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पूर्वांचल के बाद अब बुंदेलखंड की बारी – 19 नवंबर को झांसी और महोबा जाएंगे पीएम नरेंद्र मोदी

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19 नवंबर को बुंदेलखंड के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6250 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे , पानी की कमी की समस्या को दूर करने और किसानों को आवश्यक राहत देने के लिए महोबा में अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और साथ ही झांसी में 600 मेगावाट के अल्ट्रा मेगा सोलर पावर पार्क की आधारशिला भी रखेंगे।

बुंदेलखंड , लंबे अरसे से पानी की कमी की समस्या से जुझ रहा है। इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए पीएम मोदी महोबा में 3250 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं ( अर्जुन सहायक परियोजना, रतौली वियर परियोजना, भवानी बांध परियोजना और मझगांव-मिर्च छिड़काव परियोजना ) का उद्घाटन करेंगे। इन परियोजनाओं के पूरा हो जाने से महोबा, हमीरपुर, बांदा और ललितपुर जिलों में लगभग 65000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई में मदद मिलेगी, जिससे क्षेत्र के लाखों किसान लाभान्वित होंगे और साथ इस इलाके में रहने वाले लोगों को पीने योग्य पानी भी मिलने लगेगा।

महोबा के कार्यक्रम के पश्चात पीएम मोदी 19 नंवबर को ही शाम में झांसी पहुंचकर गरौठा में 600 मेगावाट के अल्ट्रा मेगा सोलर पावर पार्क की आधारशिला रखेंगे। जिसका निर्माण 3000 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत से किया जा रहा है, और यह सस्ती बिजली एवं ग्रिड स्थिरता के रूप में दोहरे लाभ प्रदान करने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री झांसी में ही भाजपा के दिग्गज नेता रह चुके पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखे गए ‘अटल एकता पार्क’ का भी उद्घाटन करेंगे। लगभग 40,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले हुए इस पार्क में एक पुस्तकालय के साथ-साथ अटल बिहारी वाजपेयी की एक प्रतिमा भी लगाई गई है। इस प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार ने किया है। यह पार्क 11 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत से बनाया गया है।

झांसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व’ कार्यक्रम में शिरकत करते हुए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के अभियान को बढ़ाना देने के लिए महत्वपूर्ण परियोजना की शुरूआत करेंगे , स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, ड्रोन और नौसेना के जहाजों के लिए उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट सशस्त्र बल सेवा प्रमुखों को औपचारिक रूप से सौंपेंगे, टैंक रोधी निर्देशित मिसाइलों के लिए प्रणोदन प्रणाली का उत्पादन करने के लिए उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे के झांसी खंड में 400 करोड़ रुपये की परियोजना की आधारशिला रखेंगे और साथ ही राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीदों को वास्तविक रूप से श्रद्धांजलि देने की सुविधा राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

आपको बता दें कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोह के हिस्से के रूप में झांसी में 17 से 19 नवंबर तक यह ‘राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व’ मनाया जा रहा है। इसी कार्यक्रम में शिरकत करते हुए पीएम मोदी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए, औपचारिक रूप से स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए उपकरणों को सशस्त्र बलों के सेवा प्रमुखों को सौंपेंगे। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की डिजाइन और विकसित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) को पीएम मोदी औपचारिक तौर पर वायु सेना प्रमुख को सौंपेगें जबकि थल सेनाध्यक्ष को भारतीय स्टार्टअप द्वारा डिजाइन और विकसित किए गए ड्रोन/यूएवी को सौंपा जाएगा। इसके अलावा डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किया गया और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा नौसेना के जहाजों के लिए निर्मित उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट को नौसेनाध्यक्ष को सौंपा जाएगा।

आपको बता दें कि एलसीएच में प्रभावी लड़ाकू भूमिकाओं के लिए उन्नत तकनीकों और कई प्रकार की सुविधाओं को शामिल किया गया है। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा भारतीय यूएवी की तैनाती भी भारतीय ड्रोन उद्योग इकोसिस्टम की बढ़ती परिपक्वता का प्रमाण है। उन्नत ईडब्ल्यू सूट का उपयोग विभिन्न नौसैनिक जहाजों में किया जाएगा, जिनमें विध्वंसक, युद्धपोत आदि शामिल हैं।

एनसीसी के पूर्व छात्रों को एनसीसी के साथ फिर से जोड़ने में सक्षम बनाने के लिए एक औपचारिक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री एनसीसी पूर्व छात्र संघ का भी शुभारंभ करेंगे। यह संघ एनसीसी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगा और राष्ट्र निर्माण में सहायता करेगा। यह संघ प्रधानमंत्री को एक पूर्व एनसीसी कैडेट के रूप में एसोसिएशन के पहले सदस्य के रूप में नामांकित भी करेगा।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

बांग्लादेश के निर्यातकों पर बढ़ा लागत का दबाव, भारत-वियतनाम-चीन से मुकाबले में पिछड़ रहे: रिपोर्ट

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ऊर्जा, वित्तपोषण और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के कारण बांग्लादेश के निर्यातक भारत, वियतनाम और चीन जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी खो रहे हैं। बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती लागत का बोझ निर्यातकों के लिए उठाना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि वे इसका पूरा असर विदेशी खरीदारों पर नहीं डाल पा रहे हैं। इससे निर्यात ऑर्डर घटने और बाजार हिस्सेदारी कम होने का खतरा बढ़ गया है।

उद्योग के अनुमान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गैस और बिजली की कीमतों में वृद्धि, मजदूरी, ब्याज दरों और मुद्रा विनिमय दर में गिरावट के कारण उत्पादन लागत में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में बांग्लादेश का वस्तु निर्यात लगभग 5 प्रतिशत घटकर 47.74 अरब डॉलर रह गया। वहीं, इसी अवधि में वियतनाम का निर्यात 16.8 प्रतिशत और चीन का 5.5 प्रतिशत बढ़ा।

उद्योग जगत का कहना है कि कीमत में मामूली अंतर भी ऑर्डर प्रतिस्पर्धी देशों की ओर मोड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ ने भी निर्यातकों पर दबाव बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट में एक उद्योग विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि यदि बांग्लादेश का एफओबी (फ्री-ऑन-बोर्ड) मूल्य किसी प्रतिस्पर्धी देश से केवल 1-2 प्रतिशत अधिक हो, तो खरीदार ऑर्डर दूसरी जगह भेज सकते हैं।

बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक पूर्व निदेशक के अनुसार, 4 डॉलर कीमत वाले परिधान के 10 लाख पीस के ऑर्डर में केवल 1-2 प्रतिशत कीमत का अंतर 40,000 से 80,000 डॉलर तक का फर्क पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चटग्राम बंदरगाह की नई टैरिफ व्यवस्था के तहत सेवा शुल्क में औसतन 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। वहीं, 20 फुट के कंटेनर का शुल्क 11,849 टका से बढ़कर 16,243 टका हो गया, जो करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि है।

बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष फजलि शमीम एहसान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं या वित्तपोषण मंजूर करने में काफी समय लगा रहे हैं, जबकि सरकार लगातार समर्थन देने की अपील कर रही है।

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राष्ट्रीय समाचार

एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस: एसोचैम

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उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा सोमवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का अगला चरण केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल बनाने पर केंद्रित होना चाहिए जहां निवेश टिकाऊ बने, उसका विस्तार हो और वह देश के आर्थिक एवं औद्योगिक तंत्र के साथ गहराई से जुड़ सके।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में भारत का एफडीआई परिदृश्य काफी बदल गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2000-01 में 4 अरब डॉलर रहे कुल एफडीआई प्रवाह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में एफडीआई इक्विटी निवेश 2 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो गया।

अध्ययन में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच भारत को कुल मिलाकर 1.16 ट्रिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जबकि एफडीआई इक्विटी निवेश 791 अरब डॉलर रहा। यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और एफडीआई नीति में क्रमिक उदारीकरण को दर्शाता है।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगला चरण निवेशकों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना, संचालन करना और विस्तार करना अधिक आसान बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। साथ ही ऐसे निवेशों से देश को मिलने वाले व्यापक आर्थिक लाभों को भी मजबूत करना जरूरी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई अब सेवाओं, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, रसायन, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय निवेश हुआ है।

एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि एफडीआई केवल पूंजी ही नहीं लाता, बल्कि तकनीक, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क भी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश से देश में कितना मूल्य संवर्धन, रोजगार, निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित होती है।

रिपोर्ट में एफडीआई को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें निवेशकों के लिए बेहतर आफ्टरकेयर व्यवस्था, सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, भूमि लागत कम करना, भूमि उपलब्धता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और उपयोगिता सेवाओं में सुधार, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा वित्त तक पहुंच को मजबूत करना शामिल है।

इसके अलावा, अध्ययन में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आधारित निवेश को बढ़ावा देने, निवेश के लिए तैयार औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।

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राष्ट्रीय समाचार

आदिवासी कल्याण घोटाला: कर्नाटक सीएम का बड़ा बयान, बोले- बेगुनाह को देना पड़ा इस्तीफा

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आदिवासी कल्याण घोटाले के सिलसिले में कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र के कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफे का जिक्र करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि विपक्ष के दबाव के कारण सरकार को एक ‘बेगुनाह’ व्यक्ति से इस्तीफा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने भाजपा विधायकों की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने उठाए गए मुद्दों पर चर्चा होने देने के बजाय विधानसभा की कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे।

उन्होंने यह बयान कर्नाटक विधानसभा में सूखा-स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने के फैसले का बचाव करते हुए दिया।

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने जोर देकर कहा कि इन मामलों पर उस ‘स्थगन प्रस्ताव’ के तहत चर्चा होनी चाहिए जिसे उन्होंने स्पीकर को सौंपा था।

नागेंद्र के इस्तीफे का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने विधानसभा में कहा कि हमने विपक्ष के दबाव में एक बेगुनाह व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मैंने ही उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मैंने विपक्ष से पूछा कि वे उनके इस्तीफे की मांग क्यों कर रहे हैं। वे कुछ नहीं बोले और सदन की कार्यवाही में बाधा डाली। बाद में, उन्होंने विरोध मार्च भी निकाला। उन्हें करने दीजिए, लोकतंत्र में इसकी इजाजत है।

शिवकुमार ने कहा कि ‘काम रोको प्रस्ताव’ की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला लिया था।

अशोका ने सरकार से उस प्रावधान के बारे में सवाल किया जिसके तहत विशेष सत्र बुलाया गया था और कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने कहा कि विपक्ष ने ‘काम रोको प्रस्ताव’ अभी पेश किया है, जबकि सरकार ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला लिया था।

शिवकुमार ने कहा कि विपक्ष ने पिछले मॉनसून सत्र में बाधा डाली थी और उन्हें एक मिनट भी बोलने नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए लिखित अनुरोध किया था, लेकिन बाद में कार्यवाही में बाधा डाली, जिससे सरकार को सत्र दो दिन कम करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि अब, मैंने एक विशेष सत्र बुलाया है। उससे पहले, मैंने सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के संबंध में विभिन्न जिलों का दौरा किया है। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर हमारा रुख 27 सितंबर तक केंद्र को बताना है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, विशेष सत्र बुलाया गया है।

शिवकुमार ने कहा कि वह पिछली रिपोर्ट सीधे केंद्र को भेज सकते थे, लेकिन वह चाहते थे कि इन मुद्दों पर चुने हुए प्रतिनिधि चर्चा करें, न कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय बने।

उन्होंने कहा कि इस सत्र में सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा होनी चाहिए। यह सत्र लोगों की इच्छा के अनुसार बुलाया गया है।

उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राज्य के चार डिवीजनों (कलबुर्गी, बेलगावी और चित्रदुर्ग शामिल) में विधायकों के साथ बैठकें की गई थीं।

शिवकुमार ने कहा कि 120 तालुकों को पहले ही सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है, जबकि अन्य 100 तालुकों को इसमें शामिल करने के लिए उनकी जांच की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों ने उन्हें किसानों पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के असर के बारे में बताया है और इसके संभावित नतीजों को गंभीर बताया।

उन्होंने कहा कि सांसदों, विधायकों और एमएलसी को बुलाया गया था और बैठकें की गई थीं।

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