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Monday,27-July-2026
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राजनीति

सीएए को लागू करने के मोदी सरकार के फैसले से 53.3 फीसदी सहमत

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Narendra-Modi

एबीपी-सी वोटर मोदी 2.0 रिपोर्ट कार्ड के अनुसार, 50 प्रतिशत से अधिक लोगों का मानना है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों जैसे कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने का फैसला सही लिया है। एबीपी-सी वोटर सर्वे में पाया गया कि 53.3 फीसदी लोगों का मानना है कि मोदी सरकार ने सीएए को लागू करने का सही फैसला लिया है, जबकि 21.8 फीसदी लोगों ने कहा कि नहीं, यह गलत फैसला था, जबकि लगभग 24.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सीएए को लागू करने के मोदी सरकार के फैसले के बारे में कुछ नहीं कहा।

सर्वे में पाया गया कि मोदी सरकार के इस फैसले को ग्रामीण इलाकों के बजाय शहरी इलाकों में ज्यादा समर्थन मिला है। सर्वेक्षण से पता चला है कि शहरी क्षेत्रों में लगभग 64.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सीएए को लागू करने के निर्णय का समर्थन किया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 48.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने एक ही विचार रखा।

शहरी क्षेत्रों में 19.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने नागरिकता कानून में किए गए नए संशोधनों का समर्थन नहीं किया, जबकि देश के ग्रामीण हिस्सों में 22.7 प्रतिशत ने नए संशोधनों का विरोध किया।

शहरी क्षेत्रों में लगभग 15.5 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 29 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने साल 2014 से पहले भारत में पड़ोसी देशों से आने वाले उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता कानून में संशोधन के समर्थन या विरोध में नहीं रहे।

यह सर्वे 23 मई से 27 मई के बीच देशभर में 12,070 लोगों पर किया गया था।

साल 2019 में संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद देश ने सीएए के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध होते देखा था।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान के जहाज पर यूक्रेन के हमले का जवाब देना जरूरी : विदेश मंत्री अब्बास अराघची

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ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि कैस्पियन सागर में ईरान के कमर्शियल जहाज पर यूक्रेन के हमले को बिना जवाब दिए ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता।

ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की पर आरोप लगाया कि उन्होंने इजरायल के कहने पर यूएन चार्टर का खुला उल्लंघन करके यूरोप को अपनी लड़ाई में घसीटने का आदेश दिया।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि उन्होंने शनिवार और रविवार को यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख काजा कैलास और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ फोन पर हुई बातचीत में स्पष्ट कर दिया था कि कीव में मुफ्तखोर ने जो किया, उसे बिना जवाब दिए नहीं जाने नहीं दिया जा सकता।

ईरानी विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, अराघची ने शनिवार को ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास के साथ एक फोन कॉल में यह बात कही। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की।

बयान के अनुसार, अराघची ने यूक्रेनी हमले की निंदा की और ईयू, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके गुनाहगारों और समर्थकों को जिम्मेदार ठहराने की अपील की।

इसमें आगे कहा गया कि दोनों पक्षों ने होर्मुज स्ट्रेट में हो रहे घटनाक्रम पर भी बात की और क्षेत्रीय तनाव को मैनेज करने के लिए डिप्लोमैटिक पहल की जरूरत पर जोर दिया।

एक अलग बयान में मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने हमले को लेकर शनिवार को तेहरान में यूक्रेन के चार्ज डी’अफेयर्स को बुलाया और औपचारिक रूप से इस काम की निंदा करते हुए विरोध पत्र दिया।

ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह हमला शनिवार को स्थानीय समय के हिसाब से सुबह 3:00 बजे हुआ और इसमें जहाज में धमाका हुआ और एक नाविक की मौत हो गई।

अर्धसरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने रविवार को बताया कि हमले में तीन नाविक भी घायल हुए हैं।

ईरान के उत्तरी गिलान प्रांत के गवर्नर हादी हकशेनास के हवाले से बताया गया कि स्टील लादे इस जहाज पर उस समय हमला हुआ, जब वह रूस के अस्त्राखान बंदरगाह से ईरान के गिलान प्रांत स्थित अंजली बंदरगाह की ओर जा रहा था।

हकशेनास ने कहा कि हमले में जहाज का ब्रिज (नियंत्रण कक्ष) पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे वह अपनी यात्रा जारी रखने में असमर्थ हो गया। उन्होंने कहा कि इस घटना को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनी माध्यमों से उठाया जाएगा।

वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को दावा किया कि यूक्रेनी बलों ने कैस्पियन सागर में एक रूसी युद्धपोत और ईरान से जुड़े सैन्य सामान की ढुलाई में इस्तेमाल किए जा रहे जहाजों को निशाना बनाया है।

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महाराष्ट्र

मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पुलिस ने 36 वर्षीय बांग्लादेशी व्यक्ति को किया गिरफ्तार

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ARREST

मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर चेकिंग के दौरान एक 36 वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। वह कथित तौर पर फर्जी तरीके से बनवाए गए दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहा था। कोलंबो से लौटते समय हवाई अड्डे पर उसे पकड़ा गया।

मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुलिस ने 36 वर्षीय बांग्लादेशी व्यक्ति को किया गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने खुलासा किया कि कोलकाता में रहते हुए आरोपी ने आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे भारतीय दस्तावेज बनवाए थे, जिसके बाद उसने भारतीय पासपोर्ट हासिल किया। इन पासपोर्ट के जरिए वह मालदीव और कोलंबो की यात्रा कर चुका था। आरोपी की पहचान बाबू बिस्वास उर्फ तपस बिस्वास के रूप में हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि कोलंबो से लौटने समय मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने के बाद आरोपी इमिग्रेशन काउंटर पर स्टांप लगवाने पहुंचा था। सहायक इमिग्रेशन अधिकारी को उसके पासपोर्ट पर शक हुआ। अधिकारी ने उससे पूछताछ की, जिस दौरान संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।

पुलिस ने बताया कि आगे पूछताछ के लिए इमिग्रेशन विंग के प्रभारी और ड्यूटी अधिकारियों के सामने पेश किया गया। इसके बाद यह साफ हो गया कि वह बांग्लादेश के फरीदपुर का रहने वाला है। पुष्टि तब हुई जब उसने घर पर अपनी पत्नी को व्हाट्सएप पर कॉल किया और उससे बांग्लादेशी नागरिकता के प्रमाण के तौर पर कुछ दस्तावेज भेजने को कहा। इसके बाद उसे बाबू विश्वास के पिता के नाम पर बांग्लादेश में रजिस्टर्ड जमीन के दस्तावेजों की फोटोकॉपी मिली।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विश्वास ने बताया कि वह 2016 में परिवार के साथ बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। वह कोलकाता के नादिया जिले में रहा और मजदूर के रूप में काम किया। पश्चिम बंगाल में रहते हुए उसने एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से पैन कार्ड और आधार कार्ड बनवा लिया। उसने कोलकाता के पासपोर्ट कार्यालय से दस्तावेजों के आधार पर 2019 में भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया। उसने 2023 में भारतीय पासपोर्ट से दो बार मालदीव की यात्रा की।

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राजनीति

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो सिर्फ शुरुआत, देशभर में हुए प्रदर्शन : शिवसेना (यूबीटी)

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भाजपा नीत एनडीए सरकार पर तीखा हमला करते हुए सोमवार को दावा किया कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्र नेताओं के 35 दिनों तक चले आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार देशभर में हंसी का पात्र बन गई।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक तीखे संपादकीय में ठाकरे गुट ने कहा कि नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए लंबे आंदोलन ने केंद्र सरकार को वास्तविकता का पूरा एहसास कराया और सरकार की छवि को गंभीर झटका पहुंचाया।

संपादकीय में कहा गया कि देशभर के युवाओं के गुस्से ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस आंदोलन का पहला राजनीतिक शिकार बना दिया। पार्टी का दावा है कि शुरुआत में सरकार इस्तीफे के पक्ष में नहीं थी। संपादकीय में उन खबरों का भी जिक्र किया गया, जिनमें कहा गया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि एनडीए की कार्यशैली में इस्तीफे शामिल नहीं हैं। हालांकि, बढ़ते जनाक्रोश के चलते सरकार को अंतत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा।

संपादकीय में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के आधिकारिक कारण को भी खारिज किया गया। प्रधान ने कहा था कि उन्होंने राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को आंदोलन का फायदा उठाने से रोकने के लिए इस्तीफा दिया है। इस पर संपादकीय में सवाल किया गया, जंतर-मंतर या देशभर के प्रदर्शनों में उन्हें कौन-सी राष्ट्रविरोधी ताकतें दिखाई दीं?

संपादकीय में कहा गया, “छात्र नेताओं और जलवायु कार्यकर्ताओं को राष्ट्रविरोधी बताना पूरे देश में मौजूद वास्तविक आक्रोश का अपमान है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का राष्ट्रीय एकता से कोई संबंध नहीं है। देश तो नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले 20 युवाओं के बलिदान से एकजुट हुआ था।”

संपादकीय में उन प्रमुख चेहरों का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने 35 दिनों के आंदोलन को गति दी। इनमें अमेरिका से लौटे अभिजीत दीपके, जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ लोगों को संगठित करने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और छात्र नेता नेहा बोरा शामिल हैं।

पार्टी ने सरकार के रुख में विरोधाभास होने का भी आरोप लगाया। संपादकीय में कहा गया कि एक तरफ भाजपा ने सोनम वांगचुक को विदेशी एजेंट बताने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ उसके मंत्री उनसे मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील करते नजर आए।

संपादकीय में कहा गया कि इस पूरे मामले का राजनीतिक असर केवल धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रह सकता। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया और प्रधानमंत्री मोदी से आधिकारिक माफी की मांग की गई।

ठाकरे गुट ने सरकार द्वारा लाए गए नए एंटी-पेपर लीक विधेयक को भी महज एक दिखावा बताया। पार्टी का आरोप है कि यह पुराना कानून ही है, जिसमें सिर्फ सजा और जुर्माने की रकम बदलकर छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित करने की कोशिश की गई है।

संपादकीय में दावा किया गया कि आंदोलन में शामिल युवाओं की डिजिटल समझ, तकनीकी क्षमता और स्वतःस्फूर्त संगठन ने एक महीने तक चले आंदोलन के दौरान भाजपा के डिजिटल प्रचार और आईटी सेल को प्रभावहीन बना दिया।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार छात्रों की नाराजगी और प्रशासनिक विफलताओं के मूल कारणों को दूर नहीं करती है, तो देशभर में असंतोष की यह चिंगारी और बढ़ती जाएगी।

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