राजनीति
टीएमसी का गृह मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन और धरना
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने यूथ विंग की प्रमुख सायोनी घोष की गिरफ्तारी के खिलाफ सोमवार को भी मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
गृह मंत्रालय के बाहर टीएमसी के 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने त्रिपुरा में टीएमसी यूथ विंग की प्रमुख सायोनी घोष को गिरफ्तार किये जाने के विरोध में गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन किया और गृह मंत्रालय के बाहर अब धरने पर बैठे हैं।
टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन के अनुसार जब तक की गृहमंत्री हमारे सीएमसी सांसदों को मिलने का समय नहीं देते सभी सांसद दिल्ली में धरने पर बैठेंगे।
टीएमसी के अनुसार ये धरना त्रिपुरा में कथित तौर पर पुलिस की बर्बरता को लेकर है। टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि त्रिपुरा में टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर क्रूर हमले किए जा रहे हैं। झूठे आरोप में गिरफ्तारियां हो रही हैं। इसलिए हम गृहमंत्री से मिल कर अपनी बात रखना चाहते हैं।
वहीं टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा है, ”तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं, इसलिए हम भी मंत्रालय के बाद धरने पर बैठे हैं।
प्रदर्शन में शामिल हुईं डोला सेन से कहा, ”सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि सभी दलों को पोलिटिकल हक है, हम एक क्षेत्रीय दल हैं, हम अगरतला नगर निगम चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन अब हम देख रहे हैं कि टीएमसी का कोई भी सांसद त्रिपुरा में जाता है उसको बुरी तरह मारा-पीटा जा रहा है। हमारे सांसदों को गृह मंत्री की तरफ से मिलने का समय भी नहीं दिया जा रहा है।”
गौरतलब है कि टीएमसी और बीजेपी के बीच अगरतला नगर निगम और 12 अन्य नगर निकायों में आगामी चुनाव को लेकर तनाव बढ़ रहा है। ये चुनाव 25 नवंबर को होगा। राज्य में टीएमसी ने बीजेपी को घेरने के लिए दिल्ली में धरना देने और विरोध प्रदर्शन करने की ये रणनीति बनाई है।
टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद त्रिपुरा और गोवा में भी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। फिलहाल इन दोनों ही राज्यों में बीजेपी की सरकार है। टीएमसी के कई बड़े नेता और सांसद त्रिपुरा और गोवा में पिछले कई महीनों से पार्टी के प्रचार में जुटे हुए हैं।
अपराध
मुंबई प्रेस क्लब में बम की धमकी से सुरक्षा अलर्ट जारी, पुलिस ने जांच शुरू की

मुंबई, 20 मार्च: मुंबई प्रेस क्लब को एक धमकी भरा ईमेल मिला है। जिसमें दावा किया गया है कि इमारत के अंदर जहरीली गैस से भरे कई छोटे बम लगाए गए हैं और वे शुक्रवार को दोपहर 1 बजे फट जाएंगे। ईमेल भेजने वाली ने अपना नाम नीरजा अजमल खान बताया है।
ईमेल मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं। प्रेस क्लब परिसर के अंदर और आसपास तलाशी अभियान जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोकने के लिए बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीडीएस) और डॉग स्क्वाड को मौके पर बुलाया गया है।
ईमेल में, भेजने वाले ने कोयंबटूर के मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया और कुछ राजनीतिक आरोप लगाए। संदेश में कहा गया कि उनके साथ अन्याय हुआ है और उनकी आवाज़ दबाई जा रही है। इसमें यह भी बताया गया कि भेजने वाले के पास सीमित संसाधन थे और उसने उनका इस्तेमाल मुंबई प्रेस क्लब को निशाना बनाने के लिए किया। हालांकि, भेजने वाले ने यह भी लिखा कि उसका इरादा नुकसान पहुंचाना था और लोगों को इमारत खाली करने की सलाह दी।
ईमेल में नक्सलियों और पाकिस्तान से जुड़े कथित गुप्त नेटवर्क का भी जिक्र किया गया था, जिससे जांचकर्ताओं के लिए मामला और भी गंभीर हो गया है। इस धमकी को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी। साइबर टीम संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल की गई ईमेल आईडी, संदेश के संभावित स्थान और इसके पीछे कौन हो सकता है, जैसी जानकारियों की जांच कर रही है।
प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि ईमेल सुरक्षित ईमेल सेवा प्रोटॉन मेल का उपयोग करके भेजा गया था, जिसे आमतौर पर ट्रैक करना मुश्किल होता है।
फिलहाल प्रेस क्लब के अंदर मौजूद लोगों को सतर्क कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ईमेल कल शाम 7.33 बजे भेजा गया था।
मुंबई प्रेस क्लब के अध्यक्ष समर खदास ने बताया कि क्लब को शुक्रवार सुबह एक परेशान करने वाला ईमेल मिला, जिसमें ‘हमें दयानिधि मारन के कपड़े धोने के लिए मजबूर किया गया’ जैसे अजीब और धमकी भरे संदेश थे। ईमेल में यह भी दावा किया गया था कि परिसर में गैस बम लगाए गए हैं और वे दोपहर 1 बजे के आसपास फटेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रेस क्लब के सचिव मयूरेश गणपतये ने उन्हें इस ईमेल की जानकारी दी। इसके बाद प्रेस क्लब ने तुरंत डीसीपी मुंधे को सूचित किया। साइबर सेल की एक टीम जल्द ही घटनास्थल पर पहुंची और आगे की जांच के लिए प्रेषक का आईपी पता प्राप्त किया।
बाद में बम निरोधक दस्ते ने परिसर की गहन तलाशी ली, लेकिन तत्काल कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। अधिकारी ईमेल के स्रोत की जांच जारी रखे हुए हैं।
राजनीति
पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी का जाना तय है, भाजपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी : जनार्दन सिंह सिग्रीवाल

पटना, 19 मार्च : पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा होने के बाद बयानबाजियों का दौर भी शुरू हो गया है। इस बीच, भाजपा के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने गुरुवार को यहां कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जाना तय है। इस चुनाव में भाजपा विजयी होगी और वहां भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।
पटना में मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोग भाजपा की सरकार के आने का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के बाद ही कई स्थानों पर विरोध शुरू हो गया है। इधर, बिहार में नए मुख्यमंत्री के सवाल को लेकर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आगे जो भी मुख्यमंत्री होगा, उन्हें भी नीतीश कुमार का आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिलेगा।
उन्होंने कहा कि बिहार को और आगे बढ़ाना है, बिहार को विकसित बिहार बनाना है। इसके लिए हम सबको मजबूती के साथ आगे काम करना है और बिहार को विकसित प्रदेश बनाना है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के पहले बिहार में जंगलराज था, कहीं निकलना भी दूभर था। सड़कें, बिजली, पानी तक नहीं थी। लेकिन नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के तौर पर इस बिहार को सुधारते-सुधारते यहां तक लाने का काम किया है। आज भी जो उनके जो काम अधूरे हैं, उन्हें भी पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो भी मुख्यमंत्री होंगे, उन्हें शुभकामनाएं हैं और हम सभी विकसित भारत और विकसित बिहार बनाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा और जदयू का गठबंधन काफी पुराना है। हमलोग वर्षों से एक साथ चलते रहे हैं और इसकी आदत भी है, इसलिए कहीं कोई समस्या नहीं है। दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुने जाने के बाद अब बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, जिसे लेकर बयानबाजी भी तेज है।
राजनीति
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप, बताया- अघोषित आपातकाल जैसे हालात

कोलकाता, 19 मार्च : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल को निशाना बनाकर अभूतपूर्व और चिंताजनक कदम उठा रहा है।
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए कहा कि चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही राज्य के 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को अचानक और मनमाने तरीके से हटा दिया गया, जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक शामिल हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उच्च स्तर की राजनीतिक दखलअंदाजी बताया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि निष्पक्ष रहने वाली संस्थाओं का राजनीतिकरण किया जा रहा है, जो संविधान पर सीधा हमला है। एक तरफ जहां कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया चल रही है और अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, वहीं आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण नजर आता है। अब तक अनुपूरक मतदाता सूची जारी नहीं की गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी है। इससे आम नागरिकों में चिंता और असमंजस का माहौल है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि आईबी, एसटीएफ और सीआईडी जैसे महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को चुनिंदा तरीके से हटाकर राज्य से बाहर भेजा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर भाजपा इतनी बेचैन क्यों है और बंगाल को बार-बार निशाना क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के फैसलों में विरोधाभास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ आयोग कहता है कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ कुछ ही घंटों में उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर बाहर भेज दिया जाता है।
उन्होंने सिलीगुड़ी और बिधाननगर के पुलिस कमिश्नरों को बिना विकल्प दिए पर्यवेक्षक नियुक्त करने पर भी सवाल उठाए, जिससे ये दोनों अहम शहर कुछ समय के लिए बिना नेतृत्व के रह गए। हालांकि, बाद में इस गलती को सुधारा गया। ममता बनर्जी ने इसे अराजकता, भ्रम और अक्षमता करार दिया और कहा कि यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, जिसका मकसद संस्थाओं के जरिए बंगाल पर नियंत्रण करना है।
उन्होंने इसे ‘अघोषित आपातकाल’ और ‘राष्ट्रपति शासन जैसे हालात’ बताया। साथ ही कहा कि भाजपा जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रही है, इसलिए अब दबाव, डर और संस्थाओं के दुरुपयोग के जरिए सत्ता हासिल करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने राज्य के अधिकारियों और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता जताई और कहा कि बंगाल कभी डर के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने साफ कहा, “बंगाल लड़ेगा, विरोध करेगा और हर साजिश को नाकाम करेगा।”
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
महाराष्ट्र9 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
-
न्याय2 years agoमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दायर
-
अपराध4 years agoबिल्डर पे लापरवाही का आरोप, सात दिनों के अंदर बिल्डिंग खाली करने का आदेश, दारुल फैज बिल्डिंग के टेंट आ सकते हैं सड़कों पे
-
अपराध3 years agoपिता की मौत के सदमे से छोटे बेटे को पड़ा दिल का दौरा
-
महाराष्ट्र12 months agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
