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वैश्विक संघर्षों के बीच रिकॉर्ड हाई से सोना 50,000 रुपए तो चांदी 2 लाख रुपए नीचे; जानिए कीमती धातुओं में गिरावट की वजह और आगे कैसी रहेगी चाल
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नई दिल्ली, 4 अप्रैल : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के पांचवें सप्ताह में पहुंचने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.2 प्रतिशत और चांदी 3.8 प्रतिशत तक गिर गई। वहीं देश में सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से 50 हजार रुपए से नीचे है, जबकि चांदी अपने उच्चतम स्तर से 2 लाख रुपए से नीचे है।
हाल के दिनों में सोने में हल्की तेजी जरूर देखने को मिली है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में दबाव साफ नजर आ रहा है। इसके पीछे मजबूत डॉलर, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताएं प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर गोल्ड 2.29 प्रतिशत गिरकर 4,702 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि सिल्वर 3.82 प्रतिशत गिरकर 73.17 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1.7 प्रतिशत टूटकर 4,675.67 डॉलर पर पहुंच गया, जबकि चांदी में और ज्यादा गिरावट देखने को मिली और यह 2.91 प्रतिशत गिरकर 72.99 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर जून डिलीवरी वाला सोना हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन (2 अप्रैल) 0.02 प्रतिशत गिरकर 1,49,650 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने ऑल-टाइम हाई 2,02,984 रुपए प्रति 10 ग्राम से करीब 53,334 रुपए कम है।
वहीं अगर चांदी की बात करें तो एमसीएक्स पर मई डिलीवरी वाली चांदी अंतिम कारोबारी दिन (2 अप्रैल) 4.48 प्रतिशत यानी 10,901 रुपए गिरकर 2,32,600 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई, जो अपने ऑल-टाइम हाई 4,39,337 रुपए प्रति किलोग्राम से 2,06,737 कम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने की मांग एक सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में बढ़ी थी। लेकिन बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई, जिससे बाजार का रुख बदल गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से सोना और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए इन धातुओं को खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है और कीमतें नीचे आती हैं।
इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टाल सकते हैं या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों का सीधा असर सोना-चांदी जैसे निवेश पर पड़ता है, क्योंकि ये कोई ब्याज नहीं देते। ऐसे में निवेशक बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की ओर रुख कर लेते हैं।
अब निवेशकों की नजर अमेरिका के अहम आर्थिक आंकड़ों जैसे नॉन-फार्म पेरोल, एडीपी रोजगार डेटा और बेरोजगारी दर पर है, जो बाजार में तेज उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। तकनीकी तौर पर सोने के लिए 1,48,000 रुपए के आसपास सपोर्ट और 1,55,000 रुपए के आसपास रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।
हालांकि इन सभी दबावों के बावजूद, सोने ने सप्ताह के दौरान करीब 2.20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक हालात और महंगाई के रुख पर निर्भर करेगी।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, और सोने की कीमतों में आगे भी घटनाओं के आधार पर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट की एक वजह यह भी है कि यह केवल निवेश धातु ही नहीं बल्कि औद्योगिक धातु भी है। जब वैश्विक आर्थिक ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो उद्योगों में इसकी मांग घटने का डर बढ़ जाता है, जिससे कीमतों पर ज्यादा दबाव आता है।
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार पूरी तरह मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों जैसे महंगाई, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर निर्भर है। आने वाले समय में इन कारकों के आधार पर ही सोने-चांदी की दिशा तय होगी और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
लगातार दूसरे दिन सोने की चमक पड़ी फीकी; चांदी में भी छाई सुस्ती

सोने और चांदी की कीमत में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.32 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे आ गया है।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 3,123 रुपए कम होकर 1,44,970 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,48,093 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
22 कैरेट सोने का दाम 1,35,653 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,32,793 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,08,728 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,11,070 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 8,218 रुपए कम होकर 2,31,93 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,40,191 रुपए प्रति किलो था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर सोना 1.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,174.47 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.91 डॉलर प्रति औंस पर थी।
एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में ब्याज दरें एक बार बढ़ाने के संकेत के बाद सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो गया। फेड के सख्त रुख के कारण बुलियन बाजारों में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई।
उन्होंने आगे कहा कि फेड की पॉलिसी के ऐलान के बाद पिछले कुछ सेशन में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत लगभग 4375 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 4150 डॉलर प्रति औंस हो गई है, जबकि एमसीएक्स गोल्ड का दाम लगभग 1,54,000 रुपए से घटकर 1,47,200 रुपए पर आ गया। डॉलर के मजबूत होने की संभावना और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।
व्यापार
एससी और ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए अब नहीं देना होगा डोमिसाइल प्रमाण पत्र

केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) छात्रों के छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को ज्यादा आसान बना दिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए डोमिसाइल (निवास) प्रमाण पत्र जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।
इस फैसले से छात्रों पर दस्तावेजों का बोझ कम होगा और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करना पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगा। खास तौर पर उन हजारों छात्रों को इसका लाभ मिलेगा जो अपने गृह राज्य के बाहर स्थित शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं।
सरकार के अनुसार, एससी और ओबीसी वर्ग के लिए संचालित प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत हर वर्ष लगभग 1.2 करोड़ छात्रों को लाभ मिलता है। डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता हटने से आवेदन प्रक्रिया अधिक छात्र-अनुकूल बनेगी, दस्तावेजी औपचारिकताएं घटेंगी और छात्रों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।
डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए विभाग ने उमंग प्लेटफॉर्म पर एसईटीयू (शैक्षिक बदलाव और उत्थान के लिए स्कॉलरशिप) भी शुरू किया है। यह छात्रवृत्ति से जुड़ी सभी सेवाओं के लिए एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
इस प्लेटफॉर्म के जरिए पात्र छात्र, संस्थागत नोडल अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी और राज्य स्तरीय अधिकारी एक ही जगह पर आवेदन पंजीकरण, आवेदन की निगरानी, सत्यापन और अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
मंत्रालय ने कहा कि ये पहल सरकार के उस व्यापक लक्ष्य का हिस्सा हैं, जिसके तहत समावेशी विकास को बढ़ावा देना, अनावश्यक प्रक्रियागत बाधाओं को कम करना और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना शामिल है।
विभाग ने यह भी दोहराया कि वह तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंच बनाने और उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
वित्त वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति वर्ग के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को 7,981.47 करोड़ रुपए की सहायता राशि वितरित की गई थी। छात्रवृत्ति योजनाओं पर खर्च में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 21 प्रतिशत, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 11.23 प्रतिशत और टॉप क्लास एजुकेशन छात्रवृत्ति योजना के तहत 13.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
व्यापार
टाटा मोटर्स ने कमर्शियल वाहनों के दाम 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाए, 1 जुलाई से लागू होंगी नई कीमतें

टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स (टीएमसीवी) ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है और नई कीमतें 1 जुलाई से लागू होंगी। यह जानकारी गुरुवार को कंपनी की ओर से दी गई।
एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी होना और लागत का बढ़ना है। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल पर विभिन्न होगी और 2.5 प्रतिशत तक सीमित होगी।
इस बढ़ोतरी से टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स भी उन कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने मध्य पूर्व संकट के चलते कच्चे माल और लागत में बढ़ोतरी के कारण कीमतों में इजाफा किया है।
इससे पहले, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (टीएमपीवी) ने 12 जून को अपनी ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। नई कीमतें एक जुलाई से लागू होंगी।
कंपनी की ओर से जारी की गई एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि कीमतों में बढ़ोतरी की वजह इनपुट लागत में बढ़ोतरी होना था।
टीएमपीवी ने कहा कि वह लागत में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है, जबकि हालिया कीमत संशोधन के जरिए बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही है।
कंपनी ने कहा कि कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी। वहीं, मध्य पूर्व तनाव के चलते मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया जैसी कंपनियां गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में, टीएमसीवी के मुनाफे में सालाना आधार पर 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि आय 22 प्रतिशत बढ़कर 24,452 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान कंपनी का एबिटा मार्जिन 13.90 प्रतिशत रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर 4 रुपए का डिविडेंड भी घोषित किया।
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