अंतरराष्ट्रीय
भारत ने आस्ट्रेलिया के साथ अपने 100वें टेस्ट को यादगार बनाया
ऐतिहासिक मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) भारत और आस्ट्रेलिया के बीच 100वें टेस्ट मैच का गवाह बना और भारत ने अपने चार अहम खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी के बावजूद अजिंक्य रहाणे की प्रेरणादायी कप्तानी में 8 विकेट से जीत हासिल करते हुए इसे याददार बना दिया है। बाक्सिंग डे टेस्ट इन दोनों टीमों के बीच के क्रिकेट रिश्तों के लिहाज से एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है और अब भारत ने जीत हासिल करते हुए इस मील के पत्थर पर अपना नाम लिख दिया है क्योंकि भारत आजाद होने के इन दोनों टीमों का जो सफर शुरू हुआ था, उसके पहले मील के पत्थर यानि पहले टेस्ट आस्ट्रेलिया की जीत हुई थी।
आज बेशक भारत और आस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट के मैदान पर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा होती है लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि आस्ट्रेलिया ने दुनिया की बाकी अन्य टीमों के साथ-साथ भारत के खिलाफ भी हमेशा से अपना वर्चस्व कायम रखा है।
बॉक्सिंग डे टेस्ट से पहले तक खेले गए 99 टेस्ट मैचों में आस्ट्रेलिया ने 43 मैच जीते हैं जबकि 28 में भारत की जीत हुई थी। एक मैच टाई रहा है और 27 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। अब भारत ने अपनी 29वीं जीत दर्ज की है। साथ ही भारत ने एमसीजी में चौथी जीत के साथ इसे अपना फेवरिट ओवरसीज वेन्यू बना लिया है।
अब इतिहास के पन्ने पलटते हैं। दोनों टीमों के बीच टेस्ट क्रिकेट की शुरूआत 1947 में भारतीय टीम के आस्ट्रेलिया दौरे के साथ हुई थी। पांच मैचों की उस सीरीज को मेजबान टीम ने 4-0 से जीता था। वह सीरीज 17 अक्टूबर 1947 को शुरू होकर 20 फरवरी 1948 में समाप्त हुई थी।
स्वतंत्र भारत की टीम पहली बार किसी विदेशी दौरे पर गई थी और इस टीम की कमान लाला अमरनाथ के हाथों में थी। दूसरी ओर, मेजबान टीम के कप्तान थे, दुनिया के महानतम बल्लेबाज माने जाने वाले सर डोनाल्ड ब्रैडमैन।
उस सीरीज में ब्रैडमैन ने 715 रन बनाए थे जबकि भारत की ओर से विजय हजारे ने सबसे अधिक 429 रन जुटाए थे। गेंदबाजी की बात करें तो रे लिंडवाल ने मेजबानों के लिए सबसे अधिक 18 और लाला अमरनाथ ने भारत के लिए 13 विकेट लिए थे।
उसके बाद 1956-57 में आस्ट्रेलिया ने पहली बार भारत का दौरा किया। दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की सीरीज खेली गई, जिसे आस्ट्रेलिया ने 2-0 से जीता।
1959-60 में आस्ट्रेलियाई टीम एक बार फिर भारत दौरे पर आई और पांच मैचों की एक सीरीज में हिस्सा लिया। यह सीरीज भारत ने 2-1 से अपने नाम किया। इस सीरीज की खास बात यह रही कि इसमें भारत ने पहली बार आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट में जीत हासिल की।
उसके बाद कंगारू 1964-65 में एक बार फिर भारत आए और तीन मैचों की सीरीज खेली, जो 1-1 से ड्रा रही। साल 1979-80 भारत के लिए बेहद खास था क्योंकि इस साल भारत ने महान सुनील गावस्कर की कप्तानी में अपने घर में खेलते हुए छह मैचों की सीरीज में 2-0 से जीत हासिल की। यह कंगारूओं के खिलाफ भारत की पहली सीरीज जीत थी।
1996-97 से इन दोनों देशों के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज को बार्डर-गावस्कर ट्राफी नाम दे दिया गया। सुनील गावस्कर और एलन बार्डर दोनों टीमों के महान खिलाड़ी और कप्तान रहे हैं।
गावस्कर की कप्तानी में भारत ने अपने घर में तो आस्ट्रेलिया को 1979-80 में हरा दिया लेकिन उसके घर में पहली सीरीज जीत के लिए उसे और 38 साल लग गए क्योंकि 2018 में जाकर विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने आस्ट्रेलिया को चार मैचों की सीरीज में 2-1 से हराया।
साल 2018 काफी अहम था क्योंकि इसने भारतीय खिलाड़ियों को नई सोच दी। यही कारण है कि भारत ने मेलबर्न में लगातार दूसरी जीत के साथ एडिलेड में इसी महीने मिली शर्मनाक को धो दिया है। हालांकि एडिलेड टेस्ट को भारतीय टीम कभी भुला नहीं पाएगी क्योंकि वहां दूसरी पारी मेंवह 36 रनों पर आउट हो गई थी, जो टेस्ट इतिहास का उसका न्यूनतम योग है।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
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