राजनीति
पीएम की सुरक्षा चूक गंभीर मुद्दा, एसपीजी और आईबी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए: गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंधमारी को गंभीर घटना करार देते हुए इस घटना के लिए एसपीजी और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) को जिम्मेदार ठहराया है। गहलोत ने अपने ट्विटर हैंडल पर कहा, “प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक एक गंभीर मामला है । इससे पहले भारत के दो प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या हो चुकी है, जिसके बाद एसपीजी को प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी का पूरा दायित्व सौंपा गया।”
“पीएम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एसपीजी अधिनियम में विशेष प्रावधान किए गए हैं। एसपीजी और आईबी पीएम की यात्रा की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं और राज्य पुलिस एसपीजी के निर्देशों और सलाह का पालन करती है। पीएम का काफिला एसपीजी की अनुमति के बिना आगे नहीं बढ़ सकता है। “
“एसपीजी को बताना चाहिए कि प्रधानमंत्री को बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के 2 घंटे से अधिक समय की सड़क यात्रा क्यों करनी पड़ी। पंजाब के सीएम ने कहा कि किसानों के विरोध की जानकारी पहले दी गई थी, फिर भी एसपीजी ने पीएम के काफिले को धरने वाले रास्ते पर जाने की अनुमति क्यों दी?
उन्होंने कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर राजनीति करने के बजाय एसपीजी, आईबी और अन्य एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इस मुद्दे पर भाजपा द्वारा कांग्रेस और पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी के खिलाफ की जा रही टिप्पणी मुद्दे की गंभीरता को कम करती है। इसकी निंदा की जानी चाहिए।”
राजनीति
‘क्या विजय सिर्फ ईसाई मुख्यमंत्री हैं?’, चामराजनगर मुठभेड़ पर कर्नाटक भाजपा का तमिलनाडु सीएम पर निशाना

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने चामराजनगर में हुई मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की कथित दखलंदाजी पर सवाल उठाते हुए मंगलवार को पूछा कि क्या वह सिर्फ “ईसाई मुख्यमंत्री” के तौर पर काम कर रहे हैं या पूरे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में विजयेंद्र ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने चामराजनगर जिले के हनूर में हुई घटना को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि एक आर्कबिशप ने भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मृतकों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी और उचित मुआवजे की मांग की है।
विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा और जेडीएस ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था और मानवीय आधार पर तीनों मृतकों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की थी।
उन्होंने सवाल किया, “क्या मृतकों को जाति या धर्म का रंग देना उचित है?”
भाजपा नेता ने कहा कि कर्नाटक के कई हिस्सों में जंगलों में रहने वाले समुदायों और वन अधिकारियों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा, “जंगल से लगे इलाकों में रहने वाले लोग लगातार वन अधिकारियों के साथ संघर्ष का सामना कर रहे हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी हो रही हैं। हाल ही में मदिकेरी में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। मदिकेरी, शिवमोग्गा, उत्तर कन्नड़ और तटीय क्षेत्रों में भी इसी तरह की समस्याएं हैं।”
विजयेंद्र ने राज्य सरकार और मंत्रियों से जंगल से लगे इलाकों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और उनका समाधान करने की अपील की।
मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि यदि वन अधिकारी टॉर्च लेकर जंगल में गए थे, तो उन्हें गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा, “आपने कहा कि वे टॉर्च लेकर गए थे। फिर मुठभेड़ क्यों हुई? क्या वे शेर या बाघ थे?” विजयेंद्र ने अभियान में चूक का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार से मामले में हुई किसी भी गलती को स्वीकार करने और न्यायिक जांच कराने की मांग की।
गौरतलब है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 15 अगस्त को कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में कर्नाटक के वन कर्मियों द्वारा तीन तमिल लोगों एंथनी सामी, जॉन रोज पीटर और कुमार की मौत पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने घटना को “नरसंहार” करार देते हुए कर्नाटक सरकार के उस दावे को खारिज किया था कि यह कार्रवाई अवैध शिकार विरोधी अभियान के दौरान हुई गोलीबारी के जवाब में की गई थी।
वहीं, कर्नाटक सरकार ने विधानसभा में इस मामले पर बयान देते हुए कहा था कि चामराजनगर के रिजर्व फॉरेस्ट में तीन कथित शिकारियों की मौत तब हुई, जब वन विभाग के कर्मचारियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। सरकार के मुताबिक, शिकारियों ने वन कर्मियों पर गोलीबारी की थी।
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झारखंडः देवेंद्र महतो बोले-अभी मिली पहली जीत, व्यापक सुधार का आंदोलन जारी रहेगा

झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल समेत टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित 14 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले को आंदोलनकारी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन की पहली बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा है कि परीक्षा रद्द होना संघर्ष का अंतिम पड़ाव नहीं है और भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
देवेंद्र नाथ महतो ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली के आरोप सामने आए थे, उन्हें रद्द किया जाना छात्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी एक परीक्षा को रद्द कराना नहीं, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने कहा कि अब सरकार को ऐसी व्यवस्था की गारंटी देनी होगी, जिसमें भविष्य में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की सेटिंग या परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश न रहे। इसके लिए प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के हर चरण का ऑडिट होना चाहिए और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से लेकर संबंधित अधिकारियों तक की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
महतो ने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों ने लंबा संघर्ष किया है। दो जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक रूप लेता गया। 25 जुलाई को मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से सत्याग्रह शुरू किया गया और बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। दो अगस्त से छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की।
उन्होंने कहा कि छात्रों की लड़ाई केवल वर्तमान अभ्यर्थियों के लिए नहीं है। उनका उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार कराना है, जिससे आने वाली पीढ़ी के युवाओं को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े। उन्होंने ईमानदारी से परीक्षा देने वाले और वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से धैर्य बनाए रखने की अपील भी की।
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि सरकार के फैसले को आंदोलन की पहली सफलता के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन छात्रों का संघर्ष अब परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित कराने पर केंद्रित रहेगा।
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अमित शाह के बयान पर इमरान मसूद का पलटवार, कहा- शर्म आपको आनी चाहिए जो छात्रों पर लाठियां चलवाईं

‘वंदे मातरम’ विवाद को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सोनिया गांधी पर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति का प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है।
अमित शाह ने कहा था कि सोनिया गांधी को शर्म आनी चाहिए, इस पर इमरान मसूद ने कहा कि शर्म आपको आनी चाहिए जो आपने दिल्ली छात्र अंदोलन के दौरान बच्चों पर लाठियां चलवाईं और बिहार में छात्रों पर एके47 से फायरिंग की गई।
इमरान मसूद ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा, “आपको शर्म आनी चाहिए कि आपने इस देश का क्या हाल कर दिया है?”
विरोध-प्रदर्शनों में बच्चों के इस्तेमाल को लेकर योग गुरु बाबा रामदेव के बयान पर भी इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “बाबा जी, आपका उद्योग अच्छा चल रहा है। अपना उद्योग चलाइए। बच्चों को शिक्षा लायक आप छोड़ोगे कहां?”
इमरान मसूद ने कहा, “देश की जवानी खतरे में नहीं है। देश के युवा तो देश के काम के लिए तैयार हैं। भाजपा इसे बर्बाद कर रही है।”
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी द्वारा चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने पर भी इमरान मसूद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “सईयां कोतवाल है तो डर किस चीज का, उन्हें तो हर मामले में क्लीन चिट मिलनी ही थी।”
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा शादी की जवाबदेही, बच्चों के कल्याण और माता-पिता की सुरक्षा से जुड़े व्यापक सामाजिक कानून पैकेज की घोषणा का इमरान मसूद ने समर्थन किया। उन्होंने कहा, “यह अच्छी बात है। हर चीज का विरोध करने की जरूरत नहीं है।” उनका कहना है कि अगर कोई कदम समाज के हित में है तो उसका स्वागत होना चाहिए। विपक्ष हर चीज का मुद्दा बनाकर विरोध करने में यकीन नहीं रखती है।
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