राजनीति
1 मार्च, 2021 तक केंद्र सरकार में 9 लाख से अधिक पद खाली पड़े थे
केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9 लाख से अधिक पद 1 मार्च, 2021 तक खाली पड़े थे, गुरुवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी गई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक लिखित उत्तर में कहा : “व्यय विभाग की वेतन अनुसंधान इकाई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के मंत्रालयों में 01.03.2021 तक कुल 9,79,327 पद खाली पड़े थे।”
उन्होंने कहा, सार्वजनिक उपक्रमों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के संबंध में ऐसा कोई डेटा केंद्रीय रूप से नहीं रखा जाता। केंद्र सरकार में पदों का सृजन और उन्हें भरना संबंधित मंत्रालय या विभाग की जिम्मेदारी है जो एक सतत प्रक्रिया है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों या विभागों, उनके संबद्ध या अधीनस्थ कार्यालयों में रिक्तियां सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, इस्तीफे, मृत्यु आदि के कारण उत्पन्न होती हैं। केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों या विभागों को रिक्त पदों को भरने के लिए समयबद्ध तरीके से मिशन मोड में कार्रवाई करने को कहा गया है।
सरकार ने पिछले महीने सशस्त्र बलों में रिक्त पदों को भरने के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा की है।
राजनीति
राघव चड्ढा के वोट कटने पर सियासत तेज, आप ने एसआईआर की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पंजाब की मतदाता सूची से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटने को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ‘आप’ ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अलग-अलग बयान जारी कर राघव चड्ढा के वोट कटने के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा।
आप की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा का नाम पंजाब की मतदाता सूची से एसआईआर प्रक्रिया के तहत काटा गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है। उनके मुताबिक, पंजाब में करीब 20 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि देशभर में लगभग 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश के अलग-अलग राज्यों में इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं तो क्या इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि राघव चड्ढा को केवल अपने वोट की चिंता करने के बजाय पंजाब के उन लाखों लोगों की आवाज भी उठानी चाहिए, जिनके नाम मतदाता सूची से हटे हैं। उन्होंने कहा कि चड्ढा को पंजाब के लोगों ने राज्यसभा भेजा है और उनके प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया में बड़ी खामियां हैं और भाजपा के निर्देश पर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
आप प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली के राजेंद्र नगर में बैक-डेटेड फॉर्म के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की कोशिश की थी। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी वीआईपी के लिए नियमों को दरकिनार कर नाम जोड़ने का प्रयास किया जाता है तो यह उन आम मतदाताओं के साथ अन्याय होगा, जिनके पास ऐसे विकल्प उपलब्ध नहीं हैं।
इस पूरे विवाद पर आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, ऐसे में उनका वोट पंजाब में क्यों होना चाहिए। उन्होंने एसआईआर के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यदि सत्यापन के दौरान कोई व्यक्ति अपने पते पर नहीं मिलता है तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। भारद्वाज के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के तहत राघव चड्ढा का नाम पंजाब की सूची से हटाया गया।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में भी बड़ी संख्या में लोगों के वोट केवल इसलिए हटाए गए क्योंकि वे एक मकान से दूसरे मकान में चले गए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी मकान में किराए पर रह रहा है और बाद में सामने वाले मकान में शिफ्ट हो जाता है तो उसका पता बदलने के कारण उसे एसआईआर फॉर्म नहीं दिया जाता और उसका नाम ‘शिफ्टेड’ दिखाया जा सकता है।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भाजपा राघव चड्ढा के वोट को लेकर चिंता जता रही है, लेकिन दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चुप है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठा रही है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है। भारद्वाज ने दावा किया कि उन्हें कुछ पत्रकारों से बातचीत के दौरान राघव चड्ढा के दिल्ली में बैक-डेट में वोट बनवाने की कथित कोशिश की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने जब चुनाव आयोग से इस संबंध में सवाल पूछा तो कथित तौर पर ऐसी प्रक्रिया को रोक दिया गया।
सौरभ भारद्वाज ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में एसआईआर से पहले की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में गरीब मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति अस्थायी रूप से दूसरे शहर या गांव चला जाता है तो केवल उस समय घर पर मौजूद नहीं होने के आधार पर उसका नाम हटाना उचित नहीं है। सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के पुराने ‘राइट टू रिजेक्ट’ के विचार को लेकर भी उन पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि चड्ढा पहले चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार की बात करते रहे हैं, इसलिए अब उन्हें यह सिद्धांत अपने ऊपर भी लागू करना चाहिए।
भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी के विधायकों ने राज्यसभा भेजा था। पार्टी छोड़ने के बाद उनके नैतिक अधिकार को लेकर सवाल उठना चाहिए। हालांकि, किसी सांसद की पार्टी बदलने या छोड़ने से उसकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। ऐसे मामलों में संवैधानिक और कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
सौरभ भारद्वाज ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उसकी पत्रकारिता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि अखबार के पत्रकारों को राघव चड्ढा के दिल्ली में कथित तौर पर बैक-डेटेड तरीके से वोट बनवाने की कोशिश की जानकारी मिली थी, लेकिन यह खबर प्रकाशित नहीं हुई।
महाराष्ट्र
बीएमसी ने मुंबई सेंट्रल के ऑर्किड सिटी मॉल के खिलाफ कार्रवाई की; मॉल बंद।

मुंबई मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने कोर्ट के दिए गए निर्देशों को लागू करने के लिए मिलकर काम शुरू किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई सेंट्रल इलाके में बेलासिस रोड पर मौजूद ऑर्किड सिटी सेंटर मॉल के बारे में ज़रूरी निर्देश जारी किए थे। इस प्रोसेस के तहत, संबंधित मालिकों/डेवलपर्स के साथ-साथ स्टॉल, यूनिट और दुकानों के यूज़र्स/कब्जा करने वालों को एक जॉइंट नोटिस जारी किया गया है, जिसमें उन्हें ऑर्किड सिटी सेंटर मॉल की जगह खाली करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, साफ़ निर्देश दिए गए हैं कि जब तक संबंधित अथॉरिटी से फॉर्मल परमिशन नहीं मिल जाती, तब तक मॉल की जगह में एंट्री या इस्तेमाल पर रोक है। हाल ही में बीएमसी के ‘डी’ वार्ड ने एक कोऑर्डिनेशन मीटिंग की थी। संबंधित म्युनिसिपल डिपार्टमेंट के अधिकारी, नागपाड़ा पुलिस स्टेशन और बेस्ट अंडरटेकिंग के प्रतिनिधि और ऑर्किड सिटी सेंटर मॉल से जुड़े प्रतिनिधि भी मीटिंग में शामिल हुए। मीटिंग के दौरान, मॉल मैनेजमेंट के प्रतिनिधियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अपनी मर्ज़ी से और सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश 2020 में, मुंबई सेंट्रल में बेलासिस रोड पर स्थित ऑर्किड सिटी सेंटर मॉल में आग लग गई। इस संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त, 2026 को निर्देश जारी किए। यह सख्ती से सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आग के कारण क्षतिग्रस्त हुई पूरी ऑर्किड सिटी सेंटर मॉल की इमारत का किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा, जब तक कि डेवलपर पूरे ढांचे की व्यापक मरम्मत पूरी नहीं कर लेता। जब तक बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) प्रशासन संतुष्ट नहीं हो जाता कि पूरी संरचना (सभी मंजिलों सहित) सभी गतिविधियों और कार्यों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है और सभी कानूनी आवश्यकताओं का पालन करती है, तब तक इमारत का किसी भी तरह से उपयोग नहीं किया जा सकता है। अदालत द्वारा जारी निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पूरी इमारत को पूरी तरह से सील रखा जाए और किसी को भी परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर, बैठक के दौरान ऑर्किड सिटी सेंटर मॉल की इमारत को खाली कराने के लिए एक संयुक्त अभियान चलाने का निर्णय लिया गया, जिसमें बीएमसी के भवन और कारखाना विभाग, भवन प्रस्ताव विभाग और मुंबई फायर ब्रिगेड शामिल थे। इसलिए, बिल्डिंग खाली करने के बारे में संबंधित मालिकों/डेवलपर्स के साथ-साथ स्टॉल, यूनिट और दुकानों के यूज़र्स/कब्जा करने वालों को एक जॉइंट नोटिस जारी किया गया है। मॉल की जगह पर पब्लिक नोटिस लगाए गए हैं, जिसमें लोगों और यूज़र्स को बिल्डिंग में आने, इस्तेमाल करने या उसमें रहने से मना किया गया है। नोटिस में साफ किया गया है कि जब तक माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया जाता और संबंधित अथॉरिटी से पहले से परमिशन नहीं ली जाती, तब तक पूरे ऑर्किड सिटी सेंटर मॉल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, और एंट्री पूरी तरह से मना रहेगी। इस बीच, मॉल की पानी की सप्लाई काटने, म्युनिसिपल लाइसेंस के बारे में सही कार्रवाई करने और बिजली की सप्लाई (कंस्ट्रक्शन के लिए ज़रूरी बिजली को छोड़कर) काटने के निर्देश दिए गए हैं। नागपारा पुलिस को ऑपरेशन को ठीक से चलाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़रूरी पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया गया है।
बीएमसी एडमिनिस्ट्रेशन सभी संबंधित पार्टियों से अपील करता है कि वे अपनी मर्ज़ी से कोर्ट के निर्देशों का पालन करें। उनसे आग्रह किया जाता है कि जब तक संबंधित अथॉरिटी से फॉर्मल परमिशन नहीं मिल जाती, तब तक वे मॉल की जगह में न आएं और न ही उसका इस्तेमाल करें और म्युनिसिपल और पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन के साथ पूरा सहयोग करें। हालांकि, एडमिनिस्ट्रेशन ने यह साफ़ कर दिया है कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो कानून और माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार जगह खाली करने और सील करने के लिए सख़्त कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के संबंधित डिपार्टमेंट अपने-अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से ज़रूरी कार्रवाई करेंगे। एडमिनिस्ट्रेशन ने आगे कहा है कि बिल्डिंग में एंट्री, इस्तेमाल या रहने के बारे में भविष्य में कोई भी परमिशन माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सक्षम अथॉरिटी के तौर पर काम करते हुए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा दी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल त्रासदी : अब तक 1252 शव बरामद, 95 की हो पाई शिनाख्त, चितवन में सबसे ज्यादा मौतें

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार दोपहर तक ‘नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी’ (एनडीआरआरएमए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मरने वाले वालों की संख्या 1252 पहुंच गई है जबकि 4,216 लोग अब भी लापता हैं।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा मौतें चितवन में दर्ज की गई हैं, जहां 355 शव मिले। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 218, नवलपरासी वेस्ट में 208 और नुवाकोट में 177 मौतें हुई हैं। रसुवा, जहां से यह आपदा शुरू हुई थी, वहां 127 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा गोरखा, धाडिंग और तनाहुन जिलों में भी शव बरामद किए गए हैं।
इनमें से केवल 95 लोगों की पहचान हो पाई है। पहचान के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान जारी है। हजारों लोग अभी भी लापता हैं, उनकी तलाश की जा रही है। इनमें विदेशी नागरिकों के साथ-साथ पनबिजली परियोजनाओं के कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि लापता लोगों में सिर्फ पनबिजली परियोजनाओं के लगभग 900 कर्मचारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों से और जानकारी मिलेगी तथा रिपोर्टों का सत्यापन होगा, लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक 11,913 लोगों को सुरक्षित किया जा चुका है। खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए 21,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। करीब 3,950 विस्थापित लोग फिलहाल नुवाकोट, धाडिंग, रसुवा और काठमांडू में बने अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया है। ऐसे इलाकों में सड़क और हेलीकॉप्टर के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। संचार सेवाओं को भी धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है।
-
दुर्घटना12 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
