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Sunday,18-October-2026
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ममता ने मोदी से विद्युत संशोधन विधेयक पेश नहीं करने की अपील की

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि संसद में विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2020 को पेश करने से पहले राज्यों से ठीक से सलाह नहीं ली गई। ममता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वे इस विधेयक को आगे बढ़ाने से परहेज करें और इसे कानून न बनाया जाए, क्योंकि यह समाज के बड़े वर्ग के हितों में बाधा उत्पन्न करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में, बनर्जी ने कहा, इस तरह के एकतरफा हस्तक्षेप के लिए बिजली बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है, खासकर जब एक विषय के रूप में विद्युत भारत के संविधान की समवर्ती सूची में है और ऐसी सूची में किसी विषय पर किसी भी कानून को राज्यों के साथ गंभीर पूर्व परामर्श की आवश्यकता होती है। वर्तमान मामले में, परामर्श के कुछ प्रतीकवाद हैं, लेकिन विचारों का कोई वास्तविक आदान-प्रदान नहीं हुआ है, जो हमारी राजनीति के संघीय ढांचे के विपरीत है।

संसद में बहुप्रतीक्षित विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2020 को रखने के लिए हाल ही में केंद्र सरकार के कदम के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा, इस तरह के अहस्तक्षेप के ²ष्टिकोण से आकर्षक शहरी-औद्योगिक क्षेत्रों में निजी लाभ-केंद्रित उपयोगिता खिलाड़ियों की एकाग्रता का परिणाम होगा, जबकि गरीब और ग्रामीण उपभोक्ताओं को सार्वजनिक क्षेत्र के डिस्कॉम्स द्वारा छोड़ दिया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, बाजार सुधारों के नाम पर, राज्य अपनी कमांडिंग ऊंचाई को छोड़ देगा, राज्य के सार्वजनिक उपक्रम निष्क्रिय हो जाएंगे और फिर भी उन क्षेत्रों की सेवा करने के लिए मजबूर होंगे, जहां कोई कॉपोर्रेट निकाय ध्यान केंद्रित नहीं करेगा। निजी संस्थाओं का चयन करने के लिए चेरी-पिकिंग की अनुमति देना सार्वजनिक नीतियों का लक्ष्य नहीं हो सकता है, खासकर बिजली जैसे रणनीतिक क्षेत्र में।

विद्युत (संशोधन) विधेयक 2020 विद्युत अधिनियम 2003 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। 2003 अधिनियम बिजली क्षेत्र की संरचना और नीति को नियंत्रित करता है। यह बिजली के उत्पादन, वितरण, पारेषण, व्यापार और उपयोग की सिफारिश करता है। इसके अलावा, यह बिजली क्षेत्र के राज्य और केंद्रीय विभागों में नियामक प्राधिकरणों के लिए नियम और कानून भी निर्धारित करता है। अधिनियम में पेश किए गए पहले कुछ संशोधन 2014 में किए गए थे।

2020 के संशोधन विधेयक ने राज्य बिजली नियामक आयोगों (एसईआरसी) की नियुक्ति के लिए एक अलग चयन पैनल के बजाय एक राष्ट्रीय चयन समिति की स्थापना का प्रस्ताव दिया है।

बिजली क्षेत्र में राज्य की पूर्व-प्रतिष्ठित भूमिका को गैर-विनियमित और लाइसेंस रहित निजी खिलाड़ियों के पक्ष में व्यापक रूप से त्यागने का आरोप लगाते हुए, मुख्यमंत्री ने लिखा, विधेयक का घोषित उद्देश्य उपभोक्ताओं को बहुवचन विकल्प प्रदान करना है, भले ही वास्तव में बिल अंतत: नए सेवा प्रदाताओं द्वारा टैरिफ में वृद्धि के माध्यम से मुनाफाखोरी में समाप्त हो जाएगा और समाज के हर क्षेत्र को टैरिफ में वृद्धि के कारण नुकसान होगा।

ममता बनर्जी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन संघीय ढांचे की जड़ पर प्रहार करता है। उन्होंने कहा, राज्य सार्वजनिक उपयोगिता निकायों की भूमिका में कमी, निजी कॉपोर्रेट निकायों की भूमिका की अनियंत्रित वृद्धि और बिजली क्षेत्र में राज्यों के अधिकार में कटौती एक साथ एक भयावह डिजाइन का संकेत देती है, जिससे क्रोनी कैपिटलिज्म को राज्यों, सार्वजनिक क्षेत्र और आम लोगों की कीमत पर पोषण मिलेगा।

ममता ने आगे कहा, राज्य विद्युत नियामक आयोग और राज्य वितरण कंपनियों की भूमिका को कम करने का तात्पर्य राज्य निकायों और घरेलू उद्योगों को ध्वस्त करने के लिए एक राजनीतिक डिजाइन है। वितरण से संबंधित गतिविधियों में केंद्र सरकार का सीधा हस्तक्षेप आम लोगों और राज्यों के हितों की देखभाल करने में बिल्कुल भी मददगार नहीं होगा।

उन्होंने अपने पत्र में कहा, मैं आपसे अनुरोध करना चाहती हूं कि कृपया कानून बनाने से परहेज करें और यह सुनिश्चित करें कि इस विषय पर व्यापक और पारदर्शी संवाद जल्द से जल्द शुरू किया जाए।

राष्ट्रीय समाचार

सिरसा थाना ग्रेनेड हमला मामला: एनआईए ने 4 और आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया आरोप-पत्र

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष अदालत में 4 आरोपियों के खिलाफ एक पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया है। एजेंसी ने रविवार को बताया कि आरोप-पत्र में साजिश और इन 4 आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का विवरण दिया गया है।

एजेंसी ने बताया कि यह मामला 25 नवंबर 2025 को हरियाणा के सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन के पास हुए ग्रेनेड हमले से जुड़ा है। इसमें पंचकूला स्थित विशेष एनआईए अदालत में शनिवार को आरोपी राजबीर सिंह उर्फ ​​फौजी, वेद प्रकाश उर्फ ​​पम्मा, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल उर्फ ​​ज्योति और चिराग ठकराल के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया गया।

एनआईए के अनुसार, यह मामला मूल रूप से 26 नवंबर 2025 को हरियाणा के सिरसा स्थित सिविल लाइन पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। बाद में, 30 दिसंबर 2025 को एनआईए ने इसे फिर से दर्ज किया।

मामले में इसी साल 24 मई को एनआईए ने पंचकूला की विशेष अदालत में 9 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जिनमें पाकिस्तानी नागरिक शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ ​​सोहेल बलोच भी शामिल थे।

एजेंसी ने कहा कि पूरक आरोप-पत्र में इस साजिश और इन 4 आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का विवरण दिया गया है। साथ ही, आगे की जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों को भी इसमें शामिल किया गया है। इन लोगों पर भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 61(2) (धारा 109 के साथ पठित) और 238, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम-1908 की धारा 5 और 6, तथा यूए(पी) अधिनियम-1967 की धारा 18, 18बी और 20 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

एजेंसी के अनुसार, जांच से पता चला है कि आरोपी राजबीर सिंह उर्फ ​​फौजी कोऑर्डिनेटर के रूप में काम कर रहा था। वह भारत में हथियारों, हैंड ग्रेनेड और नशीले पदार्थों को इकट्ठा करने और उनकी आवाजाही के लिए विदेशों में बैठे हैंडलरों के साथ मिलकर काम करता था। आरोपी चिराग ठकराल, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल उर्फ ​​ज्योति और वेद प्रकाश उर्फ ​​पम्मा ने आरोपी राजबीर सिंह उर्फ ​​फौजी के निर्देशों पर काम करते हुए सिरसा के महिला पुलिस स्टेशन पर हुए ग्रेनेड हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

यह हमला शहजाद भट्टी नेटवर्क के सदस्यों की ओर से एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया था। इसका मकसद पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचाना और आम जनता के बीच दहशत और डर पैदा करना था। एनआईए की जांच में इस साजिश के तार विदेशों में बैठे उन हैंडलरों से जुड़े पाए गए हैं, जो सीमा पार से आतंकी नेटवर्क चला रहे हैं।

एजेंसी ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है, ताकि साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जा सके और इस हमले के पीछे के पूरे सीमा पार आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

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राष्ट्रीय समाचार

तेलंगाना: हैदराबाद के एक कॉलेज में डांडिया कार्यक्रम के दौरान लाइटिंग ट्रस गिरने से एक छात्रा की मौत

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हैदराबाद के बाहरी इलाके नादेरगुल में एक इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया कार्यक्रम के दौरान लाइटिंग ट्रस (लाइट लगाने वाला ढांचा) गिर गया, जिससे एक छात्रा की मौत हो गई और कम से कम 16 अन्य लोग घायल हो गए।

यह हादसा शनिवार रात तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के आदिबतला में नादेरगुल स्थित एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में हुआ। कार्यक्रम के दौरान अचानक लाइटिंग ट्रस (लाइट लगाने वाला ढांचा) गिर गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। बी. टेक. प्रथम वर्ष की छात्रा नारायणदास सोना (18) गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वह वनापर्थी जिले की रहने वाली थीं।

पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच से पता चला है कि तेज हवाओं के कारण लाइटिंग सिस्टम गिर गया। घायलों को पास के अस्पताल ले जाया गया और वहां से उन्हें यशोदा अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, 16 घायलों में से 10 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

कुछ छात्रों और उनके अभिभावकों ने कॉलेज प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह डांडिया कार्यक्रम ‘संगम-2026’ का हिस्सा था, जो दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का तकनीकी और सांस्कृतिक उत्सव है। इस कार्यक्रम में विभिन्न कॉलेजों के छात्र अपनी तकनीकी कुशलता, नए विचारों और सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए थे।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में हुए हादसे पर गहरा दुख जताया है, जिसमें एक छात्रा की मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने छात्रा के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और निर्देश दिया कि घायल छात्रों को हर संभव बेहतरीन इलाज मुहैया कराया जाए। उन्होंने आदेश दिया कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने कहा कि इस हादसे से गहरा सदमा और दुख पहुंचा है। उन्होंने मृत छात्रा के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। रामा राव ने हादसे में घायल छात्रों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि उन्हें बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

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राजनीति

कोलकाता भगदड़ पर नेताओं ने दुख जताया, टीएमसी बोली-प्रशासन की विफलता से हुआ हादसा

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कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान मची भगदड़ पर देशभर के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस हादसे में अब तक 19 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “कोलकाता में 19 लोगों की जान चली गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। यह बेहद दुखद खबर है। जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, उनके परिवारों के प्रति हम गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि वह माता रानी से प्रार्थना करते हैं कि घायल लोग जल्द स्वस्थ हो जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि जब भी ऐसी कोई दुखद घटना होती है, तो हमें मानवीय आधार पर पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए और किसी को भी इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है और खुद घायलों से मिलकर संवेदनशीलता दिखाई है। सरकार पूरी तरह पीड़ितों के साथ खड़ी है।

कोलकाता में पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री उमेश राय ने भगदड़ के कारणों पर बात की। उन्होंने कहा, “यह भगदड़ तब मची जब लोग पंडाल से बाहर नहीं निकल रहे थे, जबकि पीछे से बड़ी संख्या में लोग अंदर आने की कोशिश कर रहे थे।” उन्होंने इस हादसे के लिए पूजा आयोजकों और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह उनकी लापरवाही का नतीजा है। मंत्री ने जानकारी दी कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जो इस घटना की गहराई से जांच करेगा।

वहीं, टीएमसी नेता और एआईटीसी विधायक कुणाल घोष ने इसे पूरी तरह प्रशासनिक विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित पूजा समिति को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इसमें कई प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। उन्होंने बताया, “अभी हम अस्पताल में हैं। रात से ही हमारी प्राथमिकता राहत कार्य और घायलों का इलाज रही है। हमारे कार्यकर्ता चोरबागन समेत हर जगह मौजूद थे।”

कुणाल घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शनिवार रात अस्पताल क्यों नहीं गए। उन्होंने कहा, “अगर नेतृत्व वहां आता तो मीडिया और पुलिस का ध्यान दूसरे कामों में लग जाता, जिससे इलाज का काम बाधित होता। इसलिए हमारी पूरी टीम वहां मौजूद थी लेकिन कुछ जानकारी मिलने के बाद आज मैं खुद अस्पताल आया हूं।”

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