अंतरराष्ट्रीय समाचार
कोलंबिया भूकंप: प्रभावित इलाकों में 30 दिनों के लिए इमरजेंसी घोषित
कोलंबिया के राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रीला ने 10 अगस्त को आए भूकंप से प्रभावित देश के कुछ हिस्सों में 30 दिनों के लिए आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय आपातकाल घोषित करने वाले एक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह आदेश बुधवार (स्थानीय समयानुसार) बोगोटा में हुई कैबिनेट बैठक के बाद जारी किया गया। इसमें वैले डेल काउका, रिसारल्डा और कैलडास समेत 15 प्रभावित विभागों (प्रांतों) को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम एक गंभीर सार्वजनिक आपदा से निपटने के लिए उठाया गया है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, एस्प्रीला ने कहा कि आपातकालीन उपायों का उद्देश्य सिर्फ क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण करना नहीं है, बल्कि कारोबारों को फिर से खड़ा करना और स्कूलों, अस्पतालों जैसी जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं को बहाल करना भी है।
उन्होंने कहा कि कोलंबिया इस समय अपने गणराज्य के इतिहास की सबसे जटिल वित्तीय स्थिति का सामना कर रहा है, इसलिए असाधारण कदम उठाना जरूरी हो गया है।
राष्ट्रपति ने बताया कि उनकी सरकार मौजूदा राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पिछली सरकार के कुछ कम प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों पर होने वाले खर्च में कटौती करेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों पर इसका कोई नकारात्मक असर न पड़े।
कोलंबिया की नेशनल यूनिट फॉर डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट की ओर से बुधवार शाम जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी कोलंबिया में आए 7.4 तीव्रता के भूकंप में 319 लोगों की मौत हो चुकी है, 4,469 लोग घायल हुए हैं और 260 लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 364 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है।
एजेंसी ने बताया कि 15 विभागों के 476 नगरपालिकाएं इस आपदा से प्रभावित हुई हैं और करीब 2,72,830 लोग इसकी चपेट में आए हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव दल अब भी मलबे में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 358 लोगों को बचाया जा चुका है।
कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने बताया कि देश में 220 टन से अधिक मानवीय सहायता सामग्री पहुंच चुकी है और 144 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए शामिल हुए हैं।
वैले डेल काउका, रिसारल्डा और चोको के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में कई लोग अब भी अस्थायी शिविरों और पार्कों में लगाए गए टेंटों में रह रहे हैं, क्योंकि उनके घर भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान के खिलाफ ट्रंप की ‘आर्थिक हमले’ वाली बात चीन को नहीं आई रास

चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कैंपेन की आलोचना की है जिसके तहत वो ईरान और उसके साझेदारों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। बीजिंग के मुताबिक ऐसी पाबंदियां स्थिति को और उलझा सकती हैं। “इकोनॉमिक डी-डे” कैंपेन की आलोचना करते हुए कहा कि और ज्यादा प्रतिबंध लगाने से लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद नहीं मिलेगी।
बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों से कहा, “प्रतिबंध लगाने और दबाव डालने से समस्या का समाधान नहीं होता है।”
इसमें आगे कहा गया, “चीन संबंधित पक्षों से जिम्मेदार कदम उठाने और कूटनीतिक व राजनीतिक तरीकों से मुद्दों को सुलझाने का आग्रह करता है।”
दरअसल, इन कदमों से चीन पर खास तौर पर असर पड़ेगा, क्योंकि एनालिटिक्स फर्म केप्लर के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, वह ईरान से निर्यात होने वाले तेल का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खरीदता है। ऐसे में अगर अमेरिका ने ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों, बैंकों या शिपिंग नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध लगाए, तो इसका सीधा असर अमेरिका-चीन संबंधों पर पड़ सकता है। यही ट्रंप की नई आर्थिक रणनीति का सबसे संवेदनशील मोर्चा हो सकता है।
अमेरिका पहले भी ईरानी तेल की खरीद और उसके परिवहन से जुड़े चीन स्थित रिफाइनरी तथा शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है। अब ट्रंप की ताजा चेतावनी से संकेत मिल रहा है कि वाशिंगटन ऐसे प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा सकता है।
गुरुवार सुबह (स्थानीय समयानुसार) अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर ‘इकोनॉमिक डी-डे’ का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वो ईरान के साझेदारों और मददगारों के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त कदम उठाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को डील करने का जितना बड़ा मौका मैंने दिया, उतना किसी और ने नहीं दिया। दुख की बात है कि वे इसका फायदा उठाने में सफल नहीं रहे।’
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को अब अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग पड़ने का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने दूसरे देशों को भी चेतावनी दी कि वे ईरान को किसी भी तरह की मदद न मुहैया कराएं, और ऐसा करने पर उन्हें भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को लेकर अमेरिकी सीनेटर ने मेटा पर उठाए सवाल

अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग से उन पेड विज्ञापनों को लेकर जवाब मांगा है, जिनमें कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल) शामिल थी। वॉर्नर ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए उस पूर्व जांच का भी हवाला दिया, जिसमें भारत में इंस्टाग्राम पर इसी तरह के विज्ञापन चलने का मामला सामने आया था।
अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से उन पेड विज्ञापनों को लेकर जवाब तलब किया है, जिनमें कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और बिना सहमति के बनाए गए अंतरंग चित्र (एनसीआईआई) शामिल थे। वॉर्नर ने सवाल उठाया कि क्या मेटा ने ऐसे विज्ञापनों से आर्थिक लाभ भी कमाया।
वर्जीनिया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर वॉर्नर ने 18 अगस्त को भेजे गए एक पत्र में कहा कि मेटा ने अपनी विभिन्न सोशल मीडिया सेवाओं पर ऐसे विज्ञापनों को चलने दिया, जिनमें बाल यौन शोषण सामग्री और गैर-सहमति वाले अंतरंग चित्र शामिल थे।
उन्होंने पत्र में लिखा, “यह पूरी तरह अस्वीकार्य है कि इस प्रकार की सामग्री मेटा के प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे और इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि आपकी कंपनी इससे लाभ कमाती हुई प्रतीत होती है।”
वॉर्नर ने मेटा से पूछा कि ये विज्ञापन उसकी समीक्षा प्रणाली से कैसे गुजर गए, कंपनी को इनसे कितनी आय हुई और इस तरह की सामग्री की पहचान कर उसे हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने 26 अगस्त तक जवाब देने की समयसीमा तय की है।
सीनेटर ने टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (टीटीपी) की एक शोध रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसके अनुसार मेटा ने नौ महीने की अवधि में फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और थ्रेड्स पर एआई से निर्मित बाल यौन शोषण सामग्री वाले दर्जनों पेड विज्ञापन चलाए।
शोधकर्ताओं को मेटा की सार्वजनिक विज्ञापन लाइब्रेरी में बच्चों के शोषण से संबंधित 50 से अधिक तस्वीरों और वीडियो वाले विज्ञापन मिले। रिपोर्ट के अनुसार ये विज्ञापन नवंबर 2025 से अगस्त 2026 की शुरुआत तक प्रसारित होते रहे।
इन विज्ञापनों को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के एक दर्जन से अधिक देशों के उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाया गया। पत्र में कहा गया है कि कम से कम एक विज्ञापन यूरोप में 2,500 से अधिक सोशल मीडिया खातों तक पहुंचा।
कुछ विज्ञापन ऐसे ऐप या वेबसाइटों की ओर ले जाते थे जो किसी व्यक्ति की तस्वीर को कृत्रिम रूप से नग्न दिखाने वाले (“न्यूडिफाई”) चित्र बना सकते हैं। अन्य विज्ञापनों में बच्चों की तस्वीरों का इस्तेमाल ऐसे थंबनेल के रूप में किया गया था जो वयस्कों के लिए आपत्तिजनक सामग्री की ओर ले जाते थे, जबकि कुछ में बच्चों के चेहरे को वयस्क शरीरों पर लगाया गया था।
वॉर्नर ने लिखा, “यह विश्वास करना कठिन है कि मेटा अनजाने में इतनी स्पष्ट रूप से अवैध सामग्री की मेजबानी कर रहा था या उससे लाभ कमा रहा था, जबकि कंपनी स्वयं दावा करती है कि वह सभी विज्ञापनों की समीक्षा और स्वीकृति करती है।”
उन्होंने कहा कि जिन सीएसएएम और एनसीआईआई विज्ञापनों की पहचान हुई, वे सभी पेड विज्ञापन थे और मेटा की अपनी प्रणालियों ने कंपनी की विज्ञापन नीतियों के तहत उनकी समीक्षा कर उन्हें मंजूरी दी थी।
वॉर्नर के अनुसार, शोधकर्ताओं को मेटा को सूचित किए जाने के बाद भी नए विज्ञापन मिलते रहे। यह सूचना जुलाई 2026 में बीबीसी की उस जांच के बाद दी गई थी, जिसमें भारत में इंस्टाग्राम पर इसी प्रकार के विज्ञापनों के चलने का खुलासा हुआ था।
सीनेटर ने मेटा की विज्ञापन नीति का भी उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विज्ञापनों में नग्नता, यौन गतिविधि या यौन संकेतात्मक मुद्राओं एवं गतिविधियों को दर्शाने वाली सामग्री नहीं होनी चाहिए।
वॉर्नर ने मेटा से यह भी बताने को कहा कि प्रत्येक विज्ञापन की पहचान कब हुई, उसे कब हटाया गया और उसकी सूचना गुमशुदा एवं शोषित बच्चों के लिए राष्ट्रीय केंद्र (एनसीएमईसी) को कब दी गई। साथ ही, पहचान और रिपोर्टिंग के बीच हुई किसी भी देरी का कारण भी पूछा गया है।
पत्र में यह भी जानना चाहा गया है कि क्या मेटा ने किसी भी प्रकार की बाल यौन शोषण सामग्री, जिसमें कंप्यूटर-जनित सामग्री भी शामिल है, का प्रसार, प्रचार या विज्ञापन किया। इसके अलावा, 11 चीनी पुनर्विक्रेताओं द्वारा दिए गए उन विज्ञापनों के बारे में भी जानकारी मांगी गई है जिन्हें बाल शोषण, उत्पीड़न या “न्यूडिफाई” सेवाओं से संबंधित नीतियों के उल्लंघन के कारण हटाया गया था।
वॉर्नर ने इन विज्ञापनों की प्रसारण तिथियों, लक्ष्य निर्धारण के तरीकों, कुल दर्शनों (इम्प्रेशन), अमेरिका में हुए दर्शनों और मेटा को प्राप्त भुगतान का विवरण भी मांगा है। साथ ही यह भी पूछा है कि क्या कंपनी ने इन विज्ञापनों से प्राप्त राजस्व अपने पास रखा।
उन्होंने 2025 और 2026 के दौरान अमेरिका में 13 से 18 वर्ष के किशोर उपयोगकर्ताओं को दिखाए गए उन पेड विज्ञापनों का आंकड़ा भी मांगा है, जिन्हें बाद में नग्नता या शोषणकारी सामग्री के कारण चिह्नित किया गया था।
गौरतलब है कि वॉर्नर ने जुलाई में सेफ एआई एक्ट नामक विधेयक पेश किया था, जिसका उद्देश्य ऐसी एआई प्रणालियों पर रोक लगाना है जो बाल यौन शोषण सामग्री या गैर-सहमति वाले अंतरंग चित्र तैयार कर सकती हैं। प्रस्तावित कानून में एआई सुरक्षा नियंत्रणों को दरकिनार करने वाले सॉफ्टवेयर पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान ने यूएई के दावे को किया खारिज, मिसाइल दागने का लगाया था आरोप

ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान ने उसके क्षेत्र की ओर मिसाइलें दागी थीं।
यूएई ने मंगलवार को दावा किया था कि उसे ईरान से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता चला। इसके बाद ईरान की ओर से यह प्रतिक्रिया सामने आई।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने ने ईरान पर लगाए आरोपों पर खेद जताते हुए कहा, ” यूएई का यह कदम अच्छे पड़ोसी के सिद्धांत के विपरीत है और क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास कायम करने तथा पश्चिम एशिया में असुरक्षा बढ़ने से रोकने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाता है।”
उन्होंने क्षेत्रीय देशों से ईरान के खिलाफ ‘‘बेबुनियाद’’ आरोप लगाने से बचने की अपील की। बघाई ने कहा, ” क्षेत्र में पहले से ही अमेरिका और इजरायल की उन गतिविधियों के कारण जटिल स्थिति बनी हुई है, जिन्हें ईरान क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए नुकसानदायक मानता है।” उन्होंने कथित फॉल्स-फ्लैग अभियानों के इतिहास का भी हवाला दिया।
चीन की समाचार एजेंसी सिंहुआ के अनुसार, यूएई के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया था कि दोनों में से पहली मिसाइल देश के क्षेत्रीय जल से बाहर गिरी, जबकि दूसरी उसके क्षेत्रीय जल के भीतर गिरी। मंत्रालय ने कहा था कि देश हाई अलर्ट पर है और अपनी सुरक्षा, संप्रभुता तथा स्थिरता को प्रभावित करने वाले किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यूएई ने कहा था कि मिसाइलों का निशाना समुद्री यातायात था। हालांकि, घटना में अब तक किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है।
इस बीच, यूएई के विदेश मंत्रालय ने बुधवार तड़के सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि उसने ईरान के साथ अगले आदेश तक सभी व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेनदेन निलंबित कर दिए हैं।
मंत्रालय के रणनीतिक संचार विभाग की निदेशक अफरा अल हमेली ने कहा कि यह फैसला क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को प्रभावित करने वाले बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है।
यूएई ने साथ ही कहा कि वह क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए संवाद, सहयोग और क्षेत्रीय एकीकरण को आवश्यक माध्यम मानता है।
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