राष्ट्रीय समाचार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एसआरए को विले पार्ले स्लम पुनर्विकास के लिए कार्यारंभ प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया, देरी के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई
मुंबई: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई के विले पार्ले में एक झुग्गी पुनर्विकास परियोजना को कथित रूप से रोकने के लिए झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) और अन्य अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है और उन्हें सटेरी बिल्डर्स एंड डेवलपर्स एलएलपी को कार्य प्रारंभ प्रमाण पत्र (सीसी) जारी करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ ने शुक्रवार को सटेरी बिल्डर्स और एक झुग्गी बस्ती सोसाइटी, श्री गुरुकृपा एसआरए सीएचएस द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें परियोजना में बार-बार आ रही रुकावटों को चुनौती दी गई थी। पीठ ने कहा कि परियोजना को न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहले ही मंजूरी दिए जाने के बावजूद, अधिकारी अभी भी नई आपत्तियाँ उठा रहे हैं।
यह विवाद दयालदास रोड पर एक प्लॉट और उससे सटे डीपी रोड प्लॉट से संबंधित है, जिसे डेवलपर को नवंबर 2020 में एक स्लम पुनर्वास योजना के तहत पुनर्विकास करने के लिए नियुक्त किया गया था। एसआरए ने डेवलपर को सड़क चौड़ीकरण (पीएपी) से प्रभावित व्यक्तियों को भी समायोजित करने का निर्देश देने के बाद मई 2022 में एक आशय पत्र (एलओआई) और अनुमोदन की सूचना (आईओए) प्रदान की थी।
हालाँकि, कुछ झुग्गीवासियों और एक प्रतिद्वंद्वी डेवलपर, जिसे कथित तौर पर स्थानीय विधायक पराग अलावानी (प्रतिवादी 9) का समर्थन प्राप्त था, ने इन मंज़ूरियों को चुनौती दी। हालाँकि सर्वोच्च शिकायत निवारण समिति (AGRC) ने शुरुआत में जुलाई 2022 में LOI को रद्द कर दिया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2024 में इसे बहाल कर दिया और मई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने उस आदेश को बरकरार रखा।
सोसायटी के अधिवक्ता मयूर खांडेपारकर और ऋषि भट्ट ने भी दलील दी कि अलवानी के हस्तक्षेप के कारण परियोजना अनावश्यक रूप से रुकी हुई है।
बिल्डर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल सखारे और अधिवक्ता योगेश संकपाल ने तर्क दिया कि “प्रतिद्वंद्वी डेवलपर के समर्थन में कार्य कर रहे प्रतिवादी संख्या 9 के हस्तक्षेप के कारण पूरे पुनर्विकास को हर स्तर पर व्यवस्थित रूप से बाधित किया जा रहा है।”
उन्होंने बताया कि एसआरए ने 31 जुलाई, 2025 को एक नया नोटिस जारी किया, जिसमें डीपी रोड प्लॉट के लिए एक और प्रस्ताव मांगा गया, जबकि इसे पहले ही स्वीकृत और बरकरार रखा जा चुका है।
अदालत ने कहा: “यह वास्तव में सबसे खेदजनक स्थिति को दर्शाता है जब कोई वैधानिक प्राधिकरण किसी बाहरी या न्यायेतर हस्तक्षेप के कारण अपने वैधानिक कर्तव्यों का परित्याग करता है… ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिवादी संख्या 2 (एसआरए) ने वर्तमान मामले में ऐसा ही किया है।”
राज्य की ओर से उपस्थित महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने स्पष्ट किया कि आवास मंत्री ने “केवल एक बैठक की है और कोई बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं किया है और न ही कोई निर्णय लिया गया है” और एसआरए को स्वतंत्र रूप से कार्य करना चाहिए।
यह देखते हुए कि बिल्डर ने परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) के लिए किराया जमा करने सहित अपने दायित्वों का पालन किया है, अदालत ने कहा कि सीसी रोकने का “बिल्कुल कोई कारण नहीं” है। इसने अधिकारियों को “प्रक्रिया पूरी करने और सीसी जारी करने” का निर्देश दिया और उन्हें “प्रतिवादी 8 (पगरानी यूनिवर्सल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, एक अन्य डेवलपर) और 9 की ओर से वर्तमान स्लम योजना से संबंधित किसी भी शिकायत और/या हस्तक्षेप” पर विचार करने से रोक दिया।
न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि मलिन बस्ती अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है, जो गरीबी, गंदगी और गंदगी में रहने को मजबूर लोगों की जीवन स्थितियों में सुधार लाने के लिए बनाया गया है।
पीठ ने कहा, “स्लम अधिनियम का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि झुग्गीवासियों को पुनर्वास के बिना बेदखल होने से बचाया जाए और उन्हें सभ्य, सुरक्षित और स्वच्छ आवास/रहने की स्थिति प्रदान की जाए।”
राष्ट्रीय समाचार
तुकाराम मुंढे को बनाया जाए मुख्य चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार को हटाओ: अबू आजमी

समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने टीपू सुल्तान को लेकर जारी विवाद, अधिकारी तुकाराम मुंढे की कार्रवाई, चुनाव आयोग और मतदाता सूची में बदलाव के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने टीपू सुल्तान को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाला संघर्षशील व्यक्ति बताया और उनके बारे में गलत बातें फैलाने का आरोप लगाया। इसके अलावा, उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में बदलावों को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
मालेगांव में टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने और इसे देश के खिलाफ बताए जाने पर अबू आजमी ने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले भारत की आजादी की लड़ाई का इतिहास पढ़ना चाहिए। उन्होंने टीपू सुल्तान को अंग्रेजों से लड़ने वाला बहादुर व्यक्ति बताया और कहा कि उनके योगदान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। आजमी ने कहा कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। टीपू सुल्तान द्वारा मंदिर तोड़े जाने के आरोपों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में मस्जिदों को तोड़े जाने का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस की ओर से टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने को देश के खिलाफ बताए जाने पर आजमी ने कहा कि यदि संविधान की किताब में टीपू सुल्तान की तस्वीर और उनकी बहादुरी के किस्से दर्ज हैं, तो स्वतंत्रता सेनानी के खिलाफ बोलने वालों के तर्कों पर भी सवाल उठना चाहिए।
तुकाराम मुंढे की ओर से की जा रही कार्रवाई पर अबू आजमी ने उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुंडे लोगों की जिंदगी बचाने और खाद्य पदार्थों में मिलावट तथा भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो किसी मंत्री या अन्य व्यक्ति के दबाव में आए बिना नियमों के मुताबिक कार्रवाई करें। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग के नियमों को सख्ती से लागू करने की शुरुआत हुई थी। आजमी ने चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि तुकाराम मुंढे को चुनाव आयोग की जिम्मेदारी दी जाए, तो लोगों की कई शिकायतें दूर हो सकती हैं।
मतदाता सूची में एसआईआर और एसएसआई प्रक्रिया के तहत बदलावों पर आजमी ने सवाल किया कि जब इतने समय से एसआईआर चल रहा था, तो अब नई प्रक्रिया की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद नई प्रक्रियाएं लाई जा रही हैं। आजमी ने कहा कि देश में पैदा हुए सभी लोगों के नाम मतदाता सूची में होने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार दबाव में है और चुनाव आयोग पर लगे आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी पर राजनाथ सिंह के आरोपों और बांग्लादेश जैसी सत्ता परिवर्तन की कोशिश संबंधी बयान पर आजमी ने कहा कि ऐसी कोई कोशिश नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के नेता घबराए हुए हैं और उनका समय खत्म होता जा रहा है।
राजनीति
चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाना कांग्रेस की प्राथमिकता: इमरान मसूद

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने राहुल गांधी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान, परिसीमन बिल, रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीट बंटवारे की बातचीत और व्यापारियों के हो रहे नुकसान के मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और छोटे व्यापारियों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी पर राजनाथ सिंह के बयान को लेकर मसूद ने कहा कि व्यवस्था तो परिवर्तन करना ही चाहते हैं, लोग आपसे उबर गए हैं। लेकिन, हम लोकतांत्रिक लोग हैं, आपकी तरह चुराएंगे नहीं। हम लूटा हुआ लोकतंत्र नहीं लेंगे। कांग्रेस की प्राथमिकता चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाना है।
परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि इसके बहाने देश की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इससे उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच नई राजनीतिक भावना पैदा हो सकती है और प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या डीएमके इस मुद्दे पर भाजपा के साथ जा सकती है, मसूद ने कहा कि ऐसा करना डीएमके के लिए आत्महत्या जैसा होगा।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे की बातचीत पर मसूद ने कहा कि दोनों पक्ष प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं और कोशिश है कि अक्टूबर में इसे पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और सभी इस विषय को लेकर चिंतित हैं।
सपा नेताओं की ओर से कांग्रेस को 50 सीटों को लेकर परेशानी न होने संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि इस तरह की बातों का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने इंडिया गठबंधन की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि गठबंधन एकजुट होकर खड़ा है।
रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ से जुड़े सवाल पर मसूद ने कहा कि इस मामले में आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में टिप्पणी की कि वह कुछ भी कर सकते हैं और उनके अगले कदम का अनुमान लगाना आसान नहीं है।
दिल्ली में प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को रोजाना करीब 50 करोड़ रुपए का नुकसान होने के दावे पर मसूद ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब व्यापारियों का सामान बिक ही नहीं रहा, तो नुकसान के आकलन को किस आधार पर बताया जा रहा है। उन्होंने जीएसटी और महंगाई का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों ने छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाया है। छोटे व्यापारियों के पास काम कम है और महंगाई ने उनकी स्थिति और मुश्किल कर दी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 2014 से पहले माफिया राज और अब रामराज्य होने के बयान पर भी मसूद ने कटाक्ष किया। उन्होंने राज्य में अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने योगी सरकार के कानून-व्यवस्था संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार सब कुछ ठीक होने की बात करती है, जबकि उनके अनुसार जमीनी स्थिति पर सवाल बने हुए हैं।
राजनीति
सिद्धारमैया के स्टिंग वीडियो विवाद में कर्नाटक पुलिस ने यूट्यूब से मांगी जानकारी

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े स्टिंग वीडियो विवाद की जांच कर रही पुलिस ने यूट्यूब को पत्र लिखकर तकनीकी जानकारी मांगी है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि पुलिस ने वीडियो अपलोड किए जाने वाले आईपी एड्रेस और उसे अपलोड करने वाले व्यक्ति की जानकारी मांगी है।
वीडियो अपलोड करने वाले की पहचान और आईपी एड्रेस की जानकारी मांगी, साइबर क्राइम पुलिस कई पहलुओं से कर रही जांच
साइबर क्राइम पुलिस वायरल वीडियो की कई पहलुओं से जांच कर रही है। इसमें वीडियो के मूल स्रोत, इसे प्रसारित करने में शामिल लोगों की पहचान और इसे बनाने तथा प्रसारित करने के पीछे के मकसद का पता लगाना शामिल है।
कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कांग्रेस सरकार के बीच टकराव सामने आया है। कुमारस्वामी ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खरगे पर तीखा हमला बोला है। शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि खरगे ने उनका जोरदार खंडन किया है। खरगे ने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले में कुमारस्वामी को गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
इसके जवाब में कुमारस्वामी ने राज्य सरकार को उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती दी और बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिस इस मामले की जांच मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर कर रही है। पहले चरण में यूट्यूब से वीडियो अपलोड करने से संबंधित तकनीकी जानकारी मांगी गई है। इसमें आईपी एड्रेस और अन्य विवरण शामिल हैं, जिनकी मदद से वीडियो अपलोड करने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सके। दूसरे चरण में पुलिस वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो मूल है या उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। इसके अलावा वीडियो बनाने वाले और उसे सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है। तीसरे पहलू के तहत पुलिस वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने के पीछे के मकसद की जांच कर रही है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इसके पीछे कोई विशेष उद्देश्य या अन्य मंशा तो नहीं थी।
पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी जांच और वीडियो के मूल स्रोत का पता चलने के बाद घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने तथा जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इस बीच, कन्नड़ के एक निजी मीडिया संस्थान के प्रमुख ने दावा किया है कि उन्होंने ही स्टिंग वीडियो बनाया है। उन्होंने यह भी कहा है कि इस संबंध में सभी जानकारी संबंधित जांच अधिकारियों को दे दी गई है।
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