व्यापार
सेबी ने डेरिवेटिव्स सेटलमेंट और सीएएस फ्रेमवर्क में बदलाव का दिया प्रस्ताव
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शनिवार को जारी किए कंसल्टेशन पेपर में डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की प्रणाली, बाजार की टाइमिंग और अगस्त में लागू हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के परिचालन में बदलाव का प्रस्ताव दिया है।
बाजार नियामक ने प्रस्ताव में एक्सपायरी के दिनों में इंडेक्स और सिंगल-स्टॉक डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट कीमत तय करने के लिए दो विकल्प सुझाए हैं।
पहले विकल्प के तहत, सेबी ने ‘ब्लेंडेड वीडब्ल्यूएपी-(वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस)’ का तरीका सुझाया है, जिसमें सेटलमेंट की कीमत ‘कंटीन्यूअस ट्रेडिंग सेशन’ (सीटीएस) के आखिरी 30 मिनट और 10 मिनट के सीएएस पीरियड के दौरान हुए ट्रेड के आधार पर तय की जाएगी।
सेबी ने कहा कि हर अवधि का योगदान एक तय वेटेज के बजाय उसके असल ट्रेडेड वैल्यू से तय किया जाएगा।
नियामक ने कहा कि इस तरीके से असल मार्केट ट्रांजैक्शन की एक बड़ी अवधि को शामिल किया जा सकेगा और इससे सेटलमेंट की ज्यादा सही कीमत मिल सकती है।
दूसरे विकल्प के तहत, सेबी ने मौजूदा सीटीएस वीडब्ल्यूएपी तरीके को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर बनाए रखने का प्रस्ताव दिया। सेटलमेंट प्राइस सीटीएस के आखिरी 30 मिनट के दौरान हुए ट्रेड पर ही आधारित रहेगी।
बाजार नियामक के अनुसार, कम से कम एक साल बाद मिली-जुली कार्यप्रणाली पर विचार किया जा सकता है, बशर्ते पर्याप्त लिक्विडिटी, भागीदारी और सीएएस से परिचितता हो।
सेबी ने सीएएस के दौरान इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू (आईआईवी) के प्रदर्शन को हटाने का भी प्रस्ताव दिया, जबकि सिक्योरिटी-लेवल इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (आईईपी) प्रदान करना जारी रखा जाए।
सेबी ने कहा कि आईईपी इंडिकेटिव और बदलने वाली वैल्यू हैं और ये उन कीमतों को नहीं दर्शाती हैं जिन पर वास्तविक ट्रेड हुए हैं। रेगुलेटर ने कहा कि कुछ मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने आईआईवी का गलत अर्थ निकाला, जिसके परिणामस्वरूप इंडिकेटिव वैल्यू के आधार पर पोजीशन ली गईं।
इसके अलावा, सेबी ने कहा कि विकल्प ए के तहत, सीएएस स्टॉक्स के लिए सीटीएस दोपहर 3:30 बजे तक जारी रहेगा, इसके बाद 3:31 बजे से 3:40 बजे तक सीएएस होगा, जबकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:45 बजे तक जारी रहेगी।
विकल्प बी के तहत, सीटीएस दोपहर 3:15 बजे खत्म होगा, सीएएस 3:15 बजे से 3:25 बजे तक चलेगा और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:30 बजे तक जारी रहेगी।
दोनों विकल्पों से सीटीएस और सीएएस के बीच का ट्रांजिशन समय पांच मिनट से घटकर एक मिनट तक रह जाएगा। सीएएस के बाद डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग विंडो भी 10 मिनट से घटकर पांच मिनट की हो जाएगी।
सेबी ने कहा कि मार्केट से मिले फीडबैक से पता चला है कि सीएएस के बाद छोटी ट्रेडिंग विंडो काफी होगी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में एथेनॉल आपूर्ति 895 करोड़ लीटर पहुंची, अनाज-आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत: इंडस्ट्री डेटा

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने एथेनॉल सप्लाई ईयर (ईएसवाई) 2025-26 के तहत अगस्त 2026 के अंत तक 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की है, जिसमें अनाज-आधारित फीडस्टॉक का हिस्सा कुल आपूर्ति का लगभग 70 प्रतिशत है।
आंकड़ों के अनुसार, यह इस अवधि के लिए अनुबंधित 1,048 करोड़ लीटर मात्रा का लगभग 85 प्रतिशत है।
एआईडीए के अनुसार, देश की एथेनॉल आपूर्ति व्यवस्था में अब विविधता बढ़ रही है और उत्पादन किसी एक कच्चे माल पर निर्भर नहीं रह गया है। कुल आपूर्ति में अनाज-आधारित फीडस्टॉक का योगदान 624 करोड़ लीटर रहा, जबकि चीनी-आधारित स्रोतों से 271 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। इस तरह कुल आपूर्ति में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी अनाज-आधारित स्रोतों की रही।
अनाज-आधारित कच्चे माल में मक्का (मकई) सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा। अगस्त के अंत तक मक्का से 345 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई। इसके अलावा, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से प्राप्त अधिशेष चावल से 214 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ, जबकि क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से 64 करोड़ लीटर एथेनॉल तैयार किया गया।
एआईडीए ने कहा कि मक्का और अधिशेष चावल के बढ़ते उपयोग से एथेनॉल उत्पादन क्षमता को स्थिरता मिल रही है और इससे ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
चीनी-आधारित स्रोतों में गन्ने के रस से सबसे अधिक 149 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। इसके अलावा, बी-हेवी शीरे से 107 करोड़ लीटर और सी-हेवी शीरे से 15 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध कराया गया।
एआईडीए का कहना है कि विभिन्न स्रोतों से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से आपूर्ति शृंखला अधिक लचीली बनी है और किसी एक फसल या कच्चे माल पर निर्भरता कम हुई है।
एआईडीए की उपमहानिदेशक भारती बालाजी ने कहा कि अब तक आपूर्ति किए गए 895 करोड़ लीटर एथेनॉल में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अनाज-आधारित स्रोतों से आया है, जिसमें मक्का और एफसीआई का अधिशेष चावल प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, चीनी आधारित स्रोत भी अभी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न फीडस्टॉक का उपयोग भारत के एथेनॉल कार्यक्रम को अधिक मजबूत बनाता है, क्योंकि इससे देश की कृषि उपज का बेहतर उपयोग संभव होता है और उत्पादन जोखिम भी कम होता है।
हालांकि एआईडीए ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे देश में एथेनॉल उत्पादन क्षमता और आपूर्ति बढ़ेगी, वैसे-वैसे इसके लिए स्थिर और अनुमानित मांग सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। उद्योग का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाएगा।
भारत केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (एफएफवी), कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) और अन्य औद्योगिक उपयोगों में भी एथेनॉल की खपत बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
व्यापार
कच्चे तेल में तेजी से 6.5 प्रतिशत के ऊपर जा सकती है महंगाई दर, आरबीआई को बढ़ानी चाहिए रेपो रेट: एसबीआई रिसर्च

कच्चे तेल में तेजी से 6.5 प्रतिशत के ऊपर जा सकती है महंगाई दर, आरबीआई को बढ़ानी चाहिए रेपो रेट: एसबीआई रिसर्च इसकी वजह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई में इजाफा होने की उम्मीद है। यह जानकारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि अगस्त में महंगाई दर करीब 4.8-4.9 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। अगर कच्चा तेल उच्च स्तर पर बना रहता है तो अक्टूबर और नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत और उससे उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया कि भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते कच्चे तेल का बेंचमार्क 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है और अगले 15 दिनों में इसके 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की उम्मीद है।
खुदरा महंगाई बढ़ने के शुरुआती संकेत साफ पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बेवरेज, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स पर दिख रहे हैं और लागत का बढ़ता बोझ अब ग्राहकों पर डाला जा रहा है।
ये सभी कारक मिलकर ब्याज दरों को 50 आधार अंक तक बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं।
लिक्विडिटी के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में जुटाए गए फंड काफी हद तक बैंकिंग सिस्टम की फंडिंग की कमी को पूरा करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, “इसका मतलब है कि क्रेडिट की मजबूत मांग और उसके साथ ही वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के मजबूत आंकड़ों को देखते हुए, अभी जो तेजी आई है, उसमें स्वाभाविक रूप से कमी आएगी।”
इसमें आगे कहा गया कि अगर क्रेडिट की उम्मीद के मुताबिक मांग पूरी हो जाती है, तो वित्त वर्ष 27 के आखिर तक सिस्टम में लिक्विडिटी का स्तर सामान्य हो जाएगा।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कई संकेतों को देखते हुए, 10-साल के बेंचमार्क भारतीय यील्ड 7.15 प्रतिशत या उससे भी ऊपर जा सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, “हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 27 के बाकी समय में लिक्विडिटी धीरे-धीरे कम होगी और मार्च 2027 तक यह आदर्श रूप से 6 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर होनी चाहिए।”
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर यील्ड पिछले दस सालों के उच्चतम स्तर से ऊपर जा रहे हैं। इसका एक खास असर यूएस यील्ड में तेजी के रूप में दिख रहा है और 10-साल का यील्ड अब 5 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है, जबकि 30-साल का यील्ड घटकर 5.40 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है।
व्यापार
वैश्विक तनावों के चलते बाजार लाल निशान में बंद; सेंसेक्स 121 अंक लुढ़का, निफ्टी 0.34 प्रतिशत गिरा

पश्चिम एशिया में जारी तनावों के चलते वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार दिन के निचले स्तर से उबरकर लाल निशान में बंद हुआ। इस बीच आईटी, एफएमसीजी और बैंक शेयरों के समर्थन से प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में 0.34 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी 50 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,398.10 पर आ गया।
दिन के शुरुआत में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,902.59 से 593.42 अंकों यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,309.16 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय इसने 14.55 अंक चढ़कर 74,17.15 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि एक समय यह 742.42 अंक यानी करीब 1 प्रतिशत फिसलकर 74,160.16 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। यानी सेंसेक्स दिन के निम्नतम स्तर से 621.59 अंक उबरकर बंद हुआ।
वहीं निफ्टी की बात करें तो यह अपने पिछले बंद 23,477.80 से 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 23,270.30 पर खुला। हालांकि दिन के कारोबार में एक समय यह 23,448.10 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक समय 246.4 अंक यानी 1 प्रतिशत फिसलकर यह 23,231.40 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया था।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जिनमें क्रमशः 2.7 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी एफएमसीजी में भी गिरावट दर्ज की गई। इनके विपरीत, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया और निफ्टी आईटी में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
निफ्टी50 इंडेक्स में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली, जबकि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि भारतीय इक्विटी पर दबाव बने रहने की संभावना है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ गई है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से सप्लाई में रुकावट की चिंता बढ़ गई है।
क्रूड की बढ़ती कीमतों ने ग्लोबल बॉन्ड यील्ड को ऊपर धकेल दिया है; अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है, जिससे इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ रहा है और फेड के सख्त रुख की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं।
इस बीच रुपया गिरकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया, जबकि एफआईआई की लगातार बिकवाली ने दबाव और बढ़ा दिया।
एक्सपर्ट ने कहा कि शुक्रवार की गिरावट के बाद पूरे हफ्ते में निफ्टी 50 में 2.1 प्रतिशत की गिरावट आई।
मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। प्राइवेट बैंकों ने बेहतर प्रदर्शन किया और 0.5 प्रतिशत की बढ़त हासिल की, जबकि रियल्टी सेक्टर पिछड़ने वालों में शामिल रहा। व्यापक रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के बीच, निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में भारी गिरावट आई और यह दो महीने से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गया; इसमें गोदरेज प्रॉपर्टीज और लोढ़ा की बड़ी भूमिका रही।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से बैंकिंग कामकाज प्रभावित हुआ। वे हफ्ते में पांच दिन काम करने और पीएलआई स्कीम में बदलाव की मांग कर रहे थे। इस महीने के आखिर में और 26 अक्टूबर से और हड़तालें होनी हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, प्राइमरी मार्केट में, एनएसई ने अपने आईपीओ के लिए 1,700-1,785 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड घोषित किया है। यह सब्सक्रिप्शन के लिए 17 सितंबर को खुलेगा और इस इश्यू से लगभग 22,662 करोड़ रुपए जुटाने की उम्मीद है।
एक्सपर्ट ने बताया कि अगले हफ्ते निवेशकों की नजर भारत के अगस्त सीपीआई और डब्ल्यूपीआई महंगाई के आंकड़ों, यूएस फेड के पॉलिसी फैसले, यूएस रिटेल सेल्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर रहेगी। साथ ही, क्रूड की कीमतें, रुपया और ग्लोबल यील्ड भी बाजार के लिए अहम कारक बने रहेंगे।
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