राजनीति
पीयूष गोयल ने बेहतर एफडीआई का हवाला देते हुए विदेशी निवेशकों को आमंत्रित किया
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों की भागीदारी को आमंत्रित करते हुए, मंगलवार को कहा कि अप्रैल-सितंबर की अवधि में देश को 40 अरब डॉलर की एफडीआई प्राप्त हुई है। सीआईआई के पार्टनरशिप समिट 2020 के उद्घाटन सत्र को वर्चुअल तरीके से संबोधित करते हुए रेल, वाणिज्य एवं उद्योग और उपभोक्ता मामले एवं खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री गोयल ने विदेशी निवेशकों को भारत की विकास गाथा का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया।
भारत में विदेशी निवेशकों का स्वागत करते हुए मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार सुधार की राह पर है और बाजारों को वैश्विक निवेशकों के लिए खोला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान, जब कोविड-19 महामारी चरम पर थी, तब हमारी एफडीआई में वृद्धि हुई। हमारे पास दुनिया में सबसे अधिक सुविधाजनक एफडीआई नीतियों में से एक है। अप्रैल-सितंबर की अवधि के दौरान एफडीआई प्रवाह 40 अरब डॉलर रहा है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है।”
गोयल ने कहा कि पिछले साल हमने दुनिया में उपलब्ध सबसे आकर्षक कर दरों में से एक की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दुनिया में कंपनी कर की दर सबसे कम 22 प्रतिशत भारत में ही है। इसके अलावा देश में अक्टूबर 2019 के बाद विनिर्माण संयंत्र लगाने वाली कंपनियों के लिए यह दर 15 प्रतिशत है।
इसके अलावा, गोयल ने कहा कि भारत में आने के लिए उद्योगों को आकर्षित करने के लिए ‘उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन’ (प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव) योजना सहित कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “केंद्र सरकार और राज्य महामारी की शुरूआत से पहले भी निवेश को आकर्षित करने और बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। भारत तेजी से अर्थव्यवस्था और उत्पादकता के स्तर में सुधार के उद्देश्य से सुधार उपायों की घोषणा कर रहा है।”
“भारत हमारी वी-आकार की रिकवरी (तेजी से होता सुधार) में अधिक से अधिक वैश्विक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल सुधार और सुविधा उपायों की शुरूआत कर रहा है। मैं आपको विकास, वृद्धि और समृद्धि की बस में सवार होने के लिए आमंत्रित करता हूं, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भारत के लोगों के लिए तैयार कर रहे हैं।”
राजनीति
इंस्टाग्राम पर सोनिया गांधी का डेब्यू, अपनी किताब ‘बिलॉन्गिंग’ की दिखाई झलक

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर डेब्यू किया और अपनी आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ का पहला लुक शेयर किया। यह किताब 10 नवंबर को जारी होने वाली है।
सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा, “हेलो एवरीवन, मैं आप सभी के साथ यह पल साझा करते हुए वास्तव में आभारी हूं, ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ की पहली झलक। यह प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनेपन की जगह खोजने की कहानी है। मैं इसे आप सभी के साथ साझा करने के लिए उत्सुक हूं।”
सोनिया गांधी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में दिख रहा है कि जब प्रकाशक किताब की हार्डबाउंड कॉपियां लेकर पहुंचे, तो सोनिया गांधी ने कहा, “आप बहुत भारी वजन उठा रही हैं।” इसके बाद उन्हें किताब की पहली कॉपी और मिठाई का डिब्बा दिया गया। वीडियो में सोनिया गांधी मुस्कुराते हुए किताब के साथ पोज देती नजर आईं जबकि आसपास मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उन्हें बधाई दी।
किताब को पलटते हुए और सोनिया गांधी ने कहा, “बहुत सारी तस्वीरें हैं, प्रियंका।” इसके बाद उन्होंने किताब अपनी बेटी को दिखाई। एक अन्य फ्रेम में प्रियंका गांधी अपनी मां को मिठाई खिलाती हुई नजर आईं और दोनों गले मिलते हुए दिखाई दीं।
खास बात यह है कि सोनिया गांधी ने इस पोस्ट में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और प्रकाशक हार्पर कॉलिन्स इंडिया के साथ कोलैब किया है। इस खबर को लिखे जाने तक वीडियो की रीच 10 लाख से अधिक तक पहुंच गई है।
‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ सोनिया गांधी की निजी जिंदगी पर आधारित है, जिसमें उन्होंने प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनेपन की तलाश की कहानी को साझा किया है। यह पहली बार है जब सोनिया गांधी ने अपनी जिंदगी के इतने निजी पहलुओं को किताब के जरिए लोगों के सामने रखने का फैसला किया है।
इंस्टाग्राम पर अकाउंट बनाते ही सोनिया गांधी चर्चा में आ गई हैं। उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। कांग्रेस समर्थकों और आम लोगों में उनकी किताब को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य प्रदेश: मूर्ति विसर्जन जुलूस पर हाईटेंशन लाइन गिरने से दो की मौत, 10 से ज्यादा घायल

मध्य प्रदेश के जबलपुर के मझौली थाना क्षेत्र में मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से कम से कम दो लोगों की मौत हो गई जबकि 10 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
पुलिस के अनुसार, मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और 10 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह हादसा मंगलवार देर रात मझौली थाना क्षेत्र में हुआ। एक समूह मूर्ति विसर्जन के लिए सिविल लाइंस पथ से नरिली तालाब की ओर जा रहा था। इस जुलूस में 50 से अधिक लोग शामिल थे।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, रास्ते से हटाने के लिए 440 वोल्ट के नीचे लटक रहे एक तार को ऊपर उठाया गया, जो ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन लाइन के संपर्क में आ गया। इसके बाद तार टूटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर गिर गया, जिससे वहां मौजूद लोग करंट की चपेट में आ गए।
हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान 22 वर्षीय विकास राजपूत और 23 वर्षीय प्रिंस चौहान के रूप में हुई है। वे ट्रैक्टर पर बैठे थे और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
गंभीर रूप से घायल होने वालों में मयंक राजपूत, विक्की रायकवार, मनीष राजपूत और आयुष रायकवार शामिल हैं। उन्हें पहले मझौली स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया लेकिन हालत गंभीर होने के चलते जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। हादसे की सूचना मिलने पर मझौली थाना प्रभारी पूर्वा चौरसिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं।
घायलों को 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से जबलपुर भेजा गया। पुलिस घटना से जुड़े हालात की जांच कर रही है। इस बीच, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि घायलों को मझौली स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बाद उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली। उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में वहां कोई मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था और डॉक्टर लगभग 30 मिनट बाद पहुंचे।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि जुलूस से पहले पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और आयोजन समिति के सदस्यों के बीच हुई एक बैठक में नीचे लटक रही बिजली लाइनों का मुद्दा उठाया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिजली विभाग से तारों को ठीक से सुरक्षित करने के लिए कहा गया था लेकिन समय रहते कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। पुलिस जांच के बारे में और जानकारी तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई का अभी इंतजार है।
राजनीति
सीएम फडणवीस की पहल, पालघर के 25 हजार स्कूली बच्चों को मिलेगा पौष्टिक भोजन

महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी और ग्रामीण बच्चों के पोषण के लिए एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका में रोजाना 25 हजार बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाला अत्याधुनिक केंद्रीय रसोईघर स्थापित करने का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। इस योजना के पूरा होने से हजारों स्कूली बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना के लिए करीब डेढ़ एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्रीय रसोईघर के निर्माण और संचालन के लिए जरूरी सरकारी अनुमतियां और मंजूरियां लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार विक्रमगढ़ तालुका के 273 स्कूलों में कुल 29,124 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इनमें जिला परिषद के स्कूलों में 15,091 विद्यार्थी, आदिवासी कल्याण विभाग के स्कूलों में 2,636 विद्यार्थी और अनुदानित आदिवासी स्कूलों में 3,607 विद्यार्थी शामिल हैं।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। बेहतर भोजन मिलने से बच्चों की भूख की समस्या कम होगी, स्कूलों में उपस्थिति बढ़ेगी, पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और सीखने की क्षमता में भी सुधार होगा।
प्रस्तावित केंद्रीय रसोईघर की अंतिम क्षमता प्रतिदिन 25 हजार विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने की होगी लेकिन शुरुआत में लगभग 2 हजार से 3 हजार विद्यार्थियों को ही भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद सरकारी मंजूरियों, संचालन की तैयारियों और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर इसका विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
राज्य सरकार की योजना इस मध्याह्न भोजन कार्यक्रम को जिला परिषद स्कूलों, स्वयं वित्तपोषित स्कूलों, निजी अनुदानित स्कूलों और सरकारी मानदंडों के अनुसार पात्र अनुदानित आदिवासी स्कूलों तक पहुंचाने की है। पात्र स्कूलों को धीरे-धीरे इस योजना में शामिल किया जाएगा।
परियोजना में पारदर्शिता और भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी, स्वतंत्र संस्थाओं से लेखा परीक्षण कराया जाएगा और योजना के परिणामों का मूल्यांकन भी किया जाएगा।
पालघर के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए यह प्रस्ताव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीएम देवेंद्र फडणवीस की इस पहल को जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद विक्रमगढ़ के हजारों बच्चों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है, इसलिए निर्माण और संचालन को लेकर अंतिम फैसला सरकारी मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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