महाराष्ट्र
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने 5 अप्रैल को पूर्व माफिया और गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गवली की समयपूर्व रिहाई की मंजूरी दे दी। श्री गवली नागपुर सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति वृषाली जोशी की खंडपीठ ने श्री गवली द्वारा 10 जनवरी, 2006 की सरकारी अधिसूचना के मद्देनजर समय से पहले रिहाई के उनके दावे की अस्वीकृति को चुनौती देने वाली आपराधिक पुन: याचिका को स्वीकार कर लिया है।
अरुण गुलाब गवली द्वारा दिए गए आवेदन को उत्तरदाताओं ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि राज्य सरकार 1 दिसंबर, 2015 को एक नई अधिसूचना लेकर आई थी, जिसके द्वारा मकोका अधिनियम के तहत एक दोषी को उक्त नीतिगत निर्णय के लाभ का हकदार माना गया था। ।”
वकील अली ने तर्क दिया था कि उनके मुवक्किल श्री गवली 2006 की अधिसूचना से लाभ पाने के हकदार होंगे क्योंकि उन्हें वर्ष 2009 में दोषी ठहराया गया था, और इसलिए, बाद की अधिसूचना जो वर्ष 2015 में लागू हुई थी, उस पर कोई प्रयोज्यता नहीं होगी। गवली जी.
राज्य ने श्री गवली द्वारा दायर याचिका को इस आधार पर पंजीकृत किया था कि 2015 की अधिसूचना विशेष रूप से मकोका अधिनियम के तहत दोषी को उक्त नीति के लाभ से बाहर करती है। इसमें आगे कहा गया कि 2006 की अधिसूचना भी यह स्पष्ट करती है कि एनडीपीएस अधिनियम, टाडा अधिनियम, एमपीडीए आदि जैसे अधिनियम के तहत दोषी पॉलिसी के लाभ के हकदार नहीं हैं।
श्री अली ने कहा, “आगे यह तर्क दिया गया कि जिस शब्दावली का उपयोग किया गया है वह वगैरह-वगैरह है, और इसलिए मकोका अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर भी ईजसडेम जेनेरिस के नियम का सहारा लेकर 2006 की नीति का लाभ नहीं मिल सकेगा।”
श्री गवली की ओर से श्री नागमन अली और महाराष्ट्र राज्य की ओर से एम.जे. खान के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद, खंडपीठ ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि श्री गवली 2006 की नीति के लाभ के हकदार होंगे और वह नहीं हो सकते। एजुस्डेम जेनेरिस के नियम का सहारा लेकर पॉलिसी के लाभ से बाहर कर दिया गया। राज्य को आदेश की तारीख से चार सप्ताह के भीतर उनकी रिहाई पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।
मामले का संक्षिप्त इतिहास
मुंबईकर अरुण गवली भायखला में दगड़ी चॉल का कुख्यात ‘डॉन’ है, जहां वह 2004 से 2009 तक विधायक रहा। उसे 2006 में शिव सेना नेता कमलाकर जामसंदेकर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उस पर मुकदमा चलाया गया था। अगस्त 2012 में मुंबई की एक सेशन कोर्ट ने उसे हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने उन पर 17 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था.
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: 500 करोड़ लेनदेन और ऑडियो क्लिप मामले में संजय राउत ने अमित शाह को लिखा पत्र, ईडी जांच की मांग

शिवसेना-यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से जुड़ी 500 करोड़ रुपए के कथित लेनदेन और वायरल ऑडियो क्लिप मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। संजय राउत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग करते हुए कहा कि यह मामला ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए) के अंतर्गत आता है।
सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र में लिखा, “आप इस बात से अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि 20 अक्टूबर को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने चौंकाने वाले आरोप लगाए और खुलासे किए। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में भाजपा की कोर टीम के वरिष्ठ नेताओं से 500 करोड़ रुपए लिए थे। यह रकम उनके बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए मनोज जरांगे तक पहुंचाई जानी थी, लेकिन यह पैसा उन तक कभी नहीं पहुंचा।”
शिवसेना-यूबीटी के सांसद ने आरोप लगाते हुए कहा कि जरांगे पाटिल के खुलासों के मुताबिक, यह सब 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से ठीक पहले किया गया था, ताकि उन्हें चुप कराया जा सके और मराठा आरक्षण के लिए चल रहे उनके आंदोलन को खत्म किया जा सके। राउत ने कहा, “मनोज जरांगे की ओर से एक ऑडियो क्लिप के रूप में किए गए ये खुलासे कई मायनों में बेहद गंभीर हैं। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली और गंभीर बात 500 करोड़ रुपए की इतनी बड़ी रकम का इसमें शामिल होना है।”
राउत ने कहा कि गहन जांच होनी चाहिए कि किसने किसे 500 करोड़ रुपए दिए और अगर यह पैसा जरांगे पाटिल तक नहीं पहुंचा, तो आखिर यह कहां गायब हो गया? इतनी बड़ी रकम कहां से आई और कहां चली गई? ऐसा लगता है कि यह ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का एक स्पष्ट मामला है और इसकी जांच भी इसी तरह से की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “इन सवालों के जवाब तुरंत मिलने चाहिए। इस मामले की पूरी जांच के लिए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप महाराष्ट्र पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जल्द से जल्द जांच करने का निर्देश दें। साथ ही, सच्चाई को महाराष्ट्र और देश की जनता के सामने लाएं और इस घोटाले में शामिल लोगों को गिरफ्तार करें।”
गृह मंत्री को लिखे पत्र में राउत ने कहा, “आपके नेतृत्व में, ईडी भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच में सबसे आगे रही है। ईडी ने ऐसे मामलों की जांच करने के लिए अपनी एक पहचान बनाई है, जिनमें बहुत कम रकम शामिल होती है।”
शिवसेना-यूबीटी के सांसद ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “मार्च 2021 में, मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने उनसे हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करके उन्हें देने के लिए कहा था। यह परमबीर सिंह का सिर्फ एक आरोप था, जिसके समर्थन में कोई सबूत नहीं था। इसके बावजूद, ईडी ने बहुत तत्परता दिखाई और गृह मंत्री अनिल देशमुख को गिरफ्तार भी कर लिया।”
उन्होंने कहा, “इसकी तुलना में, मनोज जरांगे पाटिल की ओर से किए गए खुलासे कहीं अधिक गंभीर हैं, क्योंकि उन्होंने एक ऑडियो क्लिप के रूप में सबूत दिए हैं और इसमें शामिल रकम भी बहुत बड़ी है।” राउत ने कहा, “मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप महाराष्ट्र पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए) लागू करने का निर्देश दें।”
अपराध
मुंबई: गरबा खेलने जाने से नाराज पति ने पत्नी पर चाकू से किया हमला, आरोपी गिरफ्तार

मुंबई से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। दरअसल, पवई इलाके में गरबा खेलने जाने से नाराज पति ने अपनी पत्नी पर चाकू से हमला किया है। इस हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।
पुलिस के मुताबिक, यह घटना महात्मा फुले नगर, आईआईटी पवई इलाके में केडी अस्पताल के सामने समता मित्र मंडल के पास हुई। पीड़िता की पहचान वैशाली महेश रजत (30) के रूप में हुई है, जो गरबा खेलने गई थीं। इसी बात से नाराज होकर उसके पति महेश सुभाष रजत (35) ने उसके पेट में चाकू घोंप दिया और उसकी हत्या करने की कोशिश की।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पार्कसाइट पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 109(1) और 352 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच जारी है।
चाकूबाजी की इसी प्रकार की एक दूसरी घटना नई दिल्ली से सामने आई, जहां मौर्य एनक्लेव पुलिस ने हत्या के मामले में चार नाबालिगों को हिरासत में लिया है। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है।
दरअसल, मंगलवार को मौर्य एनक्लेव पुलिस स्टेशन को एक पीसीआर कॉल मिली कि पीतमपुरा के क्यूयू ब्लॉक स्थित चौधरी डेयरी के पास किसी को चाकू मार दिया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। घायलों को बीएसए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने एक को मृत घोषित कर दिया, जिसकी पहचान अरुण के रूप में हुई है। वहीं, दूसरे मरीज की पहचान आशु के रूप में हुई है, जिसे चाकू लगने से चोटें आई हैं।
जांच के दौरान पता चला कि यह घटना कथित तौर पर एक लड़की से जुड़े विवाद के कारण हुई थी। इस मामले को लेकर हुई बहस के बाद आरोपियों ने दोनों पीड़ितों पर खंजर से हमला कर दिया।
महाराष्ट्र
दिल्ली में राष्ट्रपति से मिलेंगे सीएम देवेंद्र फडणवीस, सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वजारोहण समारोह के लिए करेंगे आमंत्रित

महाराष्ट्र के नासिक में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी कड़ी में बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिल्ली में रहेंगे, जहां वे दिल्ली में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री फडणवीस उन्हें ध्वजारोहण समारोह के लिए आमंत्रित करेंगे।
सिंहस्थ महाकुंभ के शुभारंभ की तैयारियों के तहत 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण समारोह आयोजित होना है। बताया गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 31 अक्टूबर को होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह के लिए आमंत्रित करेंगे। इस दौरान, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के भी मौजूद रहने की उम्मीद है।
31 अक्टूबर को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ का महत्वपूर्ण चरण होगा। सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वजारोहण के लिए दो प्रमुख स्थान निर्धारित किए गए हैं।
नासिक में रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से जुड़े क्षेत्र में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। दोनों स्थानों पर एक ही समय में 31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर ध्वजारोहण किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। तैयारियों के तहत सितंबर में कुंभ मेला प्रशासन और कुंभ मेला प्राधिकरण की महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। इसकी अध्यक्षता कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने की। बैठक में साधु-संतों, महंतों, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।
मंत्री गिरीश महाजन ने बताया था कि एक स्थान पर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से ध्वजारोहण होने की योजना है, जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के कई नेता भी उपस्थित रहेंगे।
बैठक में भक्तों की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पार्किंग, आपातकालीन व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय जैसे विषयों पर अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया गया था।
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