अंतरराष्ट्रीय
अगले साल एशिया कप में खेलने पाकिस्तान नहीं जाएगी टीम इंडिया : जय शाह
भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान की यात्रा नहीं करेगी और अगले साल होने वाले एशिया कप के लिए वह दूसरे स्थान की मांग करेगी। इस बारे में बीसीसीआई सचिव जय शाह ने मंगलवार को यहां बोर्ड की वार्षिक आम बैठक के बाद पुष्टि की। महाद्वीपीय चैम्पियनशिप का 2023 सीजन एशिया कप अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के भविष्य के दौरे कार्यक्रम के अनुसार पाकिस्तान को आवंटित किया गया है।
हालांकि, बीसीसीआई अपनी एजीएम के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि वह टूर्नामेंट के लिए अपने पड़ोसी देश की यात्रा नहीं करेगा और मांग की है कि टूर्नामेंट को दूसरे स्थान पर ले जाया जाए।
क्रिकबज ने एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष शाह के हवाले से कहा, “हम एशिया कप के लिए दूसरे स्थान की मांग करेंगे, क्योंकि हमने फैसला किया है कि हम पाकिस्तान की यात्रा नहीं करेंगे।”
उन्होंने कहा, “मैंने तय किया है कि हम दूसरे स्थान पर खेलेंगे।”
विशेष रूप से, एशिया कप का 2022 सीजन भी एक दूसरे स्थान पर खेला गया था जब एक आर्थिक और राजनीतिक संकट ने मेजबान देश श्रीलंका को घेर लिया था। टूर्नामेंट संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किया गया था, जहां फाइनल में पाकिस्तान को हराकर श्रीलंका चैंपियन बना था।
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान में तेल कंपनियों का संकट नहीं हो रहा खत्म, सरकार ने रोक रखी है राशि

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक जारी रहे संघर्ष का असर क्रूड ऑयल की सप्लाई पर पड़ा। इस बीच पाकिस्तान की मीडिया के अनुसार, देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां गंभीर नकदी संकट का सामना कर रही हैं। करीब 107 अरब रुपए तक के प्राइस डिफरेंस क्लेम अब भी लंबित हैं। इसकी वजह से कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
उद्योग से जुड़े लोगों ने ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी पर आरोप लगाया है कि वह बकाया भुगतान करने के बजाय बार-बार दस्तावेज की आवश्यकताओं में बदलाव कर रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक उलझती जा रही है।
इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि मार्च के बीच में फाइल किया गया लगभग 27 बिलियन रुपए का पहला क्लेम सिर्फ थोड़ा ही सेटल हुआ था, जबकि 70-80 बिलियन रुपए के बाद के क्लेम अभी भी पूरी तरह से बिना पेमेंट के हैं। कराची के एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, कुल मिलाकर इस नुकसान की वजह से कंपनियां बहुत कम मार्जिन पर काम कर रही हैं और कैश फ्लो बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि असली समस्या पारदर्शिता की नहीं, बल्कि अनिश्चितता की है। उनका आरोप है कि हर बार जब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) नियमों का पालन करने की कोशिश करती हैं, तो अथॉरिटी नई दस्तावेजी मांगें सामने रख देती है।
मांगों में इनवॉइस-स्तर पर मिलान से लेकर बार-बार सीईओ, सीएफओ और ऑडिटर सर्टिफिकेशन तक शामिल हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया बार-बार शुरू से करनी पड़ती है। सोमवार रात तक एक नया संशोधित फॉर्मेट भी जारी किया गया, लेकिन इसमें यह स्पष्ट नहीं था कि आगे बदलाव किए जाएंगे या नहीं, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।
इंडस्ट्री के एक सीनियर सोर्स ने कहा, “हर बार जब इंडस्ट्री पालन करने की तैयारी करती है, तो एक नई जरूरत आ जाती है। कोई फिनिशिंग लाइन नजर नहीं आती है।”
अगर रेगुलेटरी अथॉरिटी फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के साथ टैक्स रिकंसिलिएशन तक पेमेंट का 10 फीसदी रोकने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है, तो हालात और खराब हो सकते हैं। इस कदम से 7.4 बिलियन रुपए और दो महीने तक अटक सकते हैं।
प्राइस डिफरेंशियल क्लेम उस स्थिति में पैदा होते हैं, जब सरकार ईंधन की कीमतें उसकी खरीद लागत से कम तय कर देती है। ऐसे में इस अंतर की भरपाई कंपनियों को की जानी होती है। भुगतान में देरी होने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इस अंतर को पूरा करने के लिए उधार लेना पड़ता है, जिससे उन पर वित्तीय दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
औद्योगिक अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर लिक्विडिटी कम होती रही तो यह संकट जल्द ही फ्यूल सप्लाई में रुकावट में बदल सकता है। आर्टिकल में आगे कहा गया है कि क्षेत्र ने ऊर्जा मंत्रालय से दखल देने की अपील की और बकाया का तुरंत सेटलमेंट करने, एक ही डॉक्यूमेंटेशन फ्रेमवर्क और कुछ पेमेंट रोकने के प्रस्तावित कदम को वापस लेने की मांग की है।
अंतरराष्ट्रीय
इस्लामाबाद में सन्नाटा, बातचीत की आहट! लेकिन भरोसे पर सवाल बरकरार

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : “ईरान की सभ्यता को पूरी तरह से खत्म करने” की डेडलाइन से कुछ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी मध्यस्थता का जिक्र करते हुए सीजफायर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये संघर्ष विराम अगले 2 हफ्तों तक जारी रहेगा।
इसके बाद लगा कि हालात सामान्य होंगे। पूरी दुनिया ने प्रसन्नता जाहिर की। पाकिस्तान फूला नहीं समाया, लेकिन इसके बाद इजरायल की ओर से जो किया गया और अमेरिका की ओर से जो कहा गया, उसने वर्तमान स्थिति के भरोसे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान में ऐसा बहुत कुछ था जो ईरान सीजफायर के भविष्य पर सवाल खड़े करता है। इजरायल का लेबनान पर हमला, एक ही दिन में सैकड़ों को मारने का दावा और फिर खुद ट्रंप का कहना कि हिज्बुल्लाह को लेकर समझौते में कोई जिक्र नहीं है, इस समझौते पर सवाल खड़े करता है। हालांकि पाकिस्तान का कहना था कि हिज्बुल्लाह इसका अंग था।
इस सबके बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों एक असामान्य खामोशी में डूबी हुई है। सड़कों पर सामान्य चहल-पहल की जगह सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने ले ली है और कई इलाकों में आवागमन सीमित कर दिया गया है। वजह है ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन, जो एक बेहद संवेदनशील और अहम कूटनीतिक वार्ता के लिए यहां पहुंचने वाला है।
एक अस्थायी संघर्षविराम के बाद शुरू हो रही इस वार्ता से उम्मीद तो है, लेकिन उसके सफल होने को लेकर संशय भी उतना ही गहरा है। पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसे उसकी कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
शहर में लागू सुरक्षा इंतजाम इस बात का संकेत हैं कि इस वार्ता को कितना संवेदनशील माना जा रहा है। खासकर डिप्लोमैटिक एन्क्लेव और सरकारी परिसरों के आसपास कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन किसी भी संभावित खतरे या विरोध को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ी चुनौती भरोसे की कमी है। ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर शंका जताई जा रही है कि क्या यह वार्ता वास्तव में किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाएगी या यह केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास भर है। पिछले अनुभवों और बार-बार संघर्षविराम उल्लंघनों के आरोप ने इस अविश्वास को और गहरा किया है।
बातचीत का दायरा केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां बंद सड़कों और कड़ी सुरक्षा के बीच शांति की एक मुश्किल कोशिश जारी है।
आशंका इसलिए भी क्योंकि ईरानी संसद के स्पीकर एमबी घालिबाफ ने 10 में से तीन शर्तों के हनन का आरोप यूएस पर लगाया, तो दूसरी ओर पाकिस्तान में ईरान के एम्बेसडर, रेजा अमीरी मोगादम, ने एक्स पर एक पोस्ट डिलीट कर दी, जिसमें कहा था कि ईरान का एक डेलीगेशन गुरुवार रात यूएस के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने वाला है।
मोगादम ने पोस्ट किया था: “इजरायली सरकार द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी पब्लिक ओपिनियन पर शक के बावजूद… ईरान के बताए 10 पॉइंट्स पर सीरियस बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने सीजफायर के तीन बिंदुओं के उल्लंघन का किया दावा, दोनों पक्षों में इन 10 बिंदुओं पर बनी थी सहमति

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल को दो हफ्ते के लिए सीजफायर को लेकर सहमति बनी है। दोनों पक्ष सीजफायर करने के लिए 10 बिंदुओं पर राजी हुए। इस बीच ईरान ने आरोप लगाया है कि तीन प्वाइंट का उल्लंघन हुआ है। आइए जानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच किन 10 बिंदुओं पर सहमति बनी।
सीएनबीसी न्यूज के अनुसार, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने बुधवार को अमेरिका पर दो हफ्ते के सीजफायर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया। गालिबफ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, “अमेरिका पर हमारा जो गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है, वह उसके सभी तरह के कमिटमेंट्स के बार-बार उल्लंघन से पैदा हुआ है। अफसोस की बात है कि अमेरिका के इस पैटर्न को एक बार फिर दोहराया गया है।
गालिबफ ने कहा कि ईरान के 10-पॉइंट सीजफायर प्रस्ताव के तीन हिस्सों का उल्लंघन किया गया है। उल्लंघन में इजरायल का लेबनान पर लगातार हमले, ईरानी एयरस्पेस में एक ड्रोन का घुसना और इस्लामिक रिपब्लिक के यूरेनियम को संवर्धन करने के अधिकार को मना करना शामिल है।
ईरान और अमेरिका के बीच इन 10 प्वाइंट पर बनी बात:
दोनों पक्षों द्वारा गैर-आक्रामकता की गारंटी और ईरान के यूरेनियम संवर्धन को स्वीकार करना
ईरान की सेना के साथ तालमेल बैठाकर होर्मुज स्ट्रेट से नियंत्रित मार्ग
लेबनान में हिज्बुल्लाह समूह के खिलाफ लड़ाई समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना
इलाके के सभी बेस और डिप्लॉयमेंट पॉइंट से अमेरिकी सुरक्षा बल को हटाना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को खत्म करना
होर्मुज स्ट्रेट में एक सुरक्षित ट्रांजिट प्रोटोकॉल बनाना, जो तय शर्तों के तहत ईरानी दबदबे की गारंटी दे
संघर्ष के दौरान अनुमान के मुताबिक ईरान को हुए नुकसान की पूरी भरपाई
ईरान के खिलाफ सभी मुख्य और दूसरे बैन हटाना
विदेश में सभी ब्लॉक ईरानी संपत्तियों को रिलीज करना
इन सभी शर्तों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाइंडिंग प्रस्ताव के जरिए मंजूरी देना, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आ जाएं
ईरान का डेलीगेशन अमेरिका के साथ बातचीत के लिए गुरुवार रात इस्लामाबाद पहुंचेगा। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, “पीएम शहबाज शरीफ की बुलाई गई डिप्लोमैटिक पहल को नाकाम करने के लिए इजरायली सरकार द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी जनता की राय पर शक के बावजूद, ईरान के सुझाए गए 10 पॉइंट्स पर आधारित गंभीर बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद पहुंच रहा है।
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