अंतरराष्ट्रीय
निशानेबाजी विश्व कप : पंवार ने 10 मीटर एयर राइफल में कांस्य जीता
दिव्यांश पंवार ने यहां आईएसएसएफ विश्व कप में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में जारी इस इवेंट में पंवार के पदक के साथ भारत का खाता खुला। दिव्यांश को फाइनल में 228.1 का स्कोर मिला। अमेरिका के लुकास कोजेनस्की ने 249.8 स्कोर के साथ स्वर्ण जीता जबकि हंगरी के इस्तवान पेनी 249.1 के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
आठ खिलाड़ियों के फाइनल में भारत के अन्य प्रतियोगी, अर्जुन बाबूटा 185.5 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर रहे।
शुक्रवार को 60 शॉट के क्वालीफिकेशन राउंड में, ओलंपिक कोटा हासिल करने वाले किशोर निशानेबाज पंवार ने 629.1 अंक हासिल कर छठा स्थान हासिल किया था। 22 वर्षीय बबूटा ने तीसरा स्थान अर्जित करने के लिए 631.8 अंक जुटाए।
शुक्रवार को तीसरे स्थान पर रहे निशानेबाज जकार्ता एशियन गेम्स के पदक विजेता दीपक कुमार 12वें स्थान पर रहे और शनिवार के फाइनल में पहुंचने में असफल रहे।
अंजुम मौदगिल, उद्घाटन के दिन 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में आगे बढ़ने वाली अकेली भारतीय महिला रहीं। वह शनिवार को ही प्रतिस्पर्धा करेंगी।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर नाटो देशों और सहयोगियों पर निशाना साधा

वाशिंगटन, 7 अप्रैल : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के सैन्य अभियान का समर्थन न करने के लिए नाटो और अमेरिका के खास सहयोगियों की कड़ी आलोचना की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस गठबंधन को कागजी शेर कहा।
ट्रंप ने कहा, “नाटो एक कागजी शेर है। लड़ाई के दौरान अलायंस आगे आने में नाकाम रहा।” उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों ने मदद न करने के लिए अपनी हदें पार कर दीं और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने से भी मना कर दिया। वे हमें लैंडिंग स्ट्रिप भी नहीं देना चाहते थे।
ट्रंप ने जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को भी अपनी आलोचना में शामिल किया। उन्होंने कहा, “जापान ने हमारी मदद नहीं की, ऑस्ट्रेलिया ने हमारी मदद नहीं की, दक्षिण कोरिया ने हमारी मदद नहीं की।”
उन्होंने कहा कि लड़ाई का बोझ अकेले अमेरिका ने उठाया है। उन्होंने सहयोगियों में अमेरिका के दबदबे पर जोर देते हुए कहा, “नाटो हम हैं।”
ये टिप्पणी ईरान के साथ संघर्ष बढ़ने के बीच अमेरिका और उसके साथियों के बीच बढ़ते तनाव को दिखाते हैं।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, कई अमेरिकी साझेदार वाशिंगटन के तरीके को अप्रत्याशित मानते हैं और अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर भरोसा करने के बावजूद लड़ाई में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब एनर्जी में रुकावटें और आर्थिक नुकसान बढ़ रहे हैं, इस संघर्ष ने सहयोगियों को एक परेशानी में डाल दिया है। ट्रंप ने यूरोपीय साथियों के रवैये की भी आलोचना की और कहा कि उन्होंने लंबे समय से चले आ रहे संबंधों के बावजूद हिस्सा लेने से मना कर दिया था।
सहयोगियों की भागीदारी की कमी, अमेरिका के नेतृत्व वाली पिछली लड़ाइयों से अलग है, जहां गठबंधन का सपोर्ट एक अहम हिस्सा था।
ट्रंप ने एक सवाल के जवाब में कहा, “मुझे आपको बताना है, मैं नाटो से बहुत निराश हूं। मुझे लगता है कि यह नाटो पर एक ऐसा दाग है जो कभी नहीं मिटेगा।”
ट्रंप ने कहा, “हम नाटो गए थे। मैंने बहुत जोर देकर नहीं पूछा। मैंने बस कहा, अगर आप मदद करना चाहते हैं तो बढ़िया, तो उन्होंने कहा ‘नहीं, नहीं नहीं, हम मदद नहीं करेंगे’। मैंने कहा, कोई बात नहीं। मैंने हमेशा कहा है कि नाटो एक कागजी शेर है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “पुतिन नाटो से नहीं डरते। पुतिन हमसे डरते हैं, बहुत डरते हैं। वे खुद मुझे कई बार यह बात बता चुके हैं। मैं उन्हें बहुत अच्छे से जान गया हूं। नाटो एक कागजी शेर है। उन्होंने असल में मदद न करने के लिए अपनी हदें पार कर दीं। वे हमें लैंडिंग स्ट्रिप भी नहीं देना चाहते थे।”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “जरा सोचिए। यह सिर्फ नाटो नहीं है। आप जानते हैं कि और किसने हमारी मदद नहीं की? दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने। हमारे पास जापान में उत्तर कोरिया से उन्हें बचाने के लिए 50,000 सैनिक हैं। हमारे पास दक्षिण कोरिया में किम जोंग उन से बचाने के लिए 45,000 सैनिक हैं, जिनके साथ मेरी बहुत अच्छी बनती है, जैसा कि आप जानते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका-भारत संबंधों में तेजी आने के साथ ही प्राथमिकताओं के तालमेल पर जोर

वॉशिंगटन, 6 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत ने अपनी रणनीतिक साझेदारी में नई गति का संकेत दिया है। यह संकेत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के लिए आयोजित व्हाइट हाउस रात्रिभोज से पहले मिला। वहीं वॉशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय बैठकों की श्रृंखला ने सुरक्षा और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर बढ़ती समानता को भी रेखांकित किया।
व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति भारत में अमेरिकी राजदूत के साथ एक रात्रिभोज में भाग लेने वाले हैं। गोर इस समय अमेरिकी राजधानी में हैं और कई बैठकों में शामिल हो रहे हैं।
गोर ने वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों, जिनमें एफबीआई निदेशक काश पटेल भी शामिल हैं, के साथ बैठकों के बाद सहयोग के विस्तार पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि उन्होंने “रचनात्मक चर्चा” की, जिसमें “सीमा पार खतरों, साइबर अपराध, मादक पदार्थों और अवैध नेटवर्क” से निपटने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
उन्होंने कहा, “सुरक्षा प्राथमिकताओं पर मजबूत तालमेल है,” और जोड़ा कि पटेल “एफबीआई में शानदार काम कर रहे हैं।” उन्होंने हालिया कानून-प्रवर्तन उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कहा: “2025 में: हिंसक अपराधों में गिरफ्तारियों में साल-दर-साल 112% की वृद्धि। हत्याओं में 20 प्रतिशत की कमी। डकैती में 20 प्रतिशत की कमी!”
ये संपर्क वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच साझा सुरक्षा चुनौतियों, विशेष रूप से साइबर खतरों और संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ परिचालन सहयोग को गहरा करने के व्यापक प्रयासों के बीच हो रहे हैं।
गोर ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ अपनी बैठक के बाद संबंधों के राजनीतिक पहलू पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “अभी-अभी उपराष्ट्रपति के साथ शानदार बैठक समाप्त हुई। अमेरिका-भारत संबंधों पर उपराष्ट्रपति के निरंतर नेतृत्व और ध्यान के लिए धन्यवाद।”
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में व्हाइट हाउस इस क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय है,” और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र तथा उसमें भारत की भूमिका पर अमेरिका के निरंतर ध्यान की ओर इशारा किया।
कूटनीतिक प्रयासों में गोर और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के बीच बैठक भी शामिल रही, जो दोनों पक्षों के बीच करीबी समन्वय को दर्शाती है। गोर ने कहा, “मेरे मित्र क्वात्रा से मिलकर हमेशा खुशी होती है। वे हमारे रणनीतिक संबंधों की गहराई से परवाह करते हैं!”
क्वात्रा ने इस बातचीत को दोनों लोकतंत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करने के जारी प्रयासों का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “वॉशिंगटन डीसी की यात्रा के दौरान अपने मित्र, राजदूत सर्जियो गोर से मिलकर खुशी हुई। उनके सहयोग का सम्मान करता हूं और हम दोनों देशों के नेताओं द्वारा तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपने मजबूत प्रयास जारी रखेंगे।”
ये बातचीत सुरक्षा, कूटनीति और राजनीतिक नेतृत्व को शामिल करते हुए बहु-स्तरीय जुड़ाव को दर्शाती है, जिसमें दोनों पक्ष प्रमुख प्राथमिकताओं पर तालमेल पर जोर दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने आईआरजीसी खुफिया प्रमुख की हत्या की निंदा की

iran
तेहरान, 7 अप्रैल : ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने आईआरजीसी के एक वरिष्ठ जनरल की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ईरानी नेतृत्व के खिलाफ “हत्याएं और अपराध” देश की प्रगति को नहीं रोकेंगे। वरिष्ठ जनरल सोमवार को तेहरान में इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमले में मारे गए थे।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, खामेनेई ने एक लिखित बयान में ईरान के खुफिया संगठन (आईआरजीसी) के प्रमुख माजिद खादेमी की दशकों से ईरान की सुरक्षा, खुफिया और रक्षा क्षेत्रों में किए गए “मौन प्रयासों” की प्रशंसा की। उन्होंने इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका पर लगातार हार के बाद “आतंकवाद और हत्या” का सहारा लेने का भी आरोप लगाया।
खामेनेई ने खादेमी के परिवार और साथियों के साथ-साथ आईआरजीसी के खुफिया संगठन के अन्य कमांडरों के प्रति संवेदना व्यक्त की। खादेमी को खुफिया संगठन का प्रमुख नियुक्त किया गया था। नियुक्ति से पहले खादेमी आईआरजीसी के खुफिया सुरक्षा संगठन के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने राजधानी तेहरान में शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की। हमले में सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र की इमारत और शैक्षणिक केंद्र की मस्जिद के पास स्थित एक गैस स्टेशन को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
ईरान की सेना ने रविवार को कहा था कि उसने दक्षिणी इजरायल में पेट्रोकेमिकल उद्योगों और पेट्रोलियम उत्पाद भंडारण सुविधाओं के साथ-साथ कुवैत में अमेरिकी उपकरण डिपो, उपग्रह संचार इकाइयों और एक अड्डे पर तैनात सैनिकों को निशाना बनाया है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के साथ-साथ वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए थे। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
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