राजनीति
फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने को लेकर पीएम मोदी के पोस्ट पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया, प्रियंका बोलीं-सिस्टम से भरोसा टूटा
पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किए गए ‘एक्स’ पोस्ट पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, “ये तो वैसी ही बात है कि बच्चों का कुछ और कहना है और आप (पीएम) कुछ और कह रहे हैं। नेताओं के नेतृत्व दिखाने का समय आ गया है, वे नेतृत्व दिखाएं। बच्चों की बातें सुनें। बच्चों की स्पष्ट मांगें हैं कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और जिन्होंने मारा-पीटा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इनको पहले बच्चों की मांगों की माननी चाहिए। बच्चों का सिस्टम में भरोसा टूट गया है।”
प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि अगर सिस्टम द्वारा कोई समाधान किया जाएगा तो बच्चे इसको स्वीकार नहीं करेंगे। अगर प्रधानमंत्री को समाधान करना है तो बच्चों की मांगें सुनें और पूरी करें, तभी समाधान निकल पाएगा।
पेपर लीक में शामिल लोगों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक्स’ पोस्ट पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, “आजकल कोई भी उनकी बातों पर यकीन नहीं करता। उनकी बातों का भरोसा पहले ही खत्म हो चुका है। सबसे पहले, उन्हें धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाना होगा। फिर उन्हें छात्रों से बात करनी होगी।”
समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, “मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री किस क्रांति की बात कर रहे थे। क्या उस ‘एक्स’ पोस्ट से उन छात्रों की मांगें पूरी होंगी जिन पर लाठीचार्ज हुआ, जो घायल हुए और जो इतने लंबे समय से जंतर-मंतर पर बैठे हैं? क्या बल प्रयोग से घायल हुए छात्रों की आंखों का दर्द ठीक हो पाएगा? संसद सत्र शुरू होने पर, अगर प्रधानमंत्री युवाओं को कोई संदेश देना चाहते थे, तो उन्हें खुद सदन में आकर उनसे बात करनी चाहिए थी।”
जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा, “आखिरकार, इतने दिनों बाद सरकार की नींद खुली है। 22 दिनों तक जब छात्र जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे और सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, तब सरकार बहरी और खामोश क्यों बनी रही? छात्रों ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे अपनी मांगें रखने के लिए संसद आएंगे। इस आंदोलन को बढ़ने देने में सरकार की बड़ी भूमिका रही है और अब वह दमनकारी रवैया अपना रही है।”
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा, “अभी तक सिर्फ ‘एक्स’ पोस्ट ही आया है, कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भविष्य में यह या वह करेंगे, यह सब तो बस बातें हैं। लोग अब कार्रवाई चाहते हैं। वे जानना चाहते हैं कि आपने इसके जवाब में क्या किया है। न तो कोई इस्तीफा हुआ है, न ही लाठीचार्ज पर कोई अफसोस जताया गया है, और न ही राहुल गांधी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर कोई प्रतिक्रिया दी गई है।”
राजनीति
अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से पूछा सवाल, सबूत नहीं तो फास्ट ट्रैक कोर्ट का क्या मतलब

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच एजेंसियां अदालत में पर्याप्त सबूत ही पेश नहीं करेंगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह आश्वासन केवल दिखावा साबित हो रहा है।
केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए संसद में कानून लाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का आश्वासन दिया था। लेकिन उनके अनुसार, इसी बीच वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अदालत में कथित तौर पर यह कहे जाने से कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, सरकार के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आप प्रमुख ने दावा किया कि वर्ष 2024 में नीट पेपर लीक के समय सरकार ने संजीव मुखिया को पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया था और बड़े स्तर पर उसकी गिरफ्तारी को उपलब्धि के रूप में पेश किया गया था। हालांकि अब यदि सीबीआई अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने की बात कह रही है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आखिर इस मामले का वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है। उन्होंने सवाल किया कि यदि वही मास्टरमाइंड नहीं है, तो क्या सरकार यह मान रही है कि पेपर लीक हुआ ही नहीं?
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से पूछा कि यदि जांच एजेंसियां अदालत में मजबूत सबूत पेश नहीं करेंगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से भी कोई परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि वास्तविक कार्रवाई के स्तर पर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित हुए हैं। कई छात्रों ने मानसिक तनाव झेला और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आईं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था तैयार करना होनी चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि देश में पहले से ही पॉक्सो और दुष्कर्म जैसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित हैं, लेकिन कई मामलों में वहां भी वर्षों तक सुनवाई चलती रहती है। उनका कहना था कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जांच, मजबूत साक्ष्य और दोषियों को सख्त सजा सुनिश्चित करना अधिक आवश्यक है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई करने की होती, तो जांच एजेंसियां अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश करतीं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करतीं। उन्होंने केंद्र सरकार से पेपर लीक की घटनाओं पर पारदर्शी जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
महाराष्ट्र
मुंबई शिवाजी पार्क स्टूडेंट प्रोटेस्ट: महिला के साथ बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में गुस्सा, चार लेवल की कार्रवाई की मांग

मुंबई के शिवाजी पार्क दादर में एक प्रोटेस्ट के दौरान एक पुलिस ऑफिसर की शर्मनाक हरकत सामने आने के बाद, मुंबई पुलिस ने कॉन्स्टेबल दीपक का बचाव किया है और कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो गैर-जिम्मेदाराना है। ऑफिसर का इरादा महिला के साथ गलत व्यवहार या फ़्लर्ट करने का नहीं था। जब ऑफिसर प्रोटेस्ट के दौरान एक आदमी को अरेस्ट करने गया था, तो महिला प्रोटेस्टर बीच में आ गई और यह वीडियो है। इस मामले में जांच के बाद, पुलिस डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों ने वीडियो फुटेज की ध्यान से जांच करने के बाद ऊपर बताए गए पुलिस ऑफिसर को क्लीन चिट दे दी है। इससे नागरिकों में गुस्सा है। पुलिस ने अपने इनकार वाले बयान में कहा है कि प्रोटेस्ट करने वालों को कंट्रोल करने वाले कॉन्स्टेबल की कोई गलती नहीं है। उसने जानबूझकर महिला को नहीं छुआ। यह पक्का है कि वह प्रोटेस्ट करने वालों को कंट्रोल कर रहा था। इस मामले में, वकील नितिन सतपुते ने पुलिस कॉन्स्टेबल को मिली क्लीन चिट पर हैरानी जताई है और पीड़ित से अपील की है कि वह खुद ऑफिसर के खिलाफ केस दर्ज करे। अगर इस मामले में केस दर्ज नहीं हुआ तो वह केस दर्ज करवाने के लिए कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुंबई और दूसरी जगहों पर स्टूडेंट्स के खिलाफ हिंसा के जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वे चिंताजनक हैं। इसमें कई ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जो बहुत ज़्यादा क्रूरता पर आधारित हैं। एक वीडियो में एक कांस्टेबल दो स्टूडेंट्स को झूठे ड्रग केस में फंसाने की धमकी दे रहा है, जबकि दूसरे वीडियो में पुलिस कांस्टेबल की यह शर्मनाक हरकत सामने आई है। इस वीडियो के बाद कई पॉलिटिकल लीडर्स ने भी इसे ट्वीट करके एक्शन की मांग की है। पुलिस ने इस मामले में कांस्टेबल को क्लीन चिट दे दी है, लेकिन इससे पुलिस डिपार्टमेंट की इमेज पर भी असर पड़ा है। इस वीडियो ने मुंबई पुलिस की इमेज खराब की है। पुलिस के बर्ताव से जनता में गुस्सा है और पुलिस के इस नए रुख से भी हैरान है कि कांस्टेबल बेगुनाह है और उसने कुछ भी गलत नहीं किया है।
राष्ट्रीय समाचार
नीट पेपर लीक केस: दिल्ली की अदालत ने आरोपी मनोज शिरुरे की जमानत याचिका को किया खारिज

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार मनोज शिरुरे की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस मामले में सीबीआई ने मनोज शिरुरे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है।
स्पेशल जज (सीबीआई) अजय गुप्ता ने शुक्रवार को दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों पर विचार करने के बाद मनोज शिरुरे की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
सीबीआई का आरोप है कि मनोज शिरुरे ने तीन छात्रों को केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इन तीन छात्रों में एक आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक का बेटा भी शामिल था। जांच एजेंसी के अनुसार, शिरुरे ने आरोपी पीवी कुलकर्णी से इन छात्रों को केमिस्ट्री के प्रश्न उपलब्ध कराने में मदद की थी।
सीबीआई ने इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और परीक्षा से पहले नीट-यूजी के प्रश्न-पत्र हासिल करने व उन्हें फैलाने में शामिल एक कथित नेटवर्क की जांच कर रही है। सीबीआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले उच्च शिक्षा विभाग से मिली लिखित शिकायत के आधार पर 12 मई को मामला दर्ज किया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, पुणे की एजुकेशन कंसल्टेंट मनीषा वाघमारे ने उन छात्रों को इकट्ठा करने में बिचौलिए की भूमिका निभाई, जिन्होंने स्पेशल कोचिंग सेशन में शामिल होने के लिए लाखों रुपए दिए थे। इन सेशन में उन सवालों पर चर्चा की गई और उन्हें लिखवाया गया जो बाद में नीट-यूजी 2026 परीक्षा में आए थे।
वाघमारे ने उन उम्मीदवारों के लिए खास कोचिंग क्लास का इंतजाम किया था, जिन्हें एनटीए की ओर से नियुक्त सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा मांढरे पढ़ाती थीं। मनीषा पर बायोलॉजी पेपर लीक मामले में मुख्य साजिशकर्ता (को-मास्टरमाइंड) होने का शक है, जबकि केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को पेपर लीक नेटवर्क का कथित सरगना (किंगपिन) माना जा रहा है।
पुणे की एकेडमी में फिजिक्स पढ़ाने वाले तेजस हर्षद शाह पर आरोप है कि उन्हें सह-आरोपी मनीषा संजय हवलदार से लीक हुए फिजिक्स के सवाल मिले थे।
एफआईआर दर्ज होने के बाद खास टीमें बनाई गईं और देशभर में कई जगहों पर तलाशी ली गई। इस बीच, कथित गड़बड़ियों की चिंताओं के कारण मूल परीक्षा रद्द होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 21 जून को नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की थी।
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