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Sunday,27-September-2026
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राजनीति

बंगाल में मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठाने वाले को बर्दाश्त नहीं करेंगेः ओवैसी

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पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए प्रचार करने पहुंचे पहुंचे एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को रानीगंज में दरगाह गोशे बंगला पर पहुंचकर चादर चढ़ाई। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते आरक्षण बिल को लेकर सवाल उठाए और मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए।

महिला आरक्षण बिल पर नरेंद्र मोदी ने सभी से समर्थन मांगा और इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया। इस सवाल पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “विधेयक क्या है? मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। कम से कम विधेयक की एक प्रति तो भेजनी चाहिए।”

हुमायूं कबीर ने टीएमसी और एआईएमआईएम पर समझौता करने का आरोप लगाया है। इस पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “कभी टीएमसी तो कभी हुमायूं हमें भाजपा की ‘बी टीम’ कहते हैं, लेकिन हम सिर्फ जनता की आवाज हैं और बंगाल में मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठाने वाले किसी को भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम यहां आए हैं और आते रहेंगे। हमारा लक्ष्य बंगाल में मुसलमानों के लिए राजनीतिक सशक्तीकरण और नेतृत्व सुनिश्चित करना है, क्योंकि तभी न्याय मिलेगा। अन्यथा, हम दमन झेलते रहेंगे। इसीलिए हम चुनाव लड़ रहे हैं और अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार में हिस्सा ले रहे हैं।”

ओवैसी ने इस बार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी और उम्मीदवारों के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई।

इसके पहले रविवार को दुर्गापुर में ओवैसी ने कहा कि ममता बनर्जी को पहले यह बताना चाहिए कि उन्होंने बंगाल में मुसलमानों की हालत क्यों इतनी खराब रखी और उन्हें राजनीतिक नेतृत्व क्यों नहीं दिया। पिछले 50-60 वर्षों से बंगाल में सेक्युलर सरकारें सत्ता में रही हैं, लेकिन मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक स्थिति अभी भी बहुत खराब है। अल्पसंख्यकों को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व चाहिए।

ओवैसी ने कहा कि सरकारी आंकड़े भी यही बताते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर मुसलमानों की हालत बहुत खराब है। जब तक अल्पसंख्यकों के पास अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व नहीं होगा, तब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। हमारा प्रयास एक मजबूत मुस्लिम राजनीतिक एजेंसी बनाने का है।

अपराध

सीबीआई ने गुजरात के 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने रविवार को बताया कि यह कार्रवाई उन सिंडिकेट्स (गिरोहों) के खिलाफ सीबीआई की लगातार चल रही मुहिम का हिस्सा है, जो देशभर के नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।

एजेंसी के अनुसार, सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अपराधों पर देशव्यापी कार्रवाई को तेज करते हुए 10 राज्यों में 22 जगहों पर एक साथ तलाशी ली। इसी कड़ी में गुजरात के एक बड़े डिजिटल अरेस्ट मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया।

इस मामले में पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया था। साइबर अपराधियों ने पुलिस और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अधिकारी बनकर पीड़ित को 11.42 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास के रूप में हुई है। सीबीआई जांच के दौरान दोनों आरोपियों की अपराध से मिली रकम प्राप्त करने, उसकी लेयरिंग (कई खातों में घुमाने) और उसे आगे भेजने में भूमिका का पता चला।

जांच से यह भी पता चला कि उन्होंने कथित तौर पर एक कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल पीड़ित से ठगे गए 11.42 करोड़ रुपए में से 2.5 करोड़ रुपए प्राप्त करने के लिए किया था। साथ ही, ये दोनों मनी ट्रेल को छिपाने के इरादे से इन फंड्स को अपने साथियों के कई खातों में ट्रांसफर करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।

जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी और दूसरे साइबर अपराधों से कमाए गए पैसे को निकालने के लिए बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल करने और एपीके फाइलें इंस्टॉल करने में शामिल थे। उनके पास से जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस से कई ऐसे चैट, मैसेज और दस्तावेज भी मिले हैं, जो अपराध में उनकी भूमिका साबित करते हैं।

मनी ट्रेल के विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर तलाशी की गई। इस दौरान आपत्तिजनक बैंकिंग दस्तावेज, खाते से संबंधित रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए गए। सीबीआई ने कहा कि इन सबूतों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि राज्यों की सीमाओं के पार चल रहे डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट्स के बड़े वित्तीय और तकनीकी ढांचे का पता लगाया जा सके।

एजेंसी ने जानकारी दी कि सीबीआई ने अलग-अलग राज्यों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के कई मामले अपने हाथ में लिए हैं। इनमें से चार मामलों में पिछले 30 दिनों में सीबीआई ने 22 राज्यों में 142 जगहों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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राजनीति

मुझे तेज लहरों के बीच तैरना पसंद, सीईसी के खिलाफ महाभियोग की मांग के बीच राहुल गांधी का पोस्ट

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक ऐसा पोस्ट किया है जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। राहुल गांधी ने लिखा, “मुझे समुद्र में तब तैरना पसंद है, जब लहरें तेज हों। इससे यह सीखने को मिलता है कि उथल-पुथल भी शांति का ही एक रूप है।”

राहुल का यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की मीडिया रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग तेज कर दी है।

इससे पहले कांग्रेस समेत ‘इंडी’ गठबंधन के कई दलों ने सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली समेत पूरे देश में धरना प्रदर्शन किया था। दरअसल केरल कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन का कहना है कि ज्ञानेश कुमार ने उनसे संपर्क किया और उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा, यहां तक ​​कि मंत्री पद की पेशकश भी की। ज्ञानेश कुमार को ऐसा प्रस्ताव देने का अधिकार किसने दिया? वे किसके अधिकार से बोल रहे थे और 2016 में भाजपा के लिए राजनीतिक भर्ती में चुनाव आयुक्त की कथित संलिप्तता क्यों थी?

इस पर राहुल गांधी ने पोस्ट किया, “पहले ज्ञानेश कुमार, जो उस समय एक सेवारत आईएएस अधिकारी थे – का इस्तेमाल भाजपा के लिए भर्ती करने में किया गया। फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बनाया और उन्हें भारत के चुनावों में मैच फिक्सिंग का जिम्मा सौंप दिया।”

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है और एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम काटे जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने एक अहम बैठक की और प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। आयोग ने कहा कि हाल के महीनों में देशभर में एसआईआर समेत कई फैसले लिए गए हैं।

इस प्रेस नोट के बाद से भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है और कह रही है कि जब सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं तो फिर एक आयुक्त के मतभेद की बात कहां से आ रही है।

प्रेस रिलीज में कहा गया था, “24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का आदेश जारी किया गया था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल और 30 अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया शुरू की गई। यह आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था।”

आयोग ने आगे बताया था कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर का कार्यक्रम 27 अगस्त 2025 को जारी किया गया था। वहीं 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह कार्यक्रम 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि तीसरे चरण के बाकी 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की कुल संख्या का पता चल सकेगा।

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राजनीति

राहुल गांधी की बातों से समाज में जाता है गलत संदेश : किरेन रिजिजू

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर दिए गए बयान को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “राहुल गांधी की बातों को समाज में बेवजह फैलाना सही नहीं है क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाता है।”

बता दें कि राहुल गांधी ने 24 सितंबर को एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि देश में सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इनकम्बेंसी कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के खिलाफ तो काम करती है लेकिन भाजपा के खिलाफ गायब हो जाती है। राहुल गांधी ने दावा किया था कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है।

राहुल गांधी ने कहा था कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और 50 वर्षों से भारतीय राजनीति को करीब से देख रहे हैं। उनके मुताबिक, भारत में एंटी-इनकम्बेंसी एक स्वाभाविक राजनीतिक ताकत है, जो हर सरकार के खिलाफ समय के साथ उभरती है। उन्होंने कहा था कि इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध के बाद भारी लोकप्रियता हासिल की थी लेकिन कुछ ही समय में उनके खिलाफ भी सत्ता विरोधी माहौल बन गया। यही स्थिति कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ भी होती है लेकिन भाजपा के मामले में ऐसा नहीं दिखता।

उन्होंने कहा था, “मैं पूरी निश्चितता के साथ कह सकता हूं कि 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में धांधली हुई। मेरे पास इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। यह 99 प्रतिशत नहीं बल्कि 100 प्रतिशत निश्चित है।”

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी। उन्होंने दावा किया था कि अब चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्त भी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर आपत्ति जता रहे हैं और ज्ञानेश कुमार को मौजूदा अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा था कि चुनाव आयोग का सबसे बड़ा दायित्व मतदाता के वोट की रक्षा करना है। अगर वोट सुरक्षित नहीं रहेगा तो संविधान सही ढंग से काम नहीं करेगा, कानूनों की वैधता पर सवाल उठेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व खत्म हो जाएगा।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि “पहले वोट चोरी हुई, फिर कानून चोरी हुई और अब संस्थाओं की चोरी हो रही है।” उन्होंने यह भी कहा था कि जिन सांसदों का चुनाव कथित “वोट चोरी” के जरिए हुआ है, उनके द्वारा बनाए गए कानून भी अवैध हैं। इस पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे राहुल गांधी की राजनीति का हिस्सा बताया था।

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