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Monday,21-September-2026
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यूपी को मिली बड़ी सौगात, पीएम नरेंद्र मोदी ने किया नोएडा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का शिलान्यास

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार प्रदेश का दौरा कर जनता को सौगातें दे रहे हैं। पूर्वांचल और बुंदेलखंड की जनता को सौगात देने के बाद गुरुवार को पीएम मोदी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को सौगात देने के लिए गौतमबुद्धनगर के जेवर पहुंचे। जेवर में उत्तर प्रदेश खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को बड़ी सौगात देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गौतमबुद्धनगर जिले में प्रदेश के पांचवे अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का शिलान्यास किया। नोएडा का यह ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट भारत का पहला प्रदूषण मुक्त एयरपोर्ट होगा।

शिलान्यास कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, केंद्रीय मंत्री एस पी सिंह बघेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद महेश शर्मा के अलावा प्रदेश सरकार के कई मंत्री, सांसद, विधायक और भाजपा के नेता भी मौजूद रहे।

नोएडा का यह अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा और इसी के साथ भारत में उत्तर प्रदेश पांच अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला पहला और अकेला राज्य बन गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में यह दूसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा। इससे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी। दरअसल, इस इलाके में पिछले 30-35 वर्षों से इस तरह के एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की मांग की जा रही थी।

अगले 3 साल में यानि 2024 तक इस एयरपोर्ट से उड़ान सेवा शुरू हो जाएगी और इसके प्रथम चरण के पूरा हो जाने के बाद 1.2 करोड़ यात्री सालाना यहां से उड़ान भर सकेंगे। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर, बुलन्दशहर, अलीगढ़, हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ और एनसीआर के इलाके के आस-पास के जिलों में रहने वाले करोड़ो लोगों को फायदा होगा और साथ ही इस इलाके में व्यावसायिक एवं औद्योगिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के प्रथम चरण का विकास 10,050 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जा रहा है हालांकि इस एयरपोर्ट के निर्माण में 34 से 35 हजार करोड़ रुपए की लागत आने की संभावना है। यह 1300 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला है। पहले चरण का निर्माण हो जाने के बाद हवाई अड्डे की क्षमता वार्षिक रूप से 1.2 करोड़ यात्रियों की सेवा करने की हो जायेगी। ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी द्वारा इसका निर्माण किया जा रहा है। पहले चरण का मैदानी काम, यानी भू-अधिग्रहण और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास पूरा किया जा चुका है। इसकी वजह से 1 लाख से अधिक लोगों को नौकरी एवं रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। साथ ही इस इलाके के विकास की वजह से 5 लाख लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिलने की भी संभावना है।

यह हवाई अड्डा उत्तरी भारत के लिये लॉजिस्टिक्स का द्वार भी बनेगा क्योंकि पहली बार भारत में एकीकृत मल्टी मॉडल कार्गो केंद्र के रूप में किसी हवाई अड्डे को बनाया जा रहा है। समर्पित कार्गो टर्मिनल की क्षमता 20 लाख मीट्रिक टन होगी, जिसे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन कर दिया जायेगा। हवाई अड्डे में ग्राउंड ट्रांस्पोर्टेशन सेंटर विकसित किया जायेगा, जिसमें मल्टी मॉडल ट्रांजिट केंद्र होगा, मेट्रो और हाई स्पीड रेलवे के स्टेशन होंगे, टैक्सी, बस सेवा और निजी वाहन पाकिर्ंग सुविधा मौजूद होगी। इस तरह हवाई अड्डा सड़क, रेल और मेट्रो से सीधे जुड़ने में सक्षम हो जायेगा। नोएडा और दिल्ली को निर्बाध मेट्रो सेवा के जरिये जोड़ा जायेगा। आसपास के सभी प्रमुख मार्ग और राजमार्ग, जैसे यमुना एक्सप्रेस-वे, वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे और इस तरह के अन्य एक्सप्रेस-वे को भी हवाई अड्डे से जोड़े जायेंगे। हवाई अड्डे को प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल से भी जोड़ने की योजना है, जिसके कारण दिल्ली और हवाई अड्डे के बीच का सफर मात्र 21 मिनट का हो जायेगा।

यह भारत का पहला ऐसा हवाई अड्डा होगा, जहां उत्सर्जन शुद्ध रूप से शून्य होगा। हवाई अड्डे ने एक ऐसा समर्पित भूखंड चिह्न्ति किया है, जहां परियोजना स्थल से हटाये जाने वाले वृक्षों को लगाया जायेगा। इस तरह उसे जंगलमय पार्क का रूप दिया जायेगा। यहां के सभी मूल जंतुओं की सुरक्षा करने के साथ-साथ हवाई अड्डे के विकास के दौरान प्रकृति का पूरा ध्यान रखा जायेगा।

राष्ट्रीय समाचार

एमएलएस: 2-2 से ड्रॉ रहा इंटर मियामी और सैन डिएगो के बीच खेला गया मुकाबला, मेसी ने दागा एक गोल

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एमएलएस रेगुलर सीजन में इंटर मियामी सीएफ और सैन डिएगो एफसी के बीच मुकाबला 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ। इंटर मियामी को इस मैच में एक अंक मिला। टीम के लिए कप्तान लियोनेल मेसी और स्टार स्ट्राइकर लुइस सुआरेज ने गोल किए।

मेहमान टीम सैन डिएगो एफसी ने मैच के 12वें मिनट में एंडर्स ड्रायर के गोल की मदद से बढ़त हासिल की। इसके बाद 24वें मिनट में लियोनेल मेसी ने इंटर मियामी की ओर से शानदार गोल दागते हुए स्कोर को 1-1 से बराबर कर दिया। मेसी की फ्री-किक सीधे गोल के ऊपरी बाएं कोने में गई और गोलकीपर उसे रोक नहीं पाया।

यह मेसी का इस सीजन का 20वां गोल रहा। वह एमएलएस 2026 गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही मेसी एमएलएस इतिहास के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने लगातार तीन सीजन में 20 या उससे अधिक गोल किए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि एलएएफसी के डेनिस बुआंगा ने 2023 से 2025 के बीच हासिल की थी।

मेसी के इस गोल ने गोल्डन बूट की रेस में उनकी बढ़त को और मजबूत कर दिया है; उनके नाम लीग में सबसे ज्यादा 33 गोल योगदान (गोल + असिस्ट) हैं और वह एमएलएस में गोल (20) और असिस्ट (13) के मामले में सबसे आगे हैं। हाफ टाइम तक स्कोर 1-1 रहा, जिसके बाद दूसरे हाफ में इंटर मियामी ने जीत हासिल करने के लिए लगातार 45 मिनट तक हमले जारी रखे।

मेजबान टीम की कोशिशों का फल उन्हें 74वें मिनट में मिला। डी पॉल ने बॉक्स के दाईं ओर सुआरेज को एक सटीक पास दिया, जहां उरुग्वे के दिग्गज फॉरवर्ड ने अपने दाहिने पैर से पहला शॉट लेते हुए गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया। यह इस रेगुलर सीजन में सुआरेज का 13वां गोल था, जबकि इस असिस्ट के साथ डी पॉल के असिस्ट की संख्या 12 हो गई।

सैन डिएगो ने 82वें मिनट में एक बार फिर स्कोर को 2-2 से बराबर कर दिया। मैच के आखिरी पलों में इंटर मियामी को हमले के कई मौके मिले, लेकिन 90+6वें मिनट में मैच के आखिरी प्ले के दौरान गोलकीपर सेंट क्लेयर ने सैन डिएगो के कीरन सार्जेंट के शॉट को रोककर टीम की हार को टाला। इसके बाद इंटर मियामी अपने अगले एमएलएस मुकाबले के लिए 28 सितंबर को ओहायो के कोलंबस शहर जाएगी। वहां टीम का सामना स्कॉट्समिरेकल-ग्रो फील्ड में कोलंबस क्रू से होगा।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

बांग्लादेश के निर्यातकों पर बढ़ा लागत का दबाव, भारत-वियतनाम-चीन से मुकाबले में पिछड़ रहे: रिपोर्ट

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ऊर्जा, वित्तपोषण और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के कारण बांग्लादेश के निर्यातक भारत, वियतनाम और चीन जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी खो रहे हैं। बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती लागत का बोझ निर्यातकों के लिए उठाना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि वे इसका पूरा असर विदेशी खरीदारों पर नहीं डाल पा रहे हैं। इससे निर्यात ऑर्डर घटने और बाजार हिस्सेदारी कम होने का खतरा बढ़ गया है।

उद्योग के अनुमान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गैस और बिजली की कीमतों में वृद्धि, मजदूरी, ब्याज दरों और मुद्रा विनिमय दर में गिरावट के कारण उत्पादन लागत में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में बांग्लादेश का वस्तु निर्यात लगभग 5 प्रतिशत घटकर 47.74 अरब डॉलर रह गया। वहीं, इसी अवधि में वियतनाम का निर्यात 16.8 प्रतिशत और चीन का 5.5 प्रतिशत बढ़ा।

उद्योग जगत का कहना है कि कीमत में मामूली अंतर भी ऑर्डर प्रतिस्पर्धी देशों की ओर मोड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ ने भी निर्यातकों पर दबाव बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट में एक उद्योग विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि यदि बांग्लादेश का एफओबी (फ्री-ऑन-बोर्ड) मूल्य किसी प्रतिस्पर्धी देश से केवल 1-2 प्रतिशत अधिक हो, तो खरीदार ऑर्डर दूसरी जगह भेज सकते हैं।

बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक पूर्व निदेशक के अनुसार, 4 डॉलर कीमत वाले परिधान के 10 लाख पीस के ऑर्डर में केवल 1-2 प्रतिशत कीमत का अंतर 40,000 से 80,000 डॉलर तक का फर्क पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चटग्राम बंदरगाह की नई टैरिफ व्यवस्था के तहत सेवा शुल्क में औसतन 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। वहीं, 20 फुट के कंटेनर का शुल्क 11,849 टका से बढ़कर 16,243 टका हो गया, जो करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि है।

बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष फजलि शमीम एहसान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं या वित्तपोषण मंजूर करने में काफी समय लगा रहे हैं, जबकि सरकार लगातार समर्थन देने की अपील कर रही है।

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राष्ट्रीय समाचार

एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस: एसोचैम

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उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा सोमवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का अगला चरण केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल बनाने पर केंद्रित होना चाहिए जहां निवेश टिकाऊ बने, उसका विस्तार हो और वह देश के आर्थिक एवं औद्योगिक तंत्र के साथ गहराई से जुड़ सके।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में भारत का एफडीआई परिदृश्य काफी बदल गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2000-01 में 4 अरब डॉलर रहे कुल एफडीआई प्रवाह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में एफडीआई इक्विटी निवेश 2 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो गया।

अध्ययन में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच भारत को कुल मिलाकर 1.16 ट्रिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जबकि एफडीआई इक्विटी निवेश 791 अरब डॉलर रहा। यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और एफडीआई नीति में क्रमिक उदारीकरण को दर्शाता है।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगला चरण निवेशकों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना, संचालन करना और विस्तार करना अधिक आसान बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। साथ ही ऐसे निवेशों से देश को मिलने वाले व्यापक आर्थिक लाभों को भी मजबूत करना जरूरी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई अब सेवाओं, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, रसायन, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय निवेश हुआ है।

एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि एफडीआई केवल पूंजी ही नहीं लाता, बल्कि तकनीक, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क भी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश से देश में कितना मूल्य संवर्धन, रोजगार, निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित होती है।

रिपोर्ट में एफडीआई को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें निवेशकों के लिए बेहतर आफ्टरकेयर व्यवस्था, सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, भूमि लागत कम करना, भूमि उपलब्धता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और उपयोगिता सेवाओं में सुधार, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा वित्त तक पहुंच को मजबूत करना शामिल है।

इसके अलावा, अध्ययन में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आधारित निवेश को बढ़ावा देने, निवेश के लिए तैयार औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।

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