राजनीति
यूपी में बसपा के बाद ब्राह्मणों को लुभाने में जुटी सपा और कांग्रेस
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बाद अब अधिक से अधिक राजनीतिक दल ब्राह्मणों को लुभाने के लिए उत्तर प्रदेश में परशुराम पथ का सहारा ले रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस भी अब ब्राह्मणों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के पांच वरिष्ठ ब्राह्मण नेताओं – यूपी विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे, मनोज पांडे, अभिषेक मिश्रा, सनातन पांडे और पवन पांडे के साथ बैठक की।
तीन घंटे चली बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि पार्टी अगले महीने से प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन आयोजित करेगी, ताकि ब्राह्मण समुदाय से संपर्क स्थापित किया जा सके।
पहला सम्मेलन 22 अगस्त को सिद्धार्थ नगर में, 24 अगस्त को बलिया में और उसके बाद 25 और 26 अगस्त को मऊ और औरैया में भी इसी तरह के कार्यक्रम होंगे।
अखिलेश यादव ने ब्राह्मण आउटरीच, मुद्दों और रणनीति की योजना बनाने के लिए पांच नेताओं की एक कोर कमेटी भी बनाई है।
ब्राह्मणों को लुभाने की सपा की कोशिश ऐसे समय में आई है, जब बसपा भी ब्राह्मणों को जिताने के लिए प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन कर रही है।
हालांकि, सपा अध्यक्ष ने विशेष रूप से अपने नेताओं से कहा है कि वे ओवरबोर्ड न जाएं या हिंदुत्व कार्ड न खेलें, जो पार्टी के मुस्लिम आउटरीच को खतरे में डाल सकता है। मुस्लिम यूपी में समाजवादी पार्टी का मूल आधार वोट रहते हैं। यही कारण है कि पार्टी संतुलित तरीके से ब्राह्मण वोटबैंक को साधना चाहती है।
सूत्रों ने कहा कि पार्टी जिला स्तर पर ब्राह्मण समुदाय के सामने आने वाले मुद्दों को सूचीबद्ध करेगी और एक श्वेत पत्र तैयार करेगी।
सपा हर जिले में भगवान विष्णु के छठे अवतार और एक ब्राह्मण विचारक भगवान परशुराम की प्रतिमाएं भी लगा रही है।
समाजवादी प्रबुद्ध समाज के प्रदेश अध्यक्ष और ब्राह्मण सम्मेलनों के पीछे पार्टी के सूत्रधार मनोज पांडे ने कहा, हमने लगभग एक साल पहले हर जिले में भगवान परशुराम की मूर्तियों को स्थापित करने की घोषणा की थी। हमने लगभग 50 जिलों में इस उद्देश्य के लिए भूमि और मूर्तियों की पहचान की है। जालौन, औरैया और बलरामपुर सहित 8 जिलों में मूर्ति पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं।
इस बीच, सपा के पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा ने इन अटकलों को खारिज कर दिया कि सपा बसपा से प्रेरणा लेकर ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कर रही है।
मिश्रा ने कहा, पार्टी ने बहुत पहले घोषणा की थी कि वह लखनऊ में भगवान परशुराम की 108 फीट की मूर्ति स्थापित करेगी। मूर्ति जयपुर में बनाई जा रही है और जल्द ही लखनऊ में स्थापित की जाएगी। सपा सरकार ने परशुराम जयंती पर छुट्टी की भी घोषणा की थी, जो फैसला बाद में योगी आदित्यनाथ सरकार ने वापस ले लिया।
रिपोर्ट्स हैं कि लखनऊ में मूर्ति की स्थापना एक बहुत बड़ा आयोजन होगा।
पार्टी इस तथ्य को भी सामने लाएगी कि उसने 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में 42 ब्राह्मणों को टिकट दिया था और उनमें से 23 जीते थे।
इस बीच, कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी ने पहली बार पिछले एक साल से जेल में बंद बिकरू नाबालिग विधवा खुशी दुबे के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा, यह योगी आदित्यनाथ सरकार की ब्राह्मण विरोधी मानसिकता है, जो खुशी को पीड़ित करने के लिए जिम्मेदार है, जिसकी शादी को सिर्फ तीन दिन हुए थे और उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
आम आदमी पार्टी पिछले कई महीनों से खुशी की आजादी के लिए अभियान चला रही है।
राजनीति
‘राहुल के शो हाउसफुल, प्रधानमंत्री के टिकट काउंटर पर सन्नाटा’ : शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा गया है। संपादकीय में कहा गया है कि इंदौर में राहुल गांधी के साथ मिमिक्री में हिस्सा लेने वाले पुलकित मणि का दूसरे दिन का कॉमेडियन शो रद्द करने के लिए मजबूर किया गया।
‘सामना’ में लिखा गया है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में पीछे जा रहा है और प्रधानमंत्री सिर्फ नेताओं को जोर से गले लगाने के लिए वैश्विक आयोजन कर रहे हैं, इसका एक व्यंग्य चित्र सार्वजनिक मंच पर राहुल गांधी ने बनाया। इस पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह व्यंग्य चित्र देश का अपमान है। इस पर संपादकीय में सवाल उठाया गया है- फडणवीस यह कैसे कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री ही देश हैं?
संपादकीय में लिखा गया है कि इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में गांधी की मौजूदगी में प्रधानमंत्री की नकल की गई, इससे भाजपा वालों को तकलीफ हुई। देवेंद्र फडणवीस का मार्गदर्शन है कि ‘राहुल गांधी को स्टैंड-अप कॉमेडियन बनना चाहिए।’ लेकिन सच तो यह है कि 90 प्रतिशत भाजपा वाले राहुल गांधी से खुश हैं।
‘सामना’ में लिखा गया कि अगर राहुल गांधी ने स्टैंड-अप कॉमेडियन का पेशा अपना लिया तो प्रधानमंत्री का क्या होगा, उनके पास क्या काम बचेगा, वे और उनका अनुसरण करने वाले बेरोजगार हो जाएंगे।
संपादकीय में प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए लिखा गया है कि प्रधानमंत्री वैश्विक नेताओं से मिलने जाते हैं तो उनके गले पड़कर इतनी कसकर गले लगाते हैं कि उस विदेशी नेता का दम घुटने लगता है। हाथ मिलाते हैं तो इतनी जोर से हाथ दबाते हैं कि मेहमान के चेहरे पर दर्द साफ दिखता है।
संपादकीय में लिखा गया है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति पेशे से कॉमेडियन हैं और पीएम मोदी उन्हें मित्र मानते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने तो कॉमेडी की पराकाष्ठा ही पार कर ली है। उनकी उछल-कूद और व्यवहार देखकर हंसी से लोटपोट हो जाएं ऐसा है। राष्ट्रपति ट्रंप के हास्य के प्रधानमंत्री प्रशंसक हैं।
संपादकीय के अनुसार, संसद में प्रधानमंत्री के संबोधन की शैली कई बार गंभीर संसदीय परम्पराओं के अनुरूप प्रतीत नहीं होती। उन्होंने इसकी तुलना मिमिक्री या कॉमेडी से की, साथ ही यह कहकर भी आलोचना की कि ऐसे संबोधन में तार्किक चर्चा के बजाय नाटकीयता, विशेष शारीरिक हाव-भाव और हास-परिहास का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। सामना में नेहरू और गांधी का जिक्र करते हुए कहा गया कि ऐसे व्यक्तित्वों का मजाक उड़ाया जाता है। संपादकीय में प्रधानमंत्री पर सार्वजनिक संदेशों और उनके व्यक्तिगत निर्णयों में विरोधाभास का भी आरोप लगाया गया। वक्तव्य में कहा गया है कि विभिन्न कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री के भावुक होने, या अत्यधिक अनौपचारिक आचरण दिखाने जैसे तौर-तरीकों को केवल दिखावा मात्र माना जा सकता है।
‘सामना’ में तंज कसते हुए लिखा गया है कि प्रधानमंत्री के ‘कॉमेडी शो’ के टिकट काउंटर की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर है, लेकिन फिलहाल इस टिकट काउंटर पर सन्नाटा है और राहुल गांधी के सभी शो हाउसफुल चल रहे हैं।
संपादकीय में यह भी कहा गया है कि जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब उनका भी मजाक उड़ाया था। ‘मौनीबाबा’, ‘नीतिगत पक्षाघात’ जैसे विशेषण लगाकर उनका अपमान किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
प्योंगयांग से बातचीत की अपील, दक्षिण कोरिया-यूएस-जापान ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर जताई प्रतिबद्धता

दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के शीर्ष राजनयिकों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही प्योंगयांग से बातचीत फिर शुरू करने की अपील भी की है। तीनों देशों ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला हुआ है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह से इतर त्रिपक्षीय बैठक की।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तीनों देशों ने “उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से होने वाली आय को रोकने तथा संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों को लागू करने की प्रतिबद्धता” भी दोहराई।
बयान में कहा गया, “तीनों देशों ने डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) यानी उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। बातचीत का रास्ता खुला है और उत्तर कोरिया को बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए।”
योनहाप के मुताबिक यह अपील ऐसे समय की गई है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है। उत्तर कोरिया ने मंगलवार को बताया कि उसके नेता किम जोंग-उन की मौजूदगी में रविवार को एक नए हथियार तंत्र का परीक्षण किया गया। उत्तर कोरिया ने इस हथियार के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन इसे अपनी हथियार तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उत्तर कोरिया के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस इच्छा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है कि वह इस साल किम जोंग-उन के साथ फिर बैठक कर अपनी व्यक्तिगत कूटनीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
हालांकि अमेरिका ने प्योंगयांग के साथ बातचीत की संभावना खुली रखने के साथ ही दक्षिण कोरिया और जापान की रक्षा के प्रति अपनी ‘आयरनक्लैड’ प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
बयान के अनुसार “अमेरिका ने कहा कि दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता अमेरिकी सैन्य क्षमता और उसकी परमाणु क्षमताओं से स्वीकृत है।”
तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने उत्तर कोरिया द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के उल्लंघन और उनसे बचने के प्रयासों की निगरानी करने वाले बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी दल (एमएसएमटी) के काम का भी स्वागत किया।
उन्होंने उत्तर कोरिया के आईटी कर्मचारियों से जुड़े साइबर खतरों को लेकर विभिन्न देशों द्वारा जारी चेतावनियों का भी स्वागत किया। “तीनों देशों ने जून में हुई त्रिपक्षीय कार्य समूह की बैठक के जरिए उत्तर कोरिया से जुड़े साइबर खतरों से निपटने के प्रयासों में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।”
बैठक में ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। तीनों देशों ने ताइवान से जुड़े मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया और यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध किया।
उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया के अन्य हिस्सों में नौवहन तथा हवाई उड़ान की स्वतंत्रता, निर्बाध वैध व्यापार और समुद्र के अन्य वैध उपयोगों को बनाए रखने के समर्थन की बात कही। इन सभी गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुरूप रखने पर जोर दिया गया।
ताइवान का मुद्दा ऐसे समय में चर्चा में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को व्हाइट हाउस में शिखर बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच भू-राजनीतिक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, चो, रुबियो और मोतेगी ने पूर्वोत्तर एशिया तथा पश्चिम एशिया की स्थिति समेत प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। तीनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच आपसी संपर्क और समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
बैठक में आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। तीनों देशों ने आर्थिक दबाव तथा गैर-बाजार नीतियों और ऐसी गतिविधियों का विरोध करने की बात कही, जिनसे बाजार में असंतुलन पैदा होता है और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है।
तीनों देशों ने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने तथा स्वतंत्र और पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके तहत त्रिपक्षीय आपूर्ति श्रृंखला प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने और आर्थिक सुरक्षा पर नई त्रिपक्षीय बातचीत शुरू करने का स्वागत किया गया।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी तीनों देशों ने क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। इसमें तेल भंडार बढ़ाना तथा तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
विदेश मंत्रियों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती में तेजी लाने के लिए 7 जुलाई को हुए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन को लागू करने की योजना पर भी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि यह काम परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा मानकों और परमाणु अप्रसार के उच्चतम मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
इसके अलावा तीनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, डिजिटल बुनियादी ढांचे और जैव प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के विकास और सुरक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई।
दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के शीर्ष राजनयिकों की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तीनों देशों के बीच समन्वय लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। इससे पहले तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक 7 जुलाई को तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान और 22 जुलाई को फिलीपींस में आसियान से जुड़े क्षेत्रीय मंच के दौरान हुई थी।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने कक्षा 6 से 8 तक के लिए विस्तारित नाश्ता योजना शुरू की

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को ‘पेरुंथलैवर कामराज ब्रेकफास्ट स्कीम’ का विस्तार किया। इसके तहत राज्य भर के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को सुबह का मुफ्त नाश्ता दिया जाएगा।
विजय ने चेन्नई के थिरुवनमियूर में गांधीग्राम स्थित कॉर्पोरेशन मिडिल स्कूल में विस्तार कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने छात्रों को पोंगल परोसा और फिर उनके साथ बैठकर नाश्ता किया।
इस विस्तार से कार्यक्रम के तहत 15.30 लाख और छात्र जुड़ेंगे। कुल मिलाकर, 44,984 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 34.64 लाख बच्चों को अब इस योजना का लाभ मिलेगा।
राज्य सरकार ने इस विस्तारित कार्यक्रम को लागू करने के लिए अतिरिक्त 217.63 करोड़ आवंटित किए हैं। इसे चेंगलपट्टू जिले के मदुरंतकम निर्वाचन क्षेत्र और तिरुप्पुर जिले के धारापुरम को छोड़कर सभी जिलों में शुरू किया गया है, जहां विधानसभा उपचुनाव होने हैं।
नाश्ता कार्यक्रम मूल रूप से 2022 में डीएमके सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा शुरू किया गया था। शुरुआत में यह सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए था और बाद में इसे सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों तक भी बढ़ा दिया गया।
इस कार्यक्रम को बच्चों में कुपोषण से लड़ने, स्कूल में बच्चों की हाजिरी बढ़ाने और स्टूडेंट्स को पढ़ाई बीच में छोड़ने के बजाय उसे जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से शुरू किया गया था।
हाल ही में इसे बढ़ाने से पहले, इसमें 37,447 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 19.34 लाख स्टूडेंट्स शामिल थे।
टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद इस कार्यक्रम का नाम बदलकर ‘पेरुंथलैवर कामराज ब्रेकफास्ट स्कीम’ कर दिया गया। बाद में विजय ने घोषणा की कि इसे छठी, सातवीं और आठवीं क्लास तक बढ़ाया जाएगा।
इसे शुरू करने का कार्यक्रम पहले 17 सितंबर के लिए तय किया गया था, जो समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी की जयंती का दिन था। इसे 22 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया, क्योंकि विजय तमिलनाडु में औद्योगिक निवेश लाने के लिए लंदन गए हुए थे।
तय किए गए साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार, छात्रों को सोमवार को उपमा, मंगलवार को खिचड़ी, बुधवार को पोंगल, गुरुवार को उपमा और शुक्रवार को मीठा व्यंजन परोसा जाएगा।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि खाना पौष्टिक हो और साफ़-सुथरे माहौल में तैयार किया जाए।
सीएम विजय ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे किचन और डाइनिंग एरिया का नियमित निरीक्षण करें, साफ-सफाई बनाए रखें और स्टूडेंट्स को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी और समय पर वितरण पर कड़ी नजर रखें।
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