राष्ट्रीय समाचार
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स में 120 डिजाइन ट्रेनी/मैनेजमेंट ट्रेनी पदों पर आवेदन शुरू, जानें योग्यता से सैलरी तक सब कुछ
नौकरी की तलाश में जुटे लोगों के लिए एक शानदार मौका सामने आया है। दरअसर, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने डिजाइन ट्रेनी/मैनेजमेंट ट्रेनी के कुल 120 पदों पर योग्य उम्मीदवारों की भर्ती के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके आवेदन मांगे हैं।
एचएएल की ओर से जारी 120 रिक्तियों में डिजाइन ट्रेनी के 60 और मैनेजमेंट ट्रेनी के 60 पद शामिल हैं। डिजाइन ट्रेनी के 60 पदों में एरोनॉटिकल के 4, इलेक्ट्रिकल के 7, इलेक्ट्रॉनिक्स के 20, इंस्ट्रूमेंटेशन के 3, मैकेनिकल के 22, कंप्यूटर साइंस के 3 और मेटलर्जी का 1 पद शामिल हैं। वहीं, मैनेजमेंट ट्रेनी के 60 पदों में इलेक्ट्रिकल के 11, इलेक्ट्रॉनिक्स के 12, मैकेनिकल के 27, कंप्यूटर साइंस का 1, मेटलर्जी के 2, प्रोडक्शन के 5 और सिविल के 2 पद शामिल हैं।
इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 29 जुलाई के दोपहर 2 बजे से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 14 अगस्त तय की गई है। ऐसे में इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि के दोपहर 2 बजे तक या उससे पहले अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित पद अनुसार इंजीनियरिंग/टेक्नोलॉजी में बैचलर डिग्री या इसके समकक्ष की योग्यता न्यूनतम 70 प्रतिशत अंकों के साथ होनी चाहिए। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स के लिए न्यूनतम अंत 60 प्रतिशत तय किया गया है।
आवेदकों की अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन के अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन ऑनलाइन कंप्यूटर-आधारित चयन परीक्षा, पर्सनल इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और नौकरी से पहले मेडिकल मानक के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग की अवधि के दौरान 50,000 रुपए बेसिक पे के तहत स्टाइपेंड के तौर पर दिए जाएंगे। वहीं, ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद कैंडिडेट्स की सैलरी 50,000 से 1,60,000 रुपए के बीच दी जाएगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी मिलेंगे। उम्मीदवारों का व्यक्तिगत साक्षात्कार बेंगलुरु में आयोजित किया जाएगा।
एप्लीकेशन फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 500 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी और आंतरिक उम्मीदवार को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।
राष्ट्रीय समाचार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को सोशल मीडिया पर अदालती दस्तावेज पोस्ट करने के खिलाफ चेतावनी दी

एक वकील ने मंगलवार को बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने ब्रिटेन में रहने वाले ‘भगोड़े आर्थिक अपराधी’ विजय माल्या को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई जारी रहने के दौरान अदालती दस्तावेज सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने की चेतावनी दी है।
वकील आशीष मेहता ने बताया कि कथित तौर पर ब्रिटेन में मौजूद भगोड़े व्यवसायी को हाई कोर्ट का यह निर्देश ईडी द्वारा माल्या को जांच एजेंसी के हलफनामे को अदालत द्वारा उस पर विचार किए बिना ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपलोड करने पर आपत्ति जताने के बाद आया है।
मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर को तय करते हुए हाई कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को ईडी द्वारा किए गए खुलासों को ध्यान में रखते हुए एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इससे पहले, माल्या ने फरवरी में हाई कोर्ट को बताया था कि वह यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि वह भारत कब लौटेंगे।
उन्होंने इंग्लैंड की अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का हवाला दिया, जिनके कारण वह देश छोड़ने में असमर्थ हैं।
उच्च न्यायालय माल्या द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
एक याचिका में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के तहत ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किए जाने को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी याचिका में उन्हें औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने वाले अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।
माल्या की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति में भी रिट याचिकाओं की सुनवाई हुई थी।
उन्होंने कहा कि माल्या के खिलाफ ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है और उनके मुवक्किल को इसकी जानकारी है, लेकिन बाध्यकारी अदालती आदेशों के कारण वे ब्रिटेन नहीं छोड़ सकते।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने माल्या के अदालत में पेश होने के इरादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे ब्रिटेन के अदालती आदेशों पर भरोसा कर रहे हैं, जबकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन आदेशों को चुनौती दी गई है या नहीं।
अदालत ने संकेत दिया कि इस तरह के भरोसे को सर्वमान्य औचित्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को माल्या के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने देसाई को सुनवाई के दौरान दिए गए सभी बयानों को रिकॉर्ड पर रखते हुए एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने को भी कहा, ताकि भारत सरकार तदनुसार जवाब दे सके।
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वित्त वर्ष 26 में सैमसंग इंडिया का मुनाफा 36 प्रतिशत घटकर 7,228 करोड़ रुपए रहा

सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में अपने कंसोलिडेटेड मुनाफे में 36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है।
बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म टॉफ्लर के जरिए हासिल नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 7,228.10 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष में दर्ज 11,287.50 करोड़ रुपए से कम है।
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन निर्माता कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व वित्त वर्ष 2026 में सालाना आधार पर 1.2 प्रतिशत बढ़कर 1.12 लाख करोड़ रुपए हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 1,11,183.40 करोड़ रुपए था।
अन्य आय समेत कंपनी की कुल कंसोलिडेटेड आय वित्त वर्ष के दौरान 1,14,738.60 करोड़ रुपए रही।
सैमसंग इंडिया के राजस्व में मोबाइल फोन कारोबार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, जो देश में कंपनी के कारोबार के प्रमुख आधारों में से एक बना हुआ है।
कंपनी की टेलीविजन, टैबलेट, घरेलू उपकरणों और कंप्यूटर समेत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के कई क्षेत्रों में भी मजबूत मौजूदगी है।
दक्षिण कोरियाई टेक्नोलॉजी दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का हिस्सा यह कंपनी भारत के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में प्रमुख कंपनियों में बनी हुई है।
यह देश के अप्लायंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की एकमात्र कंपनी है, जिसका कारोबार 1 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है।
सैमसंग का वित्तीय प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी तेज है। वैश्विक और घरेलू कंपनियां विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में आक्रामक तरीके से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
इस बीच, दक्षिण कोरिया की एक अन्य प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने भी वित्त वर्ष 2026 में अपेक्षाकृत स्थिर वृद्धि दर्ज की। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल आय सालाना आधार पर करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 2,46,049.12 करोड़ रुपए हो गई।
इसके अतिरिक्त, इस महीने की शुरुआत में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बढ़ती परिचालन लागत, कमजोर उपभोक्ता मांग और संगठनात्मक पुनर्गठन के बीच लागत को तर्कसंगत बनाने की कवायद के तहत सैमसंग इंडिया ने अपने टेलीविजन और होम अप्लायंस कारोबार से जुड़े कर्मचारियों की छंटनी की है।
कई रिपोर्टों में कहा गया कि इस कार्यबल में कमी का असर विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों पर पड़ा है, जिनमें निदेशक, टीम लीडर, ब्रांच मैनेजर और एरिया मैनेजर शामिल हैं।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली एसआईआर में 47 लाख नाम हटाने के दावे पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से मांगा जवाब

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं। इसके अलावा 33 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए हैं और इन नोटिसों के पीछे कारण रिकॉर्ड में कमी बताया गया है। प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “दिल्ली में पहले 47 लाख नाम डिलीट किए। बंगाल में आपने देखा अपील को निपटाने में 12 साल लगेंगे। 47 लाख उन्होंने ड्राफ्ट रोल में डिलीट कर दिए। ज्यादातर को आयोग कहता है कि शिफ्ट कर दिए गए हैं।”
इस पर चुनाव आयोग की ओर से वकील डी. एस. नायडू ने कहा कि उन्हें याचिका की कॉपी नहीं मिली है। एक सप्ताह पहले याचिकाकर्ता ने एक रिप्रजेंटेशन दिया था और आयोग जवाब दे पाता, उससे पहले ही वे कोर्ट आ गए।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव आयोग को इन शिकायतों की जांच करनी चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नोटिस ऐसे लग रहे हैं जैसे कंप्यूटर से बने हों। जस्टिस बागची ने कहा, “प्लीज इसकी जांच करें। वे कह रहे हैं कि जब नोटिस जा रहा है तो वह कुछ खास कैटेगरी में जा रहा है। संबंधित व्यक्ति को पता होता है कि एलडी की कैटेगरी क्या है।”
सीजेआई ने भी कहा कि आयोग को लॉजिकल अंतर को थोड़ा क्लियर करने की जरूरत है। चुनाव आयोग ने जवाब में कहा कि उसने प्रेस नोट जारी किया है और हर नोटिस में कारण लिखा होता है। यह कोई मुद्दा नहीं है। आयोग ने कहा कि पेंडेंसी मैनेज करने के लिए मैनपावर बढ़ाई गई है और नोटिस में कारण भी बताए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा कि आपने लगभग 30 लाख नोटिस भेजे हैं और कितने बीएलओ तैनात हैं? इस पर आयोग ने बताया कि 14,000 बीएलओ और 1,200 ईआरओ तैनात किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि 29 अक्टूबर डेडलाइन है और अगर काम पूरा नहीं हुआ तो वह एक्सटेंशन के लिए तैयार है। यह चुनाव वाला राज्य नहीं है और एक भी वोटर का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाएगा।
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