अंतरराष्ट्रीय
टी20 वर्ल्ड कप : यूएई में ओस और टॉस की भूमिका अहम
क्रिकेट एक ऐसा स्पोट्स का खेल है जो बड़े मैदानों और 22 यार्डस पर पूरे जुनून के साथ खेला जाता है, लेकिन टॉस, ओस, पिच की हालत और सही प्लेइंग इलेवन जैसे निर्णय इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
इस टी20 विश्व कप में टॉस और ओस हर गेम पर असर डाल रहा है। टूर्नामेंट के सुपर 12 में अब तक 10 में से नौ विजेता टीमों ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए मैच को अपने नाम किया है। इसलिए यहां हर मैच में टॉस जीतना एक महत्वपूर्ण बात साबित हो रही है।
इसे देखते हुए, टॉस जीतने वाले कप्तान बिना किसी संकोच के पहले फील्डिंग का चुनाव कर रहे हैं।
यूएई में कप्तानों के लिए मैच जीतने का एक ही फॉर्मूला है, टॉस जीतो, पहले गेंदबाजी करो और लक्ष्य का पीछा करके मैच पर कब्जा कर लो। हालांकि, इस टूर्नामेंट में एक मैच ऐसा भी अपवाद देखने को मिला जब टॉस जीतकर अफगानिस्तान की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए स्कॉटलैंड को 130 रनों का लक्ष्य दिया और इस मैच में जीत भी दर्ज की थी।
ऐसा क्रिकेट के खेल में पहली या आखिरी बार नहीं हो रहा है। टी20 विश्व कप के पिछले सीजनों में भी टॉस और ओस एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहा है। हाल ही में हुए यूएई की तीन जगहों पर आईपीएल मैचों के दौरान यह स्पष्ट देखने को मिला था, जिसमें टॉस जीतकर लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम 20 मैचों में से 15 में जीत हासिल की थी।
अब ये देखना भी महत्वपूर्ण है कि इसे लेकर तमाम कप्तानों का क्या कहना हैं-
पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया की 10 विकेट की करारी हार के बाद, विराट कोहली ने माना था कि टॉस जीतकर लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को ओस के कारण फायदा मिलेगा। यही कारण रहा है कि पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए अपने दोनों मैच जीते और निश्चित रूप से भारत और न्यूजीलैंड के खिलाफ दोनों मैचों में उनकी जीत में ओस ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोहली ने कहा, हां, इस टूर्नामेंट में निश्चित रूप से टॉस एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। खासकर, अगर खेल के बीच में ओस गिरती है तो आपको पहले हाफ में ज्यादा से ज्यादा रन बनाने होंगे।
कोहली ने आगे बताया कि जब उन्होंने बल्लेबाजी की तो पिच पर खेलना इतना आसान नहीं था, लेकिन दूसरे हाफ में पाकिस्तान टीम बल्लेबाजी के लिए आई तो पिच पर खेलना बिल्कुल आसान हो गया। इसलिए पाक के सलामी बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान और बाबर आजम को भारतीय गेंदबाजों को खेलने में मुश्किल नहीं हुई।
उन्होंने कहा, ओस पाकिस्तान की दूसरी पारी में गिरनी शुरु हुई जब 10 ओवर हो चुके थे। इस दौरान हमें डॉट बॉल भी नहीं मिल सकीं क्योंकि पिच स्पष्ट रूप से बल्लेबाजों की मदद कर रही थी। वहीं गेंद पकड़ में न आने के कारण धीमी गेंद भी डालना मुश्किल हो गया था।
ओस की चुनौतियां-
पकड़ और नियंत्रण: क्रिकेट में ओस एक महत्वपूर्ण फैक्टर है जो खेल के दौरान रात में गिरनी शुरू होती है। इसके कारण गेंद पर पकड़ बनाना और नियंत्रित करना हमेशा मुश्किल होता है, इसे गेंदबाजों को गेंद करने में परेशानी होती है तो वहीं, बल्लेबाजों के लिए खेलना आसान हो जाता है।
पिच: ओस पिच की हालत में बदलाव का कारण बनती है। इससे पिच बहुत प्लेट हो जाती है और इससे सतह की दरारें चौड़ी नहीं हो पाती। इस कारण बल्लेबाजों को स्पिन और स्विंग गेंदों को खेलने में आसानी हो जाती हैं।
क्षेत्ररक्षण: क्षेत्ररक्षकों को भी ओस से प्रभावित करती है क्योंकि गीली गेंद को पकड़ना या फेंकना मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक भी क्षेत्ररक्षण करते समय अपना शत प्रतिशत नहीं दे पाते।
अब सवाल ये है कि आगे का प्लान क्या होना चाहिए-
भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले मैच में ओस फैक्टर से निपटने के लिए अलग-अलग चीजें आजमा सकती है।
गीली गेंद से अभ्यास करना: मैच से पहले टीम के गेंदबाजों को अभ्यास के दौरान गीली गेंद का उपयोग करना होगा, ताकि खिलाड़ी मैच में गीली गेंद से स्थिति को देखते हुए गेंदबाजी कर सकें।
सही लेंथ पर गेंदबाजी करना: भारतीय गेंदबाजों को कीवी टीम के खिलाफ सही लेंथ पर गेंदबाजी करना होगा। क्योंकि गीली गेंद से गेंदबाज अपने अनुसार गेंदबाजी करने में सक्षम नहीं होता, इसलिए सही लेंथ पर गेंदबाजी करना बेहद जरूरी होगा। जो गेंदबाज ये करने में सफल हो जाता है वह मैच के अंत में सफल गेंदबाज बन जाएगा।
सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग इलेवन चुनना: भारत के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ ओस वाली स्थिति में गेंद गीली होने पर रिस्ट स्पिनर, फिंगर स्पिनर की तुलना में ज्यादा सफल हो सकता है। विशेष रूप से, राहुल चाहर इस समय भारतीय टीम में एकमात्र रिस्ट स्पिनर मौजूद हैं। रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा दोनों ही फिंगर स्पिनर हैं। वहीं, स्पिन विभाग में वरुण चक्रवर्ती एक रहस्यमीय गेंदबाज के रूप में जुड़े हुए हैं।
इस समय भारतीय टीम प्रबंधन द्वारा प्लेइंग इलेवन में अधिक स्पिनरों को शामिल करना या इसी तरह के सेट-अप के साथ चलना यह देखने वाली बात होगी।
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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