राजनीति
अयोध्या में कथित जमीन घोटाले से जुड़े मामले में मायावती बोलीं, ‘सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच’
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि अयोध्या में अधिकारियों-नेताओं व उनके रिश्तेदारों के नाम पर हुई जमीन खरीदी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को पूरे मामले का संज्ञान लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में मायावती ने पत्रकारों संबोधित किया।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के आस-पास की जमीन खरीद घोटाले बड़े लोगों का नाम आना एक गंभीर मामला है। अब तो इस मामले में उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि इस बड़े प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट दखल दे। सुप्रीम कोर्ट को केन्द्र तथा राज्य सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के लिए निर्देश देना चाहिए। यह तो करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है।
ज्ञात हो कि राम जन्मभूमि मंदिर पर शीर्ष अदालत का फैसला आने के बाद अयोध्या में अधिकारियों-नेताओं व उनके रिश्तेदारों ने कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी हैं। करोड़ों की ये जमीनें औने-पौने दाम पर खरीदी गई हैं। योगी सरकार ने राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद अयोध्या में अफसरों, नेताओं और उनके रिश्तेदारों द्वारा बड़े पैमाने खरीदी गई जमीन की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विशेष सचिव राजस्व राधेश्याम मिश्रा को जांच सौंपी गई है। मिश्रा को पांच दिन में जांच पूरी करके रिपोर्ट देने को कहा गया है।
मायावती ने कहा कि भाजपा के 300 सीट जीतने के दावे में दम नहीं है। यदि ऐसा होता तो चुनावी दौर में इतनी लुभावनी घोषणा की जरूरत न पड़ती। छात्रों को लालच देने की जरूरत न पड़ती। केंद्रीय नेताओ व मंत्रियों को थोक में यूपी में लाने की जरूरत न पड़ती।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर कहा कि अपने फायदे के लिए भाजपा और सपा विधानसभा चुनाव को हिंदू-मुसलमान बनाना चाहती हैं। उन्होंने पार्टी मुख्यालय पर मुख्य सेक्टर प्रभारियों और जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वह घर-घर जाकर भाजपा और सपा कि इस साजिश का खुलासा करें और मतदाताओं को सतर्क करें।
मायावती ने फोन टैपिंग के मामले में कहा कि कांग्रेस जब पावर में होती है, तब वह भी यही करती है। भाजपा जब पावर में होती है तब वह उस पर यही आरोप लगते हैं। बसपा की चार सरकारों में जनता के हितों में ही काम किया गया है।
बसपा मुखिया मायावती ने कहा कि जैसा कि आप सभी को अवगत है कि हमारी पार्टी उत्तर प्रदेश में अकेले ही सभी 403 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ रही है। हमारे कार्यकर्ता, नेता तथा प्रत्याशी इसके लिए जोरदार तैयारी में भी लगे हैं। आज की यह बैठक इन सभी की तैयारियों को परखने के लिए बुलाई गई है।
अपराध
गुजरात में 3,000 करोड़ की ड्रग्स जब्त

गुजरात में नशे के अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ भारतीय तटरक्षक बल और गुजरात एटीएस को बड़ी कामयाबी मिली है। दोनों एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर अरब सागर में एक नाव से करीब 3,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की है।
इस कार्रवाई में पांच पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। नाव से कुल 526 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
अरब सागर में भारतीय तटरक्षक बल और गुजरात एटीएस ने संयुक्त अभियान चलाकर ड्रग्स तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
खुफिया जानकारी के आधार पर दोनों एजेंसियों ने समुद्र में संदिग्ध नाव को रोका। तलाशी के दौरान नाव से 526 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किए गए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 3,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस कार्रवाई में नाव पर सवार पांच पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ड्रग्स की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे भारत में कहां पहुंचाया जाना था।
इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है।
फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है। जांच के बाद ही ड्रग्स की पूरी सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बांग्लादेश: अवामी लीग ने बीएनपी सरकार पर हिंसा और राजनीतिक बदले की भावना बढ़ाने का लगाया आरोप

बांग्लादेश की अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) सरकार के कार्यकाल में देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। पार्टी ने हत्या, बलात्कार, भीड़ द्वारा हत्या और लोगों के जबरन गायब किए जाने की चिंताजनक घटनाओं का हवाला दिया है।
अवामी लीग ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद पर आरोप लगाया कि वह कानून-व्यवस्था के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध को तरजीह दे रहे हैं। हालात बिगड़ने के बावजूद वह एक मंच पर आए और अवामी लीग को खत्म करने का दावा करते हुए ऐसा करने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी की।
अवामी लीग के अनुसार, इस साल फरवरी से सितंबर के बीच, यानी सिर्फ सात महीनों में हिंसा के 21,756 मामले दर्ज किए गए। इन आंकड़ों में 1,789 हत्या और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ हिंसा के 11,165 मामले शामिल थे, जबकि पुलिस पर हमले के भी 317 मामले सामने आए।
पार्टी ने आगे कहा कि जनवरी से अगस्त के बीच रेप के 339 मामले सामने आए, जिनमें 114 गैंग रेप के मामले थे। 41 मामलों में पीड़िताओं की रेप के बाद हत्या कर दी गई। पार्टी ने जून में भीड़ की हिंसा में 31 लोगों की मौत और अगस्त में 28 और लोगों की मौत का भी जिक्र किया।
ढाका की संस्था ‘ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी’ (एचआरएसएस) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अवामी लीग ने कहा कि इस साल जनवरी से जून के बीच हुई 830 राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में 56 लोगों की मौत हुई और 5,246 लोग घायल हुए। अल्पसंख्यक समुदायों के 44 लोग मारे गए, जबकि 383 पत्रकारों को उत्पीड़न या हमलों का सामना करना पड़ा। सिर्फ अगस्त में ही नदियों, नहरों और जंगलों से 87 अज्ञात शव बरामद किए गए।
अवामी लीग ने कहा, “ऐसे हालात में, गृह मंत्री की सबसे बड़ी चिंता तथाकथित अवामी लीग सहयोगियों को पकड़ने पर इनाम देने की है। यह ऐसा है, जैसे खून से सने युद्ध के मैदान में गुलाब बांटे जा रहे हों। मंत्री पुलिस इंटेलिजेंस की डींगें तो मारते हैं, लेकिन पुलिस कस्टडी में मौतें, लोगों का जबरन गायब होना और जेलों में 58 लोगों की मौतें उनके हिसाब-किताब का हिस्सा नहीं लगतीं।”
पार्टी ने आगे कहा, “2001 से 2006 तक बीएनपी-जमात सरकार के दौरान बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याएं, लोगों का जबरन गायब होना, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और भ्रष्टाचार शामिल थे। इन्हें इतिहास के पन्नों से आसानी से मिटाया नहीं जा सकता। सत्ता में वापसी के बाद बीएनपी ने महज सात महीनों में ही यह दिखा दिया है कि वह शासन करने के लिए नहीं, बल्कि बदला लेने के लिए लौटी है।”
पार्टी ने सवाल उठाया कि राजनीतिक दिवालियापन किस हद तक बढ़ सकता है कि कोई सरकार उसी राजनीतिक पार्टी को पूरी तरह खत्म करने का इरादा जाहिर करे, जिसके नेतृत्व में बांग्लादेश बना था।
पार्टी ने कहा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। जब कोई मंत्री उस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहने के बाद राजनीतिक गिरफ्तारियों के लिए इनाम की घोषणा करने लगता है, तो यह साफ हो जाता है कि इस सरकार के लिए लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है, बल्कि राजनीतिक बदले की भावना प्राथमिकता है।”
राजनीति
बीआर पाटिल ने राहुल गांधी से कर्नाटक में कृषि भूमि के ट्रांसफर का मुद्दा उठाने की मांग की

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीआर पाटिल ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर कर्नाटक में कृषि भूमि के ट्रांसफर का मुद्दा उठाने और ‘कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम’ में किए गए संशोधनों की व्यापक समीक्षा की मांग की है।
अपने पत्र में पाटिल ने 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले आलंद विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से 5,994 मतदाताओं के नाम गैर-कानूनी तरीके से हटाने की कथित कोशिश का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और मांग की कि मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जाए और कानून के मुताबिक जिम्मेदारी तय की जाए।
पाटिल ने पत्र में आगे लिखा, “मेरा सार्वजनिक जीवन महात्मा गांधी, डॉ. राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के आदर्शों के साथ-साथ धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के प्रति नेहरूवादी प्रतिबद्धता से आकार लेने वाला रहा है। इन विचारों ने सार्वजनिक जीवन में मेरे पूरे सफर में मेरा मार्गदर्शन किया है और मेरा मानना है कि राजनीति में हम लोगों का यह कर्तव्य है कि हम उन मुद्दों पर बात करें जिनका लोकतांत्रिक संस्थाओं और आम नागरिकों के जीवन पर असर पड़ता है।”
पाटिल ने कहा कि कांग्रेस ने अपने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में पिछली भाजपा सरकार द्वारा बनाए गए “किसान-विरोधी कानूनों” को रद्द करने का वादा किया था। ‘डेक्कन हेराल्ड’ की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि भूमि की खरीद और मालिकाना हक पर पहले लगी पाबंदियों में ढील दिए जाने के बाद लगभग 19.92 लाख एकड़ कृषि भूमि का मालिकाना हक बदला है।
उन्होंने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे पार्टी के भीतर सही स्तर पर इस मामले को उठाएं और संशोधनों की व्यापक समीक्षा की मांग करें, जिसमें खेती, छोटे और सीमांत किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कर्नाटक की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा पर उनके असर को शामिल किया जाए। उन्होंने कृषि भूमि की खरीद और मालिकाना हक से जुड़े सुरक्षा उपायों को बहाल करने के लिए एक स्पष्ट नीतिगत रोडमैप और 2023 के घोषणापत्र के वादे के अनुरूप उचित विधायी उपायों की भी मांग की।
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