राजनीति
‘लाया जाएगा अविश्वास प्रस्ताव’, विपक्ष के सांसदों ने ओम बिरला पर आवाज दबाने का आरोप लगाया
नई दिल्ली, 9 फरवरी : विपक्ष के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। उनका आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया है। इस पर कांग्रेस नेताओं ने जमकर प्रतिक्रिया दी है और इसे संसद की परंपरा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है। सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे। सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है।”
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष एक संवैधानिक पद है, यह सत्ताधारी पार्टी का नहीं है। जिस तरह से विपक्ष के नेता की आवाज को भेदभाव के साथ दबाया जा रहा है, वह बहुत चिंताजनक है। यह संसद है, सेंसर बोर्ड नहीं।” उनका इशारा लोकसभा में विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने की ओर था, जो उनके अनुसार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा का नहीं, बल्कि सदन की परंपरा और उसकी गरिमा का है। उन्होंने यह सवाल उठाया, “क्या कभी आपने सुना है कि संसद में प्रधानमंत्री महिला सांसदों से डरते हैं? यह शर्मनाक नहीं है?” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए और इसी कारण विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने पर मजबूर है।
कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की और कहा, “स्पीकर को सभी पार्टियों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन ओम बिरला ने भाजपा की पार्टी लाइन अपनाई है, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।” उनका मानना है कि स्पीकर को सदन की परंपरा का पालन करना चाहिए।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अविश्वास प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जब आएगा तो हम आपको बताएंगे।”
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “हम बजट पर बोलने आए थे, लेकिन अब लग रहा है कि सरकार और स्पीकर संसद की कार्यवाही में कोई दिलचस्पी नहीं रखते।”
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा, “संसद बहस और प्रक्रिया का पालन करने के लिए है। विपक्ष को देश से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जगह देनी चाहिए। यह अविश्वास प्रस्ताव उसी का हिस्सा है।”
राजनीति
टीएमसी के बैंक खातों को फ्रीज करने से जुड़ी याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चार बैंक खातों को फ्रीज करने से जुड़ी याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल-जज बेंच में बुधवार को सुनवाई होगी।
राज्य पुलिस ने साइबर क्राइम से जुड़ी एक एफआईआर के आधार पर चार बैंक अकाउंट को फ्रीज करने का आदेश दिया था। हालांकि, टीएमसी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इन चार बैंक अकाउंट के जरिए किसी भी तरह के गैरकानूनी लेन-देन का कोई सबूत नहीं मिला है।
यह मामला आज जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच के सामने सुनवाई के लिए आएगा। याचिका में, याचिकाकर्ता के वकीलों ने पार्टी के जरूरी खर्चों के लिए फ्रीज किए गए अकाउंट से पैसे निकालने की इजाजत मांगी है।
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर अनुमति कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष अधिकारी के जरिए दी जाए, तो बेहतर होगा। ऐसा पहले भी एक निजी बैंक में रखे 3 अन्य बैंक खातों के मामले में किया गया था। उन खातों पर पहले राज्य पुलिस के निर्देश पर और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इसी तरह के निर्देशों पर डेबिट पर रोक लगाई गई थी।
इससे पहले, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें उसने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से बैंक खाते फ्रीज किए जाने को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह ध्यान में रखते हुए एक संतुलित आदेश दिया है कि पार्टी के पास रोजमर्रा के कामकाज चलाने के लिए पर्याप्त फंड मौजूद है।
कोर्ट ने कहा कि चूंकि पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से टीएमसी के खातों को फ्रीज करने के आदेश से जुड़ी याचिका समेत यह मामला हाई कोर्ट में लंबित है, इसलिए मामले के गुण-दोष पर कोई भी चर्चा करना उचित नहीं होगा।
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लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’, नेताओं ने कहा-देश को करना पड़ा सालों तक इंतजार

इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम’ गूंजेगा। इस ऐतिहासिक फैसले पर नेताओं ने खुशी जताई और इसे देश की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान बताया।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने से कहा, “देश को उस अमर गीत को सुनने के लिए इतने साल इंतजार करना पड़ा, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों लोगों को बलिदान और देश के लिए समर्पण की प्रेरणा दी। मेरा मानना है कि उन सभी लोगों की आत्माएं और दिल निश्चित रूप से शांति और खुशी महसूस करेंगे जब राष्ट्र का वह अमर गीत लाल किले की प्राचीर से गूंजेगा।”
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, “वंदे मातरम। प्रधानमंत्री ने देश की जनता से संकल्प लिया था कि हम सब मिलकर हर घर में तिरंगा फहराएंगे। यह एक बहुत बड़ा संदेश है।”
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “वंदे मातरम बहुत पहले से गूंजना चाहिए था। बंकिम चंद्र चटर्जी ने इसे एक विशेष भावना के साथ लिखा था, और स्वतंत्र भारत ने उसे उसी भावना से स्वीकार किया। कुछ लोगों ने वंदे मातरम् को बांटने की कोशिश की, लेकिन जब देश की जनता ने पीएम मोदी को नेतृत्व सौंपा, तो वह बांटने वाली भावना खत्म हो गई। वंदे मातरम को एक बार फिर पूरे रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा है, और इस साल इसे लाल किले पर भी बजाया जाएगा।”
भाजपा सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा, “भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम’ के नारे ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई। कई सालों तक इसकी उपेक्षा होना दुर्भाग्यपूर्ण था। आज हम सौभाग्यशाली हैं कि पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘वंदे मातरम’ की गूंज एक बार फिर लाल किले से सुनाई देगी और पूरी दुनिया में सुनी जाएगी।”
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से ‘वंदे मातरम’ का पहली बार बजना देशभर में देशभक्ति की भावना को और मजबूत करेगा। नेताओं का मानना है कि यह गीत न सिर्फ स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी देशसेवा की प्रेरणा देगा।
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प्रधानमंत्री मोदी को आई मां की याद, बोले- ‘आज भी महसूस करता हूं कमी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपनी मां को याद किया। उन्होंने कहा कि वे आज भी मां की कमी महसूस करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ के विमोचन के समय उनके जीवन संघर्षों का विशेष उल्लेख किया। इसी बीच, पीएम मोदी ने अपनी मां को भी याद किया।
उन्होंने कहा, “मैं भाग्यशाली रहा हूं कि मेरी मां सौ साल से भी अधिक समय तक जीवित रहीं और मुझे आशीर्वाद देती रहीं। उसके बावजूद आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।”
रामनाथ कोविंद के जीवन के बारे में बात करते प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी अनुभव करते हैं कि इंसान का एक स्वभाव होता है और लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते हैं, जबकि जीवन की मुश्किलों और कठिनाइयों के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं। मगर जब हृदय उदार हो, भारतीय संस्कार हो, तब व्यक्ति समाज की कमियां निकालने में समय नहीं गंवाता है। वह उसके सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है। वह अपनी सफलता में समाज को बराबर की भागीदार मानता है। रामनाथ कोविंद की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा, “रामनाथ कोविंद का कानपुर देहात के क्षेत्र में एक साधारण परिवार में जन्म हुआ। कोविंद जी ने अपनी किताब में है ‘कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई। उनकी मां अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थी। आखिर एक सामान्य परिवार में मां के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है। उसी कोशिश में आग में फंसकर उनकी मां की मृत्यु हो गई। आप कल्पना कर सकते हैं कि छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना कितना दर्दनाक रही होगी। यह ऐसा घटनाक्रम था, कोई भी उससे टूट सकता था, लेकिन कोविंद जी को उन मुश्किलों को मजबूत किया। पड़ोस की एक माता जी ने उनके पालन-पोषण में मदद की”
पीएम मोदी ने आगे कहा, “संघर्षों के बीच रामनाथ कोविंद ने शिक्षा को अपना सामर्थ बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की, संसाधनों की कमी को कमजोर नहीं बनने दिया और एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना तब लोगों ने नहीं की होगी। वे भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने। इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कोविंद जी का विनम्र व्यक्तित्व और उनकी सादगी कायम रही।”
उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद के भीतर देशसेवा की भावना थी। मोरारजी भाई देसाई के साथ काम करके उन्हें सीखने को मिला। साथ ही,नया रास्ता मिला। वहां से राजनीति और समाजसेवा को कोविंद जी ने अपना मार्ग बनाया। वे अपने कर्तव्यों के लिए समर्पित रहे और सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया। संसद में रामनाथ कोविंद का कार्यकाल इसका गवाह है।
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