राजनीति
सरकार जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के नए आंकड़ों की सीरीज जारी करने वाली है: राव इंद्रजीत सिंह
GDP
नई दिल्ली, 9 फरवरी : सरकार ने मुख्य आर्थिक आंकड़ों की प्रासंगिकता, सटीकता और अंतरराष्ट्रीय तुलना को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक समीक्षा पूरी की है। इसके बाद सरकार नए बेस ईयर (आधार वर्ष) पर आधारित जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी की नई सीरीज जारी करने जा रही है। जीडीपी के नए आंकड़े 27 फरवरी को, सीपीआई के आंकड़े 12 फरवरी को और आईआईपी के आंकड़े 28 मई को जारी किए जाएंगे। यह जानकारी सोमवार को संसद में दी गई।
राज्यसभा में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने इन तीनों आर्थिक सूचकांकों के बेस ईयर को बदलने के लिए एक विस्तृत और गहन प्रक्रिया पूरी की है, जिसका उद्देश्य इन आंकड़ों को ज्यादा प्रासंगिक, सटीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है।
मंत्री ने बताया कि जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के बेस ईयर में बदलाव का काम तकनीकी सलाहकार समितियों की देखरेख में किया गया है। इन समितियों में विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अन्य संस्थानों के जानकार शामिल हैं। इस प्रक्रिया में गणना के तरीकों में सुधार, नए डेटा स्रोतों को जोड़ना और वजन को अपडेट करना शामिल है।
सरकार ने बताया कि सीपीआई और जीडीपी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के विशेष डेटा प्रसार मानकों यानी एसडीडीएस का पालन करते हैं। इन मानकों में डेटा की उपलब्धता, समय पर जारी होना, जनता की पहुंच, डेटा की सच्चाई और उसकी गुणवत्ता जैसे अहम पहलू शामिल होते हैं।
सरकार के अनुसार, हाल के सांख्यिकीय सुधारों से देश के आर्थिक आंकड़े पहले से ज्यादा भरोसेमंद, समय के अनुरूप और उपयोगी बने हैं। जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के बेस ईयर को अपडेट करने से देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर सामने आएगी, खासकर सेवा क्षेत्र और अनौपचारिक क्षेत्र की बेहतर गणना हो सकेगी।
इसके साथ ही, सरकार ने डेटा की गुणवत्ता, समय पर उपलब्धता और आम लोगों की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। नई सीरीज को एक साथ लागू करना इस बात को दिखाता है कि सरकार पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय मानकों और सभी हितधारकों के सहयोग को महत्व देती है।
सरकार ने बताया कि जीडीपी का नया बेस ईयर 2022-23 रखा गया है ताकि अर्थव्यवस्था में आए नए बदलावों को सही तरीके से दिखाया जा सके। वहीं सीपीआई का बेस ईयर 2024 किया गया है, जिससे गांव और शहर दोनों इलाकों के उपभोक्ताओं की खपत को बेहतर तरीके से मापा जा सके। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सूचकांक (आईआईपी) का बेस ईयर भी 2022-23 किया जा रहा है ताकि यह नए राष्ट्रीय खातों के अनुरूप हो।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ये सभी कदम देश में नीतियां बनाने, योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने और आम लोगों को सही जानकारी देने में मदद करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था में भारत के सरकारी आंकड़े हमेशा उपयोगी और भरोसेमंद बने रहें।
महाराष्ट्र
मुंबई मानखुर्द एटीएम कार्ड फ्रॉड के दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर फ्रॉड करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। 5 अगस्त को शिकायत करने वाली महिला पैसे निकालने के लिए मंगल मूर्ति जंक्शन पर बने एटीएम सेंटर गई थी। एटीएम से पैसे निकालते समय उसके पीछे खड़े एक अनजान व्यक्ति ने कार्ड का पिन देख लिया। इसके बाद उसने चालाकी से एटीएम रॉड बदलकर 19,000 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने इस मामले में फ्रॉड का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में तीन संदिग्ध लोग दिखे थे जो एटीएम कार्ड से पैसे निकालते हुए पाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान कल्याण के रहने वाले 30 साल के कासिम अली बरकत अली और 38 साल के परवेज अकबर अली शेख के तौर पर हुई है। पुलिस दोनों से आगे की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उन्होंने पहले कितने लोगों को ठगा है। यह कार्रवाई एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी के निर्देश पर डीसीपी समीर शेख ने की।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बांग्लादेश चुनावों में ज्यादातर हिंसा के लिए बीएनपी से जुड़े गुट जिम्मेदार: मानवाधिकार संगठन

बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा नियंत्रण एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। इसकी वजह कुछ महीने पहले संपन्न हुए चुनावों के दौरान या फिर बाद में हुई हिंसक गतिविधियां हैं। स्थानीय मीडिया ने मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताया कि चुनावी हिंसा में सबसे ज्यादा सक्रिय वो गुट रहे हैं जो सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जुड़े रहे।
ढाका के ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘ओधिकार’ ने अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में बताया कि बीएनपी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले 52 फीसदी, पोलिंग के दिन 53 फीसदी और चुनाव के बाद 75 फीसदी हिंसक गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले दर्ज 15 फीसदी, चुनाव के दिन 13 फीसदी और चुनाव के बाद 9 फीसदी गतिविधियों में शामिल थे।
ये नतीजे सोमवार को ढाका में सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (सीआईआरडीएपी) में हुई चर्चा के दौरान पेश किए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय तौर पर हिंसक और डराने-धमकाने की घटनाएं जारी रहीं।
बांग्लादेश के सभी जिलों में से चटगांव, कॉक्स बाजार, भोला, मैमनसिंह और ढाका मुख्य हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे। यहां मुख्य तौर पर लोगों को डराया-धमकाया गया था। वहीं पोस्ट-इलेक्शन मारपीट, संपत्ति को नुकसान और हत्या जैसी वारदातें ज्यादा दर्ज की गईं। चुनाव से पहले 62 घटनाएं दर्ज की गईं।
चटगांव में सबसे ज्यादा 11 घटनाएं दर्ज की गईं, उसके बाद कॉक्स बाजार में आठ घटनाएं हुईं। ढाका और मैमनसिंह में पांच-पांच घटनाएं जबकि सिराजगंज में चार घटनाएं दर्ज की गईं। चुनाव से पहले हुई 34 घटनाओं में अधिकारियों ने किसी न किसी तरह की कार्रवाई की, जबकि 28 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ओधिकार ने वोटिंग के दिन 19 चुनाव क्षेत्रों में 32 घटनाएं रिकॉर्ड की, जिसमें मैमनसिंह में सात और भोला में छह वारदातें अंजाम दी गईं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में चार जबकि कॉक्स बाजार और फेनी में तीन-तीन मामले संज्ञान में आए।
32 घटनाओं में से 17 में बीएनपी और उसके सहयोगी शामिल थे, जबकि चार में जमात और उसके सहयोगी। दो में इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक 11 मामलों में कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सात मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह पता नहीं चल सका।
पिछले महीने, ओधिकार ने बताया कि इस साल अप्रैल और जून के बीच बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग में 33 लोग मारे गए, जबकि पूरे देश में राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान चली गई और 970 घायल हुए।
राजनीति
एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित, सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी सांसदों के जोरदार नारेबाजी के बीच राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित हो गया।
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करना है, ताकि सहकारी समितियों के लिए निधिकरण प्रक्रिया को तेज और अधिक लचीला बनाया जा सके।
इस विधेयक का उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय, एनसीडीसी (एनसीडीसी) की भूमिका का विस्तार करना है, जो सहकारी समितियों को वित्तपोषित और प्रोत्साहित करता है, ताकि देशभर में सहकारी क्षेत्रों को वित्तपोषित किया जा सके।
सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
इसके बाद लोकसभा में ध्वनि मत से विधेयक पारित हो गया और सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026, भी लोकसभा में लगातार नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित हो गया। इस विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे।
नित्यानंद राय और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने के विधेयक पर चर्चा नहीं करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। जब हंगामा बंद नहीं हुआ, तो विधेयक को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
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