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Monday,28-September-2026
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असली मुद्दा परिसीमन है, न कि महिला आरक्षण : सोनिया गांधी

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कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सोनिया गांधी ने सोमवार को केंद्र सरकार के प्रस्तावित विशेष सत्र और उससे जुड़े विधेयकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस समय असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन है, जिसे उन्होंने ‘बेहद खतरनाक’ और ‘संविधान पर हमला’ बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जाति जनगणना को टालने और पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जिस तरह और जिस समय संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, उससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

द हिंदू अखबार में प्रकाशित अपने लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन मांग रहे हैं, जिन्हें सरकार तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के चरम के दौरान विशेष सत्र में जल्दबाजी में पास कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस असाधारण जल्दबाजी के पीछे केवल एक ही कारण हो सकता है। वह यह कि राजनीतिक फायदा उठाना और विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में लाना।

सोनिया गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा की तरह पूरी सच्चाई नहीं बता रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष ने कभी भी महिला आरक्षण को जनगणना से जोड़ने की मांग नहीं की थी बल्कि विपक्ष चाहता था कि इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए।

उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 का जिक्र करते हुए बताया कि सितंबर 2023 में विशेष सत्र के दौरान संसद ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया था। इस कानून के तहत संविधान में अनुच्छेद 334-ए जोड़ा गया, जिसमें लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इसे अगली जनगणना और उसके आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद लागू करने की शर्त रखी गई।

सोनिया गांधी ने कहा कि यह शर्त विपक्ष की मांग नहीं थी। उन्होंने बताया कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि महिला आरक्षण 2024 के चुनाव से ही लागू होना चाहिए लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना।

उन्होंने सवाल उठाया कि अब जब सरकार यह संकेत दे रही है कि अनुच्छेद 334-ए में संशोधन कर महिला आरक्षण को 2029 से लागू किया जा सकता है तो इसमें 30 महीने का समय क्यों लगा? और कुछ हफ्ते इंतजार कर सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई जा सकती थी।

सोनिया गांधी ने यह भी बताया कि विपक्षी नेताओं ने तीन बार केंद्र सरकार को पत्र लिखकर 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में चुनाव के अंतिम चरण के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था, ताकि सरकार के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हो सके। हालांकि सरकार ने इस वाजिब मांग को ठुकरा दिया।

उन्होंने कहा कि इसके बजाय प्रधानमंत्री लेख लिखकर, राजनीतिक दलों से अपील कर और सम्मेलन आयोजित कर अपनी बात आगे बढ़ा रहे हैं, जो ‘एकतरफा रवैया’ और ‘मेरी मर्जी या कुछ नहीं’ जैसी कार्यशैली को दर्शाता है।

सोनिया गांधी ने अधिक संवाद और सहमति आधारित प्रक्रिया की जरूरत पर जोर देते हुए 1993 में हुए 73वें और 74वें संविधान संशोधन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन संशोधनों के जरिए पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने से पहले लगभग पांच साल तक व्यापक चर्चा की गई थी। इसका श्रेय उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिया।

उन्होंने बताया कि आज देश में करीब 15 लाख महिला जनप्रतिनिधि स्थानीय निकायों में कार्यरत हैं, जो कुल का 40 प्रतिशत से अधिक हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी मजबूत आधार पर खड़ा है।

जनगणना में देरी को लेकर भी सोनिया गांधी ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 2021 में होने वाली जनगणना को टाल दिया गया, जिससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत मिलने वाले लाभ से 10 करोड़ से ज्यादा लोग वंचित रह गए। यही कानून प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की आधारशिला है।

उन्होंने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया पांच साल की देरी के बाद अब शुरू की गई है। ऐसे में 2027 की जनगणना को लेकर सरकार की जल्दबाजी समझ से परे है। सरकार इसे ‘डिजिटल जनगणना’ बता रही है और अधिकारियों के अनुसार इसके अधिकांश आंकड़े 2027 में ही उपलब्ध हो जाएंगे। ऐसे में विशेष सत्र बुलाने और परिसीमन कराने की जल्दी के पीछे दिए जा रहे तर्क ‘खोखले’ हैं।

सोनिया गांधी ने जाति जनगणना के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि करीब एक साल पहले प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि 2027 की जनगणना में जाति आधारित गणना भी होगी, जबकि इससे पहले सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर और संसद में बयान देकर इसका विरोध कर चुकी थी।

उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने जाति जनगणना की मांग करने वाले कांग्रेस नेताओं को ‘अर्बन नक्सल मानसिकता’ से ग्रसित बताया था। उन्होंने कहा कि अब 2027 की जनगणना सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण को मजबूती देने के लिए जाति आधारित आंकड़े जुटाने वाली है।

उन्होंने कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने महज छह महीने में जाति सर्वे पूरा कर लिया, जिससे यह साफ होता है कि इसमें देरी का कोई ठोस कारण नहीं है। उनके मुताबिक, यह कहना गलत है कि जाति जनगणना से 2027 की जनगणना में देरी होगी बल्कि सरकार का असली इरादा इसे और टालना है।

विशेष सत्र को लेकर उन्होंने कहा कि अब तक सांसदों को यह तक नहीं बताया गया है कि सरकार इस सत्र में कौन-कौन से प्रस्ताव लाने जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि परिसीमन को लेकर कोई नया फॉर्मूला लाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि परिसीमन हमेशा जनगणना के बाद ही होना चाहिए और अगर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो यह केवल गणितीय नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी संतुलित होना चाहिए। परिवार नियोजन में आगे रहे राज्यों और छोटे राज्यों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ‘आरक्षण के भीतर आरक्षण’ का प्रावधान है, जिसके तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में विपक्ष ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए भी ऐसा ही प्रावधान करने की मांग की थी।

उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र जुलाई के मध्य में प्रस्तावित है और तब तक पर्याप्त समय है कि सरकार सभी दलों से चर्चा कर व्यापक सहमति बनाए।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर प्रस्तावों पर चर्चा करती है, सार्वजनिक बहस की अनुमति देती है और फिर मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक लाती है, तो इससे कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा।”

उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि इस तरह जल्दबाजी में इतने बड़े और दूरगामी बदलाव लाना न केवल गलत है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है।

राष्ट्रीय समाचार

भारत की औद्योगिक वृद्धि दर अगस्त में बढ़कर 8 प्रतिशत हुई, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर शीर्ष पर रहा

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भारत का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा है। इसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन करना था। यह जानकारी सोमवार को सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में दी गई।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अगस्त के दौरान 9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

आधिकारिक बयान के अनुसार, “रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने लगातार तीन महीनों में 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की है।”

यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर 23 में से 18 उद्योग समूहों ने अगस्त में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इस दौरान सबसे अधिक योगदान देने वाले तीन प्रमुख उद्योगों में मोटर वाहनों का विनिर्माण, जिसमें 25.2 प्रतिशत वृद्धि हुई, इलेक्ट्रिकल उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 30.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, और मशीनरी एवं उपकरणों का विनिर्माण, जिसमें 25.3 प्रतिशत वृद्धि हुई, शामिल हैं।

बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में अगस्त के दौरान 12.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

हालांकि, खनन क्षेत्र में अगस्त के दौरान 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों के अनुसार, कैपिटल गुड्स, यानी कारखानों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के उत्पादन में अगस्त में 16.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। यह खंड अर्थव्यवस्था में हो रहे वास्तविक निवेश को दर्शाता है, जिसका आगे चलकर रोजगार और आय के सृजन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि हुई। यह बढ़ती आय के बीच इन वस्तुओं की उपभोक्ता मांग में वृद्धि को दर्शाता है। वहीं, साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसे कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स के उत्पादन में महीने के दौरान 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में भी 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि हाईवे, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं में सरकार के बड़े निवेश से प्रेरित रही। ऐसी परियोजनाएं बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के साथ-साथ समग्र आर्थिक विकास दर को बढ़ावा देती हैं।

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राजनीति

शरद पवार ने रखीं 17 मांगें, किसानों पर मंडराया बड़ा संकट: एनसीपी नेता अनीश गवांडे

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एनसीपी (एसपी) नेता अनीश गवांडे ने शरद पवार की बैठक, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद, सीजेपी के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं दिए जाने, आईआईटी मुंबई के छात्र की मौत और प्रवेश वर्मा के थप्पड़ मारने के विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन सभी मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाबदेही की मांग की।

शरद पवार की बैठक को लेकर अनीश गवांडे ने कहा कि पवार साहब ने एक पत्र के जरिए 17 मांगें सामने रखी हैं। इनमें कर्ज माफी, बिजली बिल और सूखा प्रभावित किसानों को सहायता देने जैसी मांगें शामिल हैं। कुछ महीने पहले ही शरद पवार ने आशंका जताई थी कि अगर इस साल बारिश ठीक नहीं हुई तो देश और खासकर महाराष्ट्र के किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ईरान में हुए युद्ध के बाद यूरिया खाद की कमी की बात सामने आ रही है। ऐसे में अगर बारिश कम होती है तो किसानों के सामने और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने किसानों के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई।

गवांडे ने कहा कि बैठक में अन्य राजनीतिक मुद्दों के साथ चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर भी चर्चा होगी और आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जाएगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर गवांडे ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज पर इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं, ऐसे में तीनों चुनाव आयुक्तों को एक साथ सामने आकर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने फॉर्म-6 में हुए बदलाव, वोटर लिस्ट के केंद्रीकरण और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गवांडे ने इन प्रक्रियाओं को ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी’ बताते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर को लेकर राज्य चुनाव अधिकारियों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। साथ ही, अपील की प्रक्रिया में भी सभी चुनाव आयुक्तों को विश्वास में नहीं लिया गया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाएगा। कांग्रेस के अलावा सिविल सोसाइटी के लोग भी इस मुद्दे पर सामने आए हैं। मुंबई में 2 तारीख को विरोध-प्रदर्शन और 4 तारीख को शिवसेना तथा मनसे के साथ प्रदर्शन की बात कही गई है। चुनाव आयोग देश की महत्वपूर्ण स्वतंत्र संस्था है और उसके कामकाज को लेकर सवाल उठने पर नागरिकों को आवाज उठानी चाहिए।

मुंबई पुलिस द्वारा 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रस्तावित सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने पर भी गवांडे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महात्मा गांधी के दांडी मार्च का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी किसी अनुमति का सवाल नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं देना अपना सामान्य रवैया बना लिया है। विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने मराठा आरक्षण, चुनाव आयोग और पुणे में एमपीएससी छात्रों के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में अनुमति नहीं दी जाती, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ पक्ष के कार्यक्रमों को अनुमति मिलती है। जनता इसे अन्याय के रूप में देख रही है और लोग अनुमति मिले या नहीं मिले, विरोध के लिए सड़कों पर उतरेंगे।

आईआईटी मुंबई के छात्र की मौत के मामले पर अनीश गवांडे ने छात्र आत्महत्या को राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति बताया। उन्होंने 2024 के एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उस साल 14,500 छात्रों ने आत्महत्या की, जो 2014 के करीब 8,000 के आंकड़े से 80 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने आईआईटी में पिछले 20 वर्षों के दौरान 170 से अधिक छात्रों की आत्महत्या का भी दावा किया। गवांडे ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए संस्थानों में काउंसलरों की संख्या बढ़ाने और जातिगत भेदभाव के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके साथ सरकार को बातचीत करनी चाहिए और उन्हें राजनीतिक विरोधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

प्रवेश वर्मा से जुड़े थप्पड़ विवाद पर गवांडे ने इसे गलत बताते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी आम नागरिक को सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मारना अपराध है। किसी भी व्यक्ति को अपने हाथ में कानून लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने भाजपा से प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि अगर पार्टी खुद को अलग तरह की पार्टी मानती है तो उसे अपने नेता के खिलाफ कार्रवाई करके यह दिखाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो तो पुलिस को भी मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी आम नागरिक पर हाथ उठाना गलत है, खासकर तब जब ऐसा करने वाला व्यक्ति विधायक या किसी महत्वपूर्ण पद पर हो।

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राजनीति

थप्पड़ मारने वाले मंत्री को गिरफ्तार कराएं पीएम मोदी, जेन-जी का दिल जीत जाएंगे : केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तिलक नगर में जेन-जी के एक युवक को थप्पड़ मारने की घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्री प्रवेश वर्मा को गिरफ्तार करा दें और खराब सड़क निर्माण के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करें, तो इससे देश के युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेन-जी से जुड़ने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं, लेकिन उन्हें यह सोचना चाहिए कि युवा उनसे क्यों नहीं जुड़ रहे हैं।

उन्होंने तिलक नगर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले रेखा गुप्ता सरकार की ओर से बनाई गई एक सड़क को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए थे। केजरीवाल के मुताबिक, लोगों ने सड़क की गुणवत्ता दिखाते हुए बताया कि वह हाथ से ही टूट रही थी। इसी दौरान वहां मंत्री प्रवेश वर्मा भी मौजूद थे। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने वाले लोगों में मौजूद जेन-जी के एक युवक को मंत्री ने खींचकर थप्पड़ मारा।

उन्होंने सवाल किया कि जब किसी सरकार का मंत्री सार्वजनिक रूप से किसी युवा के साथ इस तरह का व्यवहार करेगा तो देश का जेन-जी प्रधानमंत्री से कैसे जुड़ेगा। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें युवाओं से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने या अन्य गतिविधियों के बजाय भ्रष्टाचार और गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी यदि अपने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करते हैं और सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार करने वालों को गिरफ्तार कराते हैं, तो उन्हें युवाओं से जुड़ने के लिए अलग से प्रयास करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश का जेन-जी ईमानदारी और स्पष्ट कार्रवाई की उम्मीद करता है। केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस पर ऊपर से दबाव है और इसी वजह से मंत्री को बचाने की कोशिश की जा रही है।

केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक तरफ युवाओं को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं और दूसरी तरफ ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करते तो यह विरोधाभास पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि जेन-जी सरकार से ईमानदारी और सीधे तरीके से कार्रवाई की अपेक्षा करता है।

गौरतलब है कि तिलक नगर में सड़क की गुणवत्ता को लेकर सामने आई घटना के बाद मंत्री प्रवेश वर्मा और युवक से जुड़े थप्पड़ प्रकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और संबंधित मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

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