राजनीति
कांग्रेस नेताओं ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को दी श्रद्धांजलि, आर्थिक सुधारों और ईमानदारी को बताया प्रेरणा स्रोत
नई दिल्ली, 26 सितंबर। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। नेताओं ने उनकी विनम्रता, ईमानदारी और आर्थिक सुधारों से संबंधित दूरदर्शिता को देश के लिए प्रेरणादायी बताया।
कांग्रेस प्रियंका गांधी वाड्रा ने लिखा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जयंती पर उन्हें सादर नमन। अपनी दूरदर्शिता के माध्यम से मनमोहन सिंह देश को असाधारण प्रगति के रास्ते पर लाए और एक समावेशी आर्थिक मजबूती के जरिए गरीब, दलित, वंचित समेत सभी तबकों को समृद्ध किया। उनकी विनम्रता, सादगी, मेहनत, ईमानदारी और देश के प्रति अटूट समर्पण हम सबकी प्रेरणा का स्रोत हैं।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने भी मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी। वेणुगोपाल ने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब हम अपने देश और उसकी अर्थव्यवस्था में उनके अमूल्य योगदान को याद न करें। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और उसे दुनिया के सबसे सफल कल्याणकारी राज्यों में से एक बनाया। उन्होंने न केवल 1991 के ऐतिहासिक उदारीकरण सुधारों की शुरुआत की, बल्कि लगभग तीन दशकों तक भारत की आर्थिक नीति को भी आकार दिया।”
वेणुगोपाल ने उनकी विनम्रता की प्रशंसा करते हुए लिखा, “डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी विनम्रता और शांतचित्तता ने अलग पहचान दिलाई। उन्होंने कभी खोखली बयानबाजी पर नहीं, बल्कि विचारों और निर्णायक कार्रवाई की शक्ति पर भरोसा किया। उनके सुधारों ने अवसरों के द्वार खोले। एक आत्मविश्वासी मध्यम वर्ग की नींव रखी और लाखों परिवारों को गरीबी से निकाला। सार्वजनिक जीवन में उन्होंने गरिमा और निष्ठा का परिचय दिया, यह साबित करते हुए कि ईमानदारी और बुद्धिमत्ता से युक्त नेतृत्व एक राष्ट्र को बदल सकता है। लगातार आलोचना और राजनीतिक हमलों के बावजूद उन्होंने सभी वर्गों के लोगों का सम्मान बनाए रखा।”
वेणुगोपाल ने आगे लिखा, “अनगिनत भारतीयों के लिए, वे बुद्धिमत्ता, निष्पक्षता और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक बने रहेंगे। उनका जीवन और कार्य हमें एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे जो न केवल अधिक सशक्त और समृद्ध हो, बल्कि अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण भी हो।”
कांग्रेस के दिग्गज नेता और कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि। एक अनुभवी नेता जिन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता से देश का मार्गदर्शन किया। उनकी दूरदर्शिता ने हमारे लोगों को शिक्षा का अधिकार, भोजन का अधिकार, मनरेगा और कई अन्य नीतियां दीं। हम बेंगलुरु के विकास में उनके विश्वास और सार्वजनिक जीवन में उनकी बेजोड़ निष्ठा को सदैव संजोकर रखेंगे। ईश्वर से कामना है कि उनकी विरासत हमें एक न्यायपूर्ण और समृद्ध भारत के निर्माण के प्रयासों में मार्गदर्शन करती रहे।”
लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने भी मनमोहन सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि दी।
गोगोई ने लिखा, “एक दूरदर्शी अर्थशास्त्री और राजनेता, उनके शांत संकल्प ने भारत के भाग्य को गहराई से आकार दिया। असम और पूर्वोत्तर के लिए, उनकी विरासत बोगीबील और ढोला सदिया पुल, जोरहाट में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी), उत्तर पूर्व सीमांत रेलवे, गैस क्रैकर परियोजना और उत्तर पूर्व औद्योगिक संवर्धन नीति (एनईआईपीपी) जैसी परिवर्तनकारी पहलों के माध्यम से कायम है, जिनसे कनेक्टिविटी मजबूत हुई, अवसर पैदा हुए और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिला।”
उन्होंने लिखा, “तीन दशकों से अधिक समय तक राज्यसभा में असम का प्रतिनिधित्व करते हुए उनकी बुद्धिमत्ता, विनम्रता और जन सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने एक स्थायी उदाहरण स्थापित किया। उनका जीवन कई पीढ़ियों को ईमानदारी, दूरदर्शिता और समर्पण के साथ सेवा करने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
राजनीति
ममता बनर्जी की सुरक्षा हटाने के आरोपों को कोलकाता पुलिस ने किया खारिज, कहा- केवल दो अधिकारियों की हुई अदला-बदली

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, कोलकाता पुलिस ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने जानबूझकर ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली है।
बुधवार रात टीएमसी के दो राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन और सागरिका घोष तथा लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के सामने मौजूद पुलिस चौकी खाली दिखाई दे रही थी। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि प्रशासन के निर्देश पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था हटा दी गई है।
हालांकि, राज्य पुलिस के सूत्रों ने इन दावों को गलत बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ममता बनर्जी की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। केवल उनकी सुरक्षा में तैनात दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बदला गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी चाहती थीं कि जब वह मुख्यमंत्री थीं, उस दौरान उनकी सुरक्षा संभालने वाले दो कोलकाता पुलिस अधिकारियों को ही उसी ड्यूटी पर बनाए रखा जाए। लेकिन सरकारी नियमों के तहत किसी अधिकारी की नियुक्ति या तैनाती व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं की जा सकती।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “सुरक्षा अधिकारियों का तबादला ड्यूटी रोस्टर और तय सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार होता है। इस मामले में भी सामान्य प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।”
सूत्रों के मुताबिक, जिन दो नए सुरक्षा अधिकारियों को बुधवार रात कालीघाट स्थित आवास पर भेजा गया था, उन्हें ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों ने ड्यूटी संभालने की अनुमति नहीं दी। बताया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री उन अधिकारियों से परिचित नहीं थीं।
इस बीच, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के आवास की सुरक्षा कम नहीं बल्कि और मजबूत की गई है। बुधवार से उनके घर के बाहर ऊंचे सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए गए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
लियोनेल मेसी ‘गोट इंडिया टूर’ विवाद: पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास की बढ़ीं मुश्किलें, सवालों के जवाब देने थाने पहुंचे

कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीडांगन में दिसंबर 2025 में आयोजित लियोनेल मेसी के “गोट इंडिया टूर” के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर जांच एक बार फिर तेज हो गई है। इस मामले को लेकर राज्य के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास गुरुवार को बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। जहां उनसे पूछताछ की जाएगी।
इससे पहले पूर्व खेल मंत्री बिस्वास बुधवार को भी बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुंचे थे, जहां उनसे पूछताछ की गई। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई है जो मेसी की टीम की ओर से पुलिस को ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी।
मेसी की टीम के एक सदस्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को भेजे गए ईमेल में आरोप लगाया है कि स्टेडियम में अफरा-तफरी तब शुरू हुई, जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास मैदान में पहुंचे। आरोप में कहा गया है कि बिस्वास बार-बार मेसी के पास जाकर उनके कंधे और कमर को छूते हुए तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही कई अनधिकृत लोग भी मैदान में प्रवेश कर गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आयोजन स्थल पर केवल तीन फोटोग्राफरों को अनुमति दी गई थी, लेकिन उस समय लगभग 40 लोग मैदान में मौजूद थे। इससे न केवल भीड़ बढ़ी, बल्कि मेसी भी असहज हो गए और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई, जिसके बाद उन्हें कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा।
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मेसी की टीम द्वारा दिए गए नए विवरण जांच में मददगार साबित होंगे। इसी घटना के बाद दत्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने भी पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था फैलाने के आरोप लगाए हैं।
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने दावा किया है कि कार्यक्रम के लिए कुल 70 हजार टिकट छापे गए थे, जिनमें से लगभग 22 हजार टिकट तत्कालीन खेल मंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ले लिए थे। आरोप है कि इन टिकटों को आगे परिचितों में बांटा गया और कुछ की बिक्री भी की गई, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई।
इस मामले में पुलिस ने कई बार अरूप बिस्वास को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अब तक जांच में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि अदालत से मिली अंतरिम राहत के बाद वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। अदालत ने पहले उन्हें कुछ शर्तों के साथ गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था और पुलिस को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे।
राजनीति
अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर पैसा लेने वालों को खोज रहे अधिकारी-ठेकेदार

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्ताधारी व्यवस्था और प्रशासनिक-राजनीतिक गठजोड़ पर कटाक्ष करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “टिकट के इच्छुक लोगों के बाद अब अधिकारी और ठेकेदार मिलकर ‘ढुंढाई पंचायत’ कर रहे हैं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर असंतोष और घबराहट का माहौल बनता जा रहा है।”
सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि पहले केवल भावी प्रत्याशी ही ऐसे लोगों को ढूंढ रहे थे, जिनसे कथित तौर पर टिकट दिलाने के नाम पर अग्रिम धनराशि ली गई थी।
अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि “अफवाह मंत्री” को लेकर जो चर्चाएं चल रही थीं, उन्हें अब तक केवल वही लोग तलाश रहे थे जो खुद प्रत्याशी बनने की दौड़ में थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब यह बात सामने आ चुकी है कि “30 सीट” मिलने की चर्चा मात्र अफवाह साबित हो रही है और वास्तविकता में स्थिति वैसी नहीं है जैसी प्रचारित की जा रही थी।
अखिलेश यादव के अनुसार, जैसे-जैसे इन कथित दावों की सच्चाई सामने आ रही है, वैसे-वैसे एई, जेई, एएमए जैसे विभागीय अधिकारी और ठेकेदार भी सक्रिय हो गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग भी उन व्यक्तियों की तलाश कर रहे हैं, जिन्होंने ट्रांसफर-पोस्टिंग और ठेके-कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के नाम पर उनसे कथित रूप से अग्रिम धनराशि ली थी।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि जिस “काली कमाई” के सहारे बड़े-बड़े दावे और राजनीतिक बयान दिए जा रहे थे, वही पैसा अब संबंधित लोगों के खिलाफ ही माहौल बना रहा है। उनके मुताबिक, यह स्थिति एक तरह की “पंचायत” जैसी बन गई है, जहां सभी पक्ष एक-दूसरे से जवाबदेही मांगते दिख रहे हैं।
इससे पहले भी अखिलेश यादव ने एनडीए पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ लोग लालच देकर और डराकर विधायक व एमएलसी को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। जो डरेगा वो तो जाएगा, बहादुर लोग होने चाहिए। यूपी में तो भाजपा के ही विधायक पाला बदलने को तैयार बैठे हैं। कुछ लोग समय पर पत्ते खोलते हैं। सपा पूरी तरह मजबूत है और पार्टी कई बार उतार-चढ़ाव देख चुकी है।
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