अंतरराष्ट्रीय
कैनबरा टी-20 : आखिरी वनडे में जीत से बढ़ा भरोसा, अतीत के दम पर उतरेगी भारत
तीसरे और आखिरी वनडे में सम्मानजनक जीत हासिल करने बाद भारतीय टीम शुक्रवार को मनुका ओवल मैदान से आस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज का आगाज करेगी। आस्ट्रेलिया ने वनडे सीरीज पर 2-1 से कब्जा किया। शुरुआती दो मैचों में जीत हासिल करने के बाद आस्ट्रेलिया को मनुका ओवल मैदान पर खेले गए तीसरे वनडे में हार मिली थी। भारत ने आस्ट्रेलिया को 13 रनों से हराया था और इस जीत से उसका आत्मविश्वास ऊपर होगा।
टीम की जीत में अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने वाले शार्दूल ठाकुर हालांकि इस मैच में नहीं खेलेंगे। टीम प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि जो खिलाड़ी सिर्फ टी-20 सीरीज के लिए चुने गए हैं, वही इस सीरीज में खेलेंगे। इसका मतलब है कि ठाकुर के अलावा 57 रन देकर एक विकेट लेने वाले स्पिनर कुलदीप यादव और बतौर सलामी बल्लेबाज 39 गेंदों पर 33 रन बनाने वाले शुभमन गिल भी इस सीरीज में तब तक नहीं खेल पाएंगे, जब तक कोई खिलाड़ी चोटिल न हो।
ठाकुर, कुलदीप और गिल वनडे टीम में चुने गए थे।
आस्ट्रेलिया में हालांकि भारत का टी-20 रिकार्ड अच्छा है। भारत ने अभी तक आस्ट्रेलिया में नौ मैच खेले हैं, जिसमें से पांच बार भारत को जीत मिली है। आस्ट्रेलिया तीन बार जीती है, जबकि एक मैच का परिणाम नहीं निकल सका था।
एक अहम बात यह है कि भारत ने आस्ट्रेलिया में कभी भी टी-20 सीरीज नहीं गंवाई है।
भारतीय कप्तान विराट कोहली ने पहले वनडे में मिली हार के बाद भारतीय खिलाड़ियों की टी-20 मोड से वनडे मोड में न आने को लेकर आलोचना की थी। ठाकुर ने भी बुधवार को माना कि दोनों प्रारूप काफी अलग हैं।
आस्ट्रेलिया और भारत दोनों खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि खिलाड़ी 48 घंटों के भीतर कैसे वनडे से अपने आप को टी-20 प्रारूप के ढालते हैं।
खिलाड़ियों ने हालांकि एक महीने पहले ही आईपीएल का लंबा सीजन खेला था, लेकिन तीन मैचों की वनडे सीरीज ने उन्हें 50 ओवरों के प्रारूप में ढाल दिया।
ठाकुर ने अलग-अलग प्रारूपों में रमने को लेकर आने वाली मुश्किलों के बारे में कहा था, “निश्चित तौर पर यह मुश्किल है। यह अलग प्रारूप है और 50 ओवरों में अलग तरह की क्रिकेट खेली जाती है। खेल काफी तेजी से शुरू होता है। 10 ओवर का पावरप्ले होता है। फिर यह मध्य में धीमा होता जाता है इसके बाद आप फिर 35-40 ओवरों में बल्लेबाजी तेजी से रन बनाते हुए देखते हैं। 40 ओवरों के बाद पाबंदियां खत्म हो जाती हैं और आपके पास घेरे के बाहर एक और फील्डर होता है। इसलिए मैच ऊपर-नीचे होता रहता है।”
भारत के पास हालांकि टी-20 के लिए अलग टीम है, लेकिन 16 में से 14 खिलाड़ी वही हैं जो वनडे टीम में थे। दीपक चहर और वॉशिंगटन सुंदर टी-20 टीम का हिस्सा हैं।
आस्ट्रेलिया की वनडे और टी-20 टीम एक ही हैं।
टीमें :
भारत : विराट कोहली (कप्तान), शिखर धवन, मयंक अग्रवाल, लोकेश राहुल (उप-कप्तान, विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर, मनीष पांडे, हार्दिक पांड्या, संजू सैमसन (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, वॉशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, नवदीप सैनी, दीपक चहर, टी.नटराजन।
आस्ट्रेलिया : एरॉन फिंच (कप्तान), सीन एबॉट, एश्टन एगर, एलेक्स कैरी, पैट कमिंस (उप-कप्तान), कैमरून ग्रीन, जोश हेजलवुड, मोइजेज हेनरिक्स, मार्नस लाबुशैन, ग्लेन मैक्सवेल, डेनियल सैम्स, एंड्रयू टाई, स्टीव स्मिथ, मैथ्यू वेड, मिशेल स्टार्क, एडम जाम्पा।
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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