राष्ट्रीय समाचार
भारत के प्राइवेट सेक्टर में गतिविधियां अप्रैल में बढ़ीं, रोजगार सृजन 10 महीनों के उच्च स्तर पर
भारत के प्राइवटे सेक्टर में अप्रैल में गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह क्षमता में विस्तार, बेहतर मांग, नए ऑर्डर्स और टेक्नोलॉजी निवेश में बढ़ोतरी होना है। यह जानकारी एचएसबीसी ‘फ्लैश इंडिया पीएमआई कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स’ में गुरुवार को दी गई।
यह इंडेक्स मासिक आधार पर भारत के सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की गतिविधियों को दिखाता है। अप्रैल में यह 58.3 पर रहा है, मार्च में यह 57.0 पर था।
एचएसबीसी की ओर से बताया गया कि अप्रैल में नए ऑर्डर मार्च की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़े हैं।
सर्वेक्षण में बताया गया कि भारत में निजी क्षेत्र में रोजगार में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल में रोजगार सृजन में वृद्धि 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मध्य पूर्व संघर्ष से जुड़ी बाधाओं के कारण मार्च में आई सुस्ती के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है। उत्पादन और नए ऑर्डर में तेजी से वृद्धि के साथ विनिर्माण क्षेत्र ने इस सुधार का नेतृत्व किया।”
सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि कंपनियां आपूर्ति पक्ष के झटके की अवधि को लेकर अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर स्टॉक बना रही हैं।
भंडारी ने कहा, “खरीद की मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ तैयार माल और इनपुट इन्वेंट्री में भी वृद्धि हुई है। इनपुट लागत का दबाव उच्च बना हुआ है और कंपनियों ने बढ़ी हुई बिक्री कीमतों के माध्यम से इस वृद्धि का कुछ हिस्सा ग्राहकों से वसूला।”
मुद्रास्फीति दरें ऐतिहासिक रूप से उच्च बनी रहीं, लेकिन सेवा क्षेत्र में मंदी के कारण पिछले महीने की तुलना में इनमें कुछ कमी आई।
एस एंड पी ग्लोबल द्वारा संकलित पीएमआई रिपोर्ट में कहा गया है, “उत्पादन और बिक्री में मजबूत उछाल के साथ विनिर्माण क्षेत्र ने रिकवरी का नेतृत्व किया, लेकिन यहां कीमतों का दबाव बढ़ गया।”
रिपोर्ट के अनुसार, सेवा प्रदाताओं की तुलना में वस्तु उत्पादकों ने नए ऑर्डर और उत्पादन में तेजी से वृद्धि दर्ज की।
सेवा कंपनियों ने भी वृद्धि दर्ज की, हालांकि यह तुलनात्मक रूप से मामूली थी। निर्यात के रुझान क्षेत्र स्तर पर मिश्रित रहे, क्योंकि सेवा प्रदाताओं में वृद्धि की धीमी गति वस्तु उत्पादकों में तेजी से वृद्धि के विपरीत थी।
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पश्चिम बंगाल में बनेंगे चार नए रीजनल एयरपोर्ट, 23 सितंबर को साइन होगा एमओयू

पश्चिम बंगाल में एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए राज्य में चार और रीजनल एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे। इसके लिए अगले हफ्ते केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होगा।
यह एमओयू साइनिंग प्रोग्राम 23 सितंबर को राज्य सचिवालय नबन्ना के मुख्य सभागार नबन्ना सभागार में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मौजूद रहेंगे। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
प्रस्तावित चार रीजनल एयरपोर्ट पुरुलिया जिले के छर्रा, दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट, अलीपुरद्वार के हासीमारा और पश्चिम मिदनापुर के कलाईकुंडा में बनेंगे। इनमें हासीमारा और कलाईकुंडा भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण बेस भी हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “राज्य सरकार इन प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन, बिजली, पानी और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी। केंद्र सरकार एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का विकास करेगी और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया एयर ट्रैफिक की जिम्मेदारी संभालेगी।”
इस मौके पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू, पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह, मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन और संबंधित जिलों के सांसद व विधायक भी मौजूद रहेंगे।
यह एमओयू केंद्र सरकार की संशोधित ‘उड़ान 6.0’ योजना के तहत साइन किया जाएगा। बता दें कि मॉडिफाइड उड़ान योजना भारत की रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम का अगला चरण है।
अधिकारी के अनुसार, इस एमओयू के साइन होने से पुरुलिया, दक्षिण दिनाजपुर, अलीपुरद्वार और पश्चिम मिदनापुर में हवाई संपर्क के बुनियादी ढांचे और रीजनल हवाई सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
केंद्र की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत समझौते के अनुसार राज्य सरकार जरूरी जमीन, संपर्क सड़कें, बिजली आपूर्ति, पानी की आपूर्ति और बुनियादी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी, जबकि केंद्र सरकार एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा तैयार करेगी।
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यूपीआई में एमडीआर आने से इंडस्ट्री को 20,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है फायदा: ब्रोकरेज

यूपीआई भुगतान में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लागू करने से बैंकों और भुगतान कंपनियों के लिए आय के नए स्रोत खुल जाएंगे और इससे पूरी इंडस्ट्री का रेवेन्यू पूल 10,000 करोड़ रुपए से 20,600 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। यह जानकारी ब्रोकरेज फर्मों की ओर से दी गई।
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) का संचालन करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने 2,000 रुपए से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पीटूएम) यूपीआई के लिए 0.4 प्रतिशत का एमडीआर 15 अक्टूबर से लगाने का ऐलान किया है। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है। इसका भुगतान मर्चेंट करेगा, न कि ग्राहक।
यूबीएस का अनुमान है कि बैंकों और भुगतान कंपनियों के लिए सालाना रेवेन्यू पूल 10,000–15,000 करोड़ रुपए का होगा। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि बैंक इसमें से लगभग 60–70 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखेंगे, जबकि बाकी हिस्सा भुगतान कंपनियों को मिलेगा। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि फिनटेक कंपनियों की कमाई पर इसका असर ज्यादा होगा।
गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि इंडस्ट्री का संभावित रेवेन्यू पूल 20,600 करोड़ रुपए का हो सकता है। यह अनुमान इस कैलकुलेशन पर आधारित है कि कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग आधा हिस्सा पूरे 40 आधार अंक एमडीआर के दायरे में आ सकता है। जेपी मॉर्गन के अनुसार, अधिकतम रेवेन्यू पूल लगभग 17,000 करोड़ रुपए का हो सकता है, जिसमें इश्यूइंग और एक्वायरिंग बैंकों के लिए लगभग 11,700 करोड़ रुपए शामिल हैं। यह रकम लिस्टेड कमर्शियल बैंकों के वित्त वर्ष 26 के शुद्ध मुनाफे का 2.1 प्रतिशत है।
सिटी का अनुमान है कि सालाना इंडस्ट्री रेवेन्यू पूल 16,000-17,000 करोड़ रुपए का होगा, जिसमें से लगभग 60 प्रतिशत बैंकों को, 25 प्रतिशत यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को और 15 प्रतिशत नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिलेगा।
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भारत का वस्तु निर्यात अगस्त में 26 प्रतिशत बढ़ा, व्यापार घाटे में आई कमी

भारत का वस्तु निर्यात अगस्त में सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हो गया है। यह निर्यात में देश का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। यह इस बात की भी पुष्टि करता है कि देश का निर्यात क्षेत्र लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। यह जानकारी सरकार की ओर से मंगलवार को दी गई।
इस दौरान देश के व्यापार घाटे में भी कमी देखने को मिली है, जो कि अगस्त में 26.86 अरब डॉलर पर रहा है, जो कि एक साल पहले समान अवधि में 27.22 अरब डॉलर पर था। इस साल जुलाई में व्यापार घाटा 32 अरब डॉलर था।
अगस्त में वस्तु आयात सालाना आधार पर 26 प्रतिशत बढ़कर 72.67 अरब डॉलर पर रहा है, जो कि इस साल जुलाई में 76.22 अरब डॉलर था। मासिक आधार पर अगस्त में निर्यात में भी कमी दर्ज की गई है, जो कि जुलाई में 44.24 अरब डॉलर पर था।
वाणिज्य मंत्रालय में सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, “निर्यात में बढ़ोतरी इंजीनियरिंग के सामान, पेट्रोलियम उत्पादों, केमिकल और टेक्सटाइल की वजह से हुई और इनकी सबसे ज्यादा मांग अमेरिका, ईयू और ब्रिक्स देशों से थी।”
आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अगस्त में सोने का आयात गिरकर 2.3 अरब डॉलर रह गया, जो अगस्त 2025 के 5.4 अरब डॉलर के आंकड़े से आधे से भी कम था।
आरबीआई के इस महीने की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) 4.2 अरब डॉलर रहा। पश्चिमी एशिया संकट के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल, एलपीजी और फर्टिलाइजर की कीमतें बढ़ने के बावजूद यह जीडीपी का 0.5 प्रतिशत बना रहा।
पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में सीएडी का अनुमान जीडीपी का 0.4 प्रतिशत था।
ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) या एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट स्कीम की वजह से डॉलर के इनफ्लो में जबरदस्त बढ़ोतरी के बाद, भारत दुनिया में विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है।
डेटा से पता चलता है कि 4 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.9 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 785.7 अरब डॉलर हो गया, जिससे भारत ने रूस को चौथे स्थान से हटा दिया और अब वह चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद चौथे स्थान पर है।
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