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Sunday,09-August-2026
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आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल का पहली तिमाही में घाटा बढ़ा, 249 करोड़ रुपए का हुआ नुकसान

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फैशन और लाइफस्टाइल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (एबीएफआरएल) को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में घाटे का सामना करना पड़ा। कंपनी का समेकित शुद्ध घाटा (कंसो. नेट लॉस) सालाना आधार पर 6.4 प्रतिशत बढ़कर 248.73 करोड़ रुपए हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 233.73 करोड़ रुपए था।

स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, कंपनी का कर-पूर्व घाटा भी बढ़कर 320.26 करोड़ रुपए पहुंच गया, जो एक वर्ष पहले इसी अवधि में 259.50 करोड़ रुपए था।

हालांकि, कंपनी की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई। जून तिमाही में परिचालन से प्राप्त राजस्व (रेवेन्यू) 10.6 प्रतिशत बढ़कर 2,025.56 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 1,831.46 करोड़ रुपए था।

इसके बावजूद कंपनी की कुल आय की तुलना में खर्चों में अधिक वृद्धि हुई। तिमाही के दौरान कुल खर्च बढ़कर 2,395.45 करोड़ रुपए हो गया, जबकि एक साल पहले यह 2,148.75 करोड़ रुपए था। खर्चों की तेज बढ़ोतरी के कारण कंपनी का घाटा और बढ़ गया।

अन्य आय को शामिल करने के बाद कंपनी की कुल आय 2,081.58 करोड़ रुपए रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,895 करोड़ रुपए थी।

कंपनी के मालिकाना हिस्सेदारों के खाते में दर्ज शुद्ध घाटा 215.24 करोड़ रुपए रहा।

कंपनी के प्रदर्शन पर सबसे अधिक दबाव उसके एथनिक वियर और अन्य व्यवसायों से जुड़े सेगमेंट में देखने को मिला। इस सेगमेंट का घाटा बढ़कर 188.54 करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले 178.82 करोड़ रुपए था। हालांकि इस सेगमेंट का रेवेन्यू बढ़कर 830.79 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 754.57 करोड़ रुपए था।

दूसरी ओर, पैंटालून्स कारोबार ने मामूली लाभ दर्ज किया। इस सेगमेंट का मुनाफा 3.48 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 3.67 करोड़ रुपए था। पैंटालून्स का राजस्व बढ़कर 1,204.39 करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले 1,094.13 करोड़ रुपए था।

जून तिमाही में अंतर-सेगमेंट समायोजन से पहले कंपनी का कुल सेगमेंट राजस्व 2,035.18 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 1,848.70 करोड़ रुपए था।

शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहा। शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल का शेयर लगभग सपाट बंद हुआ और 63.41 रुपए पर कारोबार समाप्त किया। बीते 52 सप्ताह में कंपनी के शेयर ने 94.95 रुपए का उच्चतम स्तर और 53.51 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है।

व्यापार

मार्केट आउटलुक: पहली तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगा शेयर बाजार का रुझान

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भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। अमेरिका-ईरान तनाव, पहली तिमाही के नतीजे, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से बाजार की चाल तय होगी।

10-14 अगस्त के कारोबारी सत्र में स्काईगोल्ड, बॉश, बॉम्बे डाइंग,डॉलर, डीबीएल, आईटीडीसी, वोडाफोन आइडिया, आइडियाफोर्ज, हिंदुस्तान कॉपर, लिंडे इंडिया, वीगार्ड, जी, बाटा इंडिया, ईपैक, ईपीएल, आईएफसीआई, जेएनके इंडिया और अन्य कंपनियों का नाम शामिल हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। फिलहाल दोनों देशों के बीच हमले रुके हुए, जिससे कच्चा तेल 83 डॉलर के करीब बना हुआ है।

अगले हफ्ते खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए जाएंगे। महंगाई के आंकड़े, बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थिति बताते हैं और यह शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक अहम आंकड़ा माना जाता है।

इसके अतिरिक्त, भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता हफ्ता काफी अच्छा रहा। निफ्टी 187.05 अंक या 0.77 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,570.65 और सेंसेक्स 404.53 अंक या 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,499.17 पर बंद हुआ।

इस दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप का प्रदर्शन भी अच्छा रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 548.25 अंक या 0.87 प्रतिशत की तेजी के साथ 63,463.55 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 528.15 अंक या 2.73 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,867.80 पर था।

सूचकांकों में सबसे निफ्टी पीएसयू बैंक 5.01 प्रतिशत की तेजी के साथ गेनर था। निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.30 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 3.70 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 3.14 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 2.73 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.04 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 1.32 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 1.01 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 0.64 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।

दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया 3.94 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.72 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.48 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

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राष्ट्रीय समाचार

भारतीय शेयर बाजार की शीर्ष 10 में से चार कंपनियों का मार्केटकैप 1.43 लाख करोड़ रुपए बढ़ा

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भारत की शीर्ष 10 में से चार कंपनियों का मार्केटकैप 1.43 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया है। इसमें सबसे अधिक फायदा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को हुआ है। इसकी वजह सबसे बड़े सरकारी बैंक की ओर से वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के अच्छे नतीजे पेश करना था।

हालांकि, शीर्ष 10 में बाकी छह कंपनियों का मार्केटकैप 1.23 लाख करोड़ रुपए कम हुआ।

बीते हफ्ते सबसे ज्यादा मार्केटकैप वाली टॉप-10 कंपनियों में एसबीआई का बाजार पूंजीकरण 63,922.03 करोड़ रुपए बढ़कर 10,11,721.84 करोड़ रुपए हो गया है। इस जबरदस्त बढ़ोतरी की वजह से एसबीआई भारत की सबसे अधिक वैल्यू वाली कंपनियों की रैंकिंग में और ऊपर पहुंच गई है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यूएशन में 32,816.4 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई, जिससे इसका मार्केटकैप 18,01,925.19 करोड़ रुपए हो गया।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की वैल्यूएशन 31,875.35 करोड़ रुपए बढ़कर 8,87,770.13 करोड़ रुपए हो गई।

लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का बाजार पूंजीकरण भी 14,637.76 करोड़ रुपर बढ़कर 5,56,482.45 करोड़ रुपए हो गया।

दूसरी ओर, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। इसकी मार्केट वैल्यूएशन 40,543.23 करोड़ रुपए घटकर 4,96,891.82 करोड़ रुपए रह गई।

बजाज फाइनेंस की मार्केट कैपिटलाइजेशन 37,168.96 करोड़ रुपए घटकर 6,73,648.55 करोड़ रुपए हो गई, जबकि एचडीएफीस बैंक की वैल्यूएशन में 24,183.16 करोड़ रुपए की कमी आई और यह 11,27,967.47 करोड़ रुपए पर आ गई।

आईसीआईसीआई बैंक की मार्केट कैपिटलाइजेशन 9,507.67 करोड़ रुपए घटकर 10,20,370.63 करोड़ रुपए रह गई, जबकि भारती एयरटेल की वैल्यूएशन में 7,581.65 करोड़ रुपए की कमी आई और यह 12,22,423.98 करोड़ रुपए हो गई।

हिंदुस्तान यूनिलीवर भी पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल रही। इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन 4,793.16 करोड़ रुपए घटकर 4,88,808.97 करोड़ रुपए रह गई।

दूसरी तरफ भारतीय शेयर बाजार मामूली तेजी के साथ बंद हुआ, जिसमें सेंसेक्स 404.53 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी में 187.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त हुई।

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व्यापार

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बेहतर तिमाही नतीजों से घरेलू बाजार ने दर्ज की लगातार दूसरी हफ्ते बढ़त, निवेशकों का भरोसा मजबूत

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कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज की है। हालांकि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन मुनाफावसूली देखने को मिली, फिर भी प्रमुख सूचकांक साप्ताहिक आधार पर सकारात्मक बढ़त के साथ बंद हुए।

सप्ताह के दौरान निफ्टी 0.77 प्रतिशत मजबूत हुआ, लेकिन शुक्रवार को इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,570 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 455 अंक यानी 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499 पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह में सेंसेक्स ने 0.52 प्रतिशत की बढ़त हासिल की।

वहीं, व्यापक बाजार ने मुख्य सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.73 प्रतिशत उछल गया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान बड़े शेयरों के साथ-साथ मध्यम और छोटी कंपनियों की ओर भी बढ़ रहा है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। मजबूत तिमाही नतीजों और कंपनियों से जुड़े सकारात्मक घटनाक्रमों के चलते निवेशकों का रुझान इस श्रेणी की कंपनियों की ओर बना रहा। दूसरी ओर, पीएसयू बैंकिंग शेयरों में बेहतर बुनियादी स्थिति और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के कारण अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

मेटल सेक्टर को देश में मजबूत मांग और आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं का फायदा मिला। वहीं ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी तेजी रही, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि आगामी त्योहारी सीजन में वाहनों की मांग मजबूत रहेगी।

सप्ताह की शुरुआत कुछ उतार-चढ़ाव के साथ हुई थी, जिसका कारण फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) व्यवस्था का लागू होना था। हालांकि निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों के नई व्यवस्था के अनुरूप ढलने के बाद बाजार में स्थिरता लौट आई।

विश्लेषकों का कहना है कि बाजार की धारणा को सबसे अधिक समर्थन कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से मिला। तेल सस्ता होने से भारत के लिए महंगाई और आयात लागत संबंधी चिंताओं में कमी आई है। इससे आर्थिक परिदृश्य बेहतर हुआ और निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

वैश्विक स्तर पर भी बाजार को सहारा मिला। अमेरिका के श्रम बाजार से जुड़े अपेक्षाकृत नरम आंकड़ों के बाद निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में नरमी आई, जिससे उभरते बाजारों, विशेषकर भारत, के लिए निवेश माहौल बेहतर हुआ।

घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं किया, साथ ही विकास दर (जीडीपी ग्रोथ) का अनुमान थोड़ा बढ़ाया और महंगाई का अनुमान कुछ कम किया, जिससे यह संदेश गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है।

इसके अलावा, जारी तिमाही नतीजों के सीजन ने भी बाजार को मजबूती दी है। अधिकांश कंपनियों के परिणाम बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहे हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ी और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ।

आगे की दिशा को लेकर बाजार की नजर अब अमेरिका के रोजगार और महंगाई आंकड़ों पर रहेगी, जिनसे फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों के बारे में संकेत मिल सकते हैं। वहीं घरेलू स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और बैंक ऋण वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और महंगाई के रुख को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और कंपनियों के नतीजे मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार को और समर्थन मिल सकता है।

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