राष्ट्रीय
रिलायंस जियो दिवाली तक 5जी सेवा शुरू करेगी : मुकेश अंबानी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने सोमवार को घोषणा की है कि रिलायंस जियो 24 अक्टूबर को दिवाली के दिन देश के चुनिंदा शहरों में स्टैंडअलोन 5जी सेवाएं शुरू करेगी। अखिल भारतीय ट्र 5जी नेटवर्क बनाने के लिए, जियो ने कुल 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
शुरुआत करने के लिए, जियो ने चार मेट्रो शहरों- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में 5जी सेवाएं शुरू करने की घोषणा की।
दिसंबर 2023 तक पूरे देश को कवर करने के लिए इन्हें अन्य शहरों और कस्बों में तेजी से विस्तारित किया जाएगा।
‘रिलायंस एजीएम 2022’ में, मुकेश अंबानी ने कहा कि यह ‘दुनिया की सबसे बड़ी’, ‘स्टैंडअलोन’ जियो 5जी सेवाएं होंगी।
मुकेश अंबानी ने कहा, “जियो 5जी सेवाएं सभी को, हर जगह और हर चीज को उच्चतम गुणवत्ता और सामथ्र्य के साथ जोड़ेगी। हम चीन और अमेरिका से भी आगे भारत को डेटा-संचालित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
जियो 5जी दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे उन्नत 5जी नेटवर्क होगा। अन्य ऑपरेटरों के विपरीत, जियो का 5जी नेटवर्क 4जी नेटवर्क पर शून्य निर्भरता के साथ अकेला खड़ा होगा।
स्टैंडअलोन 5जी आर्किटेक्च र का तीन गुना लाभ, स्पेक्ट्रम और कैरियर एग्रीगेशन तकनीक का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा मिश्रण का मतलब है कि जियो 5जी कवरेज, क्षमता, गुणवत्ता और सामथ्र्य का एक अद्वितीय संयोजन पेश करने में सक्षम होगा।
स्टैंडअलोन 5जी के साथ, जियो कम विलंबता, बड़े पैमाने पर मशीन-टू-मशीन संचार, 5जी वॉयस, एज कंप्यूटिंग और नेटवर्क स्लाइसिंग और मेटावर्स जैसी नई और शक्तिशाली सेवाएं प्रदान कर सकता है।
जियो ने स्वदेशी रूप से एक एंड-टू-एंड 5जी स्टैक विकसित किया है, जो पूरी तरह से क्लाउड नेटिव है, सॉफ्टवेयर परिभाषित है, क्वांटम सुरक्षा जैसी उन्नत सुविधाओं के समर्थन के साथ डिजिटल रूप से प्रबंधित है।
5जी के साथ, जियो कनेक्टेड इंटेलिजेंस के साथ अरबों स्मार्ट सेंसर लॉन्च करेगा जो इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) को ट्रिगर करेगा और चौथी औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा देगा। यह हर एक, हर जगह और हर चीज को उच्चतम गुणवत्ता और सबसे किफायती डेटा से जोड़ेगा।
रिलायंस जियो इंफोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कहा कि जियो ट्र 5जी ब्रॉडबैंड स्पीड में तेजी से बढ़ोतरी करेगा और लेटेंसी को काफी हद तक कम करेगा।
यह घोषणा सरकार के अनुरूप है, जो 12 अक्टूबर तक देश में सस्ती 5जी सेवाओं को शुरू करने की उम्मीद करती है।
सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि 5जी प्लान जनता के लिए किफायती रहे।
3जी और 4जी की तरह, दूरसंचार कंपनियां भी जल्द ही समर्पित 5जी टैरिफ योजनाओं की घोषणा करेंगी और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, उपभोक्ता अपने उपकरणों पर 5जी सेवाओं का उपयोग करने के लिए अधिक भुगतान कर सकते हैं।
हालांकि, जैसे-जैसे उपयोग बढ़ेगा, टैरिफ योजनाएं कम होंगी और अधिक लोग 5जी नेटवर्क को विशेष रूप से उन महानगरों में अपनाएंगे जहां शुरुआती मांग आएगी।
5जी के लॉन्च के साथ तत्काल टैरिफ वॉर की संभावना नहीं है, लेकिन यह ‘प्रतिस्पर्धी होगा क्योंकि भारत एक मूल्य-सचेत बाजार बना हुआ है।’
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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