राजनीति
रूपाणी नववर्ष के मौके पर राज्यपाल से मिले
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सोमवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मुलाकात की और उन्हें गुजराती नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। रूपाणी ने गांधीनगर में पंचदेव मंदिर का भी दौरा किया और सभी नागरिकों को दीपावली और नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। रूपाणी ने अपनी पत्नी अंजलिबेन रूपाणी के साथ गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मुलाकात की और उन्हें विक्रम संवत 2077 की शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर राज्य की पहली महिला (फस्र्ट लेडी) और देवव्रत की पत्नी दर्शना देवी भी उपस्थित थीं।
इससे पहले सोमवार को, मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने गांधीनगर में पंचदेव मंदिर का दौरा किया और पूजा-अर्चना की। उन्होंने यहां राज्य और देश के लिए प्रार्थना की।
नागरिकों को दिवाली और नए साल की शुभकामनाएं देते हुए, रूपाणी ने कहा, “त्योहार की शुभकामनाओं के साथ, मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि वे कोरोनावायरस महामारी के खतरे के बारे में सतर्क और जागरूक रहें। राज्य महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार है, लेकिन मैं नागरिकों से अनुरोध करता हूं कि वे सावधानी बरतें, सतर्क रहें और राज्य सरकार के साथ सहयोग करें।”
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार लगातार सात सत्रों की गिरावट के बाद हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 628 अंक बढ़ा

भारतीय शेयर बाजार लगातार सात सत्रों की गिरावट के बाद गुरुवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 628.04 अंक या 0.82 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,537.72 और निफ्टी 153.55 अंक या 0.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,231.85 पर था।
बाजार में तेजी का नेतृत्व मीडिया, रियल्टी और प्राइवेट बैंक ने किया। सूचकांकों में निफ्टी मीडिया (2.13 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (1.41 प्रतिशत) और निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.89 प्रतिशत) की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स थे। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी इन्फ्रा सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सूचकांक थे। निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी पीएसई और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में बंद हुए।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 262.80 अंक या 0.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 63,671.55 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 134.30 अंक या 0.68 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,841.45 पर था।
सेंसेक्स पैक में इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड, एलएंडटी, एचयूएल, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और एमएंडएम गेनर्स थे। टाटा स्टील, इंडिगो, एचसीएल टेक और टाइटन लूजर्स थे।
जानकारों के मुताबिक, बॉन्ड यील्ड में तेजी को रोकने के लिए यूएस ट्रेजरी के दखल से बाजार को बहुत जरूरी राहत मिली, जिससे जबरदस्त तेजी आई और घरेलू बाजार में हफ्ते भर से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। इस दखल से डॉलर कमजोर हुआ और इससे रुपए को मजबूती मिलने एवं यील्ड का दबाव कम होने से उभरते बाजार निवेशकों के लिए आकर्षण हो गए।
उन्होंने आगे कहा कि बाजार में यह सुधार सभी सेक्टर में दिखा, जिसमें मुख्य रूप से आईटी और फाइनेंशियल शेयरों में तेजी का योगदान रहा, क्योंकि यील्ड में नरमी से खर्च को बढ़ावा मिलता है। हालांकि, अभी भी कच्चे तेल की कीमत उच्च स्तर पर हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में त्योहारी सीजन में भर्ती में 15-20 प्रतिशत उछाल की उम्मीद, 2.5 लाख तक अस्थायी रोजगार सृजित होने की संभावना: रिपोर्ट

भारत में त्योहारी सीजन के दौरान भर्ती में 2026 की दूसरी छमाही में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप करीब 2-2.5 लाख तक अस्थायी, संविदा और गिग आधारित रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। गुरुवार को जारी भर्ती समाधान तथा वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, खुदरा व्यापार, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और उपभोक्ता सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक भर्ती होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस वर्ष केवल भर्ती संख्या नहीं बढ़ रही है, बल्कि कंपनियों की भर्ती रणनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां पहले कंपनियां त्योहारी मांग बढ़ने पर अंतिम समय में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती करती थीं, वहीं अब वे अधिक सुनियोजित तरीके से कार्यबल की तैयारी कर रही हैं। कई कंपनियां अब त्योहारी सीजन शुरू होने से 12 से 14 सप्ताह पहले ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर रही हैं ताकि संचालन संबंधी चुनौतियों से बचा जा सके।
एनएलबी सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एशिया-प्रशांत क्षेत्र (एपीएसी) प्रमुख वरुण सचदेवा ने कहा कि अब त्योहारी सीजन भारत के श्रम बाजार के लिए एक तरह की वास्तविक परीक्षा बन चुका है और इससे नियोक्ताओं के व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा, “नियोक्ता पहले से अधिक तेजी से भर्ती कर रहे हैं, पारंपरिक प्रतिभा केंद्रों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में प्रतिभा तलाश रहे हैं और प्रौद्योगिकी आधारित, लचीले तथा तुरंत काम के लिए तैयार कर्मचारियों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।”
सचदेवा के अनुसार, जो कभी केवल मौसमी जरूरतों को पूरा करने का उपाय माना जाता था, वह अब कंपनियों के लिए नई प्रतिभाओं की पहचान करने और भविष्य के स्थायी कर्मचारियों का आधार तैयार करने का रणनीतिक अवसर बन गया है। उनका मानना है कि त्योहारी भर्ती का प्रभाव अब केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लंबे समय के रोजगार अवसरों में भी बदल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक रूप से डिलीवरी, गोदाम प्रबंधन, फील्ड संचालन और आतिथ्य क्षेत्र भर्ती के प्रमुख स्रोत बने रहेंगे। हालांकि तकनीक आधारित उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण कई नई भूमिकाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिनमें डार्क स्टोर इन्वेंट्री नियंत्रक, रिटर्न और रिफंड विशेषज्ञ, ग्राहक समाधान अधिकारी, मार्केटप्लेस संचालन विशेषज्ञ, धोखाधड़ी एवं लेनदेन सहायता कर्मी, कैटलॉग प्रबंधन अधिकारी और ऑर्डर प्रबंधन विशेषज्ञ जैसी नौकरियां शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव दर्शाता है कि भारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था में प्रौद्योगिकी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। जो नौकरियां पहले केवल परिचालन आधारित मानी जाती थीं, वे अब डेटा, स्वचालन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वास्तविक समय के निर्णयों पर अधिक निर्भर हो गई हैं।
एक और महत्वपूर्ण रुझान यह है कि त्योहारी भर्ती अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल त्योहारी भर्ती मांग का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा ऐसे शहरों से आने की संभावना है और इन बाजारों में भर्ती 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में रोजगार अवसर अधिक तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, संगठित खुदरा व्यापार और क्षेत्रीय वितरण नेटवर्क के विस्तार से इन शहरों में भर्ती गतिविधियों को बल मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
कोलंबिया भूकंप: प्रभावित इलाकों में 30 दिनों के लिए इमरजेंसी घोषित

कोलंबिया के राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रीला ने 10 अगस्त को आए भूकंप से प्रभावित देश के कुछ हिस्सों में 30 दिनों के लिए आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय आपातकाल घोषित करने वाले एक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह आदेश बुधवार (स्थानीय समयानुसार) बोगोटा में हुई कैबिनेट बैठक के बाद जारी किया गया। इसमें वैले डेल काउका, रिसारल्डा और कैलडास समेत 15 प्रभावित विभागों (प्रांतों) को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम एक गंभीर सार्वजनिक आपदा से निपटने के लिए उठाया गया है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, एस्प्रीला ने कहा कि आपातकालीन उपायों का उद्देश्य सिर्फ क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण करना नहीं है, बल्कि कारोबारों को फिर से खड़ा करना और स्कूलों, अस्पतालों जैसी जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं को बहाल करना भी है।
उन्होंने कहा कि कोलंबिया इस समय अपने गणराज्य के इतिहास की सबसे जटिल वित्तीय स्थिति का सामना कर रहा है, इसलिए असाधारण कदम उठाना जरूरी हो गया है।
राष्ट्रपति ने बताया कि उनकी सरकार मौजूदा राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पिछली सरकार के कुछ कम प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों पर होने वाले खर्च में कटौती करेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों पर इसका कोई नकारात्मक असर न पड़े।
कोलंबिया की नेशनल यूनिट फॉर डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट की ओर से बुधवार शाम जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी कोलंबिया में आए 7.4 तीव्रता के भूकंप में 319 लोगों की मौत हो चुकी है, 4,469 लोग घायल हुए हैं और 260 लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 364 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है।
एजेंसी ने बताया कि 15 विभागों के 476 नगरपालिकाएं इस आपदा से प्रभावित हुई हैं और करीब 2,72,830 लोग इसकी चपेट में आए हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव दल अब भी मलबे में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 358 लोगों को बचाया जा चुका है।
कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने बताया कि देश में 220 टन से अधिक मानवीय सहायता सामग्री पहुंच चुकी है और 144 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए शामिल हुए हैं।
वैले डेल काउका, रिसारल्डा और चोको के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में कई लोग अब भी अस्थायी शिविरों और पार्कों में लगाए गए टेंटों में रह रहे हैं, क्योंकि उनके घर भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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