राजनीति
ट्रांसजेंडर्स को ऑनलाइन मिलेगा प्रमाणपत्र, केंद्रीय मंत्री ने किया पोर्टल का उद्घाटन
केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर्स को बड़ी राहत दी है। एक ऐसा पोर्टल तैयार हुआ है, जिससे पहचान पत्र और प्रमाण पत्र के लिए देश में कहीं से भी कोई ट्रांसजेंडर डिजिटल रूप से आवेदन कर सकेगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने बुधवार को ‘ट्रांसजेंडर लोगों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल’ लांच करने के साथ गुजरात के वडोदरा में एक ‘गरिमा गृह : ए शेल्टर होम फॉर ट्रांसजेंडर पर्सन्स’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, रामदास अठावले, रतन लाल कटारिया, ट्रांसजेंडर राष्ट्रीय परिषद के सदस्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव आर सुब्रह्मण्यम उपस्थित रहे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि 29 सितंबर 2020 को ट्रांसजेंडर के अधिकारों का संरक्षण नियम 2020 की अधिसूचना के दो महीने के भीतर यह राष्ट्रीय पोर्टल विकसित किया गया है। यह अत्यधिक उपयोगी पोर्टल देश में कहीं से भी एक ट्रांसजेंडर को प्रमाण पत्र और पहचान पत्र के लिए डिजिटल रूप से आवेदन करने में मदद करेगा। मंत्री ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह ट्रांसजेंडर को किसी भी कार्यालय जाए बिना आई-कार्ड प्राप्त करने में मदद करता है। पोर्टल के माध्यम से, वे अपने आवेदन की स्थिति की निगरानी कर सकते हैं। एक बार प्रमाण पत्र और आई-कार्ड जारी होने के बाद, आवेदक उन्हें पोर्टल से ही डाउनलोड कर सकते हैं।
राजनीति
मध्य प्रदेश में करोड़ों कमाने वाली मंडियों में सुविधाओं का टोटा : जीतू पटवारी

मध्य प्रदेश की मंडियों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस ने बड़ा हमला बोला है । कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि जो मंडियां करोड़ों रुपए कमा रही हैं मगर उनमें किसानों के लिए सुविधाएं नहीं है। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश की मंडियों में किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की 110 मंडियां ऐसी हैं, जिनकी वार्षिक आय तीन करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन इन मंडियों में किसानों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड के अनुसार मंडियों का वर्गीकरण मंडी शुल्क और अनुज्ञप्ति शुल्क से होने वाली आय के आधार पर किया जाता है। यानी जिस मंडी की आय जितनी अधिक होती है, उसकी आर्थिक क्षमता भी उतनी ही अधिक मानी जाती है लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि राघौगढ़ मंडी में किसानों के लिए स्वच्छ पेयजल और कैंटीन तक उपलब्ध नहीं है। सीधी की नई सब्जी मंडी में सड़क, शौचालय और गोदाम जैसी आवश्यक सुविधाएं अधूरी हैं। वहीं सबलगढ़ मंडी में छाया, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव की खबरें सामने आ चुकी हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि मंडी शुल्क वसूलते समय किसान सरकार के लिए राजस्वदाता दिखाई देता है, लेकिन जब किसान को सुविधाएं देने की बारी आती है तो वही किसान सरकार की प्राथमिकता से गायब हो जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वयं मंडियों की मूलभूत सुविधाओं और पुरानी संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की आय अर्जित करने वाली मंडियों में किसान आज भी पीने के पानी, छाया, शौचालय, सड़क, बैठने की जगह और अपनी उपज को सुरक्षित रखने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों परेशान है?
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश की सभी मंडियों की आय, व्यय और उपलब्ध सुविधाओं का मंडीवार सार्वजनिक ऑडिट कराया जाए। साथ ही, 3 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय वाली प्रदेश की 110 मंडियों के लिए समयबद्ध मूलभूत सुविधा सुधार योजना घोषित की जाए, ताकि किसानों को मंडी में अपनी उपज बेचने के दौरान सम्मानजनक और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि किसानों से शुल्क लेकर उन्हें बदहाल मंडियां देना किसान कल्याण नहीं, बल्कि किसान की कमाई पर सरकारी उपेक्षा का टैक्स है।
अपराध
लोनी में पुलिस मुठभेड़ के बाद नकबजनी का आरोपी गिरफ्तार, 50 लाख के जेवर बरामद

उत्तर प्रदेश के लोनी थाना पुलिस ने वांछित एक आरोपी को पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के कब्जे से एक अवैध तमंचा, कारतूस और करीब 50 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि थाना लोनी क्षेत्र के निठोरा अंडरपास के पास संदिग्ध व्यक्ति और वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि नकबजनी की घटना में वांछित आरोपी मोटरसाइकिल से निठोरा की ओर आ रहा है। पुलिस टीम ने बाइक सवार को रुकने का इशारा किया, लेकिन उसने पुलिस को चकमा देकर भागने का प्रयास किया।
पुलिस ने पीछा किया तो भागते समय आरोपी की मोटरसाइकिल फिसल गई। पुलिस के मुताबिक इसके बाद आरोपी ने तमंचे से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सचिन निवासी डबल टंकी के पास रूपनगर, लोनी, गाजियाबाद, उम्र करीब 28 वर्ष बताया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने 20 अगस्त 2026 की रात गिरि मार्केट, लोनी में एक घर में घुसकर चोरी करने की बात कबूल की है।
पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी किए गए सोने और चांदी के आभूषण बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा एक अवैध तमंचा, कारतूस भी बरामद हुआ है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ कमिश्नरेट गाजियाबाद के विभिन्न थानों में नकबजनी, चोरी, चोरी के माल की बरामदगी, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और आबकारी अधिनियम समेत करीब एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के गैंग को गिरफ्तार करने के लिए टीम का गठन किया जा रहा है,जो सचिन के बयान के आधार पर कार्रवाई करेगी और जल्द ही कई मामलों के खुलासे हो सकते है।
महाराष्ट्र
मुंबई: नेहरू साइंस सेंटर मेट्रो स्टेशन को वर्ली से जोड़ने वाले अंडरग्राउंड पैदल सबवे के प्रस्ताव को मंज़ूरी मिली

मुंबई; वर्ली में नेहरू साइंस सेंटर मेट्रो स्टेशन (मेट्रो-3) को वर्ली प्रोमेनेड से जोड़ने के लिए एक अंडरग्राउंड पैदल चलने वालों के लिए सबवे बनाने और 300 एकड़ के लैंडस्केप गार्डन के प्रस्ताव को ‘स्वराज्य रक्षा धर्म वीर छत्रपति संभाजी महाराज कोस्टल रोड प्रोजेक्ट’ की ‘सेंटेंस मीटिंग एंड कोस्टल रोड प्रोजेक्ट’ मीटिंग में मंज़ूरी दे दी गई। स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने कहा, ‘मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) इस अंडरग्राउंड सबवे के लिए 702.44 करोड़ 35,07 लाख रुपये का खर्च उठाएगी, जबकि कंस्ट्रक्शन का काम मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन करेगी।’ कोस्टल रोड मुंबई के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक, ड्रीम प्रोजेक्ट साबित हुआ है। इस प्रोजेक्ट के साथ लगभग 300 एकड़ में फैला एक बड़ा लैंडस्केप गार्डन बनाने का प्रस्ताव है। गार्डन के साथ, कोस्टल रोड पर लोगों के लिए एक खास प्रोमेनेड भी होगा। हालांकि, अभी यह इलाका फोर-व्हीलर से तो आसानी से पहुँचा जा सकता है, लेकिन आम आदमी के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या पैदल आसानी से पहुँचने के लिए कोई सही कनेक्टिविटी नहीं है। प्रस्तावित अंडरग्राउंड पैदल चलने वालों का सबवे इस समस्या को हल करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा। यह अंडरग्राउंड रास्ता इसलिए प्रस्तावित है ताकि लोग नेहरू साइंस सेंटर मेट्रो स्टेशन से सीधे पैदल चल सकें, जो लाला लाजपत राय रोड के नीचे से गुज़रता है और महालक्ष्मी रेसकोर्स इलाके से होते हुए वर्ली प्रोमेनेड और लैंडस्केप गार्डन तक पहुँच सकते हैं। लगभग 1 km लंबाई और 7.5 मीटर चौड़ाई में फैला यह रास्ता बड़ी संख्या में लोगों के लिए सुरक्षित और आसान आने-जाने में मदद करेगा। मुंबई में मेट्रो से यात्रा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और मेट्रो आम मुंबईकरों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक सस्ता और सुविधाजनक तरीका साबित हो रहा है। मेट्रो लाइन 3 से नेहरू साइंस सेंटर पहुँचने पर, लोग इस अंडरग्राउंड पैदल चलने वाले रास्ते का इस्तेमाल करके सीधे प्रोमेनेड और लैंडस्केप गार्डन जा सकेंगे। इस पहल से प्राइवेट गाड़ियों पर निर्भरता कम होगी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ पैदल चलने वालों के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा मिलेगा। अंडरग्राउंड वॉकवे से कोस्टल रोड इलाके में टूरिज्म को भी काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। लैंडस्केप गार्डन बन जाने के बाद, लोकल लोग और देश-विदेश के टूरिस्ट, दोनों ही मेट्रो के ज़रिए सस्ते में इस इलाके में आ-जा सकेंगे। श्री प्रभाकर शिंदे ने कहा कि यह रास्ता मुंबई के टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में एक अहम कड़ी का काम करेगा। स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने बताया कि मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने जून 2025 में अंडरग्राउंड टनल का कंस्ट्रक्शन शुरू करने की तैयारी जताई थी। इसके बाद, दिसंबर 2025 में हुई एक जॉइंट मीटिंग में, म्युनिसिपल कमिश्नर ने मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा प्रोजेक्ट को पूरा करने की मंज़ूरी दे दी। यह भी तय किया गया कि मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) प्रोजेक्ट का फाइनेंशियल खर्च उठाएगी। मेट्रो का बढ़ता नेटवर्क ट्रैफिक की भीड़ को कम करने और मुंबई की सड़कों पर बोझ कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे म्युनिसिपल रोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर दबाव कम हो रहा है। इसी सिद्धांत को फॉलो करते हुए, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने पहले मेट्रो 3 प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2,500 करोड़ रुपये दिए थे। अब, कॉर्पोरेशन ने इस अंडरग्राउंड पैदल चलने वालों के लिए सबवे बनाने की फाइनेंशियल ज़िम्मेदारी लेने की तैयारी दिखाई है, जो लोगों के फ़ायदे के लिए काम करता है। बीएमसी और मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन दोनों ही पब्लिक सेक्टर की कंपनियाँ हैं। अगर एक पब्लिक बॉडी दूसरे को ऐसे कामों के लिए लगाए जिससे लोगों को फ़ायदा हो, तो इसमें क्या गलत है? किसी बाहरी कॉन्ट्रैक्टर को कॉन्ट्रैक्ट देने के बजाय, काम को ज़्यादा अच्छे से पूरा करने के लिए मेट्रो 3 प्रोजेक्ट की टेक्निकल एक्सपर्टीज़ का फ़ायदा उठाने का फ़ैसला किया गया। हैरानी की बात है कि इससे कुछ लोगों को दुख क्यों हुआ। ऐसा लगता है कि जो लोग कॉन्ट्रैक्ट वाले काम से जुड़े फ़ायदे के आदी हैं, वे इस प्रपोज़ल को पचा नहीं पा रहे हैं। हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी के लिए मुंबईकरों की भलाई सबसे ज़रूरी है। स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने कहा कि यह प्रपोज़ल लोगों को स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट, सुरक्षित और आसान पैदल चलने वालों की सुविधाएँ देने के लिए बहुमत से पास किया गया था। शिंदे ने बताया कि यह अंडरग्राउंड पैदल चलने वालों के लिए सबवे, मेट्रो, कोस्टल रोड, प्रोमेनेड और प्रस्तावित लैंडस्केप गार्डन के बीच एक अच्छा कनेक्शन बनाएगा, जो भविष्य में मुंबईकरों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सस्ते पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए एक ज़रूरी कनेक्शन का काम करेगा।
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