष में बड़े उछाल के साथ 10.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।

“पूवार्नुमान एडीबी की फ्लैगशिप रिपोर्ट एशियन डेवलपमेंट आउटलुक (एडीओ) 2020” के अपडेट से आया है, जो संगठन के प्रधान कार्यालय से मंगलवार को प्रकाशित हुआ।

वित्तमंत्री ए.एच.एम. मुस्तफा कमाल ने एडीबी के विकास को लेकर किए गए पूवार्नुमान पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि विकास को लोगों की कामकाजी भावना (वार्किं ग स्पिरिट) से प्रेरित किया गया है।

रिपोर्ट में 2020 में विकासशील एशिया में अर्थव्यवस्थाओं के लिए 0.7 प्रतिशत नेगेटिव वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 1960 के दशक की शुरुआत से नहीं हुआ है। इसके साथ ही 2021 में 6.8 प्रतिशत सकारात्मक (पॉजिटिव) वृद्धि के साथ तेजी से रिकवरी का अनुमान भी लगाया गया है।

रिपोर्ट में 2020 में चीन की अर्थव्यवस्था के लिए 1.8 प्रतिशत की वृद्धि और भारत के लिए नौ प्रतिशत निगेटिव वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अगले साल 7.7 प्रतिशत की वृद्धि, जबकि भारत आठ प्रतिशत की वृद्धि के साथ उबर जाएगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट के कारण, दक्षिण एशियाई उप-क्षेत्र के 2020 में विकास दर 6.8 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है, लेकिन 2021 में इसमें 7.1 प्रतिशत तक पलटने की संभावना भी जताई गई है। यानी कोरोनावायरस के कारण उत्पन्न व्यवधान से फिसली अर्थव्यवस्था के अगले वर्ष तक पटरी पर लौटने की पूरी उम्मीद है।

अपराध

फेमा उल्लंघन मामला: दिल्ली-मुंबई में वेदांता से जुड़े परिसरों पर ईडी ने मारा छापा

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नई दिल्ली, 2 जून: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत चल रही जांच के सिलसिले में दिल्ली और मुंबई में वेदांता समूह से जुड़े दो ठिकानों पर तलाशी ली है। वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों के अनुसार, ये तलाशी अभियान कथित तौर पर समूह की कंपनियों द्वारा अपनी मूल कंपनी को किए गए ‘ब्रांड फीस भुगतान’ से जुड़े हैं।

उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी ने उन कथित लेन-देन से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड एकत्र किए हैं, जिनकी जांच फेमा के प्रावधानों के तहत की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, ईडी की टीमों ने दिल्ली और मुंबई में एक-एक स्थान पर तलाशी ली। यह अभियान सोमवार को शुरू हुआ था और अब पूरा हो चुका है।

अधिकारी इन भुगतानों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और समझौतों की समीक्षा कर रहे हैं।

जांचकर्ता कथित तौर पर ब्रांड के उपयोग के लिए किए गए भुगतानों की जांच कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि क्या ये लेन-देन विदेशी मुद्रा नियमों के अनुरूप थे।

वेदांता के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनी सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी हो चुकी है और अधिकारी अब इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करने से पहले अभियान के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विश्लेषण करेंगे। जांचकर्ता एकत्र की गई सामग्री की समीक्षा कर रहे हैं, इसलिए आगे की जानकारी का इंतजार है।

ईडी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

इस बीच, वेदांता लिमिटेड ने पिछले महीने स्टॉक एक्सचेंजों को बताया था कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बिजली की उपलब्धता के बारे में कथित गलत जानकारी देने से जुड़े एक मामले में उसकी सहायक कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के खिलाफ फैसला सुनाया है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी को लगभग 127 करोड़ रुपये का जुर्माना और लागू विलंब भुगतान अधिभार (लेट पेमेंट सरचार्ज) देना होगा।

एक रेगुलेटरी फाइलिंग में वेदांता ने कहा कि उसे टीएसपीएल से 20 मई के एक फैसले के संबंध में जानकारी मिली है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) और पंजाब स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (पीएसएलडीसी) की ओर से दायर अपीलों पर सुनाया था।

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राष्ट्रीय

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर आज से शुरू हो रही नई वार्ता, दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद

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नई दिल्ली, 2 जून: भारत और अमेरिका के बीच मंगलवार से नई व्यापार वार्ता शुरू होने जा रही है। दोनों देश लंबे समय से प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है।

2 जून से 4 जून तक होने वाली इन वार्ताओं में प्रस्तावित अंतरिम समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने और बाकी बचे मुद्दों को सुलझाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस समझौते का व्यापक ढांचा पहले ही दोनों पक्षों के बीच तय किया जा चुका है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि बातचीत का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है और अब केवल कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।

उन्होंने कहा, “बहुत जल्द हम अमेरिका के साथ पहले द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा करेंगे और इसके बाद दूसरे चरण की बातचीत भी जारी रहेगी।”

हालांकि, मौजूदा बातचीत मुख्य रूप से व्यापक बीटीए के पहले चरण पर केंद्रित रहेगी। इसमें बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, चर्चा में अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत लगाए गए शुल्क भी शामिल हो सकते हैं। भारत इन मामलों में राहत चाहता है और व्यापार से जुड़े विवाद भी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।

यदि यह व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर और प्राथमिकता वाली पहुंच मिल सकती है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे।

अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मुद्दों पर बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है और अब दोनों देश तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि समझौते के पहले चरण की औपचारिक घोषणा की जा सके।

गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पारस्परिक टैरिफ व्यवस्था के खिलाफ फैसला सुनाया था, जिसे 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के तहत लागू किया गया था।

इस फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों से आने वाले आयात पर समान रूप से 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया था। इसी कारण मुख्य वार्ताकारों की पहले प्रस्तावित बैठक को भी टालना पड़ा था।

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अंतरराष्ट्रीय

अल-अक्सा मस्जिद में घुसपैठ पर कतर ने जताया विरोध, अंतरराष्ट्रीय कानून का बताया उल्लंघन

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दोहा, 1 जून: कतर ने सोमवार को अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली कट्टरपंथियों के घुसने की निंदा की। कतर ने घटना को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और दुनियाभर के करोड़ों मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने वाली अस्वीकार्य कार्रवाई’ बताया।

कतर ने कहा कि अल-अक्सा मस्जिद मुसलमानों का इबादतगाह है और यरुशलम तथा उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिश करने वाले सभी एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य हैं।

कतर के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “कतर अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली कट्टरपंथियों के घुसने और कब्जा करने वाली सेना की सुरक्षा में की गई उनकी उकसाने वाली गतिविधियों की निंदा करता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है, दुनिया भर के लाखों मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली अस्वीकार्य हरकत है, और कब्जे वाले यरुशलम तथा उसके इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों में नई स्थिति थोपने की खतरनाक कोशिश है।”

मंत्रालय ने कहा क‍ि अल-अक्सा मस्जिद केवल मुसलमानों का इबादत स्थल है। यरुशलम और उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति बदलने के लिए उठाए गए सभी एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य हैं।

कतर के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस तरह के उल्लंघन और बार-बार होने वाली उकसाने वाली घटनाएं क्षेत्र में हिंसा और तनाव को और बढ़ा सकती हैं, जिससे शांति और स्थिरता की कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा।

बयान में कहा गया, “मंत्रालय चेतावनी देता है कि इस तरह के उल्लंघनों और लगातार हो रही उकसाने वाली कार्रवाइयों से क्षेत्र में और अधिक हिंसा तथा तनाव पैदा हो सकता है। इससे तनाव कम करने और स्थिरता लाने की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगी।”

कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह तुरंत कदम उठाए और इजरायल को एक कब्जा करने वाली शक्ति के रूप में, फि‍लिस्तीनी लोगों और उनके पवित्र स्थलों के खिलाफ जारी उल्लंघनों को रोकने तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का पालन करने के लिए मजबूर करे।

मंत्रालय ने दोहराया कि कतर फि‍लिस्तीनी मुद्दे और फि‍लिस्तीनी जनता के समर्थन में मजबूती से खड़ा है। कतर का मानना है कि कब्जे का अंत होना चाहिए और फि‍लिस्तीनी लोगों को उनके वैध अधिकार मिलने चाहिए, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फि‍लिस्तीनी राज्य की स्थापना है, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो।

कतर का यह बयान उस घटना के बाद आया जब कुछ इजरायली बसने वालों ने ‘डोम ऑफ द रॉक’ की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर इजरायली झंडे लहराए और पुलिस की सुरक्षा में इजरायल का राष्ट्रगान गाया।

अरब न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग ‘अल-मघराबा गेट’ से मस्जिद परिसर में दाखिल हुए, जिस पर पूरी तरह इजरायली अधिकारियों का नियंत्रण है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जे के बाद से अल-अक्सा मस्जिद परिसर में अक्सर झड़पें होती रही हैं। इनमें इजरायली बसने वालों के छापे और मुस्लिम श्रद्धालुओं पर लगाए गए प्रतिबंध शामिल हैं।

मस्जिद परिसर का प्रशासन जॉर्डन के औकाफ मंत्रालय के पास है, जिसके पास इस क्षेत्र के प्रबंधन और प्रवेश नियंत्रण का कानूनी अधिकार है। जॉर्डन ने भी चेतावनी दी है कि कोई भी ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जिसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक स्थल को समय और क्षेत्र के आधार पर विभाजित करने वाली नई व्यवस्था लागू करना हो।

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